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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 48998 (CHH)

STATE OF CHHATTISGARH v. ROSHAN SAHU

ACQA/601/2024 · 2025-11-05

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 {Acq. A. No.-601 of 2024} 2025:CGHC:54145 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दोषमुति अपु ल क्रमु!क -601 /2024  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस थाना-नावेगढ़, लि/ल-मुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा0/रज्या तिवेरूद्घ 1. रशना सहू5 तिपु-श्री रमु सहू5, उम्र-लगभग 28 वेष:, तिनावेस -ग्रामु घोठा, पुलिलस थाना-नावेगढ़, लि/ल-मुर, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदो /अतिभया अपु लथा0/रज्या द्वार : श्री अ!क र कश्यापु, उपु शसक@या अलिAवे । उत्तीरवेदो /अतिभया द्वार : श्री मुना/ चCहूना, अलिAवे क@ ओर स श्री मुनाहूर दोवे!गना, अलिAवे । मुनाना या न्यायामुEति: श्री स!/या क मुर /यासवेल , न्यायाA श !! तिनार्ण:या पु ठा पुर पुरिर !! 06/11/2025 1. दोण्ड प्रतिक्रया स!तिहू, 1973 क@ Aर 378(1) क हू दोषमुति क तिवेरुद्ध प्रस् इस अपु ल मुU, अपु ल या न्यायालया सत्र न्यायाA श, मुर, लि/ल मुर (छत्ती सगढ़) द्वार आपुरलिAक अपु ल क्रमु!क 55/2019 “रशना सहू5 तिवेरुद्ध छत्ती सगढ़ रज्या” मुU पुरिर POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.11.07 10:34:14 +0530 2 / 6 {Acq. A. No.-601 of 2024} तिनार्ण:या तिदोना!क 14/11/2019 क@ वेZA क चनाC दो गई हूZ, लि/सक द्वार अतिभया रशना सहू5 क भर या दोण्ड स!तिहू, 1860 क@ Aर 304(क) क अपुरA स दोषमु तिकया गया । उ आदोश क हू तिवेचरर्ण न्यायालया न्यातियाक मुलि/स्ट्रे]ट्रे प्रथामु श्रीर्ण , मुर, लि/ल मुर (छत्ती सगढ़) द्वार दोण्डिण्डक प्रकरर्ण क्रमु!क 2100216/2014 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरुद्ध रशना सहू5” मुU पुरिर तिनार्ण:या तिदोना!क 31/07/2019 क अपुस् कर तिदोया गया, लि/सक द्वार अतिभया रशना सहू5 क भर या दोण्ड स!तिहू, 1860 क@ Aर 304(क) क अपुरA मुU दोषलिसद्ध कर एक वेष: क सAरर्ण करवेस था एक हू/र रुपुया क अथा:दोण्ड स दोण्डिण्ड तिकया गया था । 2. अतिभया/ना क मुमुल, स!क्षेपु मुU, इस प्रकर हूZ तिक डaल सहू5 (अ.स.-3), लि/सक@ उम्र लगभग 11 वेष: रहू , वेहू अपुना छट्रे हूना यातिश सहू5 (उम्र लगभग 07 वेष:) क सथा तिदोना!क 03/09/2014 क र लगभग 08:00 / गर्णश दोश:ना हू नावेगढ़ ण्डिस्था लक छत्रवेस क समुना गई था । / यातिश सहू5 सड़क तिकनार खड़ था , अतिभया रशना सहू5 लर वेहूना क्रमु!क CG-25-0254 ( दोष वेहूना) क / रफ्र, लपुरवेहू एवे! उवेलपुना स चल हूfए आया और यातिश सहू5 क ठाकर मुर तिदोया था वेहूना लकर वेहू! स भग गया । ठाकर क फलस्वेरूपु यातिश सहू5 क ग!भ र चट्रेU आई! । इस घोट्रेना क उसक@ हूना डaल सहू5 (अ.स.-3) था मुCक क सक्षे तिसना सहू5 (अ.स.-2) ना दोख । घोट्रेना क@ सEचना तिमुलना पुर यातिश सहू5 क तिपु मुहूश्वेर सहू5 (अ.स.-1) मुCक पुर पुहूf!च । उन्हूU दोष वेहूना स दोघो:ट्रेना हूना क@ /नाकर तिमुलना पुर उन्हूiना थाना नावेगढ़ मुU रिरपुट्रे: दो/: करई, लि/स पुर दोष वेहूना क तिवेरुद्ध प्रदोश: पु -1 क प्रथामु सEचना पुत्र दो/: तिकया गया । अस्पुल मुU तिचतिकत्सक द्वार यातिश सहू5 क मुk घोतिष कर तिदोया गया । तिपु मुहूश्वेर सहू5 (अ.स.-1) क@ सEचना पुर मुग: प्रदोश: 3 / 6 {Acq. A. No.-601 of 2024} पु -4 कयामु कर शवे क पु!चनामु Zयार तिकया गया एवे! उसक पुर क्षेर्ण करया गया । तिचतिकत्सक पु .स . ठाक र (अ.स.-6) ना शवे पुर क्षेर्ण कर प्रतिवेदोना प्रदोश: पु -9 तिदोया और अतिभमु व्या तिकया तिक मुkत्या फ फड़ मुU ग!भ र चट्रे लगना क करर्ण हूfई । इसक पुश्च पुलिलस द्वार सतिक्षेयाi क कथाना लिलए गए, घोट्रेनास्थाल क नाक्श Zयार तिकया गया, वेहूना चलक क@ पुस/ क@ गई था वेहूना क स्वेमु सAश श्री वेस्वे (अ.स.-10) क भ कथाना लिलया गया । स!पुEर्ण: तिवेवेचना उपुर! अतिभया रशना सहू5 क तिवेरुद्ध अतिभयागपुत्र प्रस् तिकया गया । 3. आरपु प्रमुर्णना वेस् अतिभया/ना क@ ओर स अपुना पुक्षे समुथा:ना मुU 10 सतिक्षेयाi क पुर क्षेर्ण था 14 दोस्वे/ प्रदोश: तिचन्हू!तिक करए गए । Aर-313 दोण्ड प्रतिक्रया स!तिहू क हू याना मुU अतिभया ना अपुना तिवेपुर सतिक्षेयाi क कथानाi क इ!कर तिकया और कथाना तिकया तिक उस झूEठा फ! सया गया हूZ /तिक वेहू तिनादोoष हूZ । लि/सना चवे मुU कई सक्ष्या प्रस् नाहूq तिकया । उभयापुक्षे क सना /कर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार दोषलिसतिद्ध क तिनार्ण:या पुरिर तिकया गया लि/स अतिभया द्वार अपु ल मुU चनाC दोना पुर अपु ल या न्यायालया द्वार प्रश्नाA ना दोषमुति क तिनार्ण:या पुरिर कर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार क@ गई दोषलिसतिद्ध और दोण्डदोश क अपुस् तिकया गया हूZ उ दोषमुति क इस अपु ल मुU चनाC दो गई हूZ । 4. अपु लथा0/रज्या क तिवेद्वाना अलिAवे क क: हूZ तिक प्रथामु सEचना रिरपुट्रे: (प्रदोश: पु -1) मुU स्पुष्ट रूपु स दोष वेहूना स दोघो:ट्रेना हूना क उल्लेख तिकया गया हूZ । दोघो:ट्रेना स्थाल क सक्षे तिसना सहू5 (अ.स.-1) ना भ इस थ्या क@ पुतिष्ट क@ हूZ तिक दोघो:ट्रेना उ दोष वेहूना स हू हूfई था । मुkक क@ हूना डaल सहू5 (अ.स.-3) ना अपुना कथाना मुU याहू स्पुष्ट रूपु स कहू हूZ तिक दोघो:ट्रेना क समुया दोष वेहूना क अतिभया हू चल रहू था । इसक अतिरिर, दोष 4 / 6 {Acq. A. No.-601 of 2024} वेहूना क स्वेमु सAश श्री वेस्वे (अ.स.-10) ना भ इस थ्या क@ पुतिष्ट क@ हूZ तिक घोट्रेना क तिदोना उ वेहूना क चलक अतिभया रशना सहू5 हू था । तिसना सहू5 था डaल सहू5 क कथानाi स याहू थ्या भ तिनातिवे:वेदो रूपु स स्पुष्ट हू हूZ तिक अतिभया रशना सहू5 द्वार वेहूना क उपुक्षे एवे! उवेलपुना स चलना क करर्ण हू दोघो:ट्रेना घोतिट्रे हूfई । ऐस दोश मुU, अतिभया क@ दोषमुति क तिनार्ण:या तिवेलिA क@ दृतिष्ट मुU उतिच नाहूq हूZ, अपु ल या न्यायालया द्वार सक्ष्या क@ समुतिच समु क्षे नाहूq क@ गई हूZ और दोषमुति क त्रतिट्रेपुEर्ण: तिनाष्कष: तिनाकल गया हूZ, / ण्डिस्थार रख /ना याग्या नाहूq हूZ । अy दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याहू अपु ल स्वे कर कर अपु ल या न्यायालया क “प्रश्नाA ना दोषमुति क तिनार्ण:या” क अपुस् कर हूfए अतिभया क दोषलिसद्ध कर दोण्डिण्ड तिकया /ए । 5. उत्तीरवेदो /अतिभया क तिवेद्वाना अलिAवे द्वार अपु ल या न्यायालया क “प्रश्नाA ना दोषमुति क तिनार्ण:या” क समुथा:ना कर हूfए क: तिदोया गया हूZ तिक मुCक क सतिक्षेयाi क कथाना स!दोहू स पुर स्थातिपु नाहूq रहू हूZ । याहू भ प्रमुतिर्ण नाहूq रहू हूZ तिक दोष वेहूना स हू दोघो:ट्रेना हूfई और दोष वेहूना क चलक अतिभया हू था । इना स थ्याi क दृतिष्टग रख हूfए अपु ल या न्यायालया द्वार / दोषमुति क तिनाष्कष: तिनाकल गया हूZ, वेहू पुEर्ण:y उतिच हूZ । अपु लथा0/रज्या पुक्षे द्वार अपु ल मुU उठाए गए क: स्वे कर याग्या नाहूq हूz । अy अपु ल खरिर/ क@ /ए । 6. उभयापुक्षे क क: श्रीवेर्ण तिकया गया और तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभलख क सEक्ष्मुपुEवे:क पुरिरश लना तिकया गया । 7. Recently, applying the law governing the scope of interference in an appeal against acquittal, the Hon’ble Supreme Court in the case of 5 / 6 {Acq. A. No.-601 of 2024} “State of Rajasthan vs. Kistoora Ram” reported in 2022 SCC OnLine SC 984, has held as follows:- “8. The scope of interference in an appeal against acquittal is very limited. Unless it is found that the view taken by the Court is impossible or perverse, it is not permissible to interfere with the finding of acquittal. Equally if two views are possible, it is not permissible to set aside an order of acquittal, merely because the Appellate Court finds the way of conviction to be more probable. The interference would be warranted only if the view taken is not possible at all.” 8. स!पुEर्ण: सक्ष्या क पुरिरश लना स याहू ण्डिस्थाति स्पुष्ट हूZ तिक मुCक क सक्षे डaल सहू5 (अ.स.- 3) और तिसना सहू5 (अ.स.-2) हूz । लि/ना दोनाi क हू याना स इस थ्या क@ पुतिष्ट नाहूq हू हूZ तिक दोष वेहूना स हू दोघो:ट्रेना हूfई था । डaल सहू5 (अ.स.-3) ना अपुना कथाना मुU याहू अवेश्या कहू हूZ तिक अतिभया वेहूना चल रहू था, तिक! उसक याहू कथाना इस आAर पुर हूZ तिक अतिभया पुहूल तिवेद्यलया क वेहूना चल था, इसलिलए वेहू उस /ना और पुहूचना हूZ । पुर! उसक सक्ष्या स याहू स्पुष्ट नाहूq हू तिक उसना घोट्रेना स्थाल पुर अतिभया क वेहूना चल हूfए प्रत्याक्षे रूपु स दोख था या मुCक पुर दोष वेहूना क पुहूचना था । 9. इस प्रकर, तिसना सहू5 (अ.स.-2) ना अपुना न्यायालया ना कथाना मुU कहू हूZ तिक उसना ट्रेक्कर क@ आवेज़ सनाना क पुश्च दोख तिक एक स्कaतिपु:या वेहूना / रफ्र स / रहू था, /तिक अतिभया/ना क अनासर दोघो:ट्रेना लर वेहूना स हूfई था । ऐस ण्डिस्थाति मुU तिसना सहू5 क याहू कथाना अतिभया/ना क मुमुल क पुष्ट नाहूq कर । इसक अतिरिर, उसना याहू भ कहू हूZ तिक उस वेहूना क क्रमु!क यादो नाहूq हूZ था उसना अतिभया क चलक क रूपु मुU पुहूचना भ नाहूq । इस प्रकर स मुCक दोनाi हू सतिक्षेयाi क कथाना स याहू थ्या स!दोहू स पुर स्थातिपु नाहूq हूfआ तिक दोघो:ट्रेना दोष लर वेहूना स हूfई था और उस वेहूना क चलक अतिभया रशना सहू5 हू था । 6 / 6 {Acq. A. No.-601 of 2024} 10. /हू| क, वेहूना स्वेमु सAश श्री वेस्वे (अ.स.-10) ना कहू हूZ तिक दोघो:ट्रेना क तिदोना उसक उ दोष वेहूना क चलक अतिभया रशना सहू5 हू था, चE!तिक वेहू मुCक क सक्षे नाहूq हूZ । ऐस दोश मुU मुत्र चलक क रूपु मुU अतिभया रशना सहू5 क@ तिनायाति क आAर पुर याहू स!दोहू स पुर नाहूq कहू / सक तिक दोघो:ट्रेना क वे भ दोष वेहूना क अतिभया हू चल रहू था । 11. /हू| क, मुkक क तिपु मुहूश्वेर सहू5 (अ.स.-1) द्वार प्रथामु सEचना पुत्र प्रदोश: पु -1 लिलखए /ना क प्रश्ना हूZ? प्रथामु सEचना पुत्र मुU चलक क नामु क कई उल्लेख नाहूq तिकया गया हूZ, ण्डि~क क वेल दोष वेहूना क क्रमु!क अ!तिक हूZ । सथा हू , उ वेहूना क्रमु!क मुहूश्वेर सहू5 क तिकसना या था, याहू थ्या वेहू अपुना कथाना मुU स्पुष्ट करना मुU असफल रहू हूz । ऐस दोश मुU स!पुEर्ण: अतिभया/ना सक्ष्या स स!दोहू स पुर याहू प्रमुतिर्ण नाहूq रहू हूZ तिक दोष वेहूना स हू दोघो:ट्रेना हूfई और दोष वेहूना क चलक अतिभया हू था । 12. उपुर न्यायादृष्ट! उपुर न्यायादृष्ट! क आAर पुर सक्ष्या तिवेवेचना क फलस्वेरूपु याहू न्यायालया पु हूZ तिक अतिभलख मुU उपुलब्A, थ्या और सक्ष्या क दृतिष्टग रख हूfए अपु ल या न्यायालया द्वार / दोषमुति क तिनार्ण:या पुरिर तिकया हूZ उसमुU कई अवेZA या अशद्घ नाहूq हूZ । इसलिलए उसमुU हूस्क्षेपु क@ आवेश्याक नाहूq पुया / । 13. अy दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याहू अपु ल स्वे कर याग्या ना हूना स खरिर/ क@ / हूZ । 14. तिनार्ण:या क@ प्रतिलिलतिपु क सथा अपु ल या/तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभलख श घ्रपुEवे:क वेपुस प्रतिष हू । सहू /- (स!/या क मुर /यासवेल) न्यायाA श पुमुना