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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 35819 (CHH)

AVINASH PRADHAN v. STATE OF CHHATTISGARH

CRMP/2396/2025 · 2025-07-31

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 (Cr. M. P. No.-2396 of 2025) 2025:CGHC:37838 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क्रमां%क -2396 /2025 1. अतिवेनाश प्रधाना तिपु-रजक मांर प्रधाना, उम्र-लगभग 21 वेर्ष", तिनावेस -ग्रामां लकपुर, पुलिलस थाना-सरिरया, लिजल-सर%गढ़-तिलईगढ़, छत्ती सगढ़ -----यातिचकक"/अतिभयाक्त तिवेरूद्घ 1. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार थाना प्रभर , पुलिलस थाना-सरिरया, लिजल-सर%गढ़-तिलईगढ़, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा /रज्या यातिचकक"/अतिभयाक्त द्वार : श्री अतिनारूद्घ अग्रावेल, अलिधावेक्त । रज्या/उत्तीरवेदा द्वार : श्री मां नाC शमां", पुDनाल अलिधावेक्त । मांनाना या न्यायामांCति" श्री स%जया क मांर जयासवेल , न्यायाधा श !! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 01/08/2025 1. उभयापुक्ष कJ प्रर%तिभक स्र पुर सना गया । 2. भर या नागरिरक सरक्ष स%तिL, 2023 क धार-528 क L प्रस् इस यातिचक मांN, तिवेचरर्ण न्यायालया-तिवेशर्ष न्यायाधा श {अनासCतिच जति एवे% अनासCतिच POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.08.04 10:21:04 +0530 2 / 6 (Cr. M. P. No.-2396 of 2025) जनाजति (अत्याचर तिनावेरर्ण) अलिधातिनायामां, 1989 क L गतिठ न्यायालया, लिजस आग स%क्षपु मांN "तिवेशर्ष अलिधातिनायामां" स स%Jलिधा तिकया ज रL LD}, रयागढ़, लिजल-रयागढ़, छत्ती सगढ़ द्वार तिवेशर्ष दाण्डिक प्रकरर्ण क्रमां%क-27/2022 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ अतिवेनाश प्रधाना वेगDरL" मांN पुरिर आदाश तिदाना%क-11/06/2025 क उस अ%श कJ चनाX दा गई LD, लिजसक L यातिचकक"/अतिभयाक्त क धार-311 दा प्रतिक्रया स%तिL, 1973 क L प्रस् आवेदाना, प्रथाY अशJक चXLना क पुनाZ प्रतिपुर क्षर्ण L, अस्वे कर कर तिनारस् कर तिदाया गया । लिजस आग स%क्षपु मांN "प्रश्नाधा ना आदाश" स स%Jलिधा तिकया ज रL LD । 3. यातिचकक"/अतिभयाक्त अतिवेनाश प्रधाना पुर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अ%ग" धार-294, 506, 323, 326 सLपुतिठ धार-34 भर या दा स%तिL, 1860 एवे% धार-3 (1) (दा)(धा) तिवेशर्ष अलिधातिनायामां क L थाना-सरिरया, लिजल-रयागढ़, छत्ती सगढ़ क अपुरधा क्रमां%क-173/2022 मांN एक सL अतिभयाक्त क सथा तिवेचरर्ण ल%ति LD । 4. यातिचकक"/अतिभयाक्त ना तिवेचरर्ण न्यायालया क समांक्ष अ%ग" धार-311 दा प्रतिक्रया स%तिL क अ%ग" याL आवेदाना प्रस् तिकया तिक अतिभयाJजना सक्ष्या क दाXरना क छ ऐस थ्या उभर कर आए L`, लिजन्LN प्रथाY अशJक चXLना क समांक्ष रखकर उसक पुनाZ प्रतिपुर क्षर्ण करया जना न्यातियाक दृतिcकJर्ण स आवेश्याक LD, लिजसस प्रकरर्ण मांN पुCर्ण" सत्या और न्याया क स्थापुना सतिनाण्डिश्च LJ सक । 5. यातिचकक"/अतिभयाक्त क तिवेद्वाना अलिधावेक्त क क" LD तिक प्रथाY अशJक चXLना कJ जJ चJटेंN आई%, उसक स%%धा मांN तिवेवेचक छJटेंलल लिसदार सLयाक उपुतिनार क्षक (अ०स०-10); एस. .ओ.पु . प्रभ पुटेंल (अ०स०-11); तिचतिकत्सक आर०एना० मां%वे (अ०स०- 3 / 6 (Cr. M. P. No.-2396 of 2025) 07) क पुर क्षर्ण मांN आए थ्याj क प्रथाY अशJक चXLना स स्पुc करया जना आवेश्याक LD । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार उक्त आवेदाना कJ तिनारस् तिकया जना न्याया क दृतिc स त्रुतिटेंपुCर्ण" LD, था प्रथाY अशJक चXLना क पुनाZ प्रतिपुर क्षर्ण न्यायास%ग तिनार्ण"या क लिलए आवेश्याक LD । अZ "प्रश्नाधा ना आदाश" कJ अपुस् कर उक्त सतिक्षयाj कJ पुनाZ प्रतिपुर क्षर्ण L आLl तिकया जए । 6. रज्या/उत्तीरवेदा पुक्ष क तिवेद्वाना अलिधावेक्त ना इस यातिचक क तिवेरJधा कर Lmए कL LD तिक यातिचकक"/अतिभयाक्त पुक्ष द्वार उठए गए क" स्वे कर याJग्या नाLo LD । "प्रश्नाधा ना आदाश" उतिच और वेDधा LD । अZ याL यातिचक खरिरज क जए । 7. उभयापुक्ष क क" श्रीवेर्ण तिकया गया था अतिभलख क पुरिरश लना तिकया गया । 8. अतिभलख क पुरिरश लना स याL स्पुc LD तिक प्रथाY अशJक चXLना क न्यायालया ना याना तिदाना%क-16/08/2023 कJ दाज" तिकया गया । सक्ष तिवेवेचक, एस. .ओ.पु . और तिचतिकत्सक जJ तिवेशर्षज्ञ सक्ष या तिवेवेचक L` उनाक पुर क्षर्ण पुश्च मांN Lmआ LD । 9. यातिचकक" क तिवेद्वाना अलिधावेक्त स पुCछ जना पुर याL स्पुc नाLo कर सक तिक तिवेशर्षज्ञ सक्ष अथावे तिवेवेचक क सक्ष्या क आलJक मांN प्रथाY क पुनाZ प्रतिपुर क्षर्ण करए जना क कJई न्यायास%ग आधार मांXजCदा LD । अतिभयाक्त कJ आरJपु गठना क पुCवे" अतिभयाJग पुत्रु क प्रति उपुलब्धा LJ LD, लिजसस उस सतिक्षयाj क प्रतिपुर क्षर्ण मांN समांतिच प्रश्ना पुCछना क अवेसर रL LD । प्रथाY क याना क स%दाभ" मांN यातिदा कJई तिवेर्षया स्पुc करना LJ J उस तिवेवेचक अथावे तिवेशर्षज्ञ सतिक्षयाj स पुCछ ज सक LD । पुर%, उनाक सक्ष्या क आधार पुर प्रथाY कJ पुनाZ ल कर प्रतिपुर क्षर्ण क अनामांति दाना न्यायास%ग पुरिरलतिक्ष नाLo LJ । 4 / 6 (Cr. M. P. No.-2396 of 2025) 10. M. P. No.-2396 of 2025) 10. मांनाना या उच्चमां न्यायालया द्वार Natasha Singh v. CBI (State), 2013 (5) SCC 741 क कण्डिक 15 मांN याL स्पुc तिकया गया LD तिक दा प्रतिक्रया स%तिL क धार-311 क उद्देश्या याL LD तिक न्यायालया समांस् प्रस%तिगक थ्याj कJ प्रकश मांN लकर सच्चई क पुLmsच था प्रकरर्ण मांN न्यायास%ग तिनार्ण"या प्रदाना कर सक । थातिपु, इस अलिधाकर क प्रयाJग क वेल वेDधा, ठJस एवे% न्यायाJतिच करर्णj क आधार पुर L तिकया जना चतिLए, वेL भ अत्या% सवेधाना एवे% तिवेवेकपुCर्ण" ढं%ग स । याL प्रवेधाना ना J अतिभयाJजना अथावे प्रतिरक्ष पुक्ष क कतिमांयाj क पुCति" L LD, और ना L तिकस पुक्ष कJ अनातिच लभ अथावे प्रतिपुक्ष कJ प्रतिकC ल प्रभवे पुLmsचना क लिलए । कJई भ सक्ष्या भ स्वे कर तिकया जना चतिLए ज वेL न्याया क पुCर्ण" क लिलए तिना% आवेश्याक LJ एवे% उसक तिना प्रकरर्ण क तिनाष्पुक्ष तिनार्ण"या स%भवे ना LJ । इस स%%धा मांN कण्डिक-15 मांN मांनाना या सवेvच्च न्यायालया द्वार तिनाम्नानासर मांग"दाश"ना प्रदाना तिकया LDZ- “15. The scope and object of the provision is to enable the Court to determine the truth and to render a just decision after discovering all relevant facts and obtaining proper proof of such facts, to arrive at a just decision of the case. Power must be exercised judiciously and not capriciously or arbitrarily, as any improper or capricious exercise of such power may lead to undesirable results. An application under Section 311 Cr.P.C. must not be allowed only to fill up a lacuna in the case of the prosecution, or of the defence, or to the disadvantage of the accused, or to cause serious prejudice to the defence of the accused, or to give an unfair advantage to the opposite party. Further, the additional evidence must not be received as a disguise for retrial, or to change the nature of the case against either of the parties. Such a power must be exercised, provided that the evidence that is likely to be tendered by a witness, is germane to the issue involved. An opportunity of rebuttal however, must be given to the other party. The power 5 / 6 (Cr. M. P. No.-2396 of 2025) conferred under Section 311 Cr.P.C. must therefore, be invoked by the Court only in order to meet the ends of justice, for strong and valid reasons, and the same must be exercised with great caution and circumspection. The very use of words such as ‘any Court’, ‘at any stage”, or ‘or any enquiry, trial or other proceedings’, ‘any person’ and ‘any such person’ clearly spells out that the provisions of this section have been expressed in the widest possible terms, and do not limit the discretion of the Court in any way. There is thus no escape if the fresh evidence to be obtained is essential to the just decision of the case. The determinative factor should therefore be, whether the summoning/ recalling of the said witness is in fact, essential to the just decision of the case.” 11. मांनाना या सवेvच्च न्यायालया द्वार Swapan Kumar Chatterjee v. CBI, (2019) 14 SCC 328 मांN याL स्पुc तिकया LD तिक दा प्रतिक्रया स%तिL क धार-311 क अ%ग" प्रदात्ती शतिक्त क प्रयाJग न्यायालया द्वार क वेल न्याया क तिL मांN तिकया जना चतिLए । याL शतिक्त क वेल ठJस एवे% वेDधा करर्णj पुर आधारिर LJना चतिLए और इसक प्रयाJग अत्या% सवेधाना एवे% तिवेवेकपुCवे"क तिकया जना अपुतिक्ष LD । अतिभयाक्त क इच्छ या मांनामांना क आधार पुर इस धार क प्रयाJग नाLo तिकया ज सक । इस स%%धा मांN कण्डिक-11 प्रस%तिगक LD, जJ तिनाम्नानासर LD:- "11. It is well settled that the power conferred under Section 311 should be invoked by the court only to meet the ends of justice. The power is to be exercised only for strong and valid reasons and it should be exercised with great caution and circumspection. The court has wide power under this section to even recall witnesses for re-examination or further examination, necessary in the interest of justice, but the same has to be exercised after taking into consideration the facts and circumstances of each case. The power 6 / 6 (Cr. M. P. No.-2396 of 2025) under this provision shall not be exercised if the court is of the view that the application has been filed as an abuse of the process of law.” (Emphasis supplied) 12. उपुरJक्त न्यायादृc%j क प्रकश मांN, याद्यतिपु इस न्यायालया कJ भर या नागरिरक सरक्ष स%तिL, 2023 क धार 528 (जJ तिक दा प्रतिक्रया स%तिL क धार 482 क समांकक्ष LD) क अ%ग" अ%तिना"तिL शतिक्तयाs प्रप्त L`, थातिपु यातिचकक"/अतिभयाक्त द्वार प्रस् आवेदाना मांN प्रथाY अशJक चXLना क पुनाZ प्रतिपुर क्षर्ण L कJई ठJस या वेDधा करर्ण नाLo दाश"या गया LD । ऐस ण्डिस्थाति मांN, धार-311 दा प्रतिक्रया स%तिL (या .एना.एस.एस. क समांकक्ष धार-348) क अ%ग" प्रथाY अशJक चXLना कJ पुनाZ ल करना क अनामांति प्रदाना तिकया जना उतिच नाLo पुया ज । इसलिलए तिवेचरर्ण न्यायालया क "प्रश्नाधा ना आदाश" मांN तिकस Lस्क्षपु क आवेश्याक नाLo पुया ज । 13. अZ याL यातिचक प्रर%तिभक स्र पुर L खरिरज क ज LD । 14. रलिजस्टेंy कJ तिनादाzतिश तिकया ज LD तिक इस आदाश क प्रति याथाश घ्र तिवेचरर्ण न्यायालया कJ सCचनाथा" प्रतिर्ष तिकया जए । 15. उपुरJक्तनासर, इस दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क तिनारकरर्ण तिकया ज LD । सL /- (स%जया क मांर जयासवेल) न्यायाधा श पो मन