Research › Search › Judgment

High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 3507 (CHH)

SURESH SHARMA v. RAJU RAVI

CRMP/172/2019 · 2025-07-27

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 3 (Cr. M. P. No.-172 of 2019) 2025:CGHC:36597 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क्रमां%क -172/2019 1. सरश शमां" तिपु-स्वेग/या पुरन शमां", उम्र-लगभग 68 वेर्ष", तिनवेस -नगर वे" क्रमां%क-3, रमांनजग%ज, जिजल-लरमांपुर-रमांनजग%ज, छत्ती सगढ़ -----यातिचकक"/पुनर क्षर्णक"/पुरिरवेदा तिवेरूद्घ 1. रज= रतिवे तिपु-स्वेग/या तिवेजया रतिवे, उम्र-लगभग 30 वेर्ष", 2. श्री मां रजक मांर दावे पुति-तिवेजया रमां रतिवे, उम्र-लगभग 50 वेर्ष", 3. श्री मां स%ग रतिवे पुति-रज= रतिवे, उम्र-लगभग-25 वेर्ष", सभ तिनवेस -नगर वे" क्रमां%क-3, रमांनजग%ज, जिजल-लरमांपुर-रमांनजग%ज, छत्ती सगढ़ -----प्रत्यार्थी/गर्ण यातिचकक" द्वार : श्री अकर्थी क मांर यादावे, अजिDवेक्ता क ओर स श्री नवेन क मांर तिवेर , अजिDवेक्ता । प्रत्यार्थी/गर्ण द्वार : श्री ए०एन० पुया, अजिDवेक्ता क ओर स श्री शभमां तिवेर , अजिDवेक्ता । मांनन या न्यायामां=ति" श्री स%जया क मांर जयासवेल , न्यायाD श !! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 28/07/2025 1. उभयापुक्ष कM प्रर%तिभक स्र पुर सन गया । POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.07.28 17:50:46 +0530 2 / 3 (Cr. M. P. No.-172 of 2019) 2. प्रकरर्ण क थ्या स%क्षपु मांO इस प्रकर हैंR तिक यातिचकक"/पुरिरवेदा सरश शमां" द्वार प्रत्यार्थी/गर्ण क तिवेरूद्घ अ%ग" Dर-294, 506, 447 भर या दा स%तिहैं क अ%ग" पुरिरवेदा तिदान%क-22/01/2018 कM मांख्या न्यातियाक मांजिजस्ट्रेVट्रे, जिजल-लरमांपुर स्र्थीन- रमांनजग%ज, छत्ती सगढ़ क समांक्ष प्रस् तिकया गया र्थी । उक्ता पुरिरवेदा पुर स%%जिD न्यायालया द्वार पुरिरवेदा र्थी उसक सतिक्षयाW क प्रर%तिभक कर्थीन जिलए गए र्थी पुजिलस प्रतिवेदान प्रप्त कर तिदान%क-11/06/2018 कM आदाश पुरिर कर हैंYए पुरिरवेदा खारिरज कर तिदाया गया । जिजस आग स%क्षपु मांO "प्रश्नD न आदाश" स स%MजिD तिकया ज रहैं हैं] । 3. उक्ता पुरिरवेदा ख़ारिरज आदाश कM यातिचकक"/पुरिरवेदा सरश शमां" द्वार दाण्डिक पुनर क्षर्ण प्रकरर्ण क्रमां%क- 37/2018 R क मांध्यामां स चन` दा गई । जिजसपुर अपुर सत्र न्यायाD श, रमांनजग%ज न्यायालया क तिद्वा या अतिरिरक्ता न्यायाD श, जिजल-लरमांपुर स्र्थीन-रमांनजग%ज, छत्ती सगढ़ द्वार “सरश शमां" तिवेरूद्घ रज= रतिवे वेग]रहैं" मांO तिदान%क- 06/12/2018 कM आदाश पुरिर कर हैंYए दाण्डिक पुनर क्षर्ण आवेदान भ तिनरस् कर दा गई । यातिचकक"/पुरिरवेदा द्वार वे"मांन यातिचक क मांध्यामां स उक्ता दानW आदाशW कM अपुस् कर पुरिरवेदा पु%ज द्घ तिकए जन क आदाश दान क तिनवेदान तिकया गया हैं] । 4. तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार पुरिर "प्रश्नD न आदाश" मांO याहैं उल्लेजिखा तिकया गया हैं] तिक पुरिरवेदा एवे% उसक सतिक्षयाW क कर्थीनW र्थी पुजिलस प्रतिवेदान क आDर पुर, पुरिरवेदा पुक्ष न अतिभयाक्तागर्ण द्वार गल -गल`ज, Dमांक और आपुरजिDक अतिचर करिर करन कहैं हैंYए पुरिरवेदा पुश तिकया, तिक% जिलजिखा पुरिरवेदा मांO कहैंf भ घट्रेन क तिदान-र खा क स्पुष्ट उल्लेखा नहैंf तिकया हैं] । पुरिरवेदा न स्वेया% घट्रेन कM जलई, 2017 क प्रi 06:00 ज क या हैं] जतिक उसक सक्ष तिशवेपुति र्थी अशMक वेमां"न न घट्रेन कM मांई-2018 क 3 / 3 (Cr. M. P. No.-172 of 2019) लगभग 2-3 मांहैं पु=वे" क या हैं], जिजसस घट्रेन क तिजिर्थी क स%%D मांO ग%भ र तिवेरMDभस क ण्डिस्र्थीति पुरिरलतिक्ष हैंM हैं] । पुजिलस प्रतिवेदान क अनसर, उभयापुक्ष क मांध्या ज़मां न स मां%कन कM लकर तिवेवेदा हैंMन कहैं गया, जिजस पुर पु=वे" मांO तिदान%क-20/04/2016 कM दा गई रिरपुMट्रे" पुर पुजिलस द्वार Dर-155 दा प्रतिक्रया स%तिहैं क हैं पुजिलस हैंस्क्षपु अयाMग्या अपुरD हैंYए न्यायालया मांO जन क सलहैं दा गई र्थी । उभयापुक्ष क मांध्या ज़मां न क स मां%कन क मांमां=ल तिवेवेदा पुया गया और उक्ता आDर पुर Dर-203 दा प्रतिक्रया स%तिहैं क हैं पुरिरवेदा खारिरज कर तिदाया गया । 5. अतिभलखाग समांग्री क अवेलMकन र्थी तिवेद्वान अजिDवेक्ता कM सन जन क पुश्च याहैं पुया ज हैं] तिक तिवेचरर्ण न्यायालया क प्रश्नD न आदाश और पुनर क्षर्ण न्यायालया क आदाश उतिच वे उपुयाक्ता हैंR, इसजिलए उसमांO तिकस हैंस्क्षपु क आवेश्याक नहैंf पुया ज । 6. अi याहैं आवेदान स्वे कर याMग्या न हैंMन स प्रर%तिभक स्र पुर हैं खारिरज क ज हैं] । 7. रजिजस्ट्रेV कM तिनदाmतिश तिकया ज हैं] तिक इस आदाश क प्रतिजिलतिपु यार्थीश घ्र तिवेचरर्ण न्यायालया कM स=चनर्थी" प्रतिर्ष क जए । 8. उपुरMक्तानसर, इस दाण्डिक पुनर क्षर्ण आवेदान क तिनरकरर्ण तिकया ज हैं] । सहैं /- (स%जया क मांर जयासवेल) न्यायाD श पुMमांन