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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 35579 (ALL)

UMESH KOLE v. STATE OF U.P.

BAIL/10796/2025 · 2025-07-21

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:119930 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 10796 of 2025 Applicant :- Umesh Kole Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Ram Suphal Shukla,Shivendra Shukla Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रिद्वाज्य ककी तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Umesh Kole ककी ओरि सवे मसु०अ०सवं० 141/2019, अवंतररत धिद्वारिद्वा 307, 504, 419, 420, 467, 468, 471 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा बद्वारिद्वा, धजलद्वा प्रयद्वाररिद्वाज मम जमद्वानत परि मसुक करिनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरिर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारिद्वा ऐसद्वा ककोई भदी कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रथम सझूचनद्वा ररिपकोरर ववलम्ब सवे दजर करिद्वायदी रयदी हहै तथद्वा उक ववलम्ब कद्वा ककोई समसुवचत स्पषदीकरिर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान घरनद्वा कको कद्वाररित करिनवे कद्वा आववेदक कद्वा न तको ककोई हवेतसुक हहै , न हदी ककोई सरिकोकद्वारि हहै। वतरमद्वान वद्वाद मम सह- अवभयसुक रिद्वाजझू कसु मद्वारि ककी जमद्वानत दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 35709/2021, आदवेश वदनद्वावंवकत 27.09.2021 कको स्वदीकक त ककी जद्वा चसुककी हहै। अतत जमद्वानत प्रद्वाप्त सह-अवभयसुक सवे समद्वानतद्वा कवे आधिद्वारि परि आववेदक भदी जमद्वानत प्रद्वाप्त करिनवे कद्वा अधधिकद्वारिदी हहै। पसुनत उनकद्वा यह भदी कथन हहै वक आववेदक ककी तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करिनवे कवे धलए तहैयद्वारि हहै औरि जब भदी आवश्यकतद्वा हकोरदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक्ष खसुद कको उपलब्धि करिद्वाएरद्वा औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तहैयद्वारि हहै जको न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिकोवपत करिवेरदी। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरिर मम वद० 24.06.2019 सवे कद्वारिद्वारद्वारि मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरिकोधि करितवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारिद्वा कद्वाररित अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभदीरि प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि न छकोड़द्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्ययों एववं पररिणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रदी ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रदी सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत परि मसुक करिनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वारि हहै। 6. अतत वद्वाद कवे रसुर-दकोष परि वबनद्वा ककोई वरप्परदी वकए हहए आववेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष परि व्यवकरत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भदी दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करिनवे परि वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परिदीक्षर कवे ददौरिद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करिवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावक्षययों व पदीवड़तद्वा/ वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरिद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करिवेरद्वा, वह परिदीक्षर कवे ददौरिद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परिदीक्षर मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोर करिवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहदी करिवेरद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्ष यद्वा अप्रत्यक्ष रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररिययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिवेरद्वा, धजसकवे कद्वारिर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वाररि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरिकोक शतरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 22.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad