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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 31323 (CHH)

GOPICHAND KRISHNANI v. JAMMU AND KASHMIR BANK LIMITED

CRMP/2096/2025 · 2025-07-29

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 (Cr. M. P. No.-2096 of 2025) 2025:CGHC:37267 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क्रमां%क -2096 /2025 1. ग-पु च%दा क. शनाना तिपु-एच०एस० क. शनाना , उम्र-लगभग 55 वेर्ष", तिनावेस -हो-ल क्र7स स्क9 ल, :रना जार, रयापुर, होस ल वे जिजाल-रयापुर, छत्ती सगढ़ । -----यातिचकक"/अतिभयाक्त तिवेरूद्घ 1. जाम्मां9 ए कश्मां र Cक जिलतिमांटे, पु%जा क. कया"लया:-क7पुFरटे मांख्यालया, एमां. ए. र-, श्री नागर (जाम्मां9 और कश्मां र), शखा कया"लया:-जाम्मां9 ए कश्मां र Cक, ललग%ग श7तिपु%ग क7म्प्लक्स, जा . ई. र-, रयापुर, छत्ती सगढ़ मांख्यार आमां/शखा प्र%धक-पुवेना क मांर धर, तिपु-श्री अजा"नानाथ धर, तिनावेस -श7पु ना%.-110 एवे% 114, प्रथमां ल, जाम्मां9 ए कश्मां र Cक, ललग%ग श7तिपु%ग क7म्प्लक्स, जा . ई. र-, रयापुर, जिजाल रयापुर, छत्ती सगढ़ 2. भर स%घ, द्वार सतिचवे, तिवेजिध एवे% तिवेधया कया" मां%त्रालया, नाई तिदाल्ली । 3. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार सतिचवे, ग.हो तिवेभग, मांहोनादा भवेना, रजाधना पुरिरसर, नाया रयापुर, जिजाल-रयापुर, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा गर्ण यातिचकक"/अतिभयाक्त द्वार : श्री तिनाजिखाल पुरखा, अजिधवेक्त । उत्तीरवेदा क्रमां%क-1 द्वार : श्री तिवेवेक तिमांश्री, अजिधवेक्त । उत्तीरवेदा क्रमां%क-2 द्वार : क-ई उपुण्डिस्थ नाहो\ । उत्तीरवेदा क्रमां%क-3 द्वार : श्री अजिखालश क मांर, शसक या अजिधवेक्त । POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.08.01 10:43:31 +0530 2 / 6 (Cr. M. P. No.-2096 of 2025) मांनाना या न्यायामां9ति" श्री स%जाया क मांर जायासवेल , न्यायाध श !! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 30/07/2025 1. भर या नागरिरक सरक्षा स%तिहो, 2023 क धर-528 क हो प्रस् इस यातिचक मांd यातिचकक"/अतिभयाक्त द्वार पुनार क्षार्ण न्यायालया-अष्टमां अतिरिरक्त सत्रा न्यायाध श, रयापुर, जिजाल-रयापुर, छत्ती सगढ़ द्वार दाण्डिक पुनार क्षार्ण क्रमां%क-191/2022 “ग-पु च%दा क. शनाना तिवेरूद्घ जाम्मां9 ए कश्मां र जिलतिमांटे" मांd पुरिर आदाश तिदाना%क-28/06/2022 क- चनाh दा गई हो: । 2. प्रकरर्ण क स%तिक्षाप्त थ्या इस प्रकर होC तिक मांसस" खाश फना फ9 ए अपुरिरयाल्स इ%तिया प्रइवेटे जिलतिमांटे द्वार पुरिरवेदा जाम्मां9 ए कश्मां र Cक जिलतिमांटे स ऋर्ण प्रप्त तिकया गया थ, जिजासक जामांना यातिचकक"/अतिभयाक्त ना दा थ । ऋर्ण क अदायाग ना हो-ना पुर यातिचकक" द्वार ₹4,88,000/- क चक Cक क पुक्षा मांd जार तिकया गया, जा- प्रस्ति पुर अनादारिर हो- गया । फलस्वेरूपु, पुरिरवेदा Cक द्वार यातिचकक" क तिवेरुद्ध धर 138, पुरक्रम्या जिलखा अजिधतिनायामां क अ%ग" दाण्डिक पुरिरवेदा क्रमां%क-192/2017 प्रस् तिकया गया । 3. इसक पुश्च, यातिचकक" द्वार तिदाना%क-10/03/2022 क- तिवेचरर्ण न्यायालया मांd आवेदाना प्रस् कर तिनावेदाना तिकया गया तिक वेहो ₹4,88,000/- क दाया रतिश जामां कर चक हो:, अq दाण्डिक पुरिरवेदा स उन्मांक्त तिकया जाए । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार तिदाना%क- 05/05/2022 क- उभयापुक्षा क- सनाकर उक्त आवेदाना याहो कहो होrए तिनारस् तिकया गया 3 / 6 (Cr. M. P. No.-2096 of 2025) तिक धर-138, पुरक्रम्या जिलखा अजिधतिनायामां क अनासर याहो रतिश मांत्रा आ%तिशक हो:, जातिक तिवेजिध क अनासर दा-गना अथ"दा और करवेस क प्रवेधना हो: । उक्त आदाश क तिवेरुद्ध यातिचकक" द्वार दाण्डिक पुनार क्षार्ण क्रमां%क-191/2022 प्रस् तिकया गया, जिजास पुनार क्षार्ण न्यायालया द्वार तिदाना%क-28/06/2022 क- तिनारस् कर तिदाया गया । 4. यातिचकक" द्वार रिरटे यातिचक (दाण्डिक) क्रमां%क-627/2022 प्रस् क गई, जिजासपुर तिदाना%क-29/07/2022 क- पुरिर आदाश क अनासर यातिचकक" क- ₹4,88,000/- क रतिश तिमां% sफ्टे द्वार 03 सप्तहो क भ र जामां करना हो तिनादाuतिश तिकया गया थ तिवेचरर्ण कया"वेहो स्थतिग क गई । उक्त आदाश क अनाशरर्ण मांd यातिचकक" ना रतिश जामां कर दा । जिजास यातिचक क- आदाश तिदाना%क-20.07.2023 क द्वार इस आधर पुर वेपुस ल जिलया गया तिक यातिचकक" धर 482, दा प्रतिक्रया स%तिहो, 1973 क अ%ग" उपुयाक्त आवेदाना प्रस् करग । इसक उपुर% वे"मांना यातिचक प्रस् क गई । यातिचक क्रमां%क 627/2022 क वेपुस लना क उपुर% तिवेचरर्ण न्यायालया क जा- कया"वेहो स्थतिग क गई थ , वेहो पुनाq प्रर%भ हो- चक हो: । 5. यातिचकक" क अजिधवेक्त ना क" प्रस् तिकया तिक पुरक्रम्या जिलखा अजिधतिनायामां क धर 138 क उद्देश्या, चक रतिश क अदायाग सतिनाण्डिश्च करना हो: । Raj Reddy Kallem v. State of Haryana and Another, (2024) 8 SCC 588 क होवेल दा होrए याहो क" तिदाया गया तिक च9%तिक चक क रतिश Cक क- भगना कर दा गई हो:, अq आपुरजिधक कया"वेहो क- जार रखाना तिवेजिध क मां%श क तिवेरुद्ध हो: । सथ हो , यातिचकक" क ऋर्ण जामांना स%%ध उत्तीरदातियात्वे हो पु.थक स ०आर०टे ० मांd कया"वेहो ल%ति हो:। 4 / 6 (Cr. M. P. No.-2096 of 2025) 6. उत्तीरवेदा क्रमां%क-1 क अजिधवेक्त ना क" तिकया तिक चक वेर्ष" 2016 क थ और उसक भगना वेर्ष" 2022 मांd होrआ । इस तिवेल% क करर्ण जा- क्षाति होrई, उसक जिलए यातिचकक" ना क-ई उत्तीरदातियात्वे नाहो\ तिनाभया हो: । धर-138, पुरक्रम्या जिलखा अजिधतिनायामां क अनासर करवेस एवे% दा-गना अथ"दा क प्रवेधना हो:, अq यातिचक तिनारस् क जाना चतिहोए । 7. उभयापुक्षा क क" श्रीवेर्ण तिकया गया थ अतिभलखा क पुरिरश लना तिकया गया । 8. In the matter of Damodar S. Prabhu v. Sayed Babalal H., (2010) 5 SCC 663, Their Lordships of the Supreme Court while examining the object sought to be achieved by provisions of Section 138 of the N.I. Act and purpose underlying the punishment provided therein has held that Section 138 of the N.I. Act cases are meant to secure payment of money by holding as under:- "17. Unlike that for other forms of crime, the punishment here (insofar as the complainant is concerned) is not a means of seeking retribution, but is more a means to ensure payment of money. The complainant's interest lies primarily in recovering the money rather than seeing the drawer of the cheque in jail. The threat of jail is only a mode to ensure recovery. As against the accused who is willing to undergo a jail term, there is little available as remedy for the holder of the cheque." 5 / 6 (Cr. M. P. No.-2096 of 2025) 9. In the matter of Somnath Sarkar v. Utpal Basu Mallick and another, (2013) 16 SCC 465, Their Lordships of the Supreme Court while considering the punishment to be imposed under Section 138 of the N.I. Act have held in no uncertain term that under Section 138 of the N.I. Act, only fine sentence can be imposed by the Criminal Court and observed as under:- "15 ....Suffice it to say that the High Court was competent on a plain reading of Section 138 to impose a sentence of fine only upon the appellant. Inasmuch as the High Court did so, it committed no jurisdictional error…...” 10. In the matter of Raj Reddy Kallem (Supra), Hon’ble the Supreme Court held thus:- “20. This Court in Meters and Instruments private Ltd. And Another. v. Kanchan Mehta (2018) 1 SCC 560 after discussing the series of judgments including the JIK Industries Ltd. v. Amarlal V. Jumani, (2012) 3 SCC 255 observed that even in the absence of ‘consent’ court can close criminal proceedings against an accused in cases of Section 138 of the NI Act if accused has compensated the complainant. The exact words of this Court were as follows: “18.3. Though compounding requires consent of both parties, even in absence of such consent, the court, in the interests of justice, on being satisfied that the complainant has been duly compensated, can in its discretion close the proceedings and discharge the accused.” 6 / 6 (Cr. M. P. No.-2096 of 2025) 11. पुरिरश लना स याहो ण्डिस्थति स्पुष्ट हो- हो: तिक मां9ल ऋर्ण जा- पुरिरवेदा Cक स जिलया गया वेहो यातिचकक" द्वार नाहो\ जिलया गया थ, ण्डिल्क वेहो क वेल जामांनादार थ । यातिचकक" द्वार प्रदात्ती चक रतिश क भगना पुरिरवेदा Cक क- तिकया जा चक हो: । शर्ष उत्तीरदातियात्वे हो ०आर०टे ० मांd पु.थक कया"वेहो तिवेचरध ना हो: । ऐस ण्डिस्थति मांd, यातिचकक" क तिवेरुद्ध धर-138, पुरक्रम्या जिलखा अजिधतिनायामां क अ%ग" ल%ति दाण्डिक पुरिरवेदा क्रमां%क-192/2017 क कया"वेहो क- जार रखाना क औतिचत्या नाहो\ हो: । 12. अq यातिचक स्वे कर क जा हो: । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार पुरिर आदाश तिदाना%क- 05/05/2022 एवे% पुनार क्षार्ण न्यायालया क आदाश तिदाना%क-28/06/2022 अपुस् तिकए जा होC । सथ हो , यातिचकक" क तिवेरुद्ध धर-138, पुरक्रम्या जिलखा अजिधतिनायामां क अ%ग" ल%ति कया"वेहो क- खाण्डि कर समांप्त तिकया जा हो: । 13. उपुर-क्तनासर, इस दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क तिनारकरर्ण तिकया जा हो: । 14. रजिजास्टेs क- तिनादाuतिश तिकया जा हो: तिक इस आदाश क प्रतिजिलतिपु याथश घ्र तिवेचरर्ण न्यायालया क- स9चनाथ" वे पुलनाथ" प्रतिर्ष क जाए । सहो /- (स%जाया क मांर जायासवेल) न्यायाध श पो मन