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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 38778 (ALL)
KARAN v. State of UP Others
ABAIL/3319/2024 · 2025-07-07
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 38778 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:107558 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 3319 of 2024 Applicant :- Karan Opposite Party :- State Of Up Others Counsel for Applicant :- Rohit Shukla Counsel for Opposite Party :- G.A.,Shailendra Singh Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय कवे आदवेश फलक कको पपूरक शपथपत्र कवे सद्वाथ प्रस्ततुत वकयद्वा गयद्वा , धजसवे पत्रद्वावलली पर रखद्वा जद्वाए।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र , आववेदक करन ककी ओर सवे मतु०अ०ससं० 528/2022, अन्तगरत धिद्वारद्वा 363, 366, 376 ण्डिली, 506 भद्वा.दसं.ससं. एवसं धिद्वारद्वा 5/6 पपॉक्सको एक्ट, थद्वानद्वा बलदवेव, धजलद्वा मथतुरद्वा मम अवग्रिम जमद्वानत ककी मपॉग करतवे हहए इस प्रद्वाथरनद्वा कवे सद्वाथ यकोधजत वकयद्वा गयद्वा हहै वक वगरफ्तद्वारली ककी णस्थवत मम आववेदक कको जमद्वानत पर ररहद्वा वकयद्वा जद्वा सकवे ।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सतुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
4.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्ततुत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हहै , उसवे उपरकोक धिद्वारद्वाओसं मम दवेषवश तसंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप वकयद्वा गयद्वा हहै, उसवे आशसंकद्वा हहै वक उसवे उपरकोक ववणरत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हहै जबवक उसकवे ववरूद्ध ककोई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं हहै और आववेदक कवे ववरूद्ध अभली ककोई भली बद्वाध्यकद्वारली प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गयली हहै। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारद्वा यह भली कथन वकयद्वा गयद्वा वक आववेदक ककी
आयतु 11 वषर 9 मद्वाह 9 वदन हहै। ददौरद्वान ववववेचनद्वा, आववेदक कद्वा नद्वाम प्रश्नगत मद्वामलवे सवे वनकद्वाल वदयद्वा गयद्वा थद्वा, बद्वाद मम धिद्वारद्वा 319 दसं० प्र० ससं० कवे प्रद्वाथरनद्वा पत्र कवे आधिद्वार पर आववेदक कको ववचद्वारण हवेततु तलब वकयद्वा गयद्वा हहै। ववदद्वान ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा पद्वाररत तलबली आदवेश ववधधि ससंगत नहहीं हहै। यह भली कथन वकयद्वा गयद्वा वक पलीवड़ितद्वा नवे अपनवे बयद्वान अन्तगरत धिद्वारद्वा 161 मम यह कथन वकयद्वा हहै वक आववेदक नवे उसकवे सद्वाथ बलद्वात्कद्वार नहहीं वकयद्वा हहै , वह वहद्वासं उपणस्थत थद्वा। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारद्वा यह भली कथन वकयद्वा गयद्वा वक मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा पपृथ्वलीरद्वाज चदौहद्वान कवे मद्वामलवे मम दली गयली ववधधि व्यवस्थद्वा कवे आधिद्वार पर आववेदक कवे ववरूद्ध धिद्वारद्वा 5/6 पद्वाक्सको अधधिवनयम कद्वा अपरद्वाधि बननद्वा पररलवक्षित नहहीं हकोतद्वा हहै। आववेदक कको पपूवर मम आदवेश वदनद्वासंक 02.04.2024 कवे दद्वारद्वा असंतररम जमद्वानत प्रदद्वान ककी गयली थली। आववेदक दद्वारद्वा ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय कवे आदवेश फलक मम भली स्पष्ट हहै वक आववेदक ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनधिद्वारररत प्रत्यवेक वतधथ पर उपणस्थत हकोतद्वा रहद्वा हहै। आववेदक कद्वा ककोई पपूवर आपरद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हहै। पतुननः उनकद्वा कथन हहै वक आववेदक ववचद्वारण और जपॉच कवे ददौरद्वान सहयकोग करनवे कद्वा वचन दवेतद्वा हहै वक वह जपॉच एजमसली यद्वा न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अपवेवक्षित समय पर उपणस्थत रहवेगद्वा एवसं आववेदक ककी ओर सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक्षि खतुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतर्दोसं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै, जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगली।
5.
ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा अवभयतुक कवे अवग्रिम जमद्वानत कवे ववरकोधि मम यह तकर प्रस्ततुत वकयद्वा गयद्वा वक इस मद्वामलवे मम अवभयतुक ककी भपूवमकद्वा पररलवक्षित हको रहली हहै तथद्वा इस घटनद्वा मम इनककी भपूवमकद्वा ससंभद्वाव्य हहै। इसधलए अवभयतुक कको अवग्रिम जमद्वानत पर मतुक न वकयद्वा जद्वाय।
6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हहै वक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 कवे मद्वामलवे मम मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा यह अवधिद्वाररत वकयद्वा गयद्वा हहै वक अवग्रिम जमद्वानत यद्वावचकद्वा पर न्यद्वाय-वनणरयन करतवे समय न्यद्वायद्वालय कको आरकोपपों ककी प्रकपृ वत और गसंभलीरतद्वा, आरकोपली ककी न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा सवे भद्वागनवे ककी ससंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए और यह वक न्यद्वायद्वालय कको आरकोपली कवे ववरूद्ध उपलब्धि सभली सद्वामग्रिली कद्वा सद्वावधिद्वानली सवे मपूल्यद्वासंकन करनद्वा चद्वावहए और आरकोपली ककी वद्वास्तववक भपूवमकद्वा पर भली ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए।
7. उभय पक्षि कवे तकर्दो एवसं वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत ससंबसंधिली ववधधि कवे स्थद्वावपत धसद्धद्वासंतपों कको ध्यद्वान मम रखतवे हहए और पक्षिकद्वारपों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओसं कवे कथनपों, आरकोपपों ककी प्रकपृ वत, आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभली तथ्यपों एवसं ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनयत वतधथयपों पर आववेदक कवे वनयवमत रूप सवे उपणस्थत हकोनवे, पररणस्थवतयपों कको ध्यद्वान मम रखतवे हहए, चपूसंवक ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनधिद्वारररत प्रत्यवेक वतधथयपों पर आववेदक उपणस्थत हकोतद्वा रहद्वा हहै तथद्वा न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग प्रदद्वान करतद्वा रहद्वा हहै , अतनः मद्वामलवे कवे गतुण-दकोष पर वबनद्वा ककोई ववचद्वार व्यक वकए अवग्रिम जमद्वानत ककी प्रद्वाथरनद्वा स्वलीकद्वार वकए जद्वानवे यकोग्य हहै।
8. तद्नतुसद्वार, यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र स्वलीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हहै।
9.
उपरकोक मतुकदमद्वा अपरद्वाधि ससंख्यद्वा मम सणममधलत आववेदक ककी वगरफ्तद्वारली ककी दशद्वा मम, उसवे ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय ककी ससंततुवष्ट पर रू० 50,000/- कद्वा व्यवकगत बसंधि पत्र एवसं उसली धिनरद्वावश कवे दको प्रवतभपू प्रस्ततुत करनवे पर , सत्र परलीक्षिण कवे वनस्तद्वारण हकोनवे तक वनमन शतर्दो कवे अधिलीन अवग्रिम जमद्वानत पर मतुक वकयद्वा जद्वाएगद्वा :-
i) आववेदक अवभयकोजन पक्षि कवे सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेड़िछद्वाड़ि नहहीं करवेगद्वा। ii) आववेदक अवभयकोजन पक्षि कवे गवद्वाहपों कको धिमकद्वाएगद्वा यद्वा परवेशद्वान नहहीं करवेगद्वा। iii) आववेदक ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनधिद्वारररत वतधथ एवसं समय पर उपणस्थत हकोगद्वा तथद्वा अनद्वावश्यक स्थगन नहहीं लवेगद्वा। iv) आववेदक उस अपरद्वाधि कवे समद्वान ककोई अपरद्वाधि नहहीं करवेगद्वा, धजसकद्वा आरकोप आववेदक पर लगद्वायद्वा गयद्वा हहै यद्वा धजसकवे वकए जद्वानवे कद्वा ससंदवेह हहै। v) आववेदक मद्वामलवे कवे तथ्यपों सवे पररवचत वकसली व्यवक कको प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे ककोई प्रलकोभन, धिमककी यद्वा वद्वादद्वा नहहीं करवेगद्वा धजससवे वह व्यवक न्यद्वायद्वालय यद्वा वकसली पतुधलस अधधिकद्वारली कवे समक्षि तथ्यपों कद्वा खतुलद्वासद्वा करनवे सवे ववमतुख हको जद्वाए यद्वा सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेड़िछद्वाड़ि करवे।
10. उपरकोक उलवेधखत शतर्दोसं मम सवे वकसली भली शतर कवे उलघसंन ककी णस्थवत मम ससंबधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय आववेदक कको प्रदत्त जमद्वानत वनरस्त करनवे हवेततु स्वतसंत्र हहै। Order Date :- 8.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad