Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
2025:AHC:106711 Reserved :- 02.07.2025 Delivered :- 08.07.2025 Court No. - 5 Case :- WRIT - B No. - 1405 of 1977 Petitioner :- Gaya Prasad And Others Respondent :- D.D.C. And Others Counsel for Petitioner :- S. Banerji,Dhiraj Srivastava,P.N. Khare Counsel for Respondent :- Ram Kishore Gupta,Pradeep Chandra with Case :- WRIT - B No. - 29162 of 2016 Petitioner :- Damodar Swaroop And Another Respondent :- Addl. District Magistrate F And R/D.D.C. And 6 Ors. Counsel for Petitioner :- Manish Kumar Nigam,Ram Kishor Gupta,Shiv Shankar Gupta Counsel for Respondent :- C.S.C.,Hans Pratap Singh Hon'ble Saurabh Shyam Shamshery,J. Writ A No. 1405/1977
1. Present writ petition is pending since 1977 and is now being finally decided after about 48 years.
2.
Facts of present case arise out of a proceedings U/s 9A(2) of U.P. Consolidation of Holdings Act, 1953 in regard to plot Nos. 43, 44 and 45 of Khata No. 144, Village Umania, Pargana Rath, District Hamirpur. According to records available, in the basic year, original respondents- 4 and 7 were recorded as sirdar whereas Chinta (father of original petitioner-3) and original petitioners- 1 and 2 were recorded as asami in Class-VII over the disputed plots. 3. Original petitioners- 1 and 2 and father of original petitioner-3 filed an objection before Assistant Consolidation
Officer that they were in cultivated possession on disputed plots since acquisition of same from Ram Narayan (husband of original respondent-4, Smt. Raja Dulaiya) whereas name of original respondent-4 and respondents- 5 to 7 were wrongly recorded and it was prayed that their names be expunged. Original respondent- 4 has also filed objections that she was sole tenant on disputed plots and other recorded as co-tenures has no concern with disputed plots and their names be expunged. Respondent-8 has also filed objection that his name be recorded as sirdar on a ground that he was allegedly in possession over the disputed plots for last 15-16 years though subsequently, said respondent has withdrawn his objections vide statement dated 05.07.1974. 4. The Consolidation Officer vide order dated 21.08.1974 dismissed the objections filed by original respondent-4 and original respondents- 5 to 7 whereas objections filed by original petitioners 1 and 2, father of original petitioner-3 were allowed and it was directed that their names be recorded as sirdars whereas name of respondents be expunged.
Relevant part of order is quoted below :- उपरो विद्वा अधि ाओ क विस्तार पूक तक सु क तथा समस्त मौखिक खिखित सबूत का अोक कर क पश्चात यह स्प" ह# विक राम ाराय विावि$त भूविम का अस कास्तकार या उसक मर क पश्चात रा& $ु#या मृतक क( बा गौरी दुल्लैया का नाम दर्ज $ुल्ल#या का ाम $& हुआ। इसके पश्चात इसक पश्चात 135 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो त हा रा& $ु#या का ाम रहा &ो विक तौ ी दुल्लैया का नाम दर्ज क( क स साविबत ह#। इसके पश्चात इसक पश्चात प्रधिता$ी दुल्लैया का नाम दर्ज रामश्वर आवि$ का ाम $& हुआ जि&सका कोई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी औधि7त्य हीं था। प्रतिवादी था। इसके पश्चात प्रधिता$ी दुल्लैया का नाम दर्ज रामश्वर गाह कृ ष्; कु मार $ो ों ने अब कहा कि विवादित भूमि की अब कहा विक विावि$त भूविम क( त हा रा& $ु#या अस काश्तकार ह#। इसके पश्चात गौरी दुल्लैया का नाम दर्ज $ु#या या रामश्वर आवि$ का ाम फ&> $& हुआ। इसके पश्चात इसी दुल्लैया का नाम दर्ज ा$ में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो कृ ष्; कु मार भी दुल्लैया का नाम दर्ज ा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज था और रह क आ ार पर यह कह कर आय विक विावि$त भूविम पर कब्& क आ ार पर सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ार ह# विफर अप ा $ाा ापस खिया और अब रा& $ु#या क मुख्तार आम ब कर बया वि$या ह#। इसके पश्चात इसी दुल्लैया का नाम दर्ज प्रकार रामश्वर अब बया विकया ह# विक विावि$त भूविम पर उस मु0 रा&$ु#या क साथ सहात$ारी दुल्लैया का नाम दर्ज में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो विब ा रा& $ु#या क( &ा कारी दुल्लैया का नाम दर्ज क ाम $& करा खिया और अब बया विकया ह# विक उ का तथा अन्य सरी दुल्लैया का नाम दर्जक ात$ारा क ाम ारिर& कर वि$या &ाय क्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि कीविक मु0 रा& $ु#या ही दुल्लैया का नाम दर्ज त हा 2 काश्तकार ह#। इसके पश्चात अतD $ो ों ने अब कहा कि विवादित भूमि की रामश्वर कृ ष्; कु मार क बया ों ने अब कहा कि विवादित भूमि की में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो विरो ाभास ह# और ऐसा प्रती दुल्लैया का नाम दर्जत होता ह# विक &हाँ जैसा देखते हैं बयान &#सा $त हैं बयान बया कर $त हैं बयान।
इसके पश्चात अतD इ क बया पर पू; विश्वास कर ा न्यायसगत हीं था। प्रतिवादी ह#। इसके पश्चात अभिभ क अोक स स्प" ह# विक 1363 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो ाता 0 58 पर ा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; बतौर सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ार अविकत ह#। इसके पश्चात अतD यह माग सबूत प्रधिता$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; पर आता ह# विक 1365 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो ा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; क ाम ग 7 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो वि यमा ुसार $& हुय &ो जिसद्ध करने के असफल रहे हैं कर क असफ रह हैं बयान, अतD 1363 फ0 इन्द्रा& को &ब तक गत जिसद्ध करने के असफल रहे हैं हो &ा सही दुल्लैया का नाम दर्ज ही दुल्लैया का नाम दर्ज मा ा &ाएगा। इसके पश्चात इसक अधितरिर यवि$ यह भी दुल्लैया का नाम दर्ज थोड़ी दुल्लैया का नाम दर्ज $र क खिय मा खिया &ाए विक रामश्वर आवि$ अप ाम गत $& करा खिया तो ह ा$ में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो अप ाम ारिर& भी दुल्लैया का नाम दर्ज करा सकत थ विक आ& तक कोई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी कायाही दुल्लैया का नाम दर्ज ाम ारिर& करा क( हीं था। प्रतिवादी विकया। इसके पश्चात अतD उपरो तथ्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि की को ध्या में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो रत हुए यह ा$ विबन्$ु प्रधिता$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; क विरूद्ध करने के असफल रहे हैं तय विकया &ाता ह#। इसके पश्चात आ$श अतD आ$श हुआ विक विावि$त गाटों ने अब कहा कि विवादित भूमि की स रा& $ु#या आवि$ क ाम ारिर& करक ा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; क ाम बतौर सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ार 1363 फ0 स अविकत विकया &ाय तथा गा 1363 फ0 क तौ ी दुल्लैया का नाम दर्ज क अ ुसार 66 रूपया साा ा $&
विकया &ा। इसके पश्चात गाटा सख्या 45/1/385, 45/3/-0-15, 45/4/-0-34, 45/5/1-52 मौक क( प#माइश क अ ुसार $& विकया &ाए ब&ाय खिखित रक क । इसके पश्चात विमजिस ा$ अम $राम$ $ाखि $फ्तर हो। इसके पश्चात 5. Being aggrieved by above referred order, original respondent-4 filed an appeal before Settlement Officer of Consolidation (S.O.C.) which was allowed vide order dated 19.07.1975 that name of petitioners be recorded in Class-VII as asami whereas name of original respondent-4 only be entered as sirdar and name of other respondents be expunged.
Relevant part of order dated 19.07.1975 is quoted below :- “ उत्तर ा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज ग; क( तरफ स ा$ में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो यह वि$ा का भी दुल्लैया का नाम दर्ज प्रयास विकया गया ह# विक रा&$ु#या राम ाराय; क( मृत्यु क उपरान्त $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज भी दुल्लैया का नाम दर्ज पन्नाा स कर ी दुल्लैया का नाम दर्ज थी दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके पश्चात शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज क( बाबत आपखित्त में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो भी दुल्लैया का नाम दर्ज कु छ कहा कहा गया ह#। इसके पश्चात उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; क विद्वा अधि ाग; का कह ा ह# विक आपखित्त विकसी दुल्लैया का नाम दर्ज ा&ा कार आ$मी दुल्लैया का नाम दर्ज खि $ी दुल्लैया का नाम दर्ज ह#। इसके पश्चात इसखिय उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज का यह क स विक रा&$ु#या पन्नाा क साथ $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज क( ह#। इसके पश्चात रा&$ु#या &ाधित क( #श्य तथा पन्नाा &ाधित का कायस्थ ह# और इस प्रकार क( $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज का प्र7 #श्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि की में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो हीं था। प्रतिवादी ह# अतD $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज क सम्बन् में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज ग; को बहुत सबूत $ ा 7ाविहय था। इसके पश्चात उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज ूबा अक का बया कराया गया ह# उस अप बया में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो कहा ह# विक रा&$ु#या पन्नाा क( आश ायी दुल्लैया का नाम दर्ज हो गयी दुल्लैया का नाम दर्ज थी दुल्लैया का नाम दर्ज साथ ही दुल्लैया का नाम दर्ज यह भी दुल्लैया का नाम दर्ज कहा गया ह# विक पन्नाा शा$ी दुल्लैया का नाम दर्जशु$ा था। इसके पश्चात $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज हो क( बात 17-18 W पह हुई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी बतायी दुल्लैया का नाम दर्ज ह#। इसके पश्चात ऐसी दुल्लैया का नाम दर्ज $शा में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो कभिथत शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज 1655 क 3 बा$ हुई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी होती दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके पश्चात इस समय विहन्$ू विाह का ू पारिरत हो
7ुका था और उसमें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो विकसी दुल्लैया का नाम दर्ज भी दुल्लैया का नाम दर्ज व्यवि द्वारा $ो शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज कर ा र्जि&त ह#। इसके पश्चात ऐसा कोई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी सबूत हीं था। प्रतिवादी था विक पन्नाा क( पही दुल्लैया का नाम दर्ज पत् ी दुल्लैया का नाम दर्ज कभिथत शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज स पह मर गयी दुल्लैया का नाम दर्ज थी दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके पश्चात उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; पन्नाा का कु टुम्ब रजि&स्टर $ाखि विकया ह#। इसके पश्चात जि&समें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो विक रा&$ु#या का ाम भी दुल्लैया का नाम दर्ज अविकत ह# परन्तु यह हीं था। प्रतिवादी कहा &ा सकता ह# विक यह रा&$ु#या अपी दुल्लैया का नाम दर्जकता ही दुल्लैया का नाम दर्ज ह#। इसके पश्चात इसक विपरी दुल्लैया का नाम दर्जत रा&$ु#या क( तरफ स ोटरखिस्ट क( क $ाखि क( गयी दुल्लैया का नाम दर्ज ह#। इसके पश्चात जि&समें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो विक उसक पधित का ाम अब भी दुल्लैया का नाम दर्ज राम ाराय अविकत ह#। इसके पश्चात उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; को 7ाविहय था विक रा& $ु#या क( $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज साविबत कर क खिय ठोस सबूत प्रस्तुत करत। इसके पश्चात क कु टुम्ब रजि&स्टर प्रस्तुत कर स और यह कह स विक इसमें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो रा&$ु#या तथा पन्नाा पत् ी दुल्लैया का नाम दर्ज पधित खि हुय हैं बयान। इसके पश्चात अतD रा&$ु#या क( $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज मा ी दुल्लैया का नाम दर्ज &ाय मैं बयान सहमत हीं था। प्रतिवादी हूँ जैसा देखते हैं बयान। इसके पश्चात पधित प[त् क इस तरह स रह और समा& द्वारा उन्हें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो ऐसा स्ी दुल्लैया का नाम दर्जकार कर पर पु र्विाह क( प्रकल्प ा
शूद्रों ने अब कहा कि विवादित भूमि की में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो होती दुल्लैया का नाम दर्ज ह# विक #श्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि की में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो हीं था। प्रतिवादी। इसके पश्चात उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज शूद्र &ाधित क( भी दुल्लैया का नाम दर्ज हीं था। प्रतिवादी ह#। इसके पश्चात अतD उसका इस तरह बया $ में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो अप ा स्ाथ ह#, अतD इस बया में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो कु टुम्ब रजि&स्टर में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो रा&$ु#या का पन्नाा क( पत् ी दुल्लैया का नाम दर्ज खिा हो स रा&$ु#या का पु र्विाह साविबत हीं था। प्रतिवादी होता ह# अतD &मी दुल्लैया का नाम दर्ज उठात समय और &मीं था। प्रतिवादी$ारी दुल्लैया का नाम दर्ज वि ास क( तारी दुल्लैया का नाम दर्ज पर रा&$ु#या वि ा थी दुल्लैया का नाम दर्ज तथा का ू ारा 21 क अन्तगत उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; आसामी दुल्लैया का नाम दर्ज थ। इसके पश्चात अतD ह अधि ासी दुल्लैया का नाम दर्ज हीं था। प्रतिवादी हो सकत थ और ा$ में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ार। इसके पश्चात उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; क( तरफ स यह तक प्रस्तुत विकया गया ह# विक अपी दुल्लैया का नाम दर्जकता द्वारा एक $ाा उसक विरुद्ध करने के असफल रहे हैं ब$ी दुल्लैया का नाम दर्ज का $ायर विकया गया था &ो बा$ में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो उठा खिया गया। इसके पश्चात अतD $ाा क( धितभिथयों ने अब कहा कि विवादित भूमि की क ा$ स उत्तर ा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; का कब्&ा विावि$त भूविम पर अ ाधि कार हो गया और उ क हक ारा 290 क अन्तगत प#$ा हो गय। इसके पश्चात एक आसामी दुल्लैया का नाम दर्ज को सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ार
हक प्राप्त धारा ारा 204 क अन्तगत हाजिस हो सकत थ। इसके पश्चात क ब$ी दुल्लैया का नाम दर्ज क मुक$में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो क धि`ग्री दुल्लैया का नाम दर्ज हो &ा पर उसको &ारी दुल्लैया का नाम दर्ज कर पर ही दुल्लैया का नाम दर्ज उस हक प्राप्त धारा हो सकत हैं बयान क्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि कीविक यह $ाा ापस हो गया था अतD उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; रा&$ु#या क विरूद्ध करने के असफल रहे हैं हक सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ारी दुल्लैया का नाम दर्ज हाजिस हीं था। प्रतिवादी हो सकत हैं बयान। इसके पश्चात $फा 210 क अन्तगत सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ारी दुल्लैया का नाम दर्ज हक क अध्यासी दुल्लैया का नाम दर्ज को ही दुल्लैया का नाम दर्ज प्राप्त धारा होत हैं बयान। इसके पश्चात विक ऐस व्यवि को उसक कब्& क आ ार पर जि&सक( विक &मी दुल्लैया का नाम दर्ज में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो कोई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी विकसी दुल्लैया का नाम दर्ज प्रकार का अधि कार हो। इसके पश्चात क्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि कीविक उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; असामी दुल्लैया का नाम दर्ज थ। इसके पश्चात अतD उन्हें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो ारा 210 क अन्तगत हक सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ारी दुल्लैया का नाम दर्ज हाजिस हीं था। प्रतिवादी हो सकत हैं बयान। इसके पश्चात उत्तरा$ी दुल्लैया का नाम दर्जग; क( तरफ स यह कहा गया ह# विक रामश्वर आवि$ सहात$ार अविकत थ और अ&> $ाा में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&$ु#या इ ोगों ने अब कहा कि विवादित भूमि की का हक भी दुल्लैया का नाम दर्ज स्ी दुल्लैया का नाम दर्जकार विकया ह#। इसके पश्चात अतD रा&ु$ु#या त हा उस &मी दुल्लैया का नाम दर्ज क( काश्तकार हीं था। प्रतिवादी थी दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके
पश्चात सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ारी दुल्लैया का नाम दर्ज &मी दुल्लैया का नाम दर्ज में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो विकसी दुल्लैया का नाम दर्ज को सहात$ार स्ी दुल्लैया का नाम दर्जकार कर पर भी दुल्लैया का नाम दर्ज हक सहात$ारी दुल्लैया का नाम दर्ज हाजिस हीं था। प्रतिवादी हो सकत हैं बयान। इसके पश्चात &#साविक अ रिरपोटc`#` क# स& 562 तथा आर0`ी दुल्लैया का नाम दर्ज0 1674 प& 273 पर मा ी दुल्लैया का नाम दर्जय उच्च न्यायाय भी दुल्लैया का नाम दर्ज इसी दुल्लैया का नाम दर्ज प्रकार क( राय &ाविहर क( ह#। इसके पश्चात अतD 1362 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो गौरी दुल्लैया का नाम दर्ज $ु#या क ारिरसों ने अब कहा कि विवादित भूमि की का ाम काग&ात में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो बतौर सहात$ार अविकत हीं था। प्रतिवादी हो सकता था तो यह साविबत विकया गया ह# विक रा&$ु#या $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज कर ी दुल्लैया का नाम दर्ज और यह साविबत हो पाया ह# विक उसक अाा विावि$त भूविम का कोई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी और भी दुल्लैया का नाम दर्ज ात$ार था। इसके पश्चात अतD रामश्वर आवि$ का ाम ारिर& हो ा आश्यक ह#। इसके पश्चात 7कबन्$ी दुल्लैया का नाम दर्ज अधि कारी दुल्लैया का नाम दर्ज 4 रा&$ु#या का ाम गत ारिर& विकया ह#। इसके पश्चात अतD उ का आ$श वि रस्त हो योग्य ह#। इसके पश्चात आ$श उपरो तथ्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि की क आ ार पर अपी दुल्लैया का नाम दर्ज स्ी दुल्लैया का नाम दर्जकार क( &ाती दुल्लैया का नाम दर्ज ह#। इसके पश्चात 7कबन्$ी दुल्लैया का नाम दर्ज अधि कारी दुल्लैया का नाम दर्ज का आ$श वि रस्त विकया &ाता ह# और आ$श वि$या &ाता ह# विक ाता स0 144 क गाटा सख्या 43, 44, 45 पर धि7तू ूबा गया का ाम बतौर आसामी दुल्लैया का नाम दर्ज ग
7 अविकत रहगा उ ात स रा श्याम आवि$ का ाम ारिर& होकर ाता क मु0 ” रा&$ु#या क ाम अविकत हो। इसके पश्चात 6. Above referred order was challenged at the behest of original petitioners- 1 and 2 and father of original petitioner-3 before Deputy Director of Consolidation (D.D.C.), however, said revision was rejected vide order dated 25.02.1977.
Relevant part of order is quoted below :- “ मैं बयान पत्राी दुल्लैया का नाम दर्ज पर पक्षों ने अब कहा कि विवादित भूमि की द्वारा प्रस्तुत विकय गय साक्ष्य का भी दुल्लैया का नाम दर्जभाधित अोक विकया। इसके पश्चात अ$ात अपी दुल्लैया का नाम दर्ज क वि ;य में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो एक बशाी दुल्लैया का नाम दर्ज $ी दुल्लैया का नाम दर्ज गयी दुल्लैया का नाम दर्ज ह# जि&समें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो विपक्षी दुल्लैया का नाम दर्जग; रा&ा $ु#या आवि$ क पू& माता$ी दुल्लैया का नाम दर्ज को बतौर भूरिरजिसआा वि$ाया गया ह#। इसके पश्चात पत्राी दुल्लैया का नाम दर्ज पर उपब् सक तौ ी दुल्लैया का नाम दर्ज 1333 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो विावि$त भूविम माता$ी दुल्लैया का नाम दर्ज क ाम ग में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो बतौर सी दुल्लैया का नाम दर्जर अविकत ह#। इसके पश्चात क तौ ी दुल्लैया का नाम दर्ज 1346 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो राम राय पुत्र माता$ी दुल्लैया का नाम दर्ज का ाम विावि$त भूविम पर ग 5 साविकतु विम[ल्कयत $& ह#। इसके पश्चात इसमें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो राम राय ाबाखिक अविकत ह# और श्री दुल्लैया का नाम दर्ज मती दुल्लैया का नाम दर्ज गौरी दुल्लैया का नाम दर्ज $ु#या माता राम राय उसक( सरधिक्षका अविकत ह#। इसके पश्चात 1347 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो श्रमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा$ु#या का ाम राम राय मृतक क( &गह अविकत हुआ क्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि कीविक श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&$ु#या उसक( बा ह# परन्तु उसक साथ श्री दुल्लैया का नाम दर्ज मती दुल्लैया का नाम दर्ज गौरी दुल्लैया का नाम दर्ज वि ा माता$ी दुल्लैया का नाम दर्ज का ाम अविकत हो गया &ो गत ह#। इसके पश्चात क्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि कीविक अविकत ात$ारा राम राय क( मृत्यु क बा$ का ू उसक( &ाय& ारिरस रा&ा $ु#या होती दुल्लैया का नाम दर्ज ह#। इसके पश्चात श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज गौरी दुल्लैया का नाम दर्ज $ु#या उसक( मा थी दुल्लैया का नाम दर्ज इस खिय का ू बरासत क अ ुसार श्री दुल्लैया का नाम दर्ज मती दुल्लैया का नाम दर्ज गौरी दुल्लैया का नाम दर्ज $ु#या का ाम काग&ात में तनहा राज दुलैया का
नाम रहा जो मृतक राम राय क( बरासत में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो हीं था। प्रतिवादी $& हो ा 7ाविहए था। इसके पश्चात वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्ज कता ग; 7ुन्टा आवि$ का ाम ग 8 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो बतौर अधि ासी दुल्लैया का नाम दर्ज 1360 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो अविकत ह# और 1359 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो उ क ाम बतौर भिशकमी दुल्लैया का नाम दर्ज ग 19 मुद्दत बारह सा अविकत ह#। इसके पश्चात इसस यह &ाविहर होता ह# विक वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्ज कताग; क साथ भिशकविमया ा बन्$ोबस्त 1347-48 फ0 क( ओर विकया गया था &ब विक श्री दुल्लैया का नाम दर्ज मती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा $ु#या बा हो 7ुक( थी दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके पश्चात श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा $ु#या क( ओर स एक कबूखियत 1348 फ0 $ाखि क( गयी दुल्लैया का नाम दर्ज ह# उसस भी दुल्लैया का नाम दर्ज यह साविबत होता ह# विक वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्जकताग; को विावि$त भूविम काश्त कर क खिय 1348 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो $ी दुल्लैया का नाम दर्ज गयी दुल्लैया का नाम दर्ज थी दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके पश्चात इस तरह स भिशकविमया ा काश्त $ क समय श्री दुल्लैया का नाम दर्ज मती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा $ु#या तन्हा विावि$त भूविम क( काश्तकार थी दुल्लैया का नाम दर्ज और बा थी दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके पश्चात क तौ ी दुल्लैया का नाम दर्ज 1359 फ0 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो भी दुल्लैया का नाम दर्ज श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा $ु#या का त हा ाम विावि$त भूविम पर अविकत ह#। इसके पश्चात श्री दुल्लैया का नाम दर्ज मती दुल्लैया का नाम दर्ज गौरी
दुल्लैया का नाम दर्ज $ु#या क( मृत्यु 1951 में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो हुई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी थी दुल्लैया का नाम दर्ज और 7ूँ जैसा देखते हैं बयानविक उसका ाम रासत गत $& विकया गया था इसखिय उसक मर क पश्चात रा श्याम आवि$ &ो श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज गौरी दुल्लैया का नाम दर्ज $ु#या क( शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज शु$ा ड़विकयों ने अब कहा कि विवादित भूमि की क पुत्र हैं बयान उ क ाम भी दुल्लैया का नाम दर्ज श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा$ु#या क होत हुय गत $& विकय गय। इसके पश्चात 5 वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्जकताग; क( ओर स यह भी दुल्लैया का नाम दर्ज बहस क( गयी दुल्लैया का नाम दर्ज विक श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा$ु#या राम राय क( मृत्यु क उपरान्त $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज पन्ना ा क साथ कर ी दुल्लैया का नाम दर्ज थी दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके पश्चात श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा$ु#या #श्य &ाधित क( ह# तथा पन्ना ा &ाधित का कायस्थ ह# और इस तरह स $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज का कथ जिसद्ध करने के असफल रहे हैं कर क खिय वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्ज कताग; को अधितविश्वास ी दुल्लैया का नाम दर्जय साक्ष्य प्रस्तुत कर ा 7ाविहए था परन्तु उ क( ओर स इस तथ्य को जिसद्ध करने के असफल रहे हैं कर क खिय क एक गाह कू बा ामक पश विकया गया। इसके पश्चात उस भी दुल्लैया का नाम दर्ज अप बया में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो कहा ह# विक श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा $ु#या क( आश ाई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी पन्नाा स थी दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके पश्चात उस
यह भी दुल्लैया का नाम दर्ज कहा ह# विक पन्ना ाा शा$ी दुल्लैया का नाम दर्जशु$ा ह# और $ूसरी दुल्लैया का नाम दर्ज शा$ी दुल्लैया का नाम दर्ज 17,18 W पह हुई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी थी दुल्लैया का नाम दर्ज। इसके पश्चात वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्ज कताग; क( ओर स इस तथ्य को जिसद्ध करने के असफल रहे हैं कर क खिय कु टुम्ब रजि&स्टर क( क $ाखि क( गयी दुल्लैया का नाम दर्ज ह#। इसके पश्चात जि&समें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा$ु#या का ाम भी दुल्लैया का नाम दर्ज पन्ना ा क कु टुम्ब में तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो अविकत ह# परन्तु इसक विपरी दुल्लैया का नाम दर्जत श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा $ु#या क( तरफ स मत$ाता सू7ी दुल्लैया का नाम दर्ज क( क प्रस्तुत क( गयी दुल्लैया का नाम दर्ज ह# जि&समें तनहा राज दुलैया का नाम रहा जो रा&ा $ु#या क पधित का ाम राम राय अविकत ह# वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्जकताग; क( ओर स कोई औचित्य नहीं था। प्रतिवादी ठोस सबूत पु र्विाह साविबत कर क खिय हीं था। प्रतिवादी साविबत विकया गया ह# इसखिय उ क इस कथ को हीं था। प्रतिवादी मा ा &ा सकता ह#। इसके पश्चात पत्राी दुल्लैया का नाम दर्ज पर उपब् साक्ष्य स यह भी दुल्लैया का नाम दर्जभाधित प्रमाभि;त होता ह# विक &मी दुल्लैया का नाम दर्ज उठात समय और &मीं था। प्रतिवादी$ारी दुल्लैया का नाम दर्ज वि ास क( तारी दुल्लैया का नाम दर्ज पर श्री दुल्लैया का नाम दर्जमती दुल्लैया का नाम दर्ज रा&ा $ु#या वि ा थी दुल्लैया का नाम दर्ज इसखिय वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्जकता उसक आसामी दुल्लैया का नाम दर्ज थ उसक अधि ासी दुल्लैया का नाम दर्ज तथा उसक बा$ सी दुल्लैया का नाम दर्जर$ार हीं था। प्रतिवादी हो सकत हैं बयान।
इसके पश्चात उपरो वि7 ा ुसार मैं बयान इस वि ष्कW पर पहुँ जैसा देखते हैं बयान7ा हूँ जैसा देखते हैं बयान विक अ$ात अपी दुल्लैया का नाम दर्ज अप ा आ$श सही दुल्लैया का नाम दर्ज तथ्यों ने अब कहा कि विवादित भूमि की पर पारिरत विकया ह#। इसके पश्चात मैं बयान उ क आ$श स ” सहमत हूँ जैसा देखते हैं बयान। इसके पश्चात इसखिय वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्जकताग; क( वि गरा ी दुल्लैया का नाम दर्ज वि रस्त क( &ाती दुल्लैया का नाम दर्ज ह#। इसके पश्चात 7. Aforesaid orders dated 19.07.1975 and 25.02.1977 are impugned in present writ petition. 8. Sri Pradeep Kumar, Advocate holding brief of Sri Dhiraj Srivastava, learned counsel for petitioners has submitted that a well reasoned order passed by Consolidation Officer was lightly interfered by the S.O.C. and said error was not cured by D.D.C. in revision. Name of original petitioner-1, 2 and father of original petitioner-3 were recorded as sirdar and after death of Ram Narayan, husband of original respondent-4, she got remarried with one Panna Lal and as such her claim on disputed plots were extinguished. 9. He has further submitted that original respondent-4 has filed a suit against objectors, however, suit was withdrawn, therefore, 6
objectors remained in possession and were rightly recorded as sirdars. 10.
Learned counsel has referred findings returned by Consolidation Officer that respondents have failed to show any irregularity when the objectors were recorded as sirdars as well as that they have not taken any remedy to get their names expunged which also goes adverse to interest of respondents.
11.
Learned counsel has also submitted that Consolidation Officer has taken note of statements made by witnesses Rameshwar and Krishna Kumar and rejected being contrary. 12. Per contra, Sri Ram Kishore Gupta, learned counsel for respondents has submitted that an erroneous order passed by the Consolidation Officer was rightly interfered in appeal which was rightly upheld in revision. Name of original respondent-4 was rightly recorded after death of her husband. The petitioners were not able to prove that said respondent got remarried after death of her husband. No adverse effect would fall when the suit U/s 210 of U.P. Revenue Code, 2006 filed by original respondent-4 and others were withdrawn since no decree was passed in favour of petitioners. No order was shown how the names of petitioners or other respondents were recorded. 13. Heard learned counsel for parties and perused the records. 14. As referred above, in present case, the order passed by Consolidation Officer was set aside in appeal and challenge to it was rejected in revision. It is not much disputed that disputed plots were initially in the name of Ram Narayan and original respondent-4 was his wife and therefore, her name was rightly recorded. An argument that after his death, original respondent-4 7
got remarried to one Panna Lal does not have any legal basis since same was rejected with reasons not only by S.O.C. but by D.D.C. also. Aforesaid findings were based on documents such as voter list, etc. 15. Original petitioners were failed to show any order or manner under which their names were recorded as sirdar. So far as claim based on adverse possession is concerned, it was also not proved and in this regard, Court takes note of a judgment of this Court, placed by learned counsel for respondents, passed in Daya Shankar and another vs. Board of Revenue and others, 2024:AHC:165549. 16. A challenge to a finding that adverse effect would fall in favour of petitioners as the suit filed by respondents U/s 210 of Code, 2006 was withdrawn was also rejected with reasons by the S.O.C. as well as D.D.C. since no decree was passed in favour of original respondents. No perversity is shown
17. In aforesaid circumstances, Court is of the view that concurrent findings given by the S.O.C. as well as D.D.C. does not require any interference since same were based on documents and well settled legal propositions. 18.
Accordingly, writ petition lacks merit, hence, dismissed. Writ B No. 29162/2016
19. This writ petition is filed against the impugned order dated 31.03.2016 passed in Revision No. 90/140 of 2015 only on a ground that leading Writ B No. 1405/1977 was pending
consideration before this Court. 8
20. Now, leading writ petition has been dismissed vide present
order, therefore, legal impediment mentioned in impugned order dated 31.03.2016 passed in Revision No. 90/140 of 2015 is removed.
21. Accordingly, impugned order dated 31.03.2016 is set aside and matter is remitted back to concerned respondents to decide the same afresh after hearing rival parties.
22. Writ petition stands disposed of with above observations.
Order Date :- July 08, 2025 N. Sinha [Saurabh Shyam Shamshery, J.] 9 Digitally signed by :- NIRMAL SINHA High Court of Judicature at Allahabad