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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 47884 (CHH)

RAMAKANT SONI v. RAMESHWAR DIWAN

ACQA/640/2024 · 2025-11-26

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 9 {Acq. A. No.-640 of 2024} 2025:CGHC:57753 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिर्णया सरति ति क-25/11/2025 तिर्णया उद्घो)ति* ति क-27/11/2025 )*मुति- अपु ल क्रमु क -640 /2024  रमुक स) तिपु-पुरसरमु स) , उम्र-लगभग 52 वे*, तिवेस -वेर्ड क्रमु क-2, शां ति गर, गहर, पुलिलस था-गहर, लि8ल-मुहसमु , छत्ती सगढ़ -----अपु लथा9/पुरिरवे तिवेरूद्घो  रमुश्वेर वे तिपु-रसया वे, उम्र-लगभग 49 वे*, तिवेस -छ ईह, पु)स्ट-ग 8र, पुलिलस था-गहर, लि8ल-मुहसमु , छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /अतिभया- अपु लथा9/पुरिरवे द्वार : श्री कD पुशां 8 . क ल, अलिFवे- । उत्तीरवे /अतिभया- द्वार : श्री वेHभवे ए. ग)वेF, अलिFवे- । मु या न्यायामुJति श्री स 8या क मुर 8यासवेल , न्यायाF शां !! स .ए.वे . तिर्णया !! 1. ण्र्ड प्रतिक्रया स तिह, 1973 कN Fर-378 (4) क ह प्रस् इस अपु ल मुS न्यायालया-सत्र न्यायाF शां (लि8स आग स पु मुS “अपु ल या न्यायालया” स स )लिF तिकया 8 रह हH), मुहसमु , लि8ल-मुहसमु , छत्ती सगढ़ द्वार ण्डिण्र्डक अपु ल प्रकरर्ण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.11.27 16:25:49 +0530 2 / 9 {Acq. A. No.-640 of 2024} क्रमु क-एच 16/2023 “रमुश्वेर वे (अतिभया-) तिवेरूद्घो रमुक स) (पुरिरवे )” मुS पुरिर )*मुति- क तिर्णया ति क-31/08/2023 कN वेHF क) चY गई हH । 2. प्रकरर्ण क थ्या स पु मुS इस प्रकर ह[ तिक उभयापु पुरस्पुर पुरिरतिच ह[ । पुरिरवे रमुक स) क घर आकर अतिभया- रमुश्वेर वे घरलJ कया ह Fरतिशां कN आवेश्याक ई, लि8स पुर ति क 10/06/2019 क) पुरिरवे ) गवेह] कN उपुण्डिस्थाति मुS 1,60,000/- रुपुया उस ऋर्ण स्वेरूपु प्र तिकए । उ- रतिशां कN वेपुस क लिलए अतिभया- 1,60,000/- रुपुया क चक क्रमु क 000001 ति क 12/09/2019, [क ऑफ ड़ौY क, प्रशां पु -1 क रूपु मुS पुरिरवे क) सcपु । पुरिरवे द्वार उ- चक क) [क पुच9 प्रशां पु -3 क मुध्यामु स ति क 21/10/2019 क) अपु खा मुS प्रस् तिकया गया, पुर स लिF [क चक क) प्रशां पु -2 क ह ति क 24/10/2019 क) इस तिटप्पुर्ण क सथा भग क ति लYटया तिक अतिभया- क खा मुS पुयाप्त Fरतिशां उपुलब्F हi हH । इस पुर पुरिरवे अतिभया- क) तिवेलिFसम्मु मु ग-सJच (प्रशां पु -6) पु 8 कD र्डक स ति क 22/11/2019 क मुध्यामु स प्रति* कN, लि8सकN पु 8 कD र्डक रस प्रशां पु -4 हH । याह सJच अतिभया- क) ति क 07/12/2019 क) तिवेलिFवे प्रप्त हkई, तिफर भ उस वेHFतिक 15 ति] कN अवेलिF क भ र चक रतिशां क भग हi तिकया । फलस्वेरूपु, पुरिरवे चक अरर्ण क स F मुS पुरक्रम्या लिलखा अलिFतियामु, 1881 कN Fर 138 क अ ग ति क 27/12/2019 क) तिवेचरर्ण न्यायालया क समु पुरिरवे प्रस् तिकया । तिवेचरर्ण क Yर पुरिरवे था उसक स वेरयार्ण क पुर र्ण करया गया । अतिभया- Fर 313 ण्र्ड प्रतिक्रया स तिह क अ ग अपु कथा मुS पुरिरवे क सक्ष्या स इ कर कर हkए स्वेया क) तिm* या था अपु पु समुथा मुS क)ई सक्ष्या प्रस् हi तिकया । 3 / 9 {Acq. A. No.-640 of 2024} 3. A. No.-640 of 2024} 3. तिवेचरर्ण न्यायालया-न्यातियाक मुलि8स्टnट प्रथामु श्रीर्ण , मुहसमु , लि8ल-मुहसमु , छत्ती सगढ़ द्वार पुरिरवे प्रकरर्ण क्रमु क-269/2020 “रमुक स) तिवेरूद्घो रमुश्वेर वे” मुS पुरिर तिर्णया ति क-21/02/2023 मुS अतिभया- रमुश्वेर वे क) तिम्सर )*लिसद्ध कर ण्डिण्र्ड तिकया गयाp— )*लिसतिद्ध ण्र्डशां Fर-138 पुरक्रम्या लिलखा अलिFतियामु, 1881 न्यायालया उठ क कN स8 था ₹1,60,000/- (एक लखा सठ ह8र रुपुया) कN प्रतिकर रतिशां अ करग और प्रतिकर रतिशां अ कर कN शां मुS उस अतिरिर- 07 तिवेस क सFरर्ण करवेस स ण्डिण्र्ड तिकया 8एग । 4. तिवेचरर्ण न्यायालया क उ- )*लिसद्ध एवे ण्र्डशां स F तिर्णया क तिवेरूद्घो प्रस् अपु ल क) सत्र न्यायालया द्वार स्वे कर कर अतिभया- क) )*मु- कर तिया गया । लि8स )*मुति- क तिर्णया क) इस अपु ल मुS चY गई हH । 5. अपु लथा9/पुरिरवे क तिवेद्वा अलिFवे- क क हH तिक अपु लथा9 अपु मुमुल क) सक्ष्या क मुध्यामु स प्रमुतिर्ण तिकया हH था तिवेचरर्ण न्यायालया उक पुरिरवे क) स्वे कर कर हkए अतिभया- क) )*लिसद्ध तिकया हH । तिक अपु ल या न्यायालया सक्ष्या क उतिच रूपु स मुJल्या क तिकए ति प्रश्F )*मुति- क तिर्णया पुरिर कर तिया हH । उ- तिर्णया तिवेलिFस ग हi हH, तिवेशां*कर 8 पुरक्रम्या लिलखा अलिFतियामु, 1881 कN Fर 118 एवे 139 क ह ऋर्ण तिए 8 कN तिवेलिFक उपुFरर्ण पुरिरवे क पु मुS तिक्रयाशां ल हH, क्या]तिक अतिभया- ) चक 8र कर स इकर तिकया हH और ह उस पुर अपु 4 / 9 {Acq. A. No.-640 of 2024} हस्र स । ऐस पुरिरण्डिस्थाति मुS अपु ल या न्यायालया द्वार )*मुति- क तिर्णया तिवेलिF कN दृतिy मुS उतिच हi हH था ण्डिस्थार रखा 8 या)ग्या भ हi हH । अp अपु ल स्वे कर कर प्रश्F )*मुति- क तिर्णया क) अपुस् कर हkए अतिभया- क) )*लिसद्ध कर ण्डिण्र्ड तिकया 8ए । 6. उत्तीरवे /अतिभया- क तिवेद्वा अलिFवे- क क हH तिक पुरिरवे ऋर्ण तिए 8 क थ्या क) तिवेलिFवे प्रमुतिर्ण हi तिकया हH । ऋर्ण स F क)ई लिललिखा स्वे8 प्रस् हi तिकया गया, ह पुरिरवे कN आयाकर तिवेवेरर्ण मुS उ- रतिशां तिए 8 क क)ई उल्लेखा तिकया गया हH । ऐस ण्डिस्थाति मुS अपु ल या न्यायालया द्वार पुरिर )*मुति- क आशां उतिच हH । तिवेद्वा अलिFवे- द्वार याह भ क तिया गया हH तिक 8ह| ) दृतिyक)र्ण स भवे ह], वेह| वेह दृतिyक)र्ण अपुया 8 चतिहए 8) अतिभया- क पु मुS ह) । चJ|तिक अपु ल या न्यायालया द्वार अतिभया- क) )*मु- तिकया 8 चक हH, इसलिलए उस आशां मुS हस्पु कN क)ई आवेश्याक हi रह 8 । अp अपु ल खारिर8 कN 8ए । 7. उभयापु क क श्रीवेर्ण तिकया गया और तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभलखा क सJक्ष्मुपुJवेक पुरिरशां ल तिकया गया । 8. अपु ल या न्यायालया द्वार अतिभया- क) )*मु- तिकए 8 क आFर याह रह हH तिक पुरिरवे याह प्रमुतिर्ण कर पु मुS असफल रह हH तिक प्रश्F चक अतिभया- उस तिकस ऋर्ण या अन्या तियात्वे क पुJर्णp या भगp उन्मु)च क लिलए प्रत्ती तिकया था । 9. पुरिरवे कN ओर स स्वेया पुरिरवे रमुक स) और उसक स वेरयार्ण पुरिरवे मुमुल कN सक्ष्या मुS पुतिy कN हH । पुरिरवे पुत्र मुS याह उल्लेखा हH तिक पुरिरवे ) गवेह] कN 5 / 9 {Acq. A. No.-640 of 2024} उपुण्डिस्थाति मुS अतिभया- क) 1,60,000/- रुपुया ऋर्ण स्वेरूपु प्र तिकए था, लि8सकN पुतिy स वेरयार्ण स्पुy रूपु स कN हH । इस प्रकर, वेरयार्ण इस थ्या कN भ पुतिy कN हH तिक प्रशां पु -1 स F प्रश्F चक अतिभया- स्वेया पुरिरवे क) लकर तिया था । मुहत्वेपुJर्ण थ्या याह हH तिक अतिभया- ) पुरिरवे द्वार भ8 गई तिवेलिFक सJच क क)ई उत्तीर तिया और ह अपु समुथा मुS क)ई सक्ष्या प्रस् तिकया । पुरिरवे सक्ष्या क प्रतिपुर र्ण क Yर भ अतिभया- पु द्वार याह सझावे हi तिया गया तिक प्रशां पु -1 मुS वेतिर्ण हस्र अतिभया- क हi ह[ । इस प्रकर, इस थ्या क) भ चY हi गई तिक प्रशां पु -1 क चक अतिभया- द्वार 8र तिकया गया था । 10. पुरक्रम्या लिलखा अलिFतियामु कN Fर-139 तिम्सर हHp- "139. Fरक क पु मुS उपुFरर्ण-8 क तिक त्प्रतिकJ ल सति ह), याह उपुFरर्ण कN 8एग तिक चक क Fरक Fर-138 मुS तितिy प्रकD ति क चक तिकस ऋर्ण या अन्या तियात्वे क पुJर्णp या भगp उन्मु)च क लिलए प्रप्त तिकया हH ।" 11. In the matter of K. Bhaskaran v. Sankaran Vaidhyan Balan reported in (1999) 7 SCC 510, where the Hon’ble Supreme Court held that, when the signature on the cheque in question is admitted, presumption under Section 139 shall arise. In para 9 it was observed as under:- “9. As the signature in the cheque is admitted to be that of the accused, the presumption envisaged in Section 118 of the Act can legally be inferred that the cheque was made or drawn for consideration on the date which the cheque bears. Section 139 of the Act enjoins on the 6 / 9 {Acq. A. No.-640 of 2024} Court to presume that the holder of the cheque received it for the discharge of any debt or liability. The burden was on the accused to rebut the aforesaid presumption.The Trial Court was not persuaded to rely on the interested testimony of DW-1 to rebut the presumption. The said finding was upheld by the High Court. It is not now open to the accused to contend differently on that aspect.” 12. The High Court of Delhi in the matter of V.S. Yadav v. Reena reported in 2010 SCC OnLine Del 3294, held in para-8 as under:- “8. The respondent has placed reliance on Krishna Janardhan Bhat v. Dattatraya G. Hegde, 2008 Crl. L.J. 1172, which is also the case relied upon by the Trial Court. In this judgment itself Hon'ble Supreme Court has specifically observed that Court should not be blind to the ground realities and the rebuttal of presumption under Section 139 of N.I. Act would largely depend upon the factual matrix of each case. The Trial Court in this case turned a blind eye to the fact that every accused facing trial, whether under Section 138 of N.I. Act or under any penal law, when charged with the offence, pleads not guilty and takes a stand that he has not committed the offence. Even in the cases where loan is taken from a bank and the cheques issued to the bank stand dishonoured, the stand taken is same. Mere pleading not guilty and stating that the cheques were issued as security, would not give amount to rebutting the presumption raised under Section 139 of N.I. Act. If mere statement under Section 313, Cr. P.C. or under Section 281, 7 / 9 {Acq. A. No.-640 of 2024} Cr. P.C. of accused of pleading not guilty was sufficient to rebut the entire evidence produced by the complainant/prosecution, then every accused has to be acquitted. But, it is not the law. In order to rebut the presumption under Section 139 of N.I. Act, the accused, by cogent evidence, has to prove the circumstance under which cheques were issued. It was for the accused to prove if no loan was taken why he did not write a letter to the complainant for return of the cheque. Unless the accused had proved that he acted like a normal businessman/prudent person entering into a contract he could not have rebutted the presumption under Section 139, N.I. Act. If no loan was given, but cheques were retained, he immediately would have protested and asked the cheques to be returned and if still cheques were not returned, he would have served a notice as complainant. Nothing was proved in this case.” 13. Hon’ble Supreme Court in the matter of Bir Singh v. Mukesh Kumar reported in (2019) 4 SCC 197, which deals with presumption under Section 139 NI Act, basis which, it was contended that since respondent failed to lead evidence post statement under Section 313 CrPC, burden was on the accused/respondent to prove that the cheque was not issued by him. Also, respondents did not bring any material to rebut presumption under Section 139 NI Act, which is in favour of the cheque holder. 8 / 9 {Acq. A. No.-640 of 2024} 14. उपुर)- लिसद्घो क) मु या उच्चमु न्यायालया द्वार P. Rasiya v. Abdul Nazer and another, 2022 SCC OnLine SC 1131 मुS पुp पुy तिकया गया हH । 15. अतिभया- रमुश्वेर वे प्रशां पु -1 स F चक 8र कर स इ कर हi तिकया हH और ह उस पुर अपु हस्र स इ कर तिकया । ण्डिल्क प्रतिपुर र्ण क Yर अतिभया- पु कN ओर स पुरिरवे क) याह सझावे तिया गया तिक अतिभया- [क ऑफ ड़ौY मुS खा मुद्रा ऋर्ण प्रप्त कर ह खालवेया था था पुरिरवे उस याह कहकर आश्वेस तिया तिक वेह उसक मुद्रा ल) वेपुस करवे ग, और इस ह पुरिरवे उसस चक ल लिलया था । उ- सझावे क) पुरिरवे स्पुy रूपु स अस्वे कर कर तिया । इस प्रकर याह तितिवेवे हH तिक अतिभया- प्रशां पु -1 क चक 8र कर स इकर हi तिकया हH । इ पुरिरण्डिस्थातिया] मुS, पुरिरवे ऋर्ण प्र तिकए 8 क अपु प्रथातिमुक तियात्वे क) सक्ष्या क मुध्यामु स पुयाप्त रूपु स प्रमुतिर्ण तिकया हH । उपुर)- ण्डिस्थाति मुS पुरक्रम्या लिलखा अलिFतियामु, 1881 कN Fर 139 क ह याह तिवेलिFक उपुFरर्ण पुरिरवे क पु मुS हH तिक प्रशां पु -1 क प्रश्F चक, ऋर्ण तियात्वे क उन्मु)च ह ह 8र तिकया गया था । 16. उ- तिवेलिFक उपुFरर्ण क खाण्र्ड क भर अतिभया- पुर था । अतिभया- कN ओर स इस भर तिवेह क क)ई सक्ष्या प्रस् हi तिकया गया हH इसलिलए उ- उपुFरर्ण क खाण्र्ड हi ह) सक हH । अतिभलखा मुS उपुलब्F अन्या सक्ष्या क आFर पुर भ अतिभया- क पु मुS उपुFरर्ण क खाण्र्ड कN क)ई पुरिरकल्पु हi हH । 17. पुरिरवे द्वार अपु आयाकर तिवेवेरर्ण प्रस् तिकए 8 मुत्र स, या याति प्रस् तिवेवेरर्ण मुS ऋर्ण स्वेरूपु उ- रतिशां तिए 8 स F क)ई प्रतिवेतिy ह), ) भ क वेल इस आFर पुर 9 / 9 {Acq. A. No.-640 of 2024} पुरिरवे कN आलिथाक मु पुर स ह हi तिकया 8 सक । याति आयाकर तिवेवेरर्ण उपुलब्F हi हH या उसमुS स लिF प्रतिवेतिy हi हH, थातिपु पुरक्रम्या लिललिखा अलिFतियामु क ह तिवेतितिमु तिवेलिFक अमु पुरिरवे क पु मुS तिक्रयाशां ल रह हH और उसकN तिवेत्ती या समुथ्या क) स ह क आFर पुर खारिर8 हi तिकया 8 सक । इस स भ मुS मु या कटक उच्च न्यायालया द्वार M. S. Sathya Narayana v. Lingaraje Urs, AIR Online 2022 KAR 2570 मुS याह प्रतिपुति तिकया गया हH तिक क वेल आयाकर तिवेवेरर्ण या प्रस् कर स ऋर्ण कN मु स तिग्F हi ह) 8 । 18. उपुर)- आFर पुर याह न्यायालया पु हH तिक अपु ल या न्यायालया द्वार पुरक्रम्या लिलखा अलिFतियामु, 1881 क ह कN 8 वेल उपुFरर्ण क उतिच तिष्क* ल मुS चJक हkई हH । पुरिरवे क मुमुल प्रमुतिर्ण रह हH । ऐस शां मुS अपु ल या न्यायालया द्वार अतिभया- क) )*मुति- तिकया 8 क तिर्णया ण्डिस्थार रखा 8 या)ग्या हi हH । 19. अp )*मुति- क तिवेरूद्घो प्रस् याह अपु ल स्वे कर कर हkए अपु ल या न्यायालया द्वार पुरिर )*मुति- क तिर्णया अपुस् तिकया 8 हH । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार कN गई )*लिसतिद्ध और ण्र्डशां कN पुतिy कN 8 हH । 20. रलि8स्टn क) तिƒतिशां तिकया 8 हH तिक इस तिर्णया कN प्रतिलिलतिपु मुJल अतिभलखा क सथा याथाशां घ्र तिवेचरर्ण न्यायालया क) सJचथा वे पुलथा प्रति* कN 8ए । सह /- (स 8या क मुर 8यासवेल) न्यायाF शां पु)मु