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2025:CGHC:29686 अप्रतिवे द्य छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिर्ण या सरति! ति"#क-24/06/2025 तिर्ण या उद्घो+ति, ति"#क-02/07/2025
"ण्डि/0क अपुल क्रमां#क
-1139
/2021
1. भागच#" खे लवेर तिपु-र खे लवेर, उम्र-लगभाग 26 वे, , तिवेस-ग्रामां रजो+ल, था-रतिचरई, जिजोल-ल+", छत्तीसगढ़ -----अपुलथा= तिवेरूद्घो छत्तीसगढ़ शास, द्वार था-रतिचरई, जिजोल-ल+", छत्तीसगढ़ -----उत्तीरवे" अपुलथा= द्वार : श्री अतिमां जिस#ह चDह, अजिEवेक्ता । शास/उत्तीरवे" द्वार : श्री प्र#जोल शाक्ल, पुIल अजिEवेक्ता । मांया न्यायामांJति श्री स#जोया क मांर जोयासवेल
, न्यायाEशा
!! स.ए.वे. तिर्ण या !! 1. "/0 प्रतिक्रया स#तिह, 1973 कN Eर-374 (2) क ह प्रस् इस "ण्डि/0क अपुल मांS तिवेचरर्ण न्यायालया-सत्र न्यायाEशा, ल+", जिजोल-ल+", छत्तीसगढ़ द्वार सत्र प्रकरर्ण क्रमां#क-52/2018 “छत्तीसगढ़ रज्या तिवेरूद्घो भागच#" खे लवेर” मांS पुरिर तिर्ण या ति"#क- POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.07.02 12:40:40 +0530
2 / 10 {Cr. A. No.-1139 of 2021} 31/08/2021 क+ चD " गई हI । जिजोसक ह अपुलथा= क+ तिम्सर "+,जिसद्ध कर "ण्डि/0 तिकया गया हI । जिजोस आग स#! पु मांS “प्रश्E तिर्ण या” स स#+जिE तिकया जो रह हI^-
"+,जिसतिद्ध
"/0" शा Eर-323 भारया "/0 स#तिह, 1860 01 वे, क सश्रीमां करवेस कN सजो स
"ण्डि/0 तिकया गया । Eर-376 भारया "/0 स#तिह, 1860 10 वे, क सश्रीमां करवेस एवे# 2,000/- रूपुया क अथा "/0 था अथा "/0 रतिशा अ" कर कN "शा मांS 01 मांह क अतिरिरक्ता सश्रीमां करवेस कN सजो स
"ण्डि/0 तिकया गया । Eर-457 भारया "/0 स#तिह, 1860 05 वे, क सश्रीमां करवेस एवे# 1,000/- रूपुया क अथा "/0 था अथा "/0 रतिशा अ" कर कN "शा मांS 15 ति" क अतिरिरक्ता सश्रीमां करवेस कN सजो स
"ण्डि/0 तिकया गया । Eर-509 (क) भारया "/0 स#तिह, 1860 05 वे, क सश्रीमां करवेस एवे# 1,000/- रूपुया क अथा "/0 था अथा "/0 रतिशा अ" कर कN "शा मांS 15 ति" क अतिरिरक्ता सश्रीमां करवेस कN सजो स
"ण्डि/0 तिकया गया । सभा मांJल सजोए# सथा-सथा चलSग ।
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2. अतिभाया+जो मांमांल स#!
पु मांS इस प्रकर हI तिक अतिभाया+क्त्र (अ०स०-1) क पुति (अ०स०-2) हI जो+ ग्रामां-रजो+ल, था-रतिचरई, जिजोल-ल+" क तिवेस ह` । घट ति"#क-01/01/2018 कN रतित्र कर 11:00 जो कN हI । उक च्च तिभालई मांS अध्यायार था । पुति (अ०स०-2) च्चd क पुस तिभालई गया हeआ था । अतिभाया+क्त्र (अ०स०-1) रतित्र क समांया घर मांS अक ल स+ई हeई था घर क हर ठो+क -पुट कN आवेज़ आ पुर जो वेह आकर " खे + आ#ग कN लईट #" था जोतिक वेह लईट जोलकर स+ई था । हर आ पुर उस
" खे तिक आ#ग मांS उसक पुरिरवेरिरक " वेर अपुलथा= खेड़ा था जो उसस पुJछ तिक क्याd आए ह+, + अपुलथा= उसक जोर हथा पुकड़ाकर और मां#ह क+ "कर घसट हeए, उसक शायाक! मांS ल जोकर, जोर उसक
सथा लत्स#ग तिकया और भाग गया । अतिभाया+क्त्र (अ०स०-1) स#क+च वे "मां क 0र स घट आस-पुड़ा+स वेलd क+ हk ई । घट क 2-3 ति" पुश्च जो अतिभाया+क्त्र क पुति तिभालई स वेपुस घर आया, + उस घट ई । त्पुश्च पुति (अ०स०-2) अपुलथा= क+ लकर 0#ट और समांझाया तिक पुरिरवेर कN "मां ह+ग इसजिलए रिरपु+ट हk कर रह हI, ऐस हरक "+र करS । तिक# क छ ति" पुश्च उस जोवेर मांह मांS जो अतिभाया+क्त्र (अ०स०-1) कN सस घर आई हeई था पु^ अपुलथा= घर आकर अतिभाया+क्त्र स गल स##E क+ कह लग और "मां कर
कN EमांकN ति"या । जो अतिभाया+क्त्र कह तिक वेह रिरपु+ट कर " ग + अपुलथा= भाग गया, अतिभाया+क्त्र रतित्र मांS ह घट अपु सस और पुति क+ ई । ति"#क-12/03/ 2018 क+ प्र^ 06:30 जो जो अतिभाया+क्त्र क पुति ड़ा रफ शाDच कर गया हeआ था + पु^ अपुलथा= आ#ग मांS आकर, घर मांS जिलपुई कर रह अतिभाया+क्त्र क+ ल्ट ति"खेकर Eमांक लग, पुति आकर उस 0#ट, जिजोसस तिक वेह हसजो कर भाग
4 / 10 {Cr.
A. No.-1139 of 2021} गया । तिफर पुति ग#वे क गर्ण शा, करर्ण, कन्हIयालल वेगIरह क+ घट ई और उकN समांझाइशा पुर अतिभाया+क्त्र प्र"शा पु-1 कN जिलजिखे तिशाकया था-रतिचरई मांS " । जिजोसपुर प्रथामां सJच पुत्र प्र"शा पु-2 कयामां कर घटस्थाल क मांDक-क्शा या गया । पुटवेर स क्शा Iयार करवेया गया । अतिभाया+क्त्र क 0pक्टर पुर!र्ण करवेया गया । 0pक्टर द्वार Iयार कर " गई वेIजोइल स्लइ0 क+ रसयातिक पुर!र्ण ह भा जो गया । सति!याd क या जिलए गए । अपुलथा= क भा 0pक्टर पुर!र्ण करवेया गया । उसक अ#रवेस्त्र जोब् तिकया गया । अपुलथा= क+ तिगरफ्र तिकया गया । स#पुJर्ण तिवेवे च उपुर# अतिभाया+ग पुत्र पु शा तिकया गया ।
3. अतिभाया+जो कN ओर स अपु पु! समांथा मांS 10 सति!याd क पुर!र्ण था 23 "स्वे जो प्र"शा तिचन्ह#तिक करवेया गया । Eर-313 "/0 प्रतिक्रया स#तिह क ह या मांS अपुलथा= अपु तिवेपुर सति!याd क कथाd क+ इकर कर हeए कह हI तिक वेह ति"u, हI और उस झाJठो फ# सया गया हI । उसकN ओर स चवे मांS तिकस स! क पुर!र्ण हk करवेया गया । उभायापु! क स जोकर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपुलथा= क+ इस तिर्ण या कN कण्डि/0क-1 क असर "+,जिसद्ध कर "ण्डि/0 तिकया गया हI । जिजोस इस अपुल मांS चD " गई हI ।
4. अपुलथा= पु! क तिवेद्वा अजिEवेक्ता क क हI तिक अतिभाया+क्त्र (अ०स०-1) और उसक
पुति (अ०स०-2) याह स्वेकर तिकया हI तिक अपुलथा=, उक घर मांजो"Jर क कया कर था । आग क हI तिक मांजो"Jर कN कया रकमां कN मां#ग क+ ल कर हeए तिवेवे" पुर स
ह याह लत्स#ग कN झाJठो रिरपु+ट कर ढाई मांह क तिवेलम् स कN गई हI । अपुलथा= क
तिवेरूद्घो क+ई भा तिवेश्वेसया और स्पुष्ट सक्ष्या हk हI । आस-पुड़ा+स क तिकस भा व्यातिक्ता
लत्स#ग कN घट क समांथा हk तिकया हI । ढाई मांह क तिवेलम् क क+ई समांEप्र"
5 / 10 {Cr. A. No.-1139 of 2021} स्पुष्टकरर्ण हk ति"या हI । अतिभाया+क्त्र 30 वे,=या एक तिवेवेतिह मांतिहल हI उसकN सक्ष्या, तिचतिकत्सकNया सक्ष्या द्वार भा पुष्ट हk हI । मांजो"Jर क कया रकमां कN मां#ग क+ ल कर कN गई झाJठो रिरपु+ट पुर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार सक्ष्या कN उतिच रूपु स समां!
कर हeए अपुलथा= क+ त्रतिटपुJवे क "+,जिसद्ध कर "ण्डि/0 तिकया गया हI । अपुलथा= कN "+,जिसतिद्ध स#" ह स पुर स्पुष्ट, पुया प्त और तिवेश्वेसया सक्ष्या पुर आEरिर हk हI । “प्रश्E तिर्ण या” ण्डिस्थार रखे जो या+ग्या हk हI । अ^ अपुल स्वेकर कर उस
"+,मांक्ता तिकया जोए ।
5. उत्तीरवे"/शास पु! कN ओर स उपुण्डिस्था तिवेद्वा अजिEवेक्ता इस अपुल क तिवेर+E कर हeए क तिकया हI तिक अतिभाया+जो सति!याd पुJर्ण रूपु स अतिभाया+जो मांमांल क समांथा तिकया हI जिजोपुर अतिवेश्वेस तिकया जो क क+ई करर्ण हk हI । तिवेचरर्ण न्यायालया क “प्रश्E तिर्ण या” सक्ष्या कN उतिच समां! पुर आEरिर हI । अतिभाया+जो
अपुलथा= क तिवेरूद्घो अपु मांमांल स#" ह स पुर प्रमांतिर्ण तिकया हI । अपुलथा= पु! द्वार अपुल मांS उठोया गया क स्वेकर या+ग्या हk हI । अ^ अपुल खेरिरजो तिकया जोया ।
6. उभायापु! क क स गया और अतिभाल खे क सJक्ष्मांपुJवे क पुरिरशाल तिकया गया ।
7. अतिभाया+जो कN ओर स प्रस् स#पुJर्ण सक्ष्या स याह ण्डिस्थाति स्पुष्ट हI तिक मांJल घट ति"#क- 01/01/2018 कN या गई हI जोतिक उसकN प्रथामां सJच पुत्र ति"#क-12/03/ 2018 क+ "जो हeई हI अथा कर ढाई मांह क तिवेलम् स पुजिलस मांS रिरपु+ट "जो करवेई गई हI ।
8. 0pक्टर श्रीमां रण्डिश्मां ग्ल 0 (अ०स०-4) अतिभाया+क्त्र क 0pक्टर पुर!र्ण प्रतिवे
" ति"या हI उसक असर अतिभाया+क्त्र क+ अग्राभाजो मांS मांत्र 02 समांन्या प्रक| ति कN खेर+च पुई गई जो+ क| ति, कया कर वेक्ता भा आ सक ह` । इस प्रकर स , इस क+ई स्पुष्ट
6 / 10 {Cr.
A. No.-1139 of 2021} तिचतिकत्सकNया अतिभामां हk आया हI तिक अतिभाया+क्त्र क सथा जोर लत्स#ग तिकया गया ह+ । अतिभाया+क्त्र एक तिवेवेतिह मांतिहल हI । रज्या न्यायालतियाक तिवेज्ञा प्रया+गशाल कN जो#च रिरपु+ट प्र"शा पु-19 क असर अतिभाया+क्त्र क वेIजोइल स्लइ0 मांS मांवे शाक्रर्ण पुए गए ह` । चJ#तिक, वेह कर ढाई मांह क पुश्च कN ण्डिस्थाति हI और अतिभाया+क्त्र, पुति क
सथा तिवेसर तिवेवेतिह मांतिहल हI । ऐस "शा मांS, इस स्पुष्ट सक्ष्या क अभावे हI तिक वेह मांवे शाक्रर्ण अपुलथा= क ह+ । इसजिलए रज्या न्यायालतियाक तिवेज्ञा प्रया+गशाल कN जो#च रिरपु+ट क आEर पुर अतिभाया+क्त्र क कथा क+ समांथा हk तिमांल हI ।
9. याह भा स्पुष्ट हI तिक कजिथा घट ति"#क-01/01/2018 क+ अतिभाया+क्त्र अपुलथा= क तिवेर+E तिकया ह+ और आस-पुड़ा+स क तिकस व्यातिक्ता क+ तिचल्लाकर या ह+ या उन्हS घट क त्कल पुश्च जोकर " ह+, इस भा अतिभाया+क्त्र क कथा हk हI । मांDक क्शा प्र"शा पु-6 क असर अतिभाया+क्त्र क पुड़ा+स रमां शा या"वे और श्रीवेर्ण मांरक/0 या क घर अगल-गल ह+ या गया हI तिक# अतिभाया+जो द्वार इ सति!याd क पुर!र्ण हk करवेया गया हI । ऐस "शा मांS, याह स्पुष्ट हI तिक अपुलथा= क तिवेरूद्घो अतिभाया+जो क मांमांल और अपुलथा= कN "+,जिसतिद्ध क मांख्या आEर एकमांत्र अतिभाया+क्त्र (अ०स०-1) क सक्ष्या ह हI ।
10. न्यायादृष्ट# Santosh Prasad @ Santosh Kumar v. State of Bihar, (2020) 3 SCC 443 मांS मांया उच्चमां न्यायालया द्वार अवेEरिर तिकया गया हI तिक लत्कर क
अपुरE मांS एकमांत्र पुतिड़ा क कथा पुर भा "+,जिसतिद्ध कN जो सक हI तिकन् याह ह+ चतिहए जो पुतिड़ा क या तिवेश्वेस पुI" करS था पुJर रह स तिवेश्वेसया,
"ग और उत्क| ष्ट गर्णवेत्ती क प्र ह+ । जिजोसक स##E मांS कण्डि/0क-5.4.3, 5.5 एवे# 6 मांS तिम्सर अवेEरिर तिकया गया हI:-
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“5.4.3.
A. No.-1139 of 2021}
“5.4.3. In Krishan Kumar Malik v. State of Haryana (2011) 7 SCC 130 it is observed and held by this Court that no doubt, it is true that to hold an accused guilty for commission of an offence of rape, the solitary evidence of the prosecutrix is sufficient provided the same inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and should be of sterling quality. 5.5 With the aforesaid decisions in mind, it is required to be considered, whether is it safe to convict the accused solely on the solitary evidence of the prosecutrix? Whether the evidence of the prosecutrix inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and is of sterling quality?”
6. Having gone through and considered the deposition of the prosecutrix, we find that there are material contradictions. Not only there are material contradictions, but even the manner in which the alleged incident has taken place as per the version of the prosecutrix is not believable. In the examination- in-chief, the prosecutrix has stated that after jumping the fallen compound wall accused came inside and thereafter the accused committed rape. She has stated that she identified the accused from the light of the mobile. However, no mobile is recovered. Even nothing is on record that there was a broken compound wall. She has further stated that in the morning at 10 O’clock she went to the police station and gave oral complaint. However, according to the investigating officer a written complaint was given. It is also required to be noted that even the FIR is registered at 4:00 p.m. In her deposition, the prosecutrix has referred to the name of Shanti Devi, PW1 and others. However, Shanti Devi has not supported the case of the prosecution. Therefore, when we tested the version of PW5-prosecutrix, it is unfortunate that the said witness has failed to pass any of the tests of “sterling witness”. There is a variation in her version about giving the complaint. There is a delay in the FIR. The medical report does not support the case of the prosecution. FSL report also does not support the case of the prosecution. As admitted, there was an enmity/dispute between both the parties with respect to land. The manner in which the occurrence is stated to have occurred is not believable. Therefore, in
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A. No.-1139 of 2021} the facts and circumstances of the case, we find that the solitary version of the prosecutrix-PW5 cannot be taken as a gospel truth at face value and in the absence of any other supporting evidence, there is no scope to sustain the conviction and sentence imposed on the appellant and accused is to be given the benefit of doubt.”
11. उपुर+क्ता न्यायादृष्ट# क प्रकशा मांS तिवेचरE मांमांल मांS प्रस् सक्ष्या क पुरिरशाल स याह ण्डिस्थाति स्पुष्ट ह+ हI तिक प्रथामां सJच पुत्र कर ढाई मांह क तिवेलम् स जिलखेवेई गई हI । अतिभाया+क्त्र (अ०स०-1) अपु मांख्या पुर!र्ण मांS अतिभाया+जो मांमांल क समांथा अवेश्या कN हI तिक# उस याह भा या हI तिक पुजिलस जो उसस घट क समांया पुह हeए कपुड़ाd कN मां#ग कN था + उस कपुड़ा पुर ह+ क करर्ण फS क " या था । इस प्रकर, अतिभाया+क्त्र घट क समांया जिजो कपुड़ाd क+ पुह था, उकN जोब् हk हeई हI । अतिभाया+क्त्र (अ०स०-1) और उसक पुति (अ०स०-2) याह स्वेकर तिकया हI तिक अपुलथा= रिरश् मांS अतिभाया+क्त्र क " वेर लग हI जिजोसक अतिभाया+क्त्र क घर आ-जो लग रह था और वेह उक याह# मांजो"Jर कर था । अतिभाया+जो क मांमांल स भा याह ण्डिस्थाति स्पुष्ट ह+ हI तिक अतिभाया+क्त्र क घर अपुलथा= मांजो"Jर कर था । हल#तिक अतिभाया+क्त्र और उसक पुति इस सझावे क+ कर ति"या हI तिक मांजो"Jर कN कया रकमां कN मां#ग क+ ल कर तिवेवे" हeआ था । तिक# अतिभाया+क्त्र याह स्वेकर तिकया हI तिक उस
आस-पुड़ा+स क तिकस भा व्यातिक्ता क+ घट क तिवे,या मांS क+ई जोकर हk " था । प्रथामां सJच पुत्र मांS ढाई मांह क तिवेलम् क क+ई समांEप्र" करर्ण हk या गया हI । अतिभाया+क्त्र याह भा स्वेकर तिकया हI तिक क+ई समांजिजोक Iठोक उन्हd हk लई था । अतिभाया+क्त्र था उसक पुति क याह कथा तिक अतिभाया+क्त्र द्वार अपु पुति क+ जोकर
"
पुर उन्हd अपुलथा= क+ लकर समांझाया था, वेह स्वेभातिवेक आचरर्ण पुरिरलति!
हk ह+ हI ।
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12. पुति (अ०स०-2) याह भा स्वेकर तिकया हI तिक उस था-रतिचरई मांS अपु पुत् क सथा झाJमां-झापुट ह+ कN रिरपु+ट "जो करवेई था और याह रिरपु+ट ग#वे क उपुसरपु#च गर्ण शा एवे# कन्हIयालल क रया-मांशातिवेर कर क पुश्च "जो करवेई था । इस स##E मांS, उस ग#वे तिक तिरझा ई (अ०स०-5) जिसफ इ कह हI तिक उपुसरपु#च गर्ण शा क
सथा अपुलथा= कN च ह+ रह था, जो+ अपुलथा= और अतिभाया+क्त्र क स##E मांS ह
रह था । उस , उन्हS अपु घर क समां स चल जो क+ कह था इसक जिसवे वेह घट क र मांS और क छ हk जो हI । वेह उपुसरपु#च गर्ण शा रमां (अ०स०-6)
कह हI तिक अपुलथा= था अतिभाया+क्त्र क मांध्या मांरपुट कN घट हeई था और तिकस अन्या करर्ण कN उस जोकर हk हI ।
13. इस रह, याह स्पुष्ट हI तिक जिसफ पुति (अ०स०-2) क या असर, ण्डिल्क उपुसरपु#च गर्ण शा रमां (अ०स०-6) क असर भा अतिभाया+क्त्र और अपुलथा= क मांध्या तिवेवे" कN ण्डिस्थाति उत्पुन्न हeई था । अतिभाया+क्त्र क असर अपुलथा= उसक सथा लत्स#ग तिकया था जोतिक अपुलथा= क याह चवे रह हI तिक वेह अतिभाया+क्त्र क घर मांजो"Jर कर था और मांजो"Jर कN कया रकमां कN मां#ग क+ ल कर वे"-तिवेवे" हeआ था । जिजोस प्रकर स , इस मांमांल मांS, उपुसरपु#च गर्ण शा रमां भा कह हI तिक अपुलथा= उसस मांरपुट कN घट क तिवे,या मांS च कर रह था । उस अवेस्था मांS, तिवेशा , कर ढाई मांह क तिवेलम् स कN गई पुजिलस तिशाकया कN ण्डिस्थाति क+ " खे हeए अतिभाया+क्त्र क+ स#" ह स पुर तिवेश्वेसया हk कह जो सक । उसक एकमांत्र या क आEर पुर स#" ह स पुर याह तिष्कति, हk ह+ हI तिक अपुलथा= ति"#क-01/01/2018 क+ अतिभाया+क्त्र क घर जोकर उसक
सथा जोर लत्स#ग तिकया ।
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14.
A. No.-1139 of 2021}
14. तिवेजिE क याह सस्थातिपु जिसद्ध# हI तिक अतिभाया+जो क+ अपु मांमांल स#" ह स पुर प्रमांतिर्ण कर ह+ हI । उपुर+क्ता न्यायादृष्ट# मांS मांया उच्चमां न्यायालया द्वार अतिभाव्याक्ता तिवेजिEक जिसद्घो# क प्रकशा मांS याह न्यायालया पु हI तिक कर ढाई मांह क तिवेल# स कN गई पुजिलस तिशाकया क समांEप्र" स्पुष्टकरर्ण हk ति"या गया हI । ऐस "शा मांS, जो तिकस भा आस-पुड़ा+स क व्यातिक्ता द्वार इस प्रकर कN घट क समांथा हk ह+ रह हI अतिभाया+क्त्र क+ स#" ह स पुर तिवेश्वेसया हk मां जो सक और स#" ह क लभा अपुलथा= क+ तिमांल हI
15. ऐस "शा मांS, अपुलथा= कN "+,जिसतिद्ध स्पुष्ट, पुया प्त और तिवेश्वेसया सक्ष्या पुर आEरिर हk हI । अपुलथा= क तिवेरूद्घो अतिभाया+जो अपु मांमांल स#" ह स पुर प्रमांतिर्ण कर मांS असफल रह हI । इसजिलए “प्रश्E तिर्ण या” ण्डिस्थार रखे जो या+ग्या हk पुया जो ।
16. अ^ अपुल स्वेकर कN जो हI । “प्रश्E तिर्ण या” अपुस् तिकया जो हI था अपुलथा= क+ स#" ह क लभा "
हeए आर+तिपु अपुरE स
"+,मांक्ता तिकया जो हI ।
17. अपुलथा= क+ जो ल मांS तिरूद्घो या गया हI । याति" उसकN अन्या मांमांल मांS आवेश्याक ह+ + उस त्कल रिरह तिकया जोए ।
18. तिर्ण या कN प्रति क सथा तिवेचरर्ण न्यायालया क+ मांJल अतिभाल खे था तिर्ण या कN सत्याप्रतिजिलतिपु स##जिE जो ल अE!क क+ आवेश्याक कया वेह ह सJचथा एवे# पुलथा शाघ्रपुJवे क प्र ति, ह+ । सह/- (स#जोया क मांर जोयासवेल) न्यायाEशा पु+मां