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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 368 (CHH)

SANTOSH MISHRA v. STATE OF CHHATTISGARH

CRA/2273/2025 · 2026-04-20

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} 2026:CGHC:18118 ्ቚतिवे्ቕ छቈኍ सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर ति्ቓया सरति तिक-27/03/2026 ति्ቓया उሾኘ)ति* तिक-21/04/2026 ቄኌ./क अपु ल ्ቅाሰक -2273 /2025  स)* तिाሰቦኋ तिपु-ओाሰ्ቚकश तिाሰቦኋ, उ्቞-लगभग 52 वे*, तिवेस -ቇኋाሰ-रिሺसहपुर, पुिሺलस था वे हस ल-रजपुर, िሺजल-लराሰपुर-राሰजगज, छቈኍ सगढ़ -----अपु लथा>/अतिभया्ሹ तिवेरूሾኘ 1. छቈኍ सगढ़ रज्या, ቛኋर था ्ቚभर , पुिሺलस था-रजपुर, िሺजल-लराሰपुर- राሰजगज, छቈኍ सगढ़ (रज्या) 2. जगवेश यावे तिपु-तिशवेाሰगल यावे, उ्቞-लगभग 38 वे*, तिवेस -ቇኋाሰ-//खं/वे, या रजपुर, पुिሺलस था-रजपुर, िሺजल-लराሰपुर-राሰजगज, छቈኍ सगढ़ (्ቚथा>) -----उቈኍरवे ग्ቓ अपु लथा>/अतिभया्ሹ ቛኋर : ቦኋ गग पु./या, अिሺHवे्ሹ । उቈኍरवे /रज्या ቛኋर : ቦኋ अ श तिवेर , उपु शसकJया अिሺHवे्ሹ । न्यायााሰKति ቦኋ सजया क ाሰर जयासवेल POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.04.21 15:08:15 +0530 2 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} !! स .ए.वे . ति्ቓया !! 1. Hर 14(क)( ) i असKतिच जति एवे असKतिच जजति (अत्याचर तिवेर्ቓ) अिሺHतियााሰ, 1989 (िሺजस आग सपु ाሰR "तिवेश* अिሺHतियााሰ" स स)िሺH तिकया ज रह हT) क अग ्ቚस् इस अपु ल ाሰR तिवेचर्ቓ न्यायालया-तिवेश* न्यायाH श (तिवेश* अिሺHतियााሰ), लराሰपुर स्था राሰजगज, छቈኍ सगढ़ ቛኋर तिवेश* स्ቔ ्ቚकर्ቓ (ए቏ኘY).) ्ቅाሰक-37/2025 “छቈኍ सगढ़ रज्या तिवेरूሾኘ स)* क ाሰर तिाሰቦኋ” ाሰR तिक-10/10/ 2025 क) अपु लथा> पुर तिवेरतिच आर)पु अग Hर-296 भर या न्याया सतिह, 2023 था तिवेश* अिሺHतियााሰ कJ Hर-3(1)(H) क) च\  गई हT । उ्ሹ आश क) आग सपु ाሰR “्ቚश्H  आश” स स)िሺH तिकया ज रह हT । 2. थ्या सपु ाሰR इस ्ቚकर हT तिक अपु लथा>/अतिभया्ሹ स)* तिाሰቦኋ, जपु पुचया रजपुर ाሰR सहयाक ቦኋ्ቓ - III क पु पुर कयार हT । अतिभलखं स याह पुरिरलति ह) हT तिक सिሺH ्ቔ क तिवेतिच तिवेHयाक, ज) वेाሰ ाሰR ाሰ्ቔ पु पुर आस  हa, था उस िሺजल क अन्या तिवेHसभ ्ቔ कJ एक अन्या ाሰतिहल तिवेHयाक, ज) असKतिच जजति वेग स सिሺH हa (िሺजन्हR आग सपु ाሰR ्ቅाሰशb ‘ाሰ्ቔ ज ’ एवे ‘तिवेHयाक’ क रूपु ाሰR स)िሺH तिकया गया हT), ्ቚकर्ቓ कJ पुe्቗भKतिाሰ स सिሺH हa । उ्ሹ )g ज्ቚतितििሺH छቈኍ सगढ़ शस क सቈኍरूढ़ रज तिक ल, भर या ज पु቏ኘ> क सस्या हa था आतिवेस साሰज स सH रखं हa । 3. अतिभया)ज क ाሰाሰल सपु ाሰR इस ्ቚकर हT तिक ्ቚथा>/तिशकयाक जगवेश यावे, भर या ज पु቏ኘ> क रजपुर ाሰ./ल क अध्या हa । तिक 17.07.2025 क) उन्हR भर या ज पु቏ኘ> क रिरया) ाሰ./ल अध्या िሺजन््ቖ जयासवेल ቛኋर ‘व्हट्सऐपु’ एवे 3 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} Kरभ* क ाሰध्यााሰ स याह सKच  गई तिक अपु लथा>/अतिभया्ሹ ቛኋर ‘ाሰ्ቔ ज ’ एवे ‘तिवेHयाक’ क ्ቚति खंलआाሰ जतिसKचक गल -गल\ज कर हmए आतिवेस साሰज था भर या ज पु቏ኘ> क) अपुाሰति तिकया गया, िሺजसस ्ቔ ाሰR आ्ቅ)श व्या्቎ ह) गया । उ्ሹ तिशकया क आHर पुर था या रजपुर, िሺजल लराሰपुर (छቈኍ सगढ़) ाሰR उस ति अपुरH ्ቅाሰक 165/2025 पुज ्ቍ तिकया गया । तिवेवेच क \र तिशकयाक स सिሺH ध्वेति-अक (ऑति/या) ቄኌqलपु) या्ሹ पु /Yइवे जब् कJ गई, िሺजसक सH ाሰR भर या सቌኚया अिሺHतियााሰ, 2023 कJ Hर 63(4)(ग) क अग ्ቚाሰ्ቓपु्ቔ ्ቚस् तिकया गया । सथा ह अपु लथा> क तियाति्ሹ ्ቚाሰ्ቓपु्ቔ जब् तिकया गया, सतियाg क कथा लखं्ቍ तिकए गए था तिवेवेच उपुर अतिभया)गपु्ቔ ्ቚस् तिकया गया । 4. अपु लथा>/अतिभया्ሹ क तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ क क हT तिक भर या न्याया सतिह, 2023 कJ Hर 296 क अग आर)पु क िሺलए आवेश्याक ‘अश्ल ल’ था ‘ल)क स्था अथावे उसक साሰ पु’ ह) क त्वे ्ቚथााሰदृ्ቖया स्थातिपु हv ह), अb उ्ሹ Hर क अग आर)पु कJ रच तिवेिሺHसग हv हT । याह क तिया गया हT तिक 'ाሰ्ቔ ज ' क पुिሺलस ቛኋर कथा हv िሺलया गया हT था ाሰतिहल तिवेHयाक ቛኋर इस अपु ल ाሰR अपुिሺቈኍ व्या्ሹ कJ गया हT । याह भ क तिकया गया हT तिक तिशकयाक जगवेश यावे इस ्ቚकर्ቓ ाሰR पु तिx कJ ቦኋ्ቓ ाሰR हv आ, अb उक ቛኋर ्ቚस् तिशकया तिवेिሺH कJ दृति्ቖ ाሰR ቇኋ्ቨ हv हT । याह भ क तिकया गया हT तिक तिवेश* अिሺHतियााሰ क अग याह आवेश्याक हT तिक किሺथा अपुरH ल)क दृति्ቖ ाሰR आ वेल स्था पुर घति቏ኘ हmआ ह), िሺजस अतिभया)ज ቛኋर ्ቚथााሰदृ्ቖया स्थातिपु हv तिकया गया हT । इस सH ाሰR क)ई तिवेश* या स्पु्ቖ सቌኚया सकिሺल हv तिकया गया हT । किሺथा ध्वेति-अक (ऑति/या) ቄኌqलपु) क  ) िሺलप्यार्ቓ तिकया गया हT और  ह याह स्पु्ቖ हT तिक उसाሰR क\-क\ स शब् ्ቚया्ሹ हmए हa । याह भ स्पु्ቖ हv हT तिक 4 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} उ्ሹ ध्वेति-अक तिकसक ቛኋर ्ቚसरिर तिकया गया, तिकस स्था पुर Tयार तिकया गया था तिकस स्था पुर स गया । तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ क याह भ क हT तिक तिवेवेच क \र किሺथा घ቏ኘस्थाल क क)ई qश Tयार हv तिकया गया, िሺजसस उस ‘ल)क दृति्ቖ ाሰR आ वेल स्था’ क रूपु ाሰR स्थातिपु तिकया ज सक । सथा ह , किሺथा जतिसKचक गल - गल\ज तिकस तिवेतिश्ቖ व्याति्ሹ क साሰ तिकए ज क भ क)ई ्ቚत्या सቌኚया उपुलब्H हv हT । अपु लथा>/अतिभया्ሹ कJ आवेज क ाሰK हv िሺलया गया,  ह उसक क)ई Kरभ* उपुकर्ቓ जब् तिकया गया हT, और  ह ऐस क)ई सቌኚया सकिሺल तिकया गया हT िሺजसस याह स्थातिपु ह) सक तिक उ्ሹ ध्वेति-अक क ्ቚसर्ቓ अपु लथा>/अतिभया्ሹ ቛኋर तिकया गया । उपुया्ሹ पुरिरቄኌस्थातियाg ाሰR याह क तिया गया हT तिक Hर 296 भर या न्याया सतिह एवे तिवेश* अिሺHतियााሰ कJ Hर 3(1)(H) क आवेश्याक त्वेg कJ पुKति हv ह) हT, था उपुलब्H सቌኚया क आHर पुर तिवेचर्ቓ जर रखं न्यातियाक ्ቚति्ቅया क रुपुया)ग ह)ग । अb अपु ल स्वे कर कर हmए ‘्ቚश्H  आश’ अपुस् तिकया जए था अपु लथा>/ अतिभया्ሹ क) आर)तिपु अपुरH स उन्ाሰ्ሹ तिकया जए । तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ ቛኋर अपु क क साሰथा ाሰR तिम्वे न्यायादृ्ቖg क भ हवेल तिया गया हT- .I N.S. Madhanagopal and another v. K. Lalitha, (2022) 17 SCC 818. II. Karuppudayar v. State Rep. by the Deputy Superintendent of Police, Lalgudi Trichy & Ors., SLP (Criminal) No. 8779-8779 of 2024 dated 31.01.2025(2025 INS 132). III. Bhagwant Singh Randhawa and another v. State of Punjab, CRM- P No.-42685 of 2021 (O&M). 5. रज्या/उቈኍरवे ्ቅाሰक-1 क तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ क क हT तिक तिवेवेच क \र सिሺH ाሰतिहल तिवेHयाक क कथा पुिሺलस ቛኋर अतिभिሺलिሺखं तिकया गया हT, िሺजसाሰR उन्हg किሺथा 5 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} ध्वेति-अक (ऑति/या) ቄኌqलपु) क) सकर स्वेया क ब्H ह) क उቤኔखं तिकया हT । उ्ሹ ध्वेति-अक क) एक तिवेतिश्ቖ जति वेग क) अपुाሰति एवे ब्H कर क आशया स ्ቚसरिर तिकया गया, अb ‘पु तिx’ कJ पुरिरिሺH ाሰR वे सभ व्याति्ሹ सቄኌम्ाሰिሺल ह) हa िሺजन्हg उ्ሹ ध्वेति-अक क) स और िሺजाሰR )भ उत्पु्ቐ हmआ । उ्ሹ ाሰतिहल तिवेHयाक क जति ्ቚाሰ्ቓपु्ቔ अतिभलखं पुर उपुलब्H हT । अपु लथा>/अतिभया्ሹ, असKतिच जति/जजति वेग क सस्या हv हT । अपु लथा>/अतिभया्ሹ ቛኋर उ्ሹ ध्वेति-अक क) साሰन्या ज क ाሰध्या ‘व्हट्सऐपु’ साሰKह क ाሰध्यााሰ स जKझकर ्ቚसरिर तिकया गया, िሺजसस भर या न्याया सतिह, 2023 कJ Hर 296 था तिवेश* अिሺHतियााሰ कJ Hर 3(1)(H) क आवेश्याक त्वेg कJ पुKति ह) हT । अपु लथा> पु क क स्वे कया हv हa अb अपु ल तिरस् तिकया जए । तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ ቛኋर अपु क क साሰथा ाሰR Sooraj V. Sukumar v. State of Kerala Represented by Public Prosecutor and Another क न्यायादृ्ቖ क हवेल तिया गया हT । 6. इस अपु ल क सH ाሰR पु तिx (ाሰतिहल तिवेHयाक) क) तिवेिሺHवे‚ सKच ्ቚति* कJ गई था । िሺजसक अपुल ाሰR पु तिx ቛኋर तिक 12.01.2026 क) सिሺH िሺजल तिवेिሺHक सवे ्ቚिሺHकर्ቓ क ाሰध्यााሰ स आभस रूपु स उपुቄኌस्था हmई था इस अपु ल क सH ाሰR क)ई आपुिሺቈኍ  ह) कJ अतिभव्याति्ሹ कJ गई । 7. उभयापु क क ቦኋवे्ቓ तिकए गए और तिवेचर्ቓ न्यायालया क ाሰKल अतिभलखं था इस अपु ल या न्यायालया क अतिभलखं क सKቌኚाሰपुKवेक पुरिरश ल तिकया गया । 8. तिवेचर्ቓ न्यायालया ቛኋर अपु लथा>/अतिभया्ሹ पुर “्ቚश्H  आश” क ह तिवेरतिच आर)पु तिम्सर हTb- 6 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} “1. आपु तिक 17.07.2025 क) शाሰ 14.12 ज, रजपुर, िሺजल-लराሰपुर-राሰजगज (छ.ग.) ाሰR ाሰ्ቔ ( xxxx) एवे साሰर तिवेHयाक ( xxxx) ज) तिक असKतिच जजति कJ सस्या हT, क) जतिग एवे अश्ल ल गल ग्቎र कर उस वेट्सअपु ቇኋपु ाሰR ्ቚसरिर कर उन्ह वे स वेल) क) )भ करिर तिकया । 2. उ्ሹ तिक, साሰया वे स्था पुर आपु स्वेया असKतिच जति या असKतिच जजति क सस्या  ह) हmए, ाሰ्ቔ ( xxxx) एवे साሰर तिवेHयाक ( xxxx) ज) तिक असKतिचज जजति कJ सस्या हT, क) जतिग एवे अश्ल ल गल ग्቎र कर उस वेट्सअपु ቇኋपु ाሰR ्ቚसरिर कर उन्ह वे स वेल) क) )भ करिर तिकया ।” 9. सवे्ቚथााሰ, अपु लथा> पु ቛኋर ‘पु तिx’ कJ ቄኌस्थाति क सH ाሰR उठाए गए ्ቚश् पुर तिवेचर तिकया ज अपुति हT । इस सभ ाሰR अतिभलखं क अवेल)क कर पुर याह पुरिरलति ह) हT तिक ‘ाሰ्ቔ ज ’ क क)ई कथा पुिሺलस ቛኋर अतिभिሺलिሺखं हv तिकया गया हT, जतिक सिሺH ाሰतिहल तिवेHयाक क कथा अवेश्या अतिभिሺलिሺखं तिकया गया हT । याह भ तितिवेवे हT तिक अपु लथा>/अतिभया्ሹ स्वेया असKतिच जति अथावे असKतिच जजति वेग क सस्या हv हT था इस सH ाሰR उसक ቛኋर क)ई वे भ ्ቚस् हv तिकया गया हT । अतिभलखं पुर उपुलब्H जति ्ቚाሰ्ቓपु्ቔ स याह स्पु्ቖ ह) हT तिक उ्ሹ ाሰतिहल तिवेHयाक ‘क वेर’ जति स सिሺH हa, ज) असKतिच जजति वेग ाሰR आ हT, जतिक ‘ाሰ्ቔ ज ’ क सH ाሰR क)ई जति ्ቚाሰ्ቓपु्ቔ अतिभलखं पुर उपुलब्H हv हT । याह भ पुरिरलति ह) हT तिक पुिሺलस ाሰR ्ቚस् िሺलिሺखं तिशकया एक रज तिक ल क पुिሺHकर ቛኋर कJ गई हT था ाሰतिहल तिवेHयाक क अतिरिर्ሹ िሺज अन्या सतियाg क कथा अतिभिሺलिሺखं तिकए गए हa, वे भ उस रज तिक ल अथावे सिሺH जति वेग स स्ቍ व्याति्ሹ हa । 7 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} 10. A. No.-2273 of 2025} 10. असKतिच जति एवे असKतिच जजति (अत्याचर तिवेर्ቓ) अिሺHतियााሰ, 1989 कJ Hर-2 (ङग) ाሰR “पु तिx” क) तिम्सर पुरिरभति* तिकया गया हTb- “(ङग) “पु तिx” स ऐस व्याति्ሹ अतिभ्ቚ हT, ज) Hर 2 कJ उपुHर (1) क खं/ (ग) क अH  'अKसKतिच जति और असKतिच जजति’ कJ पुरिरभ* क भ र आ हT था ज) इस अिሺHतियााሰ क अH  तिकस अपुरH क ह) क पुरिर्ቓाሰस्वेरूपु शर रिरक, ाሰिሺसक, ाሰ)वेTሺኋतिक, भवेत्ाሰक या H या हति या उसकJ सपुिሺቈኍ क) हति वेह या अभवे कर हT और िሺजसक अग उसक र तिवेिሺHक सरक और तिवेिሺHक वेरिरस भ हa;” 11. पु तिx कJ उपुया्ሹ पुरिरभ* स याह स्पु्ቖ ह) हT तिक याति असKतिच जति अथावे असKतिच जजति वेग क तिकस व्याति्ሹ क) अिሺHतियााሰ ाሰR पुरिरभति* अपुरH क पुरिर्ቓाሰस्वेरूपु शर रिरक, ाሰिሺसक, ाሰ)वेTሺኋतिक, भवेत्ाሰक अथावे आिሺथाक हति ह) हT, या उसकJ सपुिሺቈኍ क) ति पुहm‡च हT, ) वेह ‘पु तिx’ कJ ቦኋ्ቓ ाሰR आएग । 12. भर या न्याया सतिह, 2023 कJ Hर-296 तिम्सर हTb- “296.अश्ल ल कया और ग-ज) क)ई,- (क) तिकस ल)क स्था ाሰR क)ई अश्ल ल कया कर हT; या (खं) तिकस ल)क स्था ाሰR या उसक साሰ पु क)ई अश्ल ल ग, ‘पुवेx’ या शब् गएग, सएग या उच्चरिर करग, िሺजसस Kसरg क) )भ ह) ह) , वेह )g ाሰR स तिकस भति क करवेस स, िሺजसकJ अवेिሺH   ाሰस क कJ ह) सक ग , या जाሰ स ज) एक हजर रूपुया क क ह) सक ग, या )g ाሰR स, ቄኌ./ तिकया जएग ।" 8 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} 13. असKतिच जति एवे असKतिच जजति (अत्याचर तिवेर्ቓ) अिሺHतियााሰ, 1989 कJ Hर-3 (1)(H) ाሰR “पु तिx” क) तिम्सर पुरिरभति* तिकया गया हTb- “3. अत्याचर क अपुरHg क िሺलए x-(1) क)ई भ व्याति्ሹ, ज) असKतिच जति या असKतिच जजति क सस्या हv हT,- (H) ल)क दृति्ቖ ाሰR आ वेल तिकस स्था पुर जति क ाሰ स असKतिच जति या असKतिच जजति क तिकस सस्या क) गल गल\ज करग; वेह, करवेस स, िሺजसकJ अवेिሺH छह ाሰस स काሰ कJ हv ह)ग , तिक  ज) पुच वे* क कJ ह) सक ग , और जाሰ स, / या ह)ग ।” 14. तिवेचरH  ाሰाሰल ाሰR याह पुरिरलति ह) हT तिक  क वेल सिሺH ाሰतिहल तिवेHयाक  अपु पुिሺलस कथा ाሰR )भ/पु x व्या्ሹ कJ हT, ቄኌˆक उक जति वेग क अन्या व्याति्ሹयाg ቛኋर भ )भ व्या्ሹ तिकया गया हT । ऐस ቄኌस्थाति ाሰR याह अपुति हv हT तिक तिशकया अतिवेयाb उस व्याति्ሹ ቛኋर ह ्ቚस् कJ जए िሺजसक तिवे*या ाሰR कह गया हT । याति तिशकया तिकस अन्या व्याति्ሹ ቛኋर कJ गई ह), तिकन् सिሺH जति वेग क व्याति्ሹयाg ቛኋर )भ व्या्ሹ तिकया गया ह), ) ाሰ्ቔ इस आHर पुर तिशकया क) असग अथावे अतिभया)ज सचल ह अपुया्቎ हv ठाहरया ज सक । Hर 296 भर या न्याया सतिह, 2023 क ्ቚवेH असर "Kसरg क) )भ ह) ह)" स भ हर वेह व्याति्ሹ पु तिx ाሰ जएग िሺजस )भ ह) हT । तिवेश* अिሺHतियााሰ क उቌኔश्या ह वेग तिवेश* क) अत्याचर स तिवेर्ቓ ्ቚ कर हT । अb, अपु लथा> पु क याह ्ቚथााሰ क स्वे कर या)ग्या हv पुया ज तिक तिशकयाक, पु तिx कJ ቦኋ्ቓ ाሰR हv आ इसिሺलया आपुरिሺHक ाሰाሰल चल या)ग्या हv हT । 9 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} 15. अपु लथा>/अतिभया्ሹ क तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ क क हT तिक भर या न्याया सतिह, 2023 कJ Hर 296 क अग अपुरH स्थातिपु कर ह याह आवेश्याक हT तिक अतिभया्ሹ ቛኋर ‘अश्ल ल’ शब्g क उच्चर्ቓ तिकया गया ह), िሺजसस अन्या व्याति्ሹयाg ाሰR )भ उत्पु्ቐ हmआ ह) । अपु इस क क साሰथा ाሰR तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ  . . ( N S Madhanagopal पुKवे‹्ሹ) क न्यायादृ्ቖ क हवेल तिया हT, िሺजसाሰR ाሰ या उच्चाሰ न्यायालया ቛኋर ‘अश्ल ल’ कJ अवेHर्ቓ क सH ाሰR अतिभाሰ व्या्ሹ तिकया गया हT, ज) तिम्सर हT— “6. Section 294(b)IPC talks about the obscene acts and songs. Section 294IPC as a whole reads thus: “294. Obscene acts and songs.—Whoever, to the annoyance of others— (a) does any obscene act in any public place, or (b) sings, recites or utters any obscene songs, ballad or words, in or near any public place, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three months, or with fine, or with both.” 7. It is to be noted that the test of obscenity under Section 294(b)IPC is whether the tendency of the matter charged as obscenity is to deprave and corrupt those whose minds are open to such immoral influences. The following passage from the judgment authored by K.K. Mathew, J. (as his Lordship then was) reported in P.T. Chacko v. Nainan Chacko [P.T. Chacko v. Nainan Chacko, 1967 SCC OnLine Ker 125 : 1967 KLT 799] explains as follows : (SCC OnLine Ker paras 5-6) 10 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} “5. The only point argued was that the 1st accused has not committed an offence punishable under Section 294(b)IPC, by uttering the words above-mentioned. The courts below have held that the words uttered were obscene and the utterance caused annoyance to the public. I am not inclined to take this view. In R. v. Hicklin [R. v. Hicklin, (1868) LR 3 QB 360] , QB at p. 371 Cockburn, C.J. Laid down the test of “obscenity” in these words : (QB p. 371) ‘… the test of obscenity is this, whether the tendency of the matter charged as obscenity is to deprave and corrupt those whose minds are open to such immoral influences.…’ 6. This test has been uniformly followed in India. The Supreme Court has accepted the correctness of the test in Ranjit D. Udeshi v. State of Maharashtra [Ranjit D. Udeshi v. State of Maharashtra, 1964 SCC OnLine SC 52 : AIR 1965 SC 881] . In Roth v. United States [Roth v. United States, 1957 SCC OnLine US SC 106 : 1 L Ed 2d 1498 : 354 US 476 (1957)] , Chief Justice Warren said that the test of “obscenity” is the ‘substantial tendency to corrupt by arousing lustful desires’. Mr Justice Harlan observed that in order to be “obscene” the matter must “tend to sexually impure thoughts”. I do not think that the words uttered in this case have such a tendency. It may be that the words are defamatory of the complainant, but I do not think that the words 11 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} are “obscene” and the utterance would constitute an offence punishable under Section 294(b)IPC.” 16. उपुया्ሹ न्यायादृ्ቖ ाሰR ्ቚतिपुति ‘अश्ल ल’ कJ अवेHर्ቓ क आल)क ाሰR तिवेचरH  ्ቚकर्ቓ क थ्याg क पुर ्ቓ कर पुर याह पुरिरलति ह) हT तिक िሺजस किሺथा ध्वेति- अक (ऑति/या) ቄኌqलपु) क ्ቚसर्ቓ क आर)पु अपु लथा>/अतिभया्ሹ स)* तिाሰቦኋ पुर लगया गया हT, उसक सH ाሰR  ) अपु लथा> क क)ई Kरभ* या्ቔ जब् तिकया गया हT और  ह उसकJ आवेज क ाሰK सकिሺल तिकया गया हT । अतिभलखं स याह भ स्पु्ቖ हT तिक तिशकयाक जगवेश यावे ቛኋर Hर 63(4)(ग) भर या सቌኚया अिሺHतियााሰ, 2023 क अग ्ቚाሰ्ቓपु्ቔ सतिह ज) पु /Yइवे ्ቚस् कJ गई, उसक क)ई िሺलप्यार्ቓ Tयार हv तिकया गया हT । या्ቕतिपु िሺलिሺखं तिशकया एवे सतियाg क कथाg ाሰR इस थ्या क उቤኔखं हT तिक उ्ሹ ध्वेति-अक ाሰR जतिसKचक एवे अश्ल ल गल -गल\ज कJ गई हT, थातिपु तिक तिवेतिश्ቖ शब्g क ्ቚया)ग तिकया गया, इसक क)ई स्पु्ቖ एवे ठा)स तिवेवेर्ቓ तिकस भ कथा ाሰR उपुलब्H हv हT । याह भ पुरिरलति ह) हT तिक उ्ሹ ध्वेति-अक क) चलकर स सH क)ई पुचाሰ Tयार हv तिकया गया हT । पुरिर्ቓाሰb, वेाሰ अतिभलखं या ቄኌस्थाति ाሰR याह पुर ्ቓ कर सभवे हv हT तिक तिवेवेति ध्वेति-अक ाሰR किሺथा रूपु स ्ቚया्ሹ शब् वेस्वे ाሰR जतिसKचक अथावे अश्ल ल था या हv, अथावे वे तिकस वेग तिवेश* क) अपुाሰति या ब्H कर वेल था । अb, उपुया्ሹ न्यायादृ्ቖ क आल)क ाሰR, किሺथा शब्g कJ ्ቚकe ति क सH ाሰR क)ई तिቄኌश्च अतिभाሰ इस स्र पुर व्या्ሹ तिकया ज सभवे हv हT । 17. अपु लथा>/अतिभया्ሹ क तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ क ्ቚाሰखं क याह हT तिक भर या न्याया सतिह, 2023 कJ Hर 296 क अग किሺथा घ቏ኘ क सH ाሰR क)ई तिवेतिश्ቖ स्था क उቤኔखं 12 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} हv तिकया गया हT, िሺजसक आHर पुर उस ‘ल)क स्था’ क रूपु ाሰR तिरूतिपु तिकया ज सक अथावे याह स्थातिपु तिकया ज सक तिक वेह स्था तिवेश* अिሺHतियााሰ क ्ቚवेHg क अरूपु ‘ल)क दृति्ቖ ाሰR आ वेल स्था’ था । 18. अपु लथा>/अतिभया्ሹ क तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ ቛኋर ्ቚस् Karuppudayar ( पुKवे‹्ሹ) ाሰR ाሰ या उच्चाሰ न्यायालया ቛኋर ्ቚतिपुति कቄኌ./क तिम्सर हT— “9. A perusal of Section 3(1)(r) of the SC-ST Act would reveal that for constituting an offence thereunder, it has to be established that the accused intentionally insults or intimidates with intent to humiliate a member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe in any place within public view. Similarly, for constituting an offence under Section 3(1)(s) of the SC-ST Act, it will be necessary that the accused abuses any member of a Scheduled Caste or a Scheduled Tribe by caste name in any place within public view. 10. The term “any place within public view” initially came up for consideration before this Court in the case of Swaran Singh v. State through Standing Counsel, (2008) 8 SCC 435. This Court in the case of Hitesh Verma v. State of Uttarakhand, (2020) 10 SCC 710 referred to Swaran Singh (supra) and reiterated the legal position as under: “14. Another key ingredient of the provision is insult or intimidation in “any place within public view”. What is to be regarded as “place in public view” had come up for consideration before this Court in the judgment reported as Swaran Singh v. State [Swaran Singh v. State, (2008) 8 SCC 435 : (2008) 3 SCC (Cri) 527]. The Court had drawn distinction between the 13 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} expression “public place” and “in any place within public view”. It was held that if an offence is committed outside the building e.g. in a lawn outside a house, and the lawn can be seen by someone from the road or lane outside the boundary wall, then the lawn would certainly be a place within the public view. On the contrary, if the remark is made inside a building, but some members of the public are there (not merely relatives or friends) then it would not be an offence since it is not in the public view (sic) [Ed. : This sentence appears to be contrary to what is stated below in the extract from Swaran Singh, (2008) 8 SCC 435, at p. 736d-e, and in the application of this principle in para 15, below:“Also, even if the remark is made inside a building, but some members of the public are there (not merely relatives or friends) then also it would be an offence since it is in the public view.”]. The Court held as under : (SCC pp. 443-44, para 28) “28. It has been alleged in the FIR that Vinod Nagar, the first informant, was insulted by Appellants 2 and 3 (by calling him a “chamar”) when he stood near the car which was parked at the gate of the premises. In our opinion, this was certainly a place within public view, since the gate of a house is certainly a place within public view. It could have been a different matter had the alleged offence been committed inside a building, and also was not in the public view. However, if the offence is committed outside the building e.g. in a lawn outside a house, and the lawn can be seen by someone from the road or lane outside the boundary wall, the lawn would certainly be a place within the public view. Also, even if the remark is made inside a 14 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} building, but some members of the public are there (not merely relatives or friends) then also it would be an offence since it is in the public view. We must, therefore, not confuse the expression “place within public view” with the expression “public place”. A place can be a private place but yet within the public view. On the other hand, a public place would ordinarily mean a place which is owned or leased by the Government or the municipality (or other local body) or gaon sabha or an instrumentality of the State, and not by private persons or private bodies.” (emphasis in original)” 11. It could thus be seen that, to be a place ‘within public view’, the place should be open where the members of the public can witness or hear the utterance made by the accused to the victim. If the alleged offence takes place within the four corners of the wall where members of the public are not present, then it cannot be said that it has taken place at a place within public view.” 19. उपुया्ሹ न्यायादृ्ቖg क आल)क ाሰR तिवेचरH  ्ቚकर्ቓ क थ्याg क पुर ्ቓ कर पुर याह स्पु्ቖ ह) हT तिक किሺथा ध्वेति-अक (ऑति/या) ቄኌqलपु) स सिሺH घ቏ኘ क क)ई तिवेतिश्ቖ स्था अतिभया)ज ቛኋर अतिभलखं पुर स्पु्ቖ हv तिकया गया हT,  ह अतिभया)ज क याह ाሰाሰल हT तिक उ्ሹ घ቏ኘ क क)ई ्ቚत्याश> स हT । अतिभलखं स याह भ पुरिरलति ह) हT तिक उ्ሹ ध्वेति-अक क ्ቚसर्ቓ अथावे पुरिरचल क सH ाሰR अपु लथा>/ अतिभया्ሹ क तिवेरु्ቍ क)ई ठा)स सቌኚया सकिሺल हv तिकया गया हT । या्ቕतिपु क छ सतियाg ቛኋर याह कथा तिकया गया हT तिक उसाሰR आवेज़ अपु लथा> कJ हT, थातिपु इसकJ पुति्ቖ ह  ) अपु लथा> कJ आवेज क ाሰK िሺलया गया हT और  ह क)ई वेTሺኋतिक पुर ्ቓ करया 15 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} गया हT । इस ्ቚकर, उ्ሹ घ቏ኘ तिकस स्था पुर घति቏ኘ हmई, इस सH ाሰR भ क)ई सቌኚया सकिሺल हv हT ।  ह याह स्पु्ቖ तिकया गया हT तिक किሺथा ध्वेति-अक क) तिशकयाक अथावे अन्या सतियाg ቛኋर क और कह‡ स गया । सथा ह , पुिሺलस ቛኋर किሺथा घ቏ኘस्थाल क क)ई qश भ Tयार हv तिकया गया हT । याह कर्ቓ हT तिक तिवेरतिच आर)पु ाሰR भ घ቏ኘस्थाल क रूपु ाሰR तिकस तिवेतिश्ቖ स्था क उቤኔखं हv हT । उपुया्ሹ पुरिरቄኌस्थातियाg ाሰR, याह तिष्कति* कर सभवे हv हT तिक किሺथा घ቏ኘ तिकस ‘ल)क स्था’ पुर घति቏ኘ हmई अथावे वेह ‘ल)क दृति्ቖ ाሰR आ वेल स्था’ था । 20. रज्या क तिवेቛኋ अिሺHवे्ሹ ቛኋर ्ቚस् Sooraj ( पुKवे‹्ሹ) ाሰR ाሰ या क रल उच्च न्यायालया ቛኋर ‘ल)क दृति्ቖ’ कJ अवेHर्ቓ क) तिम् अतिभाሰ क ाሰध्यााሰ स स्पु्ቖ तिकया गया हT— “29. The digital presence of persons through the internet has brought a change to the concept, purport and meaning of the word ‘public view’ in sections 3(1)(r) and 3(1)(s). When the victim accesses the content already uploaded to the internet, she becomes directly and constructively present for the purpose of applying the penal provisions of the Act. Thus, when insulting or abusive content is uploaded to the internet, the victim of the abuse or insult can be deemed to be present each time she accesses it. The third ingredient of sections 3(1)(r) and 3(1)(s) of the Act is also thus satisfied.” 21. इस न्यायादृ्ቖ वेल ाሰाሰल ाሰR साሰचर ्ቚसर्ቓ ाሰध्यााሰ ቛኋर सत्कर क दृश्या-ቦኋव्या ्ቚसर्ቓ तिकया गया था था उसक ्ቚसर्ቓ क स्था भ स्पु्ቖ रूपु स ሺኋ था, जतिक तिवेचरH  ्ቚकर्ቓ क थ्या इसस पुK्ቓb तिभ्ቐ हa । इसिሺलए उ्ሹ न्यायादृ्ቖ क लभ 16 / 16 {Cr. A. No.-2273 of 2025} अतिभया)ज/रज्या पु क) ्ቚ्቎ हv ह) । 22. उपुया्ሹ तिवेवेच क आHर पुर याह न्यायालया पु हT तिक ाሰाሰल ाሰR ‘ल)क स्था’ अथावे ‘ल)क दृति्ቖ ाሰR आ वेल स्था’ क सH ाሰR आवेश्याक सቌኚया सकिሺल हv तिकए गए हa, था पुिሺलस तिवेवेच ाሰR अन्या ाሰहत्वेपुK्ቓ कतिाሰया भ पुरिरलति ह) हa । फलb अपु लथा> /अतिभया्ሹ क तिवेरु्ቍ ्ቚथााሰदृ्ቖया आर)पु स्थातिपु हv ह) । ऐस ቄኌस्थाति ाሰR तिवेचर्ቓ क) जर रखं ज न्यायालया क साሰया क अपुव्याया ह)ग था न्यातियाक ्ቚति्ቅया क साሰतिच उपुया)ग हv कह ज सक । अb ‘्ቚश्H  आश’ क ह तिवेरतिच आर)पु ቄኌस्थार रखं ज या)ग्या हv हa । पुरिर्ቓाሰस्वेरूपु, अपु ल स्वे कर कJ ज हT । ‘्ቚश्H  आश’ अपुस् तिकया ज हT था अपु लथा>/अतिभया्ሹ क) भर या न्याया सतिह, 2023 कJ Hर 296 एवे तिवेश* अिሺHतियााሰ कJ Hर 3(1)(H) क आर)पु स उन्ाሰ्ሹ तिकया ज हT । 23. ति्ቓया कJ ्ቚति क सथा तिवेचर्ቓ न्यायालया क) ाሰKल अतिभलखं आवेश्याक कयावेह ह सKचथा एवे अपुलथा श ्ቈपुKवेक ्ቚति* ह) । सह /- (सजया क ाሰर जयासवेल) न्यायाH श पु)ाሰ