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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 39345 (ALL)

PRAHLAD v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

ABAIL/8510/2023 · 2025-09-21

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 8510 of 2023 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से पिरवाद सं० 0109/2021, अन्तगर्त धारा 420, 467, 468 भा.दं.सं., थाना नदीगाँव, िजला जालौन में अिग्रम जमानत की मॉग करते हुए इस प्राथर्ना के साथ योिजत िकया गया है िक िगरफ्तारी की िस्थित में आवेदक को जमानत पर िरहा िकया जा सके । 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा आज वतर्मान वाद से संबंिधत िवचारण न्यायालय के आदेश फलक की प्रमािणत प्रितिलिप दािखल की गयी, िजसे पत्रावली पर रखा जाय। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है और आवेदक के िवरूद्ध अभी कोई भी बाध्यकारी प्रिक्रया नहीं अपनाई गयी है। वतर्मान वाद दीवानी प्रकृ ित का है, िकन्तु जानबूझकर इसे आपरािधक रूप िदया गया है। प्रश्नगत िवक्रय-िवलेख के संबंध में एक दीवानी वाद संबंिधत न्यायालय में लंिबत है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। आवेदक को पूवर् में अंतिरम अिग्रम जमानत िदनांक 31.07.2023 को प्रदान की गयी थी। आवेदक द्वारा िवचारण न्यायालय द्वारा िनयत प्रत्येक ितिथ पर आवेदक उपिस्थत होता रहा है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक िवचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देता है िक वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेिक्षत समय पर आगे भी उपिस्थत रहेगा एवं आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अिभयुक्त के अिग्रम जमानत के िवरोध में यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक इस मामले में अिभयुक्त की भूिमका पिरलिक्षत हो रही है तथा इस घटना Versus Counsel for Applicant(s) : Ajay Sengar Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Vijay Singh Sengar Prahlad .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) में इनकी भूिमका संभाव्य है। इसिलए अिभयुक्त को अिग्रम जमानत पर मुक्त न िकया जाय। 6. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधािरत िकया गया है िक अिग्रम जमानत यािचका पर न्याय-िनणर्यन करते समय न्यायालय को आरोपों की प्रकृ ित और गंभीरता, आरोपी की न्याियक प्रिक्रया से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए और यह िक न्यायालय को आरोपी के िवरूद्ध उपलब्ध सभी सामग्री का सावधानी से मूल्यांकन करना चािहए और आरोपी की वास्तिवक भूिमका पर भी िवचार करना चािहए। 7. उभय पक्ष के तकोर् एवं वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं िवचारण न्यायालय द्वारा िनयत ितिथयों पर आवेदक के िनयिमत रूप से उपिस्थत होने, पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण- दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए अिग्रम जमानत की प्राथर्ना स्वीकार िकए जाने योग्य है। 8. तद्नुसार, यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकया जाता है। 9. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में सिम्मिलत आवेदक की िगरफ्तारी की दशा में, उसे संबंिधत िवचारण न्यायालय की संतुिष्ट पर रू० 50,000/- का व्यिक्तगत बंध पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर, सत्र परीक्षण के िनस्तारण होने तक िनम्न शतोर् के अधीन अिग्रम जमानत पर मुक्त िकया जाएगा :- i) आवेदक अिभयोजन पक्ष के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii) आवेदक अिभयोजन पक्ष के गवाहों को धमकाएगा या परेशान नहीं करेगा। iii) आवेदक िवचारण न्यायालय द्वारा िनधार्िरत प्रत्येक ितिथ एवं समय पर उपिस्थत होगा तथा अनावश्यक स्थगन नहीं लेगा। iv) आवेदक उस अपराध के समान कोई अपराध नहीं करेगा, िजसका आरोप आवेदक पर लगाया गया है या िजसके िकए जाने का संदेह है। v) आवेदक मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी व्यिक्त को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं करेगा िजससे वह व्यिक्त न्यायालय या िकसी पुिलस अिधकारी के समक्ष तथ्यों का खुलासा करने से िवमुख हो जाए या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करे। 10. उपरोक्त उल्लेिखत शतोर्ं में से िकसी भी शतर् के उल्लघंन की िस्थित में संबिधत िवचारण न्यायालय आवेदक को प्रदत्त जमानत िनरस्त करने हेतु स्वतंत्र है। 11. तद्नुसार, वतर्मान अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र अंितम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है। September 22, 2025 Pawan Kumar ABAIL No. 8510 of 2023 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad