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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 36512 (CHH)

DIPAK SHARMA v. THE STATE OF CHHATTISGARH

CRMP/2351/2025 · 2025-07-28

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 4 (Cr. M. P. No.-2351 of 2025) 2025:CGHC:36749 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क्रमां%क -2351 /2025 1. दा पुक शमां" तिपु-तिलकरज शमां", उम्र-लगभग 50 वेर्ष", ति2वेस -तिशवेमां सन्दारमां क3ल42 , तिवेति2 सड़ी स6टर क पु छ, वे" स%ख्या-10, तिछ%दावेड़ी, मांध्या प्रदाश । -----यातिचकक"/अतिभयाक्त तिवेरूद्घ 1. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार मांति@ल था2, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ 2. रूतिच शमां" पुति-दा पुक शमां", उम्र-लगभग 44 वेर्ष", ति2वेस -मांक2 स%ख्या-08/ए, र4 2म्र-2, सक्टर-9, तिभलई, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ (तिशकयाक"/अतिभया4क्त्री ) -----उत्तीरवेदा गर्ण यातिचकक"/अतिभयाक्त द्वार : श्री अण्डिOवे2 पुति2कर, अजिPवेक्त । उत्तीरवेदा क्रमां%क-1 द्वार : श्री तिवेवेक शमां", पुQ2ल अजिPवेक्त । उत्तीरवेदा क्रमां%क-2 द्वार : क4ई उपुण्डिRथा 2@S । मां22 या न्यायामांTति" श्री स%जया क मांर जयासवेल , न्यायाP श !! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 29/07/2025 1. भर या 2गरिरक सरक्षा स%ति@, 2023 क Pर-528 क @ प्रR इस यातिचक मां6 यातिचकक"/अतिभयाक्त द्वार पु2र क्षार्ण न्यायालया-तिद्वा या अपुर सत्री न्यायाP श, दाग", POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.07.30 10:24:40 +0530 2 / 4 (Cr. M. P. No.-2351 of 2025) जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ द्वार दाण्डिक प्रकरर्ण क्रमां%क-131/2025 “दा पुक शमां" तिवेरूद्घ रूतिच शमां"" मां6 पुरिर आदाश तिदा2%क-04/07/2025 क4 च2^ दा गई @Q, जिजसक @ यातिचकक"/अतिभयाक्त द्वार पुरिरस मां अजिPति2यामां, 1963 क Pर-5 क अ%ग" प्रR तिवेल% क्षामां आवेदा2 क4 अRवे कर कर @`ए, उसक द्वार प्रR पु2र क्षार्ण आवेदा2 क4 भ ति2रR कर तिदाया गया @Q । 2. उक्त पु2र क्षार्ण आवेदा2 क @ यातिचकक"/अतिभयाक्त 2 तिवेचरर्ण न्यायालया-न्यातियाक मांजिजRटaट प्रथामां श्रीर्ण , दाग", जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ द्वार दाण्डिक प्रकरर्ण क्रमां%क- 3704/2024 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ दा पुक शमां"" मां6 पुरिर आदाश तिदा2%क- 16/05/2024 क4 च2^ दा था , जिजसक @ यातिचकक"/अतिभयाक्त क तिवेरूद्घ तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार भर या दा स%ति@ क Pर 498-ए क अ%ग" आर4पु क रच2 क गई था । 3. पु2र क्षार्ण न्यायालया-तिद्वा या अपुर सत्री न्यायाP श, दाग", जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ द्वार प्रO2P 2 आदाश मां6 उल्लेख तिकया तिक पु2र क्षार्ण आवेदा2 प्रRति मां6 कर 238 तिदावेस क तिवेलम् @`आ @Q, जिजस तिवेलम् क अतिभयाक्त पुक्षा द्वार क4ई सद्भातिवेक करर्ण प्रR 2@S तिकया गया । इसजिलए, पुरिरस मां अजिPति2यामां, 1963 क Pर-5 क अ%ग" प्रR तिवेलम् क्षामां आवेदा2 ति2रR कर @`ए, पु2र क्षार्ण आवेदा2 भ ति2रR कर तिदाया गया । 4. यातिचकक"/अतिभयाक्त क तिवेद्वा2 अजिPवेक्त क क" @Q तिक आर4पु रच2 क पुOच यातिचकक" क मां-तिपु क RवेRथ्या ठ क 2@S @42 क करर्ण उ2क ति2र%र उपुचर चल र@ था तिदा2%क-20/09/2024 क4 यातिचकक"/अतिभयाक्त क मां क ति2P2 @4 गया । सथा @ , Rवेया% यातिचकक"/अतिभयाक्त क RवेRथ्या भ ठ क 2@S र@, 3 / 4 (Cr. M. P. No.-2351 of 2025) इ2 करर्णf स पु2र क्षार्ण आवेदा2 प्रRति मां6 तिवेलम् @`आ । अg उक्त पुरिरण्डिRथातियाf मां6 तिवेलम् क4 क्षामां कर पु2र क्षार्ण न्यायालया क4 ति2दाhतिश तिकया जए तिक उसक द्वार प्रR पु2र क्षार्ण आवेदा2 क ति2रकरर्ण गर्ण-दा4र्ष पुर तिकया जए । 5. रज्या/उत्तीरवेदा पुक्षा क तिवेद्वा2 अजिPवेक्त 2 इस यातिचक क तिवेर4P कर @`ए क@ @Q तिक यातिचकक"/अतिभयाक्त पुक्षा द्वार उठए गए क" Rवे कर या4ग्या 2@S @Q । "प्रO2P 2 आदाश" उतिच और वेQP @Q । अg या@ यातिचक खरिरज क जए । 6. उभयापुक्षा क क" श्रीवेर्ण तिकया गया था अतिभलख क पुरिरश ल2 तिकया गया । 7. मां22 या उच्चमां न्यायालया द्वार न्यायादृष्टां% Mool Chandra v. Union of India (2025) 1 SCC 625 मां6 प्रतिपुतिदा तिकया गया @Q तिक ज तिवेलम् क ’पुया"प्त करर्ण’ दाश"या गया @4 4 तिवेल% क अवेजिP च@ जिज2 भ अजिPक @4, उस क्षामां तिकया ज सक @Q । कण्डिक-20 मां6 ति2म्22सर अवेPरिर तिकया गया @Qg- “20. Be that as it may. On account of liberty having been granted to the appellant to pursue his remedy in accordance with law, yet another O.A. No.2066 of 2020 along with an application for condonation of delay came to be filed. The delay was not condoned by the Tribunal on the ground that it was filed more than one year after the impugned order came to be passed. No litigant stands to benefit in approaching the courts belatedly. It is not the length of delay that would be required to be considered while examining the plea for condonation of delay, it is the cause for delay which has been propounded will have to be examined. If the cause for delay would fall within the four corners of “sufficient cause”, irrespective of the length of delay same deserves to be condoned. However, if the cause shown is insufficient, irrespective of the period of delay, same would not be condoned.” 4 / 4 (Cr. M. P. No.-2351 of 2025) 8. यातिचकक" द्वार अपु2 पुक्षा समांथा"2 मां6 Rवेया% क सथा-सथा मां कमांलश था तिपु तिलकरज क उपुचर स%%P दाRवेज स%लग्न तिकया @p । सथा @ मां कमांलश क मांqत्या प्रमांर्ण पुत्री भ स%लग्न तिकया @Q । इ2 दाRवेज़ोंf क4 दृतिष्टांग रख @`ए यातिचकक" क तिवेल% सद्भातिवेक वे पुया"प्त दातिश" @4 @Q । इस अवेRथा मां6 उसक द्वार प्रR पु2र क्षार्ण क ति2रकरर्ण गर्णदा4र्ष पुर @42 चति@ए । 9. अg या@ यातिचक प्रर%तिभक Rर पुर Rवे कर क ज @Q । 10. पु2र क्षार्ण न्यायालया-तिद्वा या अपुर सत्री न्यायाP श, दाग", जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ द्वार पुरिर प्रO2P 2 आदाश तिदा2%क-04/07/2025 क4 अपुR कर @`ए यातिचकक"/अतिभयाक्त द्वार प्रR तिवेलम् क्षामां क आवेदा2 अ%ग" Pर-5 पुरिरस मां अजिPति2यामां Rवे कर तिकया ज @Q । पु2र क्षार्ण न्यायालया क4 ति2दाhतिश तिकया ज @Q तिक दाण्डिक पु2र क्षार्ण क्रमां%क- 131/25 क ति2रकरर्ण उभयापुक्षा क4 स2 जकर तिवेजिP अ2सर श घ्रपुTवे"क तिकया जए । 11. यातिचकक"/अतिभयाक्त पुक्षा क4 ति2दाhतिश तिकया ज @Q तिक वे@ तिदा2%क-13/08/2025 क4 पु2र क्षार्ण न्यायालया क समांक्षा आवेOयाक कया"वे@ @ उपुण्डिRथा र@6 । 12. उपुर4क्त2सर, इस दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क ति2रकरर्ण तिकया ज @Q । 13. रजिजRटa क4 ति2दाhतिश तिकया ज @Q तिक इस आदाश क प्रतिजिलतिपु याथाश घ्र तिवेचरर्ण न्यायालया था पु2र क्षार्ण न्यायालया क4 सTच2था" वे पुल2था" प्रतिर्ष क जए । स@ /- (स%जया क मांर जयासवेल) न्यायाP श पो मन