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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 36519 (ALL)
RAJENDRA SUBBA NAYADU v. STATE OF U.P.
BAIL/11066/2025 · 2025-07-24
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 36519 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:122767 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 11066 of 2025 Applicant :- Rajendra Subba Nayadu Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Vivek Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Rajendra Subba Nayadu ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 306/2022, अवंतररत धिद्वारद्वा 420, 409, 467, 468, 471, 120-बली. भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा दवेवरवनयद्वा, धजलद्वा बरवेलली मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै, उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक प्रथम सझूचनद्वा ररपकोरर मम नद्वावमत अवभयसुक नहहीं हहै , ददौरद्वान ववववेचनद्वा आववेदक कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा। वतरमद्वान घरनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकली नहहीं हहै। आववेदक कवं पनली कद्वा ण्डिद्वायरवेक्रर/महैनवेधजवंर ण्डिद्वायरवेक्रर नहहीं हहै। आववेदक कको रवंधजशन वतरमद्वान वद्वाद मम वमथ्यद्वारकोवपत वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रद्वाथवमककी अत्यवंत ववलम्ब सवे दजर करद्वायली रयली हहै तथद्वा उसमम घरनद्वा कद्वा वदनद्वावंक एववं समय स्पष्ट नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान वद्वाद दलीवद्वानली प्रकक वत कद्वा हहै , वकन्तसु जद्वान- बझूझकर इसवे आपरद्वाधधिक रूप वदयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पझूवर कवे आपरद्वाधधिक इवतहद्वासस कको शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 19 मम स्पष्ट वकयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान वद्वाद मम नद्वावमत मसुख्य सह - अवभयसुक Morimisety Pandu @ Balaji Vasudevan @ Ramlingam ककी जमद्वानत दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 38040/2023, आदवेश वदनद्वावंवकत 31.10.2023 कको स्वलीकक त हको चसुककी हहै। अततः जमद्वानत प्रद्वाप्त सह-अवभयसुक सवे कमतर भझूवमकद्वा हकोनवे कवे आधिद्वार पर आववेदक भली जमद्वानत प्रद्वाप्त करनवे कद्वा अधधिकद्वारली हहै। पसुनतः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 27.07.2023 सवे
कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4.
ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यस एववं पररणस्थवतयस कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतस ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
6. अततः वद्वाद कवे रसुर -दकोष पर वबनद्वा ककोई वरप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष्ट पर व्यवकरत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यस कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकयस व पलीवड़तद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशस कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीकर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यस सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररयस कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा , धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यस कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 25.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad