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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 35665 (CHH)

BHUNESHWAR VISHAVKARMA v. DOHAR (Dead)

CRMP/2375/2025 · 2025-07-31

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) 2025:CGHC:38150 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क्रमां%क -2375 /2025 1. भुवेनेश्वेर तिवेश्वेकमां" तिपु-स्वेग1या 2सखू4, उम्र-लगभुग 50 वेर्ष", तिनेवेस -जर%ग च8क, वे" स%ख्या-8, ग्रामां-छ%टा, हस ल-पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़, 2. रमांश्वेर तिवेश्वेकमां" तिपु-स्वेग1या 2सखू4, उम्र-लगभुग 40 वेर्ष", तिनेवेस -जर%ग च8क, वे" स%ख्या-8, ग्रामां-छ%टा, हस ल-पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़, 3. शी क मांर तिवेश्वेकमां" तिपु-स्वेग1या 2सखू4, उम्र-लगभुग 37 वेर्ष", तिनेवेस -वे" स%ख्या-1, इन्द्रानेगर, पुटाने, हस ल-पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़, 4. स% तिवेश्वेकमां" तिपु-स्वेग1या 2सखू4, उम्र-लगभुग 37 वेर्ष", तिनेवेस -वे" स%ख्या-1, जर%ग पुर, ज4नेवेने , दाग", जिजल-दाग", छत्ती सगढ़, 5. दाहD तिवेश्वेकमां" पुति-रमांक मांर, उम्र-लगभुग 43 वेर्ष", तिनेवेस -वे" स%ख्या-8, लEहर पुर, घुघुवे, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़, 6. तिशीवेवे तिवेश्वेकमां" पुति-स्वेग1या 2सखू4, उम्र-लगभुग 75 वेर्ष", तिनेवेस -जर%ग च8क, वे" स%ख्या-8, ग्रामां-छ%टा, हस ल-पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़, 7. कG ष्र्ण क मांर तिवेश्वेकमां" तिपु-ललरमां, उम्र-लगभुग 46 वेर्ष", तिनेवेस -जर च8क, वे" स%ख्या-40, जEर रई, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़, 8. जनेक ई तिवेश्वेकमां" पुति-नेथू4रमां, उम्र-लगभुग 58 वेर्ष", तिनेवेस -वे" स%ख्या-5, घुल , जिजल-दाग", छत्ती सगढ़, 9. तिवेमांल ई तिवेश्वेकमां" पुति-कन्ह2या, उम्र-लगभुग 50 वेर्ष", तिनेवेस -ग्रामां उई, हस ल-पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़, -----यातिचकक"गर्ण/अतिभुयाक्तगर्ण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.08.04 10:20:45 +0530 2 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) तिवेरूद्घ 1. Eहर तिपु-स्वेग1या मां%जिथूर टाने (मांG), 1 क श्री मां आरधने टाने पुति-स्वेग1या Eहर जिस%ह, उम्र-लगभुग 50 वेर्ष", 1 खू मांनेस टाने तिपु-स्वेग1या Eहर जिस%ह, उम्र-लगभुग 25 वेर्ष", 1 ग पुरूल टाने तिपु-स्वेग1या Eहर जिस%ह, उम्र-लगभुग 23 वेर्ष", 2. खूलने तिपु-स्वेग1या मां%जिथूर टाने, सभु तिनेवेस -ग्रामां छ%टा, हस ल-पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा गर्ण यातिचकक"गर्ण/अतिभुयाक्तगर्ण द्वार : श्री द्दरूदा ने, अजिधवेक्त । उत्तीरवेदा गर्ण द्वार : कEई उपुण्डिस्थू नेहX । मांनेने या न्यायामां4ति" श्री स%जया क मांर जयासवेल , न्यायाध शी !! आदाशी पु ठ पुर पुरिर !! 01/08/2025 1. भुर या नेगरिरक सरक्षा स%तिह, 2023 क धर-528 क ह प्रस् इस यातिचक मां], अपु ल या न्यायालया-अपुर सत्र न्यायाध शी, पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ द्वार दाण्डिक प्रकरर्ण क्रमां%क-275/2024 “भुवेनेश्वेर तिवेश्वेकमां" वेग2रह तिवेरूद्घ Eहर (मांG) वेग2रह" मां] पुरिर आदाशी तिदाने%क-05/04/2025 कE चने8 दा गई ह2 । 2. प्रकरर्ण क थ्या स%क्षापु मां] इस प्रकर ह2 तिक यातिचकक"गर्ण ने उत्तीरवेदा पुक्षा क तिवेरूद्घ व्यावेहर न्यायाध शी वेग"-1, पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ मां] व्यावेहरवेदा क्रमां%क-38/ 2018 वेस् घुEर्षर्ण, कब्ज़ा एवे% स्थूया तिनेर्षधज्ञा प्रस् तिकया । वेदा सक्ष्या क स्र पुर उत्तीरवेदा पुक्षा द्वार उनेक पु4वे"ज रमांचरर्ण द्वार तिदाने%क-26/06/1961 कE 3 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) तिनेष्पुतिदा तिवेक्रया तिवेलखू क प्रतिजिलतिपु प्रस् क गई । यातिचकक"गर्ण ने धर-340 दा प्रतिक्रया स%तिह क ह कया"वेह तिवेचरर्ण न्यायालया क समांक्षा इस आशीया क आवेदाने प्रस् तिकया तिक उत्तीरवेदा पुक्षा द्वार प्रस् तिकया गया तिदाने%क-26/06/1961 क तिवेक्रया तिवेलखू क4 टारतिच ह2 क्याjतिक उस तिवेक्रया तिवेलखू क फोEटाEकlपु क सत्यातिपु प्रतिजिलतिपु प्रस् क गई ह2 जतिक वेर्ष"-1961 मां] भुर वेर्ष" मां] फोEटाEकlपु मांशी ने ह नेहX थू ण्डिnक उस समांया हथू स ह जिलखूकर तिद्वा या प्रति 2यार क ज थू और उक्त तिवेक्रया तिवेलखू मां] पु4वे"ज रमांचरर्ण क हस्क्षार भु नेहX ह2 । इसजिलए फोज़ा1 और क4 टारतिच तिवेक्रया तिवेलखू क उत्तीरवेदा गर्ण क तिवेरूद्घ धर-199, 205, 471 सतिह भुर या दा स%तिह क अन्या धरओं% क ह कया"वेह क जए । जिजसपुर सनेवेई कर हqए तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपुने आदाशी तिदाने%क-10/08/2023 क ह उक्त आवेदाने कE तिनेरस् कर तिदाया गया । 3. उक्त तिनेरस् आदाशी तिदाने%क-10/08/2023 कE यातिचकक" पुक्षा द्वार दाण्डिक अपु ल क्रमां%क-275/2024 मां] चने8 दा गई । अपु ल या न्यायालया-अपुर सत्र न्यायाध शी, पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ द्वार सनेवेई पुश्च तिदाने%क-05/04/2025 क आदाशी क ह उक्त अपु ल खूरिरज कर दा गई और याह तिनेष्कतिर्ष" तिकया गया तिक इस स%%ध मां] तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार प्रकरर्ण क अ%तिमां तिनेरकरर्ण क स्र पुर उसक तिनेरकरर्ण तिकया ज सक ह2 जिजसक जिलए यातिचकक" पुक्षा सक्षामां न्यायालया क समांक्षा आवेदाने प्रस् करने ह स्वे%त्र ह2 । 4. यातिचकक" क तिवेद्वाने अजिधवेक्त क क" ह2 तिक व्यावेहर न्यायाध शी वेग"-1, पुटाने, जिजल-दाग", छत्ती सगढ़ क समांक्षा वेह व्यावेहर वेदा अ भु ल%ति ह2 । उनेक द्वार प्रस् 4 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) आवेदाने अ%ग" धर-340 दा प्रतिक्रया स%तिह क तिनेरकरर्ण अ%तिमां स्र पुर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार तिकया ज सक ह2 । अr तिवेचरर्ण न्यायालया क तिनेरस् और अपु ल या न्यायालया द्वार अपु ल तिनेरस् आदाशी कE अपुस् कर हqए तिवेचरर्ण न्यायालया कE तिनेदाsतिशी तिकया जए तिक उनेक आवेदाने अ%ग" धर-340 दा प्रतिक्रया स%तिह क तिनेरकरर्ण व्यावेहर प्रकरर्ण क अ%तिमां तिनेरकरर्ण क समांया तिकया जए । 5. यातिचकक" पुक्षा क क" श्रीवेर्ण तिकया गया थू अतिभुलखू क पुरिरशी लने तिकया गया । 6. धर-340 दा प्रतिक्रया स%तिह, 1973 क प्रवेधने तिनेम्नेनेसर ह2r- 340. धर 195 मां] वेतिर्ण" मांमांलj मां] प्रतिक्रया-(1) ज तिकस न्यायालया क , उसस इस तिनेतिमांत्ती तिकए गए आवेदाने पुर या अन्याथू, याह रया ह2 तिक न्याया क तिह मां] याह समां च ने ह2 तिक धर 195 क उपुधर (1) क खू (खू) मां] तिनेतिदा"ष्ट तिकस अपुरध क , जE उस, याथूण्डिस्थूति, उस न्यायालया क कया"वेह मां] या उसक सम्न्ध मां] अथूवे उस न्यायालया क कया"वेह मां] पुशी क गई या सक्ष्या मां] दा गई दास्वेज क र मां] तिकया हqआ प्र हE ह2, जwच क जने चतिहए ऐस न्यायालया ऐस प्रर%तिभुक जwच क पुश्चy यातिदा कEई हE, ज2स वेह आवेश्याक समांझे, -- (क) उस भुवे क तिनेष्कर्ष" अतिभुजिलजिखू कर सक ह2; (खू) उसक जिलजिखू पुरिरवेदा कर सक ह2; (ग) उस अजिधकरिर रखूने वेल प्रथूमां वेग" मांजिजस्टा|टा कE भुज सक ह2; (घु) ऐस मांजिजस्टा|टा क समांक्षा अतिभुयाक्त क हतिज़ार हEने क जिलए पुया"प्त प्रतिभु4ति ल सक ह2 अथूवे यातिदा अतिभुकजिथू अपुरध अजमांने या ह2 और न्यायालया ऐस करने आवेश्याक समांझे 5 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) ह2, E अतिभुयाक्त कE ऐस मांजिजस्टा|टा क पुस अतिभुरक्षा मां] भुज सक ह2; और (ङ) ऐस मांजिजस्टा|टा क समांक्षा हतिज़ार हEने और सक्ष्या दाने क जिलए तिकस व्यातिक्त कE आद्ध कर सक ह2 । (2) तिकस अपुरध क र मां] न्यायालया कE उपुधर (1) मां] प्रदात्ती शीतिक्त क प्रयाEग, ऐस मांमांल मां], जिजसमां] उस न्यायालया ने उपुधर (1) क अध ने उस अपुरध क र मां] ने E पुरिरवेदा तिकया ह2 और ने ऐस पुरिरवेदा क तिकए जने क जिलए आवेदाने कE नेमां%ज़ा4र तिकया ह2, उस न्यायालया द्वार तिकया ज सक ह2, जिजसक ऐस पु4वे"कजिथू न्यायालया धर 195 क उपुधर (4) क अथू" मां] अध नेस्थू ह2। (3) इस धर क अध ने तिकए गए पुरिरवेदा पुर हस्क्षार, -- (क) जहw पुरिरवेदा करने वेल न्यायालया उच्च न्यायालया ह2 वेहw उस न्यायालया क ऐस अजिधकर द्वार तिकए जए%ग, जिजस वेह न्यायालया तिनेयाक्त कर; [(खू) तिकस अन्या मांमांल मां], न्यायालया क पु ठस ने अजिधकर द्वार या न्यायालया क ऐस अजिधकर द्वार, जिजस तिक न्यायालया इस तिनेतिमांत्ती जिलजिखू मां] प्रजिधकG कर, तिकए जए%ग ।] (4) इस धर मां] "न्यायालया” क वेह अथू" ह2, जE धर 195 मां] ह2 । 7. धर-195 दा प्रतिक्रया स%तिह, 1973 क प्रवेधने तिनेम्नेनेसर ह2r- 195. लEक न्याया क तिवेरुद्ध अपुरधj क जिलए और सक्ष्या मां] तिदाए गए दास्वेजj स सम्ण्डिन्ध अपुरधj क जिलए लEक सवेकj क तिवेजिधपु4र्ण" प्रजिधकर क अवेमांने क जिलए अतिभुयाEजने-(1) कEई न्यायालया, -- (क) ( )i भुर या दा स%तिह (1860 क 45) क धर 172 स धर 188 क क धरओं% क (जिजनेक अन्ग" या दाEनेj धरए% भु ह2) अध ने दाने या तिकस अपुरध क; अथूवे 6 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) ( ) ii ऐस अपुरध क तिकस दाष्प्ररर्ण या ऐस अपुरध करने क प्रयात्ने क, अथूवे ( ) iii ऐस अपुरध करने क जिलए तिकस आपुरजिधक र्षड्यं%त्र क, स%ज्ञाने सम्द्ध लEक सवेक क , या तिकस अन्या ऐस लEक सवेक क , जिजसक वेह प्रशीसतिनेक 8र पुर अध नेस्थू ह2, जिलजिखू पुरिरवेदा पुर ह करग, अन्याथू नेहX; (खू) ( ) i भुर या दा स%तिह (1860 क 45) क तिनेम्नेजिलजिखू धरओं% अथू"y 193 स 196 (जिजनेक अन्ग" या दाEनेj धरए% भु ह…), 199, 200, 205 स 211 (जिजनेक अन्ग" या दाEनेj धरए% भु ह…) और 228 मां] स तिकन्हX क अध ने दाने या तिकस अपुरध क, ज ऐस अपुरध क र मां] याह अतिभुकजिथू ह2 तिक वेह तिकस न्यायालया मां] क कया"वेह मां] या उसक सम्न्ध मां] तिकया गया ह2; अथूवे ( ) ii उस स%तिह क धर 463 मां] वेतिर्ण" या धर 471, धर 475 या धर 476 क अध ने दाने या अपुरध क, ज ऐस अपुरध क र मां] याह अतिभुकजिथू ह2 तिक वेह तिकस न्यायालया मां] क कया"वेह मां] पुशी क गई सक्ष्या मां] दा गई तिकस दास्वेज क र मां] तिकया गया ह2; अथूवे ( ) iii उपुखू ( ) i या उपुखू ( ) ii मां] तिवेतिनेतिदा"ष्ट तिकस अपुरध कE करने क जिलए आपुरजिधक र्षड्यं%त्र या उस करने क प्रयात्ने या उसक दाष्प्ररर्ण क अपुरध क, स%ज्ञाने [ऐस न्यायालया क या न्यायालया क ऐस अजिधकर द्वार, जिजस वेह न्यायालया इस तिनेतिमांत्ती जिलजिखू मां] प्रजिधकG कर या तिकस अन्या न्यायालया क , जिजसक वेह न्यायालया अध नेस्थू ह2, जिलजिखू पुरिरवेदा पुर ह करग, अन्याथू नेहX ।] 7 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) 8. M. P. No.-2375 of 2025) 8. The Supreme Court (Constitution Bench) in the matter of Iqbal Singh Marwah and another v. Meenakshi Marwah and another, (2005) 4 SCC 370 has held that 'normally', a direction for filing of a complaint is not made during the pendency of the proceeding before the Court and this is done at the stage when the proceeding is concluded and the final judgment is rendered. It has also been held that as per the language of Section 340 of CrPC, the Court is not bound to make a complaint as the section is conditioned by the words "Court is of the opinion that it is expedient in the interests of justice". Paragraphs 23 and 24 of the report states as under :- "23. In view of the language used in Section 340 CrPC the court is not bound to make a complaint regarding commission of an offence referred to in Section 195(1) (b), as the section is conditioned by the words "court is of opinion that it is expedient in the interests of justice". This shows that such a course will be adopted only if the interest of justice requires and not in every case. Before filing of the complaint, the court may hold a preliminary enquiry and record a finding to the effect that it is expedient in the interests of justice that enquiry should be made into any of the offences referred to in Section 195(1)(b). This expediency will normally be judged by the court by weighing not the magnitude of injury suffered by the person affected by such forgery or forged document, but having regard to the effect or impact, such 8 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) commission of offence has upon administration of justice. It is possible that such forged document or forgery may cause a very serious or substantial injury to a person in the sense that it may deprive him of a very valuable evidence produced or given in evidence in court, where voluminous evidence may have been adduced and the effect of such piece of evidence on the broad concept of administration of justice may be minimal. In such circumstances, the court may not consider it expedient in the interest of justice to make a complaint. The broad view of clause (b)(ii), as canvassed by learned counsel for the appellants, would render the victim of such forgery or forged document remediless. Any interpretation which leads to a situation where a victim of a crime is rendered remediless, has to be discarded. 24. There is another consideration which has to be kept in mind. Sub-section (1) of Section 340 CrPC contemplates holding of a preliminary enquiry. Normally, a direction for filing of a complaint is not made during the pendency of the proceeding before the court and this is done at the stage when the proceeding is concluded and the final judgment is rendered. Section 341 provides for an appeal against an order directing filing of the complaint. The hearing and ultimate decision of the appeal is bound to take time. Section 343(2) confers a discretion upon a court trying the complaint to adjourn the hearing of the case if it is brought to its notice that an 9 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) appeal is pending against the decision arrived at in the judicial proceeding out of which the matter has arisen. In view of these provisions, the complaint case may not proceed at all for decades specially in matters arising out of civil suits where decisions are challenged in successive appellate fora which time-consuming. It is also to be noticed that there is no provision of appeal against an order passed under Section 343(2), whereby hearing of the case is adjourned until the decision of the appeal. These provisions show that, in reality, the procedure prescribed for filing a complaint by the court is such that it may not fructify in the actual trial of the offender for an unusually long period. Delay in prosecution of a guilty person comes to his advantage as witnesses become reluctant to give evidence and the evidence gets lost. This important consideration dissuades us from accepting the broad interpretation sought to be placed upon clause (b)(ii)." 9. The decision rendered in Iqbal Singh Marwah (supra) has been followed with approval by their Lordships of the Supreme Court in the matter of Rugmini Ammal v. V. Narayana Reddiar, (2007) 12 SCC 611. 10. उपुरEक्त तिवेजिधक प्रवेधनेj थू न्यायादृष्ट%j क पुरिरशी लने स याह ण्डिस्थूति स्पुष्ट हE ह2 तिक धर-199, 205, 471 भुर या दा स%तिह क अपुरधj क स%ज्ञाने उस न्यायालया क पुरिरवेदा पुर ह जिलया ज सक ह2 जिजस न्यायालया क समांक्षा तिवेचरर्ण या ज%च क दा8रने वेह अपुरध करिर तिकया गया हE । याह ण्डिस्थूति भु स्पुष्ट ह2 तिक धर-340 दा प्रतिक्रया 10 / 10 (Cr. M. P. No.-2375 of 2025) स%तिह क तिवेजिधक प्रवेधने अनेसर तिवेचरर्ण न्यायालया क रया क आधर पुर ह कया"वेह क ज ह2 और तिवेचरर्ण न्यायालया ज%च पुश्च ह रया कयामां कर ह2 । कजिथू व्यावेहरवेदा जिजसमां] तिमांथ्या सक्ष्या दाने क आधर जिलया गया ह2 उसक तिवेचरर्ण पु4र्ण" नेहX हqआ ह2 । ऐस ण्डिस्थूति मां], ज तिवेचरर्ण जर ह2 धर-340 दा प्रतिक्रया स%तिह क आवेदाने क तिनेरकरर्ण तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार कर तिदाया जने उतिच नेहX पुया ज ह2 ण्डिnक उस आवेदाने क तिनेरकरर्ण व्यावेहरवेदा क अ%तिमां तिनेरकरर्ण क सथू ह तिकया जने न्यायास%ग और उतिच हEग । 11. अr उपुरEक्त तिवेजिधक ण्डिस्थूति कE दृतिष्टग रखू हqए धर-340 दा प्रतिक्रया स%तिह क तिवेचरर्ण न्यायालया थू अपु ल या न्यायालया द्वार पुरिर आदाशी अपुस् तिकया ज ह2 । तिवेचरर्ण न्यायालया क समांक्षा यातिचकक" पुक्षा द्वार प्रस् धर-340 दा प्रतिक्रया स%तिह क आवेदाने उस रूपु मां] पुनेस्थू"तिपु तिकया ज ह2 एवे% तिवेचरर्ण न्यायालया कE तिनेदाsतिशी तिकया ज ह2 तिक धर-340 दा प्रतिक्रया स%तिह क आवेदाने क तिनेरकरर्ण व्यावेहरवेदा क अ%तिमां तिनेर्ण"या क सथू ह तिकया जवे] । 12. उपुरEक्तनेसर, इस दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क तिनेरकरर्ण प्रर%तिभुक स्र पुर तिकया ज ह2 । 13. रजिजस्टा| कE तिनेदाsतिशी तिकया ज ह2 तिक इस आदाशी क प्रतिजिलतिपु याथूशी घ्र तिवेचरर्ण न्यायालया कE स4चनेथू" एवे% अनेपुलनेथू" प्रतिर्ष तिकया जए । सह /- (स%जया क मांर जयासवेल) न्यायाध शी पो मन