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2025:CGHC:52500 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिर्णया सरति ति क-10/10/2025 तिर्णया उद्घो)ति* ति क-28/10/2025 )*मुति-
अपु ल क्रमु क
-699
/2024
छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार था प्रभार , पुलिलस था-ए.स . ., लि9ल-रयापुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा:/रज्या तिवेरूद्घो
1. लस रमु च ल तिपु ल्लुरमु च ल, उम्र-लगभाग 57 वे*, पुटवेर -पुटवेर हल्क र-10/11, वेमु तिवेस -ग्रामु लट)ड़, हस ल-ल), लि9ल-ल), छत्ती सगढ़, स्थाया तिवेस -ग्रामु सखर कल, हस ल-धमुध, लि9ल-ग, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /अतिभाया- अपु लथा:/रज्या द्वार : सश्री प्रज्ञा पुण्डेया, उपु शासकMया अलिधवे- । उत्तीरवे /अतिभाया- द्वार : श्री सरशा क मुर वेमु, अलिधवे- । मु या न्यायामुOति श्री स 9या क मुर 9यासवेल
, न्यायाध शा
!! स .ए.वे . तिर्णया !! 1. ण्डे प्रतिक्रया स तिह, 1973 कM धर-378 (1) क ह प्रस् इस अपु ल मुU तिवेचरर्ण न्यायालया-तिवेशा* न्यायाध शा, भ्रष्टाचर तिवेरर्ण अलिधतियामु, 1988 क ह गतिX POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.10.28 15:22:47 +0530
2 / 12 {Acq. A. No.-699 of 2024} न्यायालया, लि9स आग स पु मुU “तिवेशा* अलिधतियामु” कह गया ह\), ल), लि9ल-ल), छत्ती सगढ़ द्वार तिवेशा* प्रकरर्ण क्रमु क-01/2015 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घो लस रमु च ल” मुU पुरिर तिर्णया ति क-30/07/2016 कM वे\ध क) च^
गई ह\ । लि9सक ह अतिभाया)9 क मुमुल प्रमुतिर्ण पु ह`ए अतिभाया- लस रमु च ल क) धर-7, 13(1), डे सहपुतिX धर-13(2) तिवेशा* अलिधतियामु क अपुरध स )*मु- तिकया गया । लि9स आग स पु मुU "प्रश्ध तिर्णया" स स )लिध तिकया 9 रह ह\ ।
2. याह थ्या तितिवेवे ह\ तिक प्रथा: छन्नूOलल सहe (अ.स.-2) कM अपु पुरिर9f क सथा स या- रूपु स धरिर भाOतिमु ग्रामु लट)ड़, था ल), लि9ल ल) (छत्ती सगढ़) मुU स्थिस्था रह ह\, 9ह अतिभाया- लस रमु च ल पुटवेर क पु पुर ल)क सवेक क रूपु मुU पुस्था ह)कर कयार था ।
3.
अतिभाया)9 क मुमुल, स पु मुU, इस आशाया क रह तिक प्रथा: छन्नूOलल सहe कM लगभाग ) एकड़ पुस्\ भाOतिमु ग्रामु लट)ड़ मुU स्थिस्था था । उसक छ)ट भाई ग)पुल ह\, और )f भाई ख तिवेभा9 कर चह था । इस उद्देश्या स वे अतिभाया- लस रमु च ल (पुटवेर ) क पुस गए । अतिभाया- इस कया क लिलए ₹5,000/- रूपुया, रिरश्वे कM मु ग कM । प्रथा: द्वार ₹1,000/- रुपुया तिए 9 पुर अतिभाया- मु^क पुर 9कर भाOतिमु क मुपु तिकया और कह तिक शा* ₹4,000/- रुपुया पुर ह वेह ऋर्ण पुस्थिस्क \यार कर ग । प्रथा: छन्नूOलल सहe रिरश्वे कM शा* रतिशा हm चह था, इसलिलए वेह ए.स . ., रयापुर क कयालया मुU स च स (अ.स.-11) क सथा गया और प्रशा पु -17 क रूपु मुU लिललिख तिशाकया प्रस् कM । उ- तिशाकया पुर पुलिलस अध क, ए.स . . द्वार ति क 14/01/2015 क) तिर क वे पुतिटल (अ.स.-
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ति टs\पु ल ग्रामु लट)ड़ रवे ह`आ । पुटवेर कयालया स लगभाग आध तिकल)मु टर पुOवे, प्रथा: छन्नूOलल सहe एवे पु च स प्र पु लिस ह पुरिरहर (अ.स.-1) क) अतिभाया- क पुस रिरश्वे भा9 गया । उन्हU याह भा तिnशा तिया गया तिक रिरश्वे तिए 9 क पुश्च प्रथा: गमुछ स लिसर पुर पुगड़ vधकर इशार करग । प्रथा: द्वार वे\स ह स क तिए 9 पुर टs\पु ल क सभा सस्या पुटवेर कयालया पुह`vच, 9हv अतिभाया- क पुस स वेह क्रमु क वेल ₹500/- मुOल्या क आX )ट रमु ह`ए । अतिभाया- क हथाf क) स)तिडेयामु कwट क घो)ल मुU डे)या गया, लि9सस घो)ल क र ग पुरिरवे ह`आ । मु^क पुर आवेश्याक पु चमु, 9ब् एवे अन्या तिवेलिधक कयावेतिहयाv स पुति कM गई । पुटवेर स मु^क क क्शा \यार करया गया, सतियाf क या 9 तिकए गए, था 9ब् घो)ल क) रसयातिक पुर र्ण ह प्रया)गशाल भा9 गया । ह लस पुर अपुरध पु 9 द्घो कर स पुOर्ण तिवेवेच उपुर अतिभाया)ग पुत्र प्रस् तिकया गया ।
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4. आर)पु क प्रमुर्ण वेस् तिवेचरर्ण न्यायालया क समु अतिभाया)9 कM ओर स अपु पु समुथा मुU 11 सतियाf क पुर र्ण था 29 स्वे9 प्रशा तिचन्ह तिक करए गए । आतिटकल ए और क स्वे9 9ब् तिकए गए । धर-313 ण्डे प्रतिक्रया स तिह क ह या मुU अतिभाया- अपु तिवेपुर सतियाf क कथाf क) इ कर कर ह`ए स्वेया क) तिw* ह) ह`ए कह ह\ तिक उस ख टवेर कर क क)ई अलिधकर हm ह\। उस प्रथा: क) याह या था तिक ख टवेर क लिलए हस लर क) आवे प्रस् कर ह)ग, पुर उस झूOX tv सया गया ह\ । अतिभाया- अपु चवे मुU क)टवेर डे)मुस (.स.-1) क पुर र्ण करया, लि9स अपु कथा मुU कह तिक प्रथा: क र- र अर)ध कर पुर अतिभाया- उसक ख क मुपु ल गया था, तिक तिकस प्रकर कM रकमु कM मु ग हm कM था । उस याह भा या तिक अतिभाया- क) हस लर स क)ई स्वे9 प्रप्त हm ह`ए था था ख टवेर क कया हस लर क आशा पुर ह तिकया 9 ह\ । उभायापु क) स 9कर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार प्रश्ध तिर्णया पुरिर तिकया गया ह\ लि9स इस अपु ल मुU च^
गई ह\ ।
5. अपु लथा:/रज्या पु क तिवेद्वा अलिधवे- क क ह\ तिक अतिभाया)9 प्रस् सक्ष्या क मुध्यामु स मुमुल क) तिकस भा स ह स पुर प्रमुतिर्ण तिकया गया ह\ । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार उक सक्ष्या पुर तिवेश्वेस कर ह`ए त्रतिटपुOर्ण तिष्क* तिकल गया ह\ 9) तिवेलिध कM दृतिष्टा मुU स्थिस्थार रख 9 या)ग्या हm ह\ । अतिभाया- क तिवेरूद्घो अतिभाया)9 क मुमुल प्रमुतिर्ण रह ह\ । अ‚ प्रश्ध )*मुति- क आशा अपुस् कर ह`ए अपु ल स्वे कर कM 9कर अतिभाया- क) )*लिसद्ध कर स्थिण्डे तिकया 9ए ।
6. अतिभाया-गर्ण/उत्तीरवे गर्ण क तिवेद्वा अलिधवे- क क ह\ तिक ख टवेर क आशा कर क लिलए समु प्रलिधकर हस लर ह) ह\ । प्रथा: छन्नूO लल सहe द्वार ख
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A. No.-699 of 2024} टवेर ह आवे हस लर क) हm तिया गया था । अतिभाया)9 सतियाf क कथा ग भा र तिवेर)धभास लिलए ह`ए ह„ । अतिभाया)9 याह प्रमुतिर्ण कर मुU असtल रह ह\ तिक अतिभाया- द्वार ख तिवेभा9 ह तिकस रिरश्वे मु ग कM गई । अतिभाया)9 याह थ्या स ह स पुर प्रमुतिर्ण कर मुU असtल रह ह\ तिक अतिभाया- स रिरश्वे रकमु कM रमुग कM गई । उपुर)- अवेस्था मुU अतिभालख मुU उपुलब्ध सक्ष्या क असर तिवेचरर्ण न्यायालया क )*मुति- स ध तिष्क* पुOर्ण‚ उतिच ह\ लि9समुU तिकस हस्पु कM आवेश्याक हm ह\ । अपु लथा: पु क क स्वे कर या)ग्या हm ह\ । अ‚ अपु ल खरिर9 कM 9ए ।
7. उभायापु क क श्रीवेर्ण तिकया गया था अतिभालख क सOक्ष्मुपुOवेक पुरिरशा ल तिकया गया ।
8. In the matter of K. Shanthamma v. State of Telangana reported in (2022) 4 SCC 574 it has been held by the Hon'ble Supreme Court in paras 10 & 11 of its judgment as under:-
10. We have given careful consideration to the submissions. We have perused the depositions of the prosecution witnesses. The offence under Section 7 of the PC Act relating to public servants taking bribe requires a demand of illegal gratification and the acceptance thereof. The proof of demand of bribe by a public servant and its acceptance by him is sine qua non for establishing the offence under Section 7 of the PC Act. 11. In P. Satyanarayana Murthy v. State of A.P., (2015) 10 SCC 152, this Court has summarised the well-settled law on the subject in para 23 which reads thus:
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“23. The proof of demand of illegal gratification, thus, is the gravamen of the offence under Sections 7 and 13(1)(d)(i) and (ii) of the Act and in absence thereof, unmistakably the charge therefor, would fail. Mere acceptance of any amount allegedly by way of illegal gratification or recovery thereof, dehors the proof of demand, ipso facto, would thus not be sufficient to bring home the charge under these two sections of the Act.
As a corollary, failure of the prosecution to prove the demand for illegal gratification would be fatal and mere recovery of the amount from the person accused of the offence under Section 7 or 13 of the Act would not entail his conviction thereunder.”
9. In 2023 SCC OnLine SC 424 (Soundarajan v. State Represented by the Inspector of Police Vigilance Anticorruption Dindigul), the Supreme Court observed and held thus:
“9. We have considered the submissions. It is well settled that for establishing the commission of an offence punishable under Section 7 of the PC Act, proof of demand of gratification and acceptance of the gratification is a sine qua non. Moreover, the Constitution Bench in the case of Neeraj Dutta 2022 SCC OnLine SC 1724 has reiterated that the presumption under Section 20 of the PC Act can be invoked only on proof of facts in issue, namely, the demand of gratification by the accused and the acceptance thereof.”
10. उपुर)- न्यायादृष्टा f क प्रकशा मुU आर)तिपु अपुरध क प्रमुर्ण वेस् ) प्रमुख थ्या क प्रमुतिर्ण तिकया 9 आवेश्याक ह) ह\ । पुहल थ्या रिरश्वे कM मु ग और Oसर थ्या रिरश्वे कM रकमु क) प्रप्त कर ह\ ।
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11.
स्वेया प्रथा: छन्नूOलल सहe (अ.स.-2) अपु सक्ष्या कM क तिडेक-8 मुU याह स्वे कर तिकया ह\ तिक ख तिवेभा9 क स ध मुU उस हस लर क समु क)ई आवे प्रस् हm तिकया था । ख तिवेभा9 स ध आशा पुरिर कर क अलिधकर क वेल समु प्रलिधकर , अथा… हस लर, क) ह) ह\, 9तिक पुटवेर , हस लर क अध था उसक तिnशासर ह कयावेह कर ह\ । वेमु मुमुल मुU इस थ्या क क)ई सक्ष्या हm ह\ तिक प्रथा: छन्नूOलल सहe ख तिवेभा9 क लिलए हस लर स कभा स पुक तिकया ह) या उसक समु क)ई आवे प्रस् तिकया ह) । ऐस स्थिस्थाति मुU 9 ख तिवेभा9 कM कयावेह आर भा ह हm कM गई था , अतिभाया- पुटवेर लस रमु च ल द्वार उ- कया क लिलए रिरश्वे कM मु ग तिकया 9 स हस्पु प्र ह) ह\ ।
12. प्रथा: छन्नूOलल सहe (अ.स.-2) अपु न्यायालया कथा मुU अपु तिशाकया था अतिभाया)9 क आर)पुf कM पुतिष्टा अवेश्या कM ह\, तिक सथा ह याह भा स्वे कर तिकया ह\ तिक ₹1,000/- रुपुया क पुश्च शा* रतिशा क लिलए उस ग्रामु क उपुसरपु च तिलश्वेर सहe स उधर रतिशा मुvग था । थातिपु, इस थ्या क समुथा मुU उपुसरपु च तिलश्वेर सहe क सक्ष्या न्यायालया क समु प्रस् हm तिकया गया ह\ । अ‚ इस मुहत्वेपुOर्ण थ्या कM पुतिष्टा ह) क करर्ण अतिभाया)9 क मुमुल स हस्पु प्र ह) ह\ ।
13. प्रथा: छन्नूOलल सहe द्वार प्रशा पु -17 क रूपु मुU प्रस् अपु प्रथामु लिललिख तिशाकया क असर, 9 वेह पुहल र अतिभाया- पुटवेर स ख तिवेभा9 कर क तिवे कर गया था, उसक सथा उसक छ)ट भाई ग)पुल भा उपुस्थिस्था था । थातिपु, अतिभाया)9 अपु समुथा मुU उ- ग)पुल क न्यायालया मुU पुर र्ण हm करया ह\ । प्रशा पु -17 मुU याह उल्लुख अवेश्या ह\ तिक ति क 14/01/2015 क) ए.स . ., रयापुर मुU गई तिशाकया
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A. No.-699 of 2024} स लगभाग एक सप्तह पुOवे वेह अतिभाया- पुटवेर स तिमुल था और उसकM मु ग पुर ₹1,000/- रुपुया तिए था, तिक उ- तिशाकया मुU उस ₹1,000/- रुपुया तिए 9 क स्था था तिलिथा क क)ई स्पुष्टा उल्लुख हm तिकया गया ह\ ।
14. ख तिवेभा9 क कया ह कलिथा रिरश्वे मु ग क स ध मुU अतिभाया)9 क प्रमुख स
स्वेया प्रथा: छन्नूOलल सहe (अ.स.-2) ह\ । इस स ध मुU उसक छ)ट भाई ग)पुल भा
प्रत्याशा: स था, तिक अतिभाया)9 पु द्वार ग)पुल क पुर र्ण न्यायालया मुU हm करया गया ह\ । अतिभाया- द्वार कलिथा मु ग तिकए 9 क थ्या क स्वे त्र सक्ष्या द्वार समुथा हm ह) पुया ह\ । टs\पु ल क प्रमुख एवे तिवेवेचक तिर क वे पुतिटल (अ.स.-10) अपु कथा मुU या तिक प्रथा: छन्नूOलल सहe द्वार गई लिललिख तिशाकया क उपुर उस एक तिडेलि9टल वेoइस रिरकoडेर प्र तिकया गया था पु चमु प्रशा पु -18 \यार तिकया गया । उस तिnशा तिया गया था तिक वेह अतिभाया- पुटवेर स रिरश्वे स ध च रिरकoडे कर । प्रथा: छन्नूOलल सहe क असर उस अतिभाया- स ह`ई च रिरकoडे कM था , और तिवेवेचक तिर क वे पुतिटल (अ.स.-10) क असर उ- च क लिलप्या रर्ण प्रशा पु -2 क रूपु मुU \यार तिकया गया था । याह उल्लुख या ह\ तिक उ- लिलप्या रर्ण क स टs\पु ल क सस्या प्र पु लिस ह पुरिरहर (अ.स.-1) था एस.क . 9)सt (अ.स.-5) ह„, 9) )f ह ल)क सवेक ह„ । )f सतियाf अपु कथा मुU स्पुष्टा रूपु स याह हm कह ह\ तिक रिरकoडे कM गई च मुU प्रथा: छन्नूOलल सहe स स वे कर वेल अन्या व्याति- वेस्वे मुU अतिभाया- पुटवेर
लस रमु च ल ह था । तिकस भा स याह हm या तिक रिरकoडे कM गई च
मुU स गई आवेज़ अतिभाया- लस रमु च ल कM था । अथा तिकस स उसकM आवे9 कM पुहच हm कM ह\ । प्रशा पु -2 क स प्र पु लिस ह पुरिरहर (अ.स.-1),
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A. No.-699 of 2024} 9) उस समुया 9ल स सध तिवेभाग, रयापुर मुU उपु अतिभाया क पु पुर पुस्था था, कह तिक लिलप्या रर्ण सहयाक ग्राडे-3 मु डेवे क द्वार \यार तिकया गया था । थातिपु, याह स्पुष्टा हm ह`आ तिक उ- सहयाक ग्राडे-3 मु डेवे तिकस कयालया अथावे तिवेभाग क कमुचर था । ) लिलप्या रर्ण मुU उसक हस्र शाए गए ह„, ह उस सक्ष्या सOच मुU सस्थिŠमुलिल तिकया गया और ह उसक पुर र्ण न्यायालया मुU करया गया । लिलप्या रर्ण मुU ₹1,000/- रुपुया और ₹4,000/- रुपुया कया ह) कM 9) च शाई गई ह\, वेह र-र प्रथा: छन्नूOलल सहe कM ओर स कह गई ह\, तिक Oसर व्याति- द्वार ।
15. तिडेलि9टल वेoइस रिरकoडेर क स ध मुU एक अन्या स च स (अ.स.-11) ह\, लि9स कह तिक ए.स . . कयालया द्वार प्रथा: छन्नूOलल सहe क) टपु रिरकoडेर प्र तिकया गया था और वेह स्वेया प्रथा: क सथा गया था प्रथा: और पुटवेर लस रमु च ल कM च
रिरकoडे कर उस ए.स . . कयालया, रयापुर लकर आया था । थातिपु, च स याह हm या तिक याह च क, कहv और तिक पुरिरस्थिस्थातियाf मुU रिरकoडे कM गई था । लिलप्या रर्ण क प्रमुख स च स क) ह) चतिहए था, तिक उस लिलप्या रर्ण क स हm या गया ह\ । इसक अतिरिर-, च स क प्रतिपुर र्ण मुU याह थ्या समु आया ह\ तिक वेह धर 420 भार या ण्डे स तिह क अ ग तिचटt डे प्रकरर्ण मुU 09 मुह क 9ल मुU रह था । इस करर्ण उसकM तिवेश्वेस या भा स तिग्ध ह) 9 ह\ । इ समुस् थ्याf क आल)क मुU याह स्पुष्टा ह\ तिक अतिभाया)9 पु याह थ्या स ह स पुर प्रमुतिर्ण कर मुU असtल रह ह\ तिक अतिभाया- लस रमु च ल ख तिवेभा9 क लिलए अवे\ध पुरिर)*र्ण क रूपु मुU रतिशा कM मु ग कM था अथावे स्वे कर कM था ।
16. 9ह क अतिभाया- द्वार ₹4,000/- क) रिरश्वे क रूपु मुU प्रप्त कर था उस रतिशा कM 9ब् क प्रश् ह\? इस स ध मुU याह उल्लुख या थ्या प्रथा: छन्नूOलल सहe क कथा मुU
10 / 12 {Acq. A. No.-699 of 2024} आया ह\ तिक उस ₹500/- क 08 )ट ए.स .
., रयापुर क अलिधकरिरयाf क) ) र तिए था । सथा ह , चस (अ.स.-11) भा याह कह ह\ तिक टs\पु कM करवेई क लिलए वे ) र गए था, लि9मुU स एक र शामु क पुटवेर हm तिमुल, वे ल^ट आए, और Oसर र 9 पुर टs\पु कM करवेई स पुन्नू ह`ई । टs\पु कM इस करवेई कM पुतिष्टा प्रथा: छन्नूOलल सहe क सथा-सथा टs\पु ल क मुलिखया तिर क वे पुतिटल (अ.स.-10) था पु च स उपु अतिभाया प्र पु लिस ह पुरिरहर (अ.स.-1) एवे एस.क . 9)सt (अ.स.-5) कM ह\ । इ सतियाf क कथाf मुU इस ति पुर ग भा र तिवेर)धभास पुया गया ह\ तिक रतिशा कM 9ब् तिकस प्रकर ह`ई । स्वेया प्रथा: छन्नूOलल सहe कह ह\ तिक उसक इशार क पुश्च 9 ए.स . . अलिधकर पुटवेर कयालया पुह` च, ) अतिभाया- स्वेया अपु 9 स रिरश्वे कM रतिशा तिकलकर ए.स . . अलिधकरिरयाf क) सŒपु । इसक तिवेपुर तिर क वे पुतिटल (अ.स.-10) कह ह\ तिक वेह पुह` च पुर तिर क एस.क . स अतिभाया- लस रमु क एक हथा पुकड़ लिलया, और टs\पु ल क प्रभार डे .एस.पु . शा)ए ख ल क सस्याf क पुरिरचया अतिभाया- लस रमु च ल स करया । त्पुश्च पु च स प्र पु लिस ह पुरिरहर (अ.स.-1) द्वार अतिभाया- कM लशा
ल पुर उसकM पु„ट कM च)र 9 स )ट रमु ह`ए । उल्लुख या ह\ तिक पु च स प्र पु लिस ह पुरिरहर (अ.स.-1) क पुर र्ण न्यायालया मुU करया गया ह\, तिक तिर क एस.क . स क पुर र्ण हm ह`आ ह\ ।
17. प्र पु लिस ह पुरिरहर (अ.स.-1) अपु कथा मुU कह ह\ तिक तिर क स अतिभाया- क हथा पुकड़कर उसकM पु„ट कM च)र 9 स रिरश्वे कM रकमु तिकल था , अथा… उस तिर क वे पुतिटल क इस कथा कM पुतिष्टा हm कM तिक उस स्वेया लशा लकर रतिशा रमु कM था । इस प्रकर, इस स क कथा स याह स्पुष्टा ह) ह\ तिक रकमु कM 9ब्
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स द्वार कM गई था , लि9सक पुर र्ण अतिभाया)9 कM ओर स हm करया गया ह\ ।
18. Oसर पु च स एस.क . 9)सt (अ.स.-5) भा कह ह\ तिक अतिभाया- क एक हथा तिर क एस.क . स पुकड़ था और Oसर हथा तिर क वे पुतिटल (अ.स.-10) , था पुरिरहर सह (अ.स.-1) च)र 9 स रिरश्वे कM रकमु कM रमुग कM था । थातिपु, स्पुष्टा ह\ तिक प्र पु लिस ह पुरिरहर (अ.स.-1) स्वेया द्वार रकमु रमु कर कM स्पुष्टा पुतिष्टा हm कM ह\ । तिर क वे पुतिटल (अ.स.-10) अपु प्रतिपुर र्ण मुU याह भा स्वे कर तिकया तिक पु च स प्र पु लिस ह पुरिरहर (अ.स.-1) द्वार रमुग क पुश्च उक हथा क) स)तिडेयामु कwट क घो)ल स धलवेया हm गया था । इस प्रकर, वेस्वे मुU अतिभाया- स रकमु कM रमुग तिकस कM, इस ति पुर सभा अतिभाया)9 सतियाf क कथाf मुU आपुस तिवेर)धभास ह\, लि9सस रतिशा कM 9ब् क थ्या भा स हस्पु पुया गया ह\ ।
19. Recently, applying the law governing the scope of interference in an appeal against acquittal, the Hon’ble Supreme Court in the case of
“State of Rajasthan vs. Kistoora Ram” reported in 2022 SCC OnLine SC 984, has held as follows:-
“8. The scope of interference in an appeal against acquittal is very limited. Unless it is found that the view taken by the Court is impossible or perverse, it is not permissible to interfere with the finding of acquittal. Equally if two views are possible, it is not permissible to set aside an order of acquittal, merely because the Appellate Court finds the way of
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20.
उपुर)- न्यायादृष्टा क प्रकशा मुU याह न्यायालया पु ह\ तिक प्रथा: छन्नूOलल सहe ख तिवेभा9 कM कयावेह ह हस लर क समु क)ई आवे प्रस् हm तिकया था । पुटवेर द्वार क)ई भा कयावेह क वेल हस लर क तिnशासर ह कM 9 ह\, तिक इस मुमुल मुU हस लर क) क)ई आवे प्रप्त हm ह`आ था । अ‚ याह स्थातिपु हm ह) तिक हस लर पुटवेर क) तिकस कया क लिलए तिnतिशा तिकया ह) । इस प्रकर, अतिभाया- द्वार ख तिवेभा9 क कया क लिलए रिरश्वे कM मु ग कर स ह स पुर प्रमुतिर्ण हm ह`आ । इस प्रकर, अतिभाया- द्वार रिरश्वे कM रतिशा प्रप्त कर और उसस रमुग
क थ्या भा स हस्पु पुया गया । इस प्रकर अतिभालख मुU उपुलब्ध थ्या एवे सक्ष्या क आधर पुर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार 9) )*मुति- क तिर्णया पुरिर तिकया गया ह\, उसमुU तिकस प्रकर कM अवे\ध या अशाद्ध हm ह\ । इसलिलए उसमुU हस्पु कM आवेश्याक हm पुई 9 ।
21. अ‚ )*मुति- क तिवेरूद्घो प्रस् याह अपु ल स्वे कर या)ग्या ह) स खरिर9 कM 9 ह\ ।
22. तिर्णया कM प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभालख शा घ्रपुOवेक वेपुस प्रति* ह) । सह /- (स 9या क मुर 9यासवेल) न्यायाध शा पु)मु