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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 35317 (ALL)

KULDEEP v. STATE OF U.P.

BAIL/10860/2025 · 2025-08-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:130873 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 10860 of 2025 Applicant :- Kuldeep Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Satyendra Kumar Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक ककी ववदद्वान अधधिवकद्वा शशुभद्वाभांवगिननी वदववेदनी एवभां रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सशुनद्वा तथद्वा पतद्वावलनी कद्वा पररशनीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक कशु लदनीप ककी ओर सवे मशु०अ०सभां० 617/2024, अभांतगिरत धिद्वारद्वा 420, 467, 468, 471, 406, 506, 120-बनी. भद्वा.दभां.सभां., थद्वानद्वा टटकोवनकद्वा धसटनी, धजलद्वा गिद्वाधजयद्वाबद्वाद मम जमद्वानत पर मशुक करनवे हवेतशु प्रस्तशुत वकयद्वा गियद्वा हहै। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तशुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम गिलत एवभां फजर्जी ढभांगि सवे झझूठद्वा फभां सद्वायद्वा गियद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भनी अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गियद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गियद्वा हहै। आववेदक वतरमद्वान वद्वाद मम न तको कवे तद्वा हहै, न हनी गिवद्वाह हहै। आववेदक दद्वारद्वा वकसनी प्रकद्वार ककी कझू टरचनद्वा नहहीं ककी गियनी हहै, न हनी वकसनी प्रकद्वार ककी धिकोखद्वाधिडनी कद्वाररत ककी गियनी हहै। यहद्वाभां प्रद्वासभांवगिक तथ्य हहै वक वतरमद्वान वद्वाद मम अन्य सह-अवभयशुक कवपल ककी जमद्वानत, जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सभां० 9101/2025 मम इसनी न्यद्वायपनीठ दद्वारद्वा वभन्न वतधथ कको स्वनीकक त ककी जद्वा चशुककी हहै। अततः जमद्वानत प्रद्वाप्त सह-अवभयशुक सवे समद्वान भझूवमकद्वा कवे आधिद्वार पर आववेदक भनी जमद्वानत पद्वानवे कद्वा अधधिकद्वारनी हहै। आववेदक कद्वा ककोई पझूवर आपरद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हहै। पशुनतः उनकद्वा यह भनी कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गियद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवकयद्वा मम सहयकोगि करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भनी आवश्यकतद्वा हकोगिनी वह ईमद्वानदद्वारनी सवे अदद्वालत कवे समक खशुद कको उपलब्धि करद्वाएगिद्वा और उन सभनी शतरभां कको स्वनीकद्वार करनवे कवे धलए भनी तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगिनी। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 08.03.2025 सवे कद्वारद्वागिद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। 4. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तशुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सभांभांजवेय एवभां गिभांभनीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय। 5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरभां कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलनी पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्ययों एवभां पररणस्थवतययों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतयों ककी प्रकक वत और वकसनी भनी ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रनी ककी अनशुपणस्थवत एवभां उपलब्धि सद्वामग्रनी सवे छवेडछद्वाड ककी सभांभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरनी रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मशुक करनवे कद्वा उपयशुक आधिद्वार हहै। 6. अततः वद्वाद कवे गिशुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परनी वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सभांबभांधधित न्यद्वायद्वालय ककी सभांतशुवष्टि पर व्यवकगित बभांधि -पत एवभां अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भनी दको प्रवतभझू प्रस्तशुत करनवे पर वनम्नधलधखत शतरभां कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परनीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेगिद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकययों व पनीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेगिद्वा/धिमकद्वायवेगिद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशयों कद्वा पद्वालन करवेगिद्वा , वह परनीकर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगिन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोगिद्वा तथद्वा परनीकर मम ईमद्वानदद्वारनी सवे सहयकोगि करवेगिद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतभांततद्वा कद्वा दशुरूपयकोगि नहनी करवेगिद्वा और वकसनी भनी अपरद्वाधधिक गिवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोगिद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेगिद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसनी भनी व्यवक यद्वा पशुधलस अधधिकद्वाररययों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेगिद्वा न हनी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेगिद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्ययों कको उजद्वागिर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरभां मम सवे वकसनी कवे उलभांघन कवे मद्वामलवे मम , परनीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानशुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतभांत हहै। Order Date :- 4.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad