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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 47394 (ALL)

SHYAM SINGH RANA @ SHYAM SINGH BHANTU v. STATE OF U.P.

BAIL/13409/2025 · 2025-07-28

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:125808 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 13409 of 2025 Applicant :- Shyam Singh Rana @ Shyam Singh Bhantu Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Abhisht Jaiswal,Pranav Tiwary Counsel for Opposite Party :- G.A.,Mohd Raghib Ali Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रिद्वाज्य ककी तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Shyam Singh Rana @ Shyam Singh Bhantu ककी ओरि सवे मसु०अ०सवं० 418/2024, अवंतररत धिद्वारिद्वा 323, 447, 420, 467, 468, 471, 504, 506, 354 ख भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा कल्यद्वारपसुरि, धजलद्वा कद्वानपसुरि नररि मम जमद्वानत परि मसुक करिनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3.(क). प्रश्नरत वववद्वावदत भभूवम धजसकवे सम्बन्धि मम धसववल वद्वाद लणम्बत हहै, धजसमम रिद्वाजककीय उदद्वान बस्तदी, कल्यद्वारपसुरि, कद्वानपसुरि नररि णस्थत आवंवशक भभूवम सवंख्यद्वा 86 कद्वा नद्वामद्वान्तरिर समद्वाज कल्यद्वार दद्वारिद्वा वरर 1965-66 मम पद्वाररित प्रशद्वासवनक आदवेश कवे अनसुसद्वारि वरर 1972-73 मम चन्द्रपद्वाल (सभूचनद्वाकतद्वार कवे वपतद्वा) कवे नद्वाम करि वदयद्वा रयद्वा थद्वा। (ख). सभूचनद्वाकतद्वार कवे वपतद्वा नवे वववद्वावदत भभूवम सवंख्यद्वा 86 कको वरर 1985 मम बलरिद्वाज धसवंह कको दवे वदयद्वा थद्वा औरि बलरिद्वाज धसवंह नवे वरर 2000 तक समद्वाज कल्यद्वार मम भभूवमकरि जमद्वा वकयद्वा थद्वा। सभूचनद्वाकतद्वार कवे वपतद्वा नवे वववद्वावदत भभूवम सवंख्यद्वा 86 ककी पवंजदीकक त वसदीयत वदनद्वावंक 28.08.2003 कको बलरिद्वाज धसवंह कवे पक्ष मम ककी थदी। तत्पश्चद्वातत् सभूचनद्वाकतद्वार कवे वपतद्वा नवे बलरिद्वाज धसवंह कवे पक्ष मम ककी रई पवंजदीकक त वसदीयत कको रिद्द करि वदयद्वा औरि 14.10.2009 कको आववेदक ककी मद्वातद्वा चवंदद्वा दवेवदी कवे पक्ष मम भभूवम सवंख्यद्वा 86 कद्वा पवंजदीकक त वसदीयतनद्वामद्वा औरि नकोटरिदी ववक्रय ववलवेख वनष्पद्वावदत वकयद्वा औरि उसकवे बद्वाद चवंदद्वा दवेवदी नवे उक भभूवम परि एक भवन कद्वा वनमद्वारर वकयद्वा। उक भभूवम परि वनवमरत भवन कवे सवंबवंधि मम सभूचनद्वा समद्वाज कल्यद्वार आयकोर ववभद्वार दद्वारिद्वा जद्वारिदी ककी रई हहै, जको आववेदक कवे कब्जवे मम हहै तथद्वा आववेदक दद्वारिद्वा उक जमदीन कको वकसदी अन्य व्यवक कको हस्तद्वावंतररित नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै एववं धसववल सभूट दद्वाधखल हकोनवे सवे पहलवे हदी उक मकद्वान बन चसुकद्वा थद्वा। (र). आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारिद्वा अवग्रिम तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरिर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झभूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा ऐसद्वा ककोई भदी कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रथम सभूचनद्वा ररिपकोटर अत्यवंत ववलणम्बत हहै तथद्वा उक ववलम्ब कद्वा ककोई समसुवचत स्पषदीकरिर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान वद्वाद पभूरर रूप सवे ददीवद्वानदी प्रकक वत कद्वा हहै, वकन्तसु जद्वान-बभूझकरि इसवे आपरिद्वाधधिक रूप वदयद्वा रयद्वा हहै। अवंतररत धिद्वारिद्वा 354 ख कवे सवंबवंधि मम पदीवड़ितद्वा दद्वारिद्वा वदयवे रयवे बयद्वाननों एववं प्रद्वाथवमककी कवे तथ्यनों मम परिस्परि ववरिकोधिद्वाभद्वास हहै तथद्वा आववेदक दद्वारिद्वा वकसदी प्रकद्वारि ककी छवेड़िछद्वाड़ि नहहीं ककी रयदी हहै एववं वचवकत्सदीय आख्यद्वा सवे भदी अवभयकोजन कथद्वानक कद्वा समथरन नहहीं हकोतद्वा हहै। वतरमद्वान घटनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाक्षदी नहहीं हहै। आववेदक दद्वारिद्वा वकसदी प्रकद्वारि कवे दस्तद्वाववेज ककी कभू टरिचनद्वा नहहीं ककी रयदी हहै , न हदी वकसदी प्रकद्वारि ककी धिकोखद्वाधिड़िदी ककी रयदी हहै। आववेदक दद्वारिद्वा अपनवे पभूवर कवे आपरिद्वाधधिक इवतहद्वास कको प्रद्वाथरनद्वापत कवे शपथपत कवे प्रस्तरि सवं० 37 तथद्वा पभूवर मम दद्वाधखल प्रत्यसुत्तरि शपथपत कवे प्रस्तरि सवं० 3 एववं पभूरिक शपथपत कवे प्रस्तरि सवं० 19 मम स्पष वकयद्वा रयद्वा हहै। पसुननः उनकद्वा यह भदी कथन हहै वक आववेदक ककी तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानभून ककी प्रवक्रयद्वा मम सहयकोर करिनवे कवे धलए तहैयद्वारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतद्वा हकोरदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक्ष खसुद कको उपलब्धि करिद्वाएरद्वा औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तहैयद्वारि हहै जको न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिकोवपत करिवेरदी। आववेदक वनदरर हहै तथद्वा वह इस प्रकरिर मम वद० 16.03.2025 सवे कद्वारिद्वारद्वारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि छकोड़ि वदयद्वा जद्वाय। 4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरिकोधि करितवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक सभूचनद्वाकतद्वार कवे वपतद्वा ककी मकत्यसु कवे पश्चद्वातत् सभूचनद्वाकतद्वार उक वववद्वावदत भभूवम कद्वा स्वद्वामदी ववरिद्वासत मम प्रद्वाप्त हहई, वकन्तसु आववेदक दद्वारिद्वा मनरढवंत एववं फजर्जी दस्तद्वाववेजनों कवे आधिद्वारि परि भभूवम सवंख्यद्वा -86 ककी सम्पभूरर जमदीन, धजसकद्वा क्षवेतफल 1 एकड़ि हहै, परि अवहैधि रूप सवे कब्जद्वा करि धलयद्वा तथद्वा सभूचनद्वाकतद्वार कको कक वर कद्वायर करिनवे सवे भदी ववंवचत करि वदयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा उक वववद्वावदत भभूवम कवे कसु छ वहस्सवे परि मकद्वान बनवद्वा धलयद्वा रयद्वा हहै तथद्वा बचवे हहए कसु छ वहस्सवे कद्वा व्यद्वावसद्वावयक उपयकोर वकयद्वा जद्वा रिहद्वा हहै एववं उक वववद्वावदत जमदीन कद्वा कसु छ वहस्सद्वा वकसदी अन्य व्यवक कको बवेच वदयद्वा रयद्वा हहै। अतएव आववेदक दद्वारिद्वा ससुवनयकोधजत तरिदीकवे सवे कद्वाररित अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभदीरि प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि न छकोड़िद्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्यनों एववं पररिणस्थवतयनों कद्वा समग्रि रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबभूतनों ककी प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रिदी ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रिदी सवे छवेड़िछद्वाड़ि ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत परि मसुक करिनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वारि हहै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर -दकोर परि वबनद्वा ककोई वटप्परदी वकए हहए आववेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष परि व्यवकरत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भदी दको प्रवतभभू प्रस्तसुत करिनवे परि वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छकोड़ि वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परिदीक्षर कवे ददौरिद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यनों कवे सद्वाथ छवेड़िछद्वाड़ि नहहीं करिवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षयनों व पदीवड़ितद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरिद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशनों कद्वा पद्वालन करिवेरद्वा , वह परिदीक्षर कवे ददौरिद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परिदीक्षर मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोर करिवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहदी करिवेरद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यनों सवे पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररियनों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिवेरद्वा , धजसकवे कद्वारिर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यनों कको उजद्वाररि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरिकोक शतरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 29.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad