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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 48537 (CHH)
SURAJ BANDHE v. THE STATE OF CHHATTISGARH
ACQA/427/2019 · 2025-10-27
Shri Sanjay Agrawal, Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 48537 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 3 {Acq. A. No.-427 of 2019}
2025:CGHC:52375-DB अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दोषमुति
अपु ल क्रमु!क
-427
/2019
1. स+रज !धे पुति-हरिररमु !धे, उम्र-लगभग 28 वेष3, ति4वेस -ग्रामु रवेल , च6क7-च!दो4+, पुलिलस था4-4!दोघाट, लिजल-मुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा</पु ति= तिवेरूद्घ
1. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस था4-4!दोघाट, लिजल-मुर, छत्ती सगढ़ । (रज्या)
2. मुक श उर्फ3 मु!क7 !धे तिपु-शत्रुह4 !धे, उम्र-लगभग 23 वेष3, ति4वेस -ग्रामु रवेल , च6क7-च!दो4+, था4-4!दोघाट, लिजल-मुर, छत्ती सगढ़ । (अतिभया) -----उत्तीरवेदो गण अपु लथा</पु ति= द्वार : श्री सतिहल सहL, अलिधेवे सतिह श्री रतिवेन्द्र शमु3, अलिधेवे । रज्या/उत्तीरवेदो क्रमु!क-1 द्वार : श्री रूहNल अमु 4 मुमु4, पुO4ल अलिधेवे । अतिभया/उत्तीरवेदो क्रमु!क-2 द्वार : स+च4 4हP । यागल पु ठःR मु44 या न्यायामु+ति3 श्री स!जया अग्रावेल
, न्यायाधे श
मु44 या न्यायामु+ति3 श्री स!जया क मुर जयासवेल
, न्यायाधे श
!! ति4ण3या पु ठः पुर पुरिर !! द्वार
स!जया क मुर जयासवेल
, न्यायाधे श
POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.10.28 15:15:07 +0530
2 / 3 {Acq. A. No.-427 of 2019} 28/10/2025
1. उभयापुक्ष क अपु ल क7 ग्राह्य पुर स4 गया ।
2. दोण्ड प्रतिक्रया स!तिह, 1973 क7 धेर-372 क ह दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् इस अपु ल मु[ तिवेचरण न्यायालया-सत्रु न्यायाधे श, मुर, लिजल-मुर, छत्ती सगढ़ द्वार सत्रु प्रकरण क्रमु!क-16/2017 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ मुक श उर्फ3 मु!क7 !धे” मु[ पुरिर ति4ण3या तिदो4!क-29/04/2019 क7 वेOधे क च46 दो गई हO । लिजसक ह अतिभयाज4 क मुमुल प्रमुतिण 4 पु हNए अतिभया क धेर-302 एवे! 201 भर या दोण्ड स!तिह, 1860 क अपुरधे स दोषमु तिकया गया ।
3. अतिभयाज4 क मुमुल क अ4सर, मुaक अतिमु !धे पुbलिलटक्निd4क कbलज, दोग3 मु[ अध्याया4र था, ज तिदो4!क 29/12/2016 क अपु4 गaह ग्रामु रवेल आया था । तिदो4!क 01/01/2017 क अपु4 जन्मुतिदो4 मु44 क पुश्च, तिदो4!क 04/01/2017 क वेह लपु ह गया । पुश्च मु[, तिदो4!क 08/01/2017 क उसक शवे हbर्फ 4दो क तिक4र क्निस्था ज!गल क7 झाति=याi मु[ तिमुल । इस स!!धे मु[ ज 4 दोस !जर द्वार दो गई स+च4 पुर था4 4!दोघाट मु[ मुग3 कयामु कर शवे क पु!च4मु Oयार तिकया गया एवे! शवे पुर क्षण करया गया । तिचतिकत्सक7या अतिभमु क अ4सर, मुaक क7 मुaत्या गल घाट4 स पुई गई, लिजस आपुरलिधेक मु4वेवेधे क7 श्रीण मु[ मु4 गया । मु6क 4dश Oयार कर सतिक्षयाi क कथा4 दोज3 तिकए गए । अतिभया मुक श उर्फ3 मु!क7 !धे क मुमुरण्डमु कथा4 क आधेर पुर मुaक क मुइल र्फ4 एवे!
लिसमु कड3 जब् तिकए गए, लिजसक7 जब् क्रमुशR प्रदोश3 पु -11 एवे! पु -12 क ह क7 गई । इसक अतिरिर, घाट4 मु[ प्रया अतिभया क चमु= क ल्ट क7 रख क पु!च4मु प्रदोश3 पु -14 था ल्ट क dकल 4 तिमुल4 क पु!च4मु प्रदोश3 पु -13 Oयार तिकया गया । स!पु+ण3 तिवेवेच4 उपुर! अतिभयागपुत्रु न्यायालया मु[ प्रस् तिकया गया ।
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4. अतिभया मुक श उर्फ3 मु!क7 !धे क तिवेरुद्ध कई प्रत्याक्ष सक्ष्या उपुलब्धे 4हP रह । उस अतिभयालिज कर4 क मुख्या आधेर उसक मुमुरण्डमु कथा4 क आधेर पुर मुaक क या गया मुइल र्फ4 एवे! लिसमु कड3 क7 जब् रह , लिजसक7 जब् कया3वेह सहयाक उपुति4र क्षक आर.क . कश्यापु (अ.स.-16) द्वार तिकया गया । इस कया3वेह क7 पुतिs सक्ष
झामुक लल सहL (अ.स.-8) एवे! स!जया क मुर !धे (अ.स.-9) क कथा4 स हNई । थातिपु, इस स!!धे मु[ पुलिलस द्वार ऐस कई सक्ष्या स!कलिल 4हP तिकया गया लिजसस याह स्थातिपु ह सक तिक जब् तिकया गया मुइल र्फ4 एवे! लिसमु कड3, वेस्वे मु[ मुaक अतिमु !धे क स्वेतिमुत्वे या आलिधेपुत्या क था ।
5. इस प्रकर, जब् मुइल र्फ4 और लिसमु कड3 क मुaक स कई स!!धे स्थातिपु कर पु4 मु[ अतिभयाज4 क7 असर्फल क दृतिsग रख हNए दोषमुति क7 गया । अतिभलख मु[ उपुलब्धे थ्या एवे! सक्ष्या क प्रकश मु[ हमु पु हx तिक तिवेचरण न्यायालया द्वार पुरिर दोषमुति क ति4ण3या मु[ कई अवेOधे या अशद्घ 4हP हO । इसलिलए उसमु[ हस्क्षपु क7 आवेश्याक 4हP पुई ज ।
6. अR दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याह अपु ल ग्राह्य याग्या 4 ह4 स प्रर!तिभक स्र पुर ह
खरिरज क7 ज हO ।
7. ति4ण3या क7 प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभलख श घ्रपु+वे3क वेपुस प्रतिष ह । सह /- (स!जया अग्रावेल) न्यायाधे श सह /- (स!जया क मुर जयासवेल) न्यायाधे श पुमु4