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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 39279 (CHH)
XYZ v. GOVIND KUMAR SAHU
ACQA/329/2023 · 2025-09-08
Shri Sanjay Agrawal, Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 39279 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 7 {Acq. A. No.-329 of 2023}
2025:CGHC:45804-DB अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दोषमुति
अपु ल क्रमु!क
-329
/2023
X Y Z -----अपु लर्थी*/अति+याक्त्री तिवेरूद्घ
1. गतिवे!दो क मुर सहू1 तिपु-रमुनरश सहू1, उम्र-लग+ग 28 वेष6, तिनवेस -ग्रामु करजा, पुस्ट-जागमुल, पुलिलस र्थीन-लखनपुर, लिजाल-सरगजा, छत्ती सगढ़ । (अति+या)
2. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार र्थीन प्र+र , मुतिहूल र्थीन-अ!तिकपुर, लिजाल-सरगजा, छत्ती सगढ़ । -----उत्तीरवेदो गण अपु लर्थी*/अति+याक्त्री द्वार : श्री तिष्ण मुतिन, अलिFवे । अति+या/उत्तीरवेदो क्रमु!क-1 द्वार : सHचन नहूI । रज्या/उत्तीरवेदो क्रमु!क-2 द्वार : श्री सच्चिच्चदोन!दो यादोवे, पुKनल अलिFवे । मुनन या न्यायामुHति6 श्री स!जाया अग्रावेल
, न्यायाF श
मुनन या न्यायामुHति6 श्री स!जाया क मुर जायासवेल
, न्यायाF श
!! तिनण6या पु ठ पुर पुरिर !! द्वार
स!जाया क मुर जायासवेल
, न्यायाF श
POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN
2 / 7 {Acq. A. No.-329 of 2023} 09/09/2025
1. दोण्ड प्रतिक्रया स!तिहू, 1973 कS Fर-378 (4) क हू दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् इस अपु ल मुV तिवेचरण न्यायालया-अपुर सत्री न्यायाF श (फास्ट टXक कट6), अ!तिकपुर, लिजाल-सरगजा, छत्ती सगढ़ द्वार सत्री प्रकरण क्रमु!क-66/2021 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ गतिवे!दो क मुर सहू1” मुV पुरिर तिनण6या तिदोन!क-18/08/2023 कS वेKF क चन\ दो गई हूK । लिजासक हू अति+याजान क मुमुल प्रमुतिण न पु हू^ए अति+या गतिवे!दो क मुर सहू1 क Fर-376 (2)(ढ), 376 (4), 417, 313, 376 (ड), 323, 506 (+ग-दो), +र या दोण्ड स!तिहू, 1860 क अपुरF स स!दोहू क ल+ दो हू^ए दोषमु तिकया गया हूK । लिजास आग “प्रश्नF न तिनण6या” स स!लिF तिकया जा रहू हूK ।
2.
अति+याजान मुमुल इस प्रकर हूK तिक अति+याक्त्री (अ०स०-3) तिवेवेतिहू मुतिहूल रहू हूK । कलिर्थी घटन तिदोन!क 05/08/2019 स 03/12/2020 क लग+ग डढ़ वेष6 कS अवेलिF मुV घतिट ई गई हूK । अति+याक्त्री द्वार मुतिहूल र्थीन अ!तिकपुर, लिजाल सरगजा मुV तिदोन!क 21/12/2020 क प्रर्थीमु सHचन रिरपुट6 दोजा6 करई गई । रिरपुट6 क अनसर अति+या गतिवे!दो क मुर सहू1, ग्रामु तिवेशनपुर, र्थीन ग!F नगर क्षेत्री क तिनवेस हूK, जा प्रर!+ मुV मुन्ना लकड़ा क मुकन मुV र्थी त्पुश्च अ!लिiयास तिकj क मुकन मुV तिकरए स तिनवेसर र्थी । अति+या न अति+याक्त्री क तिवेवेहू क प्रल+न दोकर अपुन सर्थी उ तिकरए क मुकन मुV रख र्थी उसक सर्थी लगर शर रिरक स!!F स्र्थीतिपु कर रहू, फालस्वेरूपु अति+याक्त्री छहू मुहू कS ग+6वे हू गई । त्पुश्च अति+या न तिवेवेहू स इ!कर कर तिदोया र्थी अति+याक्त्री क सर्थी मुरपु ट + करन लग । ग+6वेस्र्थी कS जानकर पुर अति+या न अति+याक्त्री कS सहूमुति एवे! इच्छ क तिवेरुद्ध दोवे लिखलकर
3 / 7 {Acq. A. No.-329 of 2023} उसक ग+6पु कर तिदोया । अति+याक्त्री कS लिललिख रिरपुट6 क आFर पुर अपुरF पु!जा द्ध तिकया गया र्थी स!पुHण6 तिवेवेचन उपुर! अति+याग पुत्री प्रस् तिकया गया ।
3. अति+याजान कS ओर स अपुन पुक्षे समुर्थी6न मुV 11 सतिक्षेयाn क पुर क्षेण र्थी 18 दोस्वेजा प्रदोश6 तिचन्हू!तिक करए गए । Fर-313 दोण्ड प्रतिक्रया स!तिहू क हू यान मुV अति+या न अपुन तिवेपुर सतिक्षेयाn क कर्थीनn क इनकर कर हू^ए स्वेया! क तिनदोoष हून या हूK लिजासकS ओर स चवे मुV तिकस सक्षे क पुर क्षेण नहूI करया गया । उ+यापुक्षे क सन जाकर तिवेचरण न्यायालया द्वार प्रश्नF न दोषमुति क तिनण6या पुरिर तिकया गया हूK लिजास इस अपु ल मुV चन\ दो गई हूK ।
4. याहू उल्लेखन या थ्या हूK तिक तिवेचरण न्यायालया द्वार अति+या पुर Fर 376(2)(ढ), 376(4), 417, 313, 376(ड), 323 र्थी 506(+ग-दो), +र या दोण्ड स!तिहू, 1860 क अ!ग6 आरपु कS रचन कS गई र्थी । उल्लेखन या हूK तिक Fर 376(4) क अ!ग6 अपुरF क कई प्रवेFन +र या दोण्ड स!तिहू मुV तिवेद्यमुन नहूI हूK । इस प्रकर आरपु कS रचन मुV त्रीतिट पुरिरलतिक्षे हू हूK, जा तिक दोषमुति आदोश कS कच्चिण्डक-42 मुV + उतिल्लेलिख हूK । र्थीतिपु, उ त्रीतिट स अति+या क तिवेरुद्ध अति+याजान क मुमुल पुर कई तिवेशष अर्थीवे प्रतिकH ल प्र+वे पुरिरलतिक्षे नहूI हू ।
5.
अपु लर्थी*/अति+याक्त्री पुक्षे क तिवेद्वान अलिFवे क याहू क6 हूK तिक अति+याक्त्री न अपुन न्यायालया न यान मुV अति+याजान क मुमुल कS पुHण6r पुतिs कS हूK । अति+या द्वार तिवेवेहू क आश्वेसन दोकर शर रिरक स!!F स्र्थीतिपु तिकए जान र्थी ग+6वे हून पुर जारन दोवे लिखलकर ग+6पु करए जान कS अति+याक्त्री न स्पुs रूपु स कहू हूK । उसक कर्थीन प्रस् अन्या सक्ष्या द्वार + पुs हू हूK । तिफार + तिवेचरण न्यायालया न सक्ष्या क
4 / 7 {Acq. A. No.-329 of 2023} समुतिच पुर क्षेण नहूI तिकया हूK और या!त्रीवेत्री रूपु स तिनण6या पुरिर कर हू^ए अति+या क दोषमु कर तिदोया हूK । प्रश्नF न दोषमुति क आदोश च्चिस्र्थीर रख जान याग्या नहूI हूK । अr अपु ल स्वे कर कर प्रश्नF न दोषमुति क तिनण6या अपुस् तिकया जाए और अति+या क दोषलिसतिद्ध कर दोच्चिण्ड तिकया जाए ।
6. अपु लर्थी* पुक्षे क तिवेद्वान अलिFवे क प्रर!ति+क क6 श्रीवेण तिकया गया और अति+लख क सHक्ष्मुपुHवे6क पुरिरश लन तिकया गया ।
7. Recently, applying the law governing the scope of interference in an appeal against acquittal, the Hon’ble Supreme Court in the case of
“State of Rajasthan vs. Kistoora Ram” reported in 2022 SCC OnLine SC 984, has held as follows:-
“8. The scope of interference in an appeal against acquittal is very limited. Unless it is found that the view taken by the Court is impossible or perverse, it is not permissible to interfere with the finding of acquittal. Equally if two views are possible, it is not permissible to set aside an order of acquittal, merely because the Appellate Court finds the way of conviction to be more probable. The interference would be warranted only if the view taken is not possible at all.”
8. स!पुHण6 अति+लख एवे! प्रस् सक्ष्या क पुरिरश लन स याहू च्चिस्र्थीति स्पुs हू हूK तिक अति+याक्त्री
(अ०स०-3) एक वेयास्क एवे! तिवेवेतिहू मुतिहूल रहू हूK । उसक अपुन पुति स तिकस
तिवेलिFक प्रतिक्रया द्वार तिवेवेहू-तिवेच्छदो हू^आ हू, ऐस कई थ्या अति+लख स पुरिरलतिक्षे नहूI हू । याहू + स्पुs हूK तिक अति+याक्त्री , सहूमुति स अति+या क सर्थी लग+ग डढ़ वेष6 क तिकरए क मुकन मुV तिनवेस कर रहू । याद्यतिपु उसन याहू कर्थीन तिकया हूK तिक अति+या न उस तिवेवेहू क आश्वेसन तिदोया र्थी, र्थीतिपु सक्ष्या स याहू थ्या पुरिरलतिक्षे हू हूK तिक वेहू
5 / 7 {Acq.
A. No.-329 of 2023} अपुन पुति क छड़ाकर स्वेच्छ स अति+या क सर्थी तिनवेसर र्थी । पुति स तिवेलिFक रूपु स तिवेवेहू तिवेच्छदो तिकए तिन तिकस अन्या व्याति क आश्वेसन पुर जाकर उसक सर्थी दो घ6 अवेलिF क तिनवेस करन एवे! शर रिरक स!!F स्र्थीतिपु करन ऐस थ्या हूK, लिजासस याहू नहूI कहू जा सक तिक अति+याक्त्री क सर्थी छल तिकया गया अर्थीवे वेहू असहूमु पुक्षेकर रहू ।
9. अति+याक्त्री क कर्थीनn स याहू + स्पुs हू हूK तिक उसन स्वेया! अपुन पुति क तिवेरुद्ध तिवेवेहू स!!F करणn स र्थीन मुV रिरपुट6 दोजा6 करई र्थी । उसक कर्थीनn मुV अनक तिवेस!गतियाy हूz । अति+याक्त्री कS ओर स प्रदोश6-2(अ) शपुर्थीपुत्री र्थी प्रदोश6-2() अन!F पुत्री तिदोन!क 13/08/2020 क प्रस् तिकए गए हूz, लिजानमुV अति+या द्वार याहू आश्वेस् तिकया गया हूK तिक वेहू अति+याक्त्री क सर्थी तिनवेस कर हूK और उसक पुति क रूपु मुV दोतियात्वेn क तिनवे6हून करग । याहू दोस्वेजा पुलिलस रिरपुट6 तिदोन!क 21/12/2020 स क छ मुहू पुHवे6 क हूK । र्थीतिपु, अति+या द्वार उ शपुर्थीपुत्री या अन!F तिनष्पुतिदो तिकए जान स!!F स्पुs एवे! ठस सक्ष्या क अ+वे हूK । सर्थी हू , इस प्रकर क दोस्वेजाn क उपुयाग अति+या क लिसतिवेल दोतियात्वे क तिनF6रण हू तिकया जा सक हूK, तिक! उसस आपुरलिFक दोतियात्वे क तिनF6रण नहूI हू ।
10. अति+लख मुV उपुलब्F स!पुHण6 सक्ष्या स याहू थ्या प्रमुतिण हू हूK तिक अति+याक्त्री , वेयास्क एवे! तिवेवेतिहू मुतिहूल हून स, अति+या क सर्थी सहूमुति स तिनवेसर रहू हूK । ऐस दोश मुV, लत्स!ग क अपुरF करिर हून तिवेचरण न्यायालया द्वार प्रमुतिण नहूI पुया गया हूK ।
11. इस प्रकर, तिचतिकत्सक सषमु रतिवे (अ०स०-9) र्थी तिचतिकत्सक स!वेदोन लिस!हू (अ०स०-2) क कर्थीनn क आFर पुर याहू + पुरिरलतिक्षे हू हूK तिक जा अति+याक्त्री
6 / 7 {Acq. A. No.-329 of 2023} अस्पुल गई र्थी उसन खर, कमुज़ोर , शर र मुV दोदो6 एवे!
उल्ट कS तिशकया कS र्थी । इसक अतिरिर उसन कई अन्या तिशकया नहूI कS र्थी । जाहूy क ग+6पु क प्रश्न हूK, अति+याक्त्री न ऐस कई तिशकया नहूI कS तिक अति+या न उस छलपुHवे6क दोवे लिखलकर ग+6पु करया हू, च्चिल्क तिचतिकत्सक सषमु रतिवे (अ०स०-9) क समुक्षे उसक कर्थीन याहू रहू तिक एक तिदोन पुHवे6 उसक पुyच मुहू क ग+6पु स्वे+तिवेक रूपु स हू गया, लिजास पुर उपुचर पुच* प्रदोश6-पु /1 Kयार कS गई र्थी । इस प्रकर, प्रस् सक्ष्या क आFर पुर तिवेचरण न्यायालया द्वार याहू थ्या + प्रमुतिण नहूI पुया गया तिक अति+या न अति+याक्त्री
(अ०स०-3) क सर्थी मुरपु ट कS अर्थीवे उसकS सहूमुति क तिन दोवे दोकर उसक ग+6पु करया ।
12. तिवेचरण न्यायालया द्वार प्रस् सक्ष्या क पुर क्षेण स याहू पुया गया तिक लिजास प्रकर अति+याक्त्री न अपुन कर्थीन मुV छट लिसलVडर स लिसर पुर प्रहूर तिकए जान कS कहू हूK, वेKस न कई चट उसक लिसर पुर पुई गई और न हू अति+याक्त्री क पुलिलस कर्थीन अर्थीवे उसक द्वार दोजा6 करई गई प्रर्थीमु सHचन रिरपुट6 मुV छट लिसलVडर स प्रहूर तिकए जान क कई उल्लेख तिकया गया हूK । उ पुरिरच्चिस्र्थीति क आFर पुर अति+याक्त्री क तिवेश्वेसन या सक्षे
नहूI पुया गया र्थी अति+याजान क मुमुल स!दोहू स पुर प्रमुतिण न हून क करण अति+या क दोषमु तिकया गया ।
13. इस प्रकर, प्रस् न्यायादृs! क प्रकश मुV सक्ष्या तिवेवेचन क फालस्वेरूपु याहू न्यायालया पु हूK तिक अति+लख मुV उपुलब्F थ्या और सक्ष्या क दृतिsग रख हू^ए तिवेचरण न्यायालया द्वार जा दोषमुति क तिनण6या पुरिर तिकया हूK उसमुV कई अवेKF या अशद्घ नहूI हूK । इसलिलए उसमुV तिकस हूस्क्षेपु कS आवेश्याक नहूI पुया जा ।
7 / 7 {Acq. A. No.-329 of 2023}
14. अr दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याहू अपु ल स्वे कर याग्या न हून स प्रर!ति+क स्र पुर हू
खरिरजा कS जा हूK ।
15.
तिनण6या कS प्रतिलिलतिपु क सर्थी तिवेचरण न्यायालया क अति+लख श घ्रपुHवे6क वेपुस प्रतिष हू । सहू /- (स!जाया अग्रावेल) न्यायाF श सहू /- (स!जाया क मुर जायासवेल) न्यायाF श पुमुन