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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 40432 (CHH)

AMARDEEP BHAINA v. STATE OF CHHATTISGARH

CRA/1723/2025 · 2025-09-16

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 (Cr. A. No.-1723 of 2025) 2025:CGHC:47835 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक अपु ल क्रमां"क -1723 /2025 1. अमांरदा पु भै,ना तिपु-गनापु भै,ना, उम्र-लगभैग 20 वेर्ष0, तिनावेस -रिरसदा, पुलिलस थाना-रद्वार, लि5ल-5"5ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ 2. प्रशां" रठौ9र तिनावेस -रिरसदा, पुलिलस थाना-रद्वार, लि5ल-5"5ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा:गण/अतिभैयाक्तगण तिवेरूद्घ • छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार थाना प्रभैर , पुलिलस थाना-सक्त@, लि5ल-5"5ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा /रज्या अपु लथा:गण/अतिभैयाक्तगण द्वार : श्री ऐश्वेया0 क मांर दा, अलिEवेक्त । रज्या/उत्तीरवेदा द्वार : श्री सण्डिच्चदाना"दा यादावे, पु,नाल अलिEवेक्त । आपुलित्तीक0/प्रलिथा0या द्वार : कHई नाहींK । मांनाना या न्यायामांLति0 श्री स"5या क मांर 5यासवेल , न्यायाE शां !! आदाशां पु ठौ पुर पुरिर !! 17/09/2025 1. Eर 14(2)(क) अनासLतिच 5ति एवे" अनासLतिच 5ना5ति (अत्याचर तिनावेरण) अलिEतिनायामां, 1989 (लि5स आग स"क्षेपु मांV "तिवेशांर्ष अलिEतिनायामां" कहीं गया हीं,) सहींपुतिठौ Eर POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.09.18 10:42:18 +0530 2 / 6 (Cr. A. No.-1723 of 2025) 438/439 दा प्रतिक्रया स"तिहीं, 1973 क अ"ग0 प्रस् इस प्रथामां 5मांना आवेदाना मांV, पुलिलस थाना–सक्त@, लि5ल–सक्त@ (छत्ती सगढ़) क अपुरE क्रमां"क 214/2025, लि5समांV भैर या नागरिरक सरक्षे स"तिहीं क@ Eर 296, 351(3), 115(2), 333, 74, 303(2), 61(1)( ), 191(2) a था तिवेशांर्ष अलिEतिनायामां क@ Eर 3(1)()(1), 3(दा) (E), 3(2)( ) v क अ"ग0 अपुरE पु"5 द्ध हीं,, उसमांV अतिभैयाक्तगण अमांरदा पु भै,ना एवे" प्रशां" रठौ9र क@ ओर स तिनायातिमां 5मांना क@ मां"ग क@ गई हीं, । 2. अतिभैयाक्तगण द्वार तिनायातिमां 5मांना हीं प्रस् आवेदाना पुर तिवेचरHपुर", तिवेचरण न्यायालया–सत्र न्यायाE शां वेस् तिवेशांर्ष न्यायाE शां (तिवेशांर्ष अलिEतिनायामां), 5"5ग र–चम्पु, छत्ती सगढ़ ना तिदाना"क 07/08/2025 कH उक्त 5मांना आवेदाना तिनारस् कर तिदाया । उक्त आदाशां स क्षेब्E हींHकर अतिभैयाक्तगण ना वे0मांना अपु ल प्रस् क@ हीं, । 3. अतिभैलख स याहीं थ्या स्पुष्ट हींH हीं, तिक र5 सरन्द्र हींदार लिस"हीं क तिनाEना मांहीं अप्र,ल, 2025 मांV हींH चक हीं,, लि5नाक@ पुत्ना ग दावे हींd । प्रलिथा0या क पुति Eमांe"द्र लिस"हीं (5H वे0मांना मांV 5नापुदा पु"चया सदास्या हींd) कH स्वेग:या र5 सरन्द्र हींदार लिस"हीं द्वार गHदा लिलया गया था । उक्त ण्डिस्थाति अनासर प्रलिथा0या कH र5 सरन्द्र हींदार लिस"हीं क@ पुत्रवेE कहीं गया हीं, । 4. अपु लथा:गण/अतिभैयाक्तगण कH ग दावे क समांथा0क या गया हीं, । उभैयापुक्षे कH सनाना था अतिभैलख क अवेलHकना तिकए 5ना क उपुर" याहीं थ्या भै पुरिरलतिक्षे हींH हीं, तिक 'पु ल मांहींल' स स""लिE तिवेवेदा उभैयापुक्षे क मांध्या तिवेग लम् समांया स तिवेद्यमांना हीं,, लि5सक करण उनाक मांध्या अनाक दा वेना एवे" आपुरलिEक प्रकरण न्यायालयाh मांV तिवेचरE ना हींd । 3 / 6 (Cr. A. No.-1723 of 2025) 5. अतिभैयाH5ना क मांमांल इस आशांया क हीं, तिक तिदाना"क-25/06/2025 कH, 5 प्रलिथा0या ‘पु ल मांहींल’ पुरिरसर मांV दाHपुहींर क समांया रतिरमां लिसदार, नालिसर हींkस,ना एवे" ब्र5र5 नामां सतिहीं अन्या व्यातिक्तयाh स मांलक कर रहीं था , उस समांया लगभैग 03:00 5 र5 क मांर अग्रवेल, र5शां शांमां0, अमां"क 5Hशां था उनाक सथा 15 स 20 अन्या व्यातिक्त चरपुतिहींया वेहींना स वेहीं" पुहींk"च था दारवेज़े क ल Hड़कर अ"दार घुस आए । उक्त व्यातिक्तयाh द्वार प्रलिथा0या एवे" उपुण्डिस्था अन्या व्यातिक्तयाh कH मांr-हींना क@ अश्ल ल गलिलयाr दा गई", प्रलिथा0या कH 5तिसLचक एवे" अशांHभैना या शांब्दाh क प्रयाHग कर हींkए Eमांकया गया तिक 'सल गh ना आतिदावेस , L इस घुर स हींर तिनाकल 5, नाहींK H 5ना स मांर दाVग और र सथा क्या- क्या करVग, L सHच भै नाहींK सक ।' प्रलिथा0या द्वार तिवेरHE तिकए 5ना पुर अमां"क 5Hशां ना प्रलिथा0या क शांर र क अ"गh कH स्पुशां0 कर लdतिगक हींमांल तिकया । उन्हींhना " स मांरपु ट क@, लि5सक फलस्वेरूपु रतिरमां लिसदार, नालिसर हींkस,ना एवे" ब्र5र5 नामां कH शांर रिरक चHटV आई" । इस सम्पुLण0 घुटना कH तिवेनाया यादावे ना भै दाख । इसक अतिरिरक्त, प्रलिथा0या क दाH मांHइल फHना, सHना क@ लिलया" था उसक पुति क 5मांना हीं सरतिक्षे रख गए ₹3,00,000/- क@ रतिशां चHर कर ल गई । मांहींल क दारवेज़े, लिखड़तिकयाr, अलमांरिरयाr, क लिस0याr आतिदा मांV Hड़फHड़ क@ गई था मांHटरसइतिकल कH भै क्षेतिग्रस् तिकया गया । प्रलिथा0या, 5H तिक गh 5ति क@ सदास्या हीं, एवे" अनासLतिच 5ना5ति वेग0 मांV आ हीं,, कH 5तिग अपुमांना5नाक गलिलयाr दा गई" था उक्त घुटनाक्रमां क दा9रना उसक सथा लdतिगक हींमांल एवे" मांरपु ट भै क@ गई । प्रलिथा0या क@ रिरपुHट0 पुर थाना-सक्त@, लि5ल-सक्त@, छत्ती सगढ़ द्वार तिदाना"क 26/06/2025 कH अपुरE क्रमां"क-214/2025 पु"5 द्घ कर, भैर या न्याया स"तिहीं, 2023 क@ Eर 296, 351(3), 115(2), 333, 74, 303(2), 61(1)( ), 191(2) a क अ"ग0 अपुरE कयामां तिकया गया । अनास"Eना क 4 / 6 (Cr. A. No.-1723 of 2025) दा9रना Eर-3(1)()(1), 3(दा)(E), 3(2)( ) " v तिवेशांर्ष अलिEतिनायामां" क अपुरE 5Hड़ गया हीं, । 6. अपु लथा:गण/आवेदाकगण क तिनायातिमां 5मांना आवेदाना पुर उसक तिवेद्वाना अलिEवेक्त द्वार क0 तिकया गया हीं, तिक उन्हींV लिसफ0 ग दावे क समांथा0क हींHना क करण झूLठौ फ" स गया हीं, । उक्त घुटना क स""E मांV ग दावे क@ ओर स भै एक तिशांकया थाना मांV प्रस् क@ गई था , तिक" उस पुर पुलिलस द्वार कHई अपुरE पु"5 द्घ नाहींK तिकया गया । उनाक नामां प्रथामां सLचना पुत्र मांV भै उल्लेलिख नाहींK हीं, । इस प्रकर, अपु लथा:/आवेदाक पुक्षे क आहीं व्यातिक्तयाh द्वार प्रस् तिशांकया पुर भै पुलिलस द्वार कHई स"ज्ञाना नाहींK लिलया गया । याहीं भै क0 तिदाया गया तिक प्रलिथा0या क पुति Eमांe"द्र लिस"हीं, 5H तिक 5नापुदा पु"चया क सदास्या हींHकर एक प्रभैवेशांल व्यातिक्त हीं,, उस क प्रभैवे मांV आकर उनाक तिवेरूद्घ झूLठौ मांमांल पु"5 द्घ तिकया गया हीं, । उनाक तिवेरूद्घ तिवेशांर्ष अलिEतिनायामां क अपुरE प्रथामांदृष्टया दातिशां0 नाहींK हींH हीं, । इस घुटना स स""लिE अन्या सहीं–अतिभैयाक्तगण कH इस न्यायालया द्वार पुLवे0 मांV तिनायातिमां 5मांना प्रदाना तिकया गया हीं,, अपु लथा:गण क मांमांल उनास तिभैन्न नाहींK हीं, । वे तिदाना"क- 26/06/2025 स न्यातियाक अतिभैरक्षे मांV हींd, मांमांल क@ 5"च और तिवेचरण मांV समांया लगना स"भैतिवे हीं, । ऐस दाशां मांV, अपु ल स्वे कर कर उन्हींV तिनायातिमां 5मांना प्रदाना तिकया 5ए । 7. उत्तीरवेदा /रज्या क तिवेद्वाना अलिEवेक्त ना तिवेरHE कर हींkए क0 तिदाया हीं, तिक प्रथामां सLचना पुत्र क पुरिरशां लना स हीं स्पुष्ट हींH हीं, तिक प्रलिथा0या क सथा ना क वेल 5तिसLचक अपुमांना5नाक शांब्दाh क प्रयाHग कर गल -गल95 क@ गई हीं,, अतिपु उसक सथा लdतिगक हींमांल एवे" मांरपु ट भै क@ गई था 5ना स मांरना क@ Eमांक@ दा हींkए उसक तिनावेस ‘पु ल मांहींल’ मांV Hड़फHड़ क@ गई हीं, । अपु लथा:/आवेदाक-प्रशां" रठौ9र क पुLवे0 आपुरलिEक आचरण रहीं हीं, । 5 / 6 (Cr. A. No.-1723 of 2025) तिवेशांर्ष अलिEतिनायामां क@ Eर-18 आकतिर्ष0 हींHना स अपु लथा:गण/आवेदाकगण क तिनायातिमां 5मांना आवेदाना स्वे कर तिकए 5ना याHग्या नाहींK हीं, । अ~ 5मांना स""E अपु ल खरिर5 तिकया 5ए । 8. प्रलिथा0या/आपुलित्तीक0 कH तिवेलिEवे• सLचना प्रतिर्ष क@ गई था लि5समांV तिपुछल तिलिथा 11/09/2025 कH उसक अलिEवेक्त उपुण्डिस्था हींkए था, थातिपु आ5 तिदाना"क कH उसक@ ओर स कHई उपुण्डिस्था नाहींK । 9. उपुण्डिस्था पुक्षे क क0 श्रीवेण तिकया था अतिभैलख एवे" क स यार क पुरिरशां लना तिकया गया । 10. स"पुLण0 क पुरिरशां लना स याहीं स्पुष्ट हीं, तिक ग दावे क अपुना पुति स्वेग:या र5 सरन्द्र हींदार लिस"हीं स भै सम्पुलित्ती तिवेवेदा क@ ण्डिस्थाति रहीं हीं, । इस प्रकर, ग दावे क प्रलिथा0या और उसक पुति Eमांe"द्र लिस"हीं स भै सम्पुलित्ती कH लकर तिवेवेदा क@ ण्डिस्थाति हीं, । अपु लथा:गण कH ग दावे क समांथा0क या गया हीं, । उभैयापुक्षे क मांध्या सम्पुलित्ती स""E अनाक दा वेना और आपुरलिEक मांमांल ल"ति हींd था पुरस्पुर एक दाLसर क लिखलफ तिशांकयाV प्रस् क@ 5 रहीं हींd । 11. अपु लथा:/आवेदाक अमांरदा पु भै,ना एवे" प्रशां" रठौ9र तिगरफ्र तिदाना"क-26/06/2025 स न्यातियाक अतिभैरक्षे मांV हींd । उनाक नामां प्रथामां सLचना पुत्र मांV उल्लेलिख नाहींK हीं, । उनाक मांमांल 5मांना पुर रिरहीं तिकए गए सहींअतिभैयाक्त टकच"दा 5यासवेल एवे" स"दारलल लल 5यासवेल स तिभैन्न नाहींK हीं, । मांमांल क@ 5"च और तिवेचरण मांV समांया लगना स"भैतिवे हीं, । इना थ्याh कH दृतिष्टग रख हींkए उन्हींV तिनायातिमां 5मांना पुर रिरहीं तिकया 5ना उतिच पुया 5 हीं, । 6 / 6 (Cr. A. No.-1723 of 2025) 12. अ~ अपु लथा:/आवेदाक अमांरदा पु भै,ना एवे" प्रशां" रठौ9र द्वार प्रस् तिनायातिमां 5मांना आवेदाना स""E अपु ल स्वे कर क@ 5 हींd । उनाक तिवेचरण न्यायालया द्वार पुरिर आदाशां अपुस् तिकया 5 हीं, । 13. अपु लथा:/आवेदाक अमांरदा पु भै,ना एवे" प्रशां" रठौ9र दाण्डिक प्रकरण क तिनारकरण क स""लिE न्यायालया मांV अपुना तिनायातिमां उपुण्डिस्थाति सतिनाण्डिश्च करना हीं प्रत्याक ₹25,000/- (पुच्च स हीं5र रुपुया) क मांचलक एवे" उना हीं रतिशां क सक्षेमां 5मांनादार प्रस् कर H उन्हींV 5मांना पुर रिरहीं तिकया 5ए । याहीं स्पुष्ट तिकया 5 हीं, तिक 5मांना क@ शां‚" क तिकस भै प्रकर क उल्ले"घुना 5मांना आदाशां क@ स्वेमांवे तिनारस् क@ दाशां तिनातिमां0 करग । 14. रलि5स्टƒ कH तिनादाeतिशां तिकया 5 हीं, तिक इस आदाशां क@ प्रतिलिलतिपु याथाशां घ्र तिवेचरण न्यायालया कH सLचनाथा0 वे अनापुलनाथा0 प्रतिर्ष क@ 5ए । सहीं /- (स"5या क मांर 5यासवेल) न्यायाE शां पो मन