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2026:CGHC:15363 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिर्णया सरति ति क-25/03/2026 तिर्णया उद्घो*ति+ ति क-02/04/2026 ण्डि./क अपु ल क्रमां क
-1049
/2025
मां + क वेर तिपु-पुरमां क वेर, उम्र-लगभग 21 वे+, तिवेस -ग्रामां खम्हरिरया, आवेसपुर, पुलिलस था-स पु, लि>ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा?/अतिभयाक्त तिवेरूद्घो छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार लि>ल ./लिDकर , लि>ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /रज्या एवे ण्डि./क अपु ल क्रमां क
-1199
/2025
लिखलश क वेर उर्फ छ*टूI तिपु-पुरमां क वेर, उम्र-लगभग 19 वे+, तिवेस -ग्रामां खम्हरिरया, आवेसपुर, पुलिलस था-स पु, लि>ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़, -----अपु लथा?/अतिभयाक्त तिवेरूद्घो छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार लि>ल ./लिDकर , लि>ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /रज्या POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.04.02 16:50:34 +0530
2 / 17 {Cr. A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} अपु लथा?गर्ण/अतिभयाक्तगर्ण द्वार : श्री प्रवे र्ण स* , अलिDवेक्त । उत्तीरवे /रज्या द्वार : श्री अमां म्रकर, पुMल अलिDवेक्त । न्यायामांIति श्री स >या क मांर >यासवेल !! स .ए.वे . तिर्णया !! 1. भर या गरिरक सर स तिह, 2023 कP Dर-415 (2) क ह प्रस् इस ण्डि./क अपु ल मांU तिवेचरर्ण न्यायालया-शमां अपुर सत्र न्यायाD श, तिलसपुर, लि>ल-तिलसपुर, (छत्ती सगढ़) द्वार सत्र प्रकरर्ण क्रमां क 101/2022 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरुद्ध लिखलश क वेर उर्फ छ*टूI एवे एक अन्या” मांU पुरिर तिर्णया ति क 23/05/2025 क* च[
गई हM । लि>सक ह अपु लथा?गर्ण क* तिम्सर *+लिसद्ध कर ण्डि./ तिकया गया हM । लि>स आग स पु मांU “प्रश्D तिर्णया” स स *लिD तिकया > रह हM^- अपु लथा? क मां *+लिसतिद्ध ./श लिखलश क वेर उर्फ छ*टूI Dर-307 भर या ./ स तिह, 1860 07 वे+ क सश्रीमां करवेस एवे 10,000/-रूपुया क अथा./ था अथा./ रतिश अ कर कP श मांU 06 मांह क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कP स> । मां + क वेर Dर-307/34 भर या ./ स तिह, 1860 07 वे+ क सश्रीमां करवेस एवे 10,000/-रूपुया क अथा./ था अथा./ रतिश अ कर कP श मांU 06 मांह क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कP स> ।
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2. अतिभया*> मांमांल स पु मांU इस प्रकर हM तिक आह/प्रथा?
सत्यारयार्ण स*झर
(अ.स.-2) कP पुत् स ई स*झर (अ.स.-4) हM । स ई कP ह Dक मांर क वेर (अ.स.-5) हM था Dक मांर क वेर क पुति लवे क मांर स*झर
(अ.स.-10) हc । इस प्रकर आह सत्यारयार्ण (अ.स.-2) एवे लवे क मांर (अ.स.- 10) आपुस मांU सढ़I भई हc । घटू, ति क 17/12/2021 क* शमां लगभग 06:30 > कP हM । आह सत्यारयार्ण, >* ग्रामां खम्हरिरया क तिवेस हM, पुI> समांग्रा तिवेक्रया क कया कर हM । ग्रामां खम्हरिरया मांU रउ >र लग हM, >हe घटू क ति वेह अपु क लगकर Mठा था । उस समांया उसक सढ़I भई लवे क मांर (अ.स.-10) अपु पुत् Dक मांर क वेर (अ.स.-5) क सथा >र घIमां आया था । रउ >र मांU झIल क पुस लवे क मांर क अपु लथा?गर्ण स तिवेवे ह* गया, लि>स आह सत्यारयार्ण समांझइश कर श कर तिया और वेह पु^ अपु क पुर आकर Mठा गया । त्पुश्चh शमां लगभग 06:30 >, > स ई स*झर (अ.स.-4), लवे क मांर (अ.स.-10) एवे Dक मांर क वेर (अ.स.-5) वेहe उपुण्डिस्था था, उस समांया अपु लथा?गर्ण पु^ आए । अपु लथा? मां + प्रथा? सत्यारयार्ण क* मांe-ह कP गल
हiए आर*पु लगया तिक उस उस मांर था और एक थाप्पुड़ प्रथा? सत्यारयार्ण क* मांर । इस [र अपु लथा? लिखलश क वेर उर्फ छ*टूI चकI स सत्यारयार्ण क पुटू मांU वेर तिकया, लि>सस उस ग भ र च*टू आई और रक्तस्रावे ह* लग । त्पुश्चh उस ए लUस क मांध्यामां स उपुचर ह स्वेण्डिस्क अस्पुल भ> गया । उस ति रतित्र लगभग 11:45 > पुलिलस द्वार सत्यारयार्ण कP सIच पुर ह लस (प्रश पु -5) Mयार कर था स पु मांU अपुरD क्रमां क 615/2021 क प्रथामां सIच पुत्र (प्रश पु -18) पु > द्ध तिकया गया । आह क तिचतिकत्स या पुर र्ण एवे उपुचर करया गया । तिवेवेच क [र
4 / 17 {Cr. A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} /-ह/ तिटूकटू >ब् तिकया गया, घटूस्थाल क क्श Mयार तिकया गया था सतियाp क कथा लिलए गए । अपु लथा?
लिखलश क मांमां*र./मां कथा क आDर पुर उसस घटू मांU प्रयाक्त कलिथा चकI कP >ब् कP गई । त्पुश्चh अपु लथा?गर्ण क* तिगरफ्र कर स पुIर्ण तिवेवेच उपुर अतिभया*ग पुत्र प्रस् तिकया गया ।
3. तिवेचरर्ण क [र आर*पु क प्रमांर्ण ह अतिभया*> कP ओर स अपु पु क समांथा मांU क ल 11 सतियाp क पुर र्ण करया गया था 22 स्वे> प्रतिश तिचन्ह तिक करए गए । Dर 313 ./ प्रतिक्रया स तिह क ह कथा मांU अपु लथा?गर्ण/अतिभयाक्तगर्ण अपु तिवेपुर आए सतियाp क कथाp क* इ कर कर हiए कह हM तिक वे मां[क पुर उपुण्डिस्था ह हs था । प्रथा? सत्यारयार्ण और उसकP पुत् द्वार तिमांलकर उन्हU झIठा र्फ सया गया हM । चवे स क रूपु मांU अख्र मां*हम्मां (.स.-1) और र > लिस ह (.स.-2) क पुर र्ण करया हM >* मां[क पुर हs था तिक उन्हp कह हM तिक अपु लथा?गर्ण कलिथा घटू क समांया रयागढ़ आए हiए था और मां[क पुर हs था । उभयापु क स >कर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपु लथा?गर्ण/अतिभयाक्तगर्ण क* इस तिर्णया कP कण्डि./क-1 क असर *+लिसद्ध कर ण्डि./ तिकया गया हM । लि>स इस अपु ल मांU च[
गई हM ।
4. अपु लथा?गर्ण/अतिभयाक्तगर्ण क तिवेद्वा अलिDवेक्त क क हM तिक प्रथा? सत्यारयार्ण क कथा मांU ग भ र तिवेर*Dभस हc । पुर ति सभ स , लि>न्हU चश्मां स या गया हM, प्रथा? सत्यारयार्ण क तिकटू स D हc, लि>सस उकP सक्ष्या कP तिवेश्वेस या स तिग्D ह* >
हM । याह भ क प्रस् तिकया तिक अपु लथा? लिखलश स कलिथा चकI कP >ब् स ह स पुर प्रमांतिर्ण हs हiई हM । अतिभया*> तिकस स्वे त्र स क पुर र्ण कर मांU असर्फल रह हM । तिचतिकत्सक याह अतिभमां व्याक्त तिकया हM तिक प्रथा? सत्यारयार्ण कP च*टूU ज़मां पुर
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A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} पुड़ तिकस Dरर ल*ह क उपुकरर्ण पुर तिगर स भ करिर ह* सक हc । तिवेद्वा अलिDवेक्त आग क तिया हM तिक भर या ./ स तिह कP Dर 34 क अ ग समांन्या आशया क गठा ह “एकमां (
meeting of minds)” क ह* आवेश्याक हM, लि>स अतिभया*> प्रमांतिर्ण कर मांU असर्फल रह हM । याति अपु लथा? लिखलश द्वार क*ई कy त्या तिकया भ गया ह*, * उसमांU अपु लथा? मां + क क*ई समांन्या आशया तिवेद्यमां था, याह अतिभया*> प्रमांतिर्ण हs कर सक हM । अ^ अपु लथा? मां + क तिवेरुद्ध समांन्या आशया क आDर पुर अपुरD मांU सहभतिग प्रमांतिर्ण हs ह* हM । तिवेद्वा अलिDवेक्त अपु क क समांथा मांU 907
& . Constable Surendra Singh Another v State of , (2025) 5 433 Uttarakhand SCC क तिर्णया क हवेल तिया हM । >हe क अपु लथा? लिखलश क स D हM, उसक तिवेरुद्ध भ अपुरD स ह स पुर प्रमांतिर्ण हs हiआ हM । थातिपु, वेMकण्डि{पुक रूपु स याह तिवे तिकया गया हM तिक उसकP अतिभर अवेलिD लगभग 11 मांह 10 ति ह* चकP हM । उपुचर क [र उस प्रथा? सत्यारयार्ण क* लगभग ₹65,000 स ₹85,000 क क आलिथाक सहया*ग भ प्र तिकया हM । अपु लथा? लिखलश कP वेमां आया लगभग 19 वे+ हM, उसक क*ई पुIवे आपुरलिDक इतिहस हs हM था उस पुर पुरिरवेरिरक तियात्वे भ हc । अ^ तिवे तिकया हM तिक याति उस *+ ठाहरया भ > हM, * उस प्रत्ती 07 वे+ क करवेस ./ क* उसकP अ क कP अतिभर अवेलिD क स तिमां तिकया >ए ।
5. रज्या/उत्तीरवे क तिवेद्वा अलिDवेक्त क क हM तिक प्रथा? सत्यारयार्ण द्वार वेतिर्ण घटू क असर, प्रर तिभक तिवेवे क करर्ण अपु लथा?गर्ण, >* आपुस मांU सग भई हc, र लि>शवेश एवे एकमां ह*कर पु^ प्रथा?
कP क पुर आए था । वेहe अपु लथा? मां + पुहल सत्यारयार्ण क* गल -गल[> कर हiए थाप्पुड़ मांर था उस [र अपु लथा? लिखलश
6 / 17 {Cr. A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} उसक पुटू मांU चकI स वेर तिकया । उक्त समांस् थ्या एवे पुरिरण्डिस्थातियाe इस क* स्पुष्ट कर हc तिक अपु लथा?गर्ण समांन्या आशया क सथा घटूस्थाल पुर आए था और उस
आशया कP पुIति मांU पुहल अपु लथा? मां + द्वार मांरपु टू कP शरुआ कP गई, त्पुश्च अपु लथा? लिखलश द्वार चकI स वेर तिकया गया । चश्मां सतियाp क रिरश्र ह*, प्रकरर्ण कP पुरिरण्डिस्थातियाp मांU स्वेभतिवेक हM और मांत्र इस आDर पुर उक कथाp क* अतिवेश्वेस या हs मां > सक । प्रथा? सत्यारयार्ण अतिभया*> क कथा क पुIर्ण समांथा तिकया हM, >* तिचतिकत्स या एवे अन्या सक्ष्या स भ पुष्ट हM । इसक अतिरिरक्त, अपु लथा? लिखलश स घटू मांU प्रयाक्त चकI कP तिवेलिDवे >ब् कP गई हM । अ^ तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपु लथा?गर्ण क* *+लिसद्ध कर पुरिर तिकया गया ./श तिवेलिDसम्मां एवे न्याया*तिच हM, लि>समांU तिकस प्रकर क हस्पु अथावे पुरिरवे कP आवेश्याक हs हM । अपु लथा? पु क क स्वे कर या*ग्या हs हc । अएवे, अपु ल खरिर> कP >ए ।
6. उभयापु क क श्रीवेर्ण तिकया गया और अतिभलख क सIक्ष्मांपुIवेक पुरिरश ल तिकया गया ।
7. प्रथा? सत्यारयार्ण (अ.स.-2) अतिभया*> मांमांल कP पुतिष्ट कर हiए अपु न्यायालया सक्ष्या मांU कह हM तिक घटू ति क 17/12/2021 क*, > वेह ग्रामां खम्हरिरया क रउ >र मांU अपु क लगकर Mठा था, उसक सढ़I भई लवे क मांर वेहe घIमां आया था, >हe अपु लथा?गर्ण क उसस तिवेवे ह* गया । उस समांझइश कर उक्त तिवेवे क* श करया, लि>सक पुश्च अपु लथा?गर्ण वेहe स चल गए । क छ समांया अपु लथा?गर्ण अन्या व्यातिक्तयाp क सथा पु^ उसकP क पुर आए, >हe अपु लथा? मां + उस मांe-ह कP गल हiए एक थाप्पुड़ मांर । त्पुश्च अपु लथा?
लिखलश चकI स उसक पुटू मांU वेर तिकया, लि>सस उस च*टू आई और रक्तस्रावे ह* लग । इसक उस
7 / 17 {Cr. A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} ए लUस क मांध्यामां स उपुचर ह अस्पुल ल >या गया । प्रतिपुर र्ण मांU प्रथा? याह कह हM तिक अपु लथा?गर्ण स उसकP क*ई पुIवे शत्र हs था । उसक उक्त कथा क समांथा मां[क पुर उपुण्डिस्था उसकP पुत् स ई स*झर (अ.स.-4), सढ़I भई लवे क मांर (अ.स.-10) था Dक मांर क वेर (अ.स.-5) भ अपु न्यायालया सक्ष्या मांU तिकया हM लि>सक ख./ हs हiआ हM ।
8. तिचतिकत्सक अतिभ+क तिमांश्री (अ.स.-7) अपु न्यायालया सक्ष्या मांU या हM तिक वेह स्वेण्डिस्क अस्पुल क स चलक हM, >हe ति क 17/12/2021 क* शमां लगभग 07:37 > आह सत्यारयार्ण क* उपुचर ह लया गया था । उसक पुटू मांU चकI स च*टू लग था था क करर्ण पुटू मांU कड़पु पुया गया । याs पुसल स लगभग 4 स.मां . च घवे तिवेद्यमां था । उस आह क* भ? कर उपुचर प्रर भ तिकया था लिसटू
स्कM कर कP सलह । रिरपु*टू प्रप्त ह* पुर याह पुया तिक पुटू क अमांशया/पुइल*रस (
stomach pylorus) मांU र्फटू क लर्ण था था पुटू मांU वेया एवे रक्त उपुण्डिस्था था । ण्डिस्थाति कP ग भ र क* दृतिष्टग रख हiए ऑपुरश एवे उपुचर कP सलह गई । तिचतिकत्सक याह भ या तिक आ रिरक रूपु स रक्त क थाक्क ( clots) पुए गए था । उन्हp इस स D मांU प्रतिवे (प्रश पु -16) प्रस् तिकया था स्पुष्ट तिकया तिक आह क* लग च*टूU ग भ र प्रकy ति कP थाs ।
9. ओ कर अस्पुल क तिचतिकत्सक आकश तिमांश्री (अ.स.-3) अपु न्यायालया सक्ष्या मांU या हM तिक ति क 18/12/2021 क* आह सत्यारयार्ण क* उपुचर ह अस्पुल लया गया था । पुर र्ण कर पुर पुया गया तिक उसक पुटू मांU Dरर हलिथायार स च*टू लग था , लि>सस आ र्फटू चकP था था पुटू मांU रक्त क >मांवे था । ण्डिस्थाति कP ग भ र
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10. इस प्रकर, उपुर*क्त तिवेवेच स याह स्पुष्ट ह* हM तिक आह सत्यारयार्ण क* पुटू मांU Dरर हलिथायार, अथाh चकI स ग भ र च*टू पुहi चई गई था । अतिभया*> प्रकरर्ण मांU अपु लथा? लिखलश क प्रकटू करर्ण कथा क आDर पुर घटू मांU प्रयाक्त चकI कP तिवेलिDवे >ब् कP गई हM । उक्त चकI क पुर र्ण कर तिचतिकत्सक अतिभ+क तिमांश्री (अ.स.-7) द्वार प्रतिवे (प्रश पु -17) क* पुष्ट कर या हM तिक आह सत्यारयार्ण क* करिर च*टूU उक्त चकI स ह* सक हc । समांस् सक्ष्या क पुर र्ण स याह थ्या स्पुष्ट रूपु स स्थातिपु ह* हM तिक अपु लथा? लिखलश चकI स सत्यारयार्ण क पुटू मांU वेर कर उस ग भ र उपुहति करिर कP, लि>सस उसकP आ U र्फटू गई । इ पुरिरण्डिस्थातियाp क आDर पुर याह प्रमांतिर्ण ह* हM तिक अपु लथा? लिखलश द्वार तिकया गया कy त्या हत्या क प्रयास क अपुरD कP श्रीर्ण मांU आ हM ।
11. >हe क, अपु लथा? मां + क मांख्या अतिभयाक्त लिखलश क सथा समांन्या आशया तितिमां ह* क प्रश् हM । इस स भ मांU अपु लथा? पु द्वार न्यायादृष्ट कƒन्स्टूल 907 सरन्द्र लिस ह एवे अन्या (पुIवे…क्त) क प्रकरर्ण मांU मां या सवे…च्च न्यायालया द्वार कण्डि./क-30 मांU तिम्सर तिवेलिD लिसद्ध प्रतिपुति तिकया गया हM—
“30. By now it is a settled principle of law that for convicting the accused with the aid of Section 34IPC the prosecution must establish prior meetings of minds. It must be established that all the accused had pre- planned and shared a common intention to commit the crime with the accused who has actually committed the
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It must be established that the criminal act has been done in furtherance of the common intention of all the accused. Reliance in support of the aforesaid proposition could be placed on the following judgments of this Court in the cases of: (i) Ezajhussain Sabdarhussain v. State of Gujarat, (2019) 14 SCC 339; (ii) Jasdeep Singh v. State of Punjab, (2022) 2 SCC 545; (iii) Gadadhar Chandra v. State of W.B., (2022) 6 SCC 576; and (iv) Madhusudan v. State of M.P., (2024) 15 SCC 757.”
12. उपुर*क्त क अलवे 'समांन्या आशया' क तिवे+या मांU मां या उच्चमां न्यायालया द्वार समांया-समांया पुर अक मांहत्वेपुIर्ण अतिभमां तिया गया हM । लि>क उल्लेख याह तिकया > आवेश्याक वे उतिच ह*ग ।
13. मां या उच्चमां न्यायालया द्वार मां*ह लिस ह मां पु > रज्या, 1963 174 AIR SC मांU याह प्रतिपुति तिकया गया हM तिक समांन्या आशया क त्पुया समांIतिहक रूपु स तिकया गया कया था पुIवे मांU मांp क तिमांल हM, और कy त्या तिभन्न-तिभन्न एवे स्वेरूपु मांU अलग-अलग ह* सक हc, तिकन् वे सभ एक ह समांन्या आशया स प्ररिर ह* हc । उक्त तिर्णया कP कण्डि./क–13 तिम्सर हM—
“13. That inevitably takes us to the question as to whether the appellants can be convicted under Section 302/34. Like Section 149, Section 34 also deals with cases of constructive criminal liability. It provides that where a criminal act is done by several persons in furtherance of the common intention of all, each of such persons is
10 / 17 {Cr. A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} liable for that act in the same manner as if it were done by him alone. The essential constituent of the vicarious criminal liability prescribed by Section 34 is the existence of common intention.
If the common intention in question animates the accused persons and if the said common intention leads to the commission of the criminal offence charged, each of the persons sharing the common intention is constructively liable for the criminal act done by one of them. Just as the combination of persons sharing the same common object is one of the features of an unlawful assembly, so the existence of a combination of persons sharing the same common intention is one of the features of Section
34. In some ways the two sections are similar and in some cases they may overlap. But, nevertheless, the common intention which is the basis of Section 34 is different from the common object which is the basis of the composition of an unlawful assembly. Common intention denotes action-in-concert and necessarily postulates the existence of a prearranged plan and that must mean a prior meeting of minds. It would be noticed that cases to which Section 34 can be applied disclose an element of participation in action on the part of all the accused persons. The acts may be different; may vary in their character, but they are all actuated by the same common intention. It is now well-settled that the common intention required by Section 34 is different from the same intention or similar intention. As has been observed by the Privy Council in Mahbub Shah v. King-Emperor4 common intention within the meaning of Section 34 implies a pre- arranged plan, and to convict the accused of an offence applying the section
11 / 17 {Cr. A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} it should be proved that the criminal act was done in concert pursuant to the pre-arranged plan and that the inference of common intention should never be reached unless it is a necessary inference deducible from the circumstances of the case.”
14.
मां या उच्चमां न्यायालया द्वार तिशवेरमां लिस ह मां उत्तीर प्रश रज्या, (1973) 3 SCC 110 मांU याह प्रतिपुति तिकया गया हM तिक पुIवे तिया*> ( - pre concert) क रूपु मांU तिकस स्पुष्ट पुIवे या*> क लिसद्ध तिकया > आवेश्याक हs हM; समांन्या आशया तिकस
तिवेश+ पुरिरर्णमां क* प्रप्त कर क लिलए, प्रकरर्ण क थ्याp एवे पुरिरण्डिस्थातियाp क स भ मांU, अक व्यातिक्तयाp क च घटू स्थाल पुर ह तिवेकलिस ह* सक हM ।
15. मां या उच्चमां न्यायालया द्वार खमां*च पु /या एवे अन्या मां तिहर रज्या, (1997) 8 SCC 405 मांU याह प्रतिपुति तिकया गया हM तिक भर या ./ स तिह कP Dर 34 क अप्रया*ग ह याह आवेश्याक हM तिक सक्ष्या एवे प्रकरर्ण कP पुरिरण्डिस्थातियाe इस थ्या क* स्थातिपु करU तिक तिवेतिभन्न अतिभयाक्तp क मांध्या मांp क तिमांल (
) meeting of minds एवे तिवेचरp क समांन्वेया (
) fusion of ideas हiआ था ।
16. मां या उच्चमां न्यायालया द्वार सरश मां उत्तीर प्रश रज्या, (2001) 3 SCC 673
मांU याह प्रतिपुति तिकया गया हM तिक भर या ./ स तिह कP Dर 34 क आक+र्ण ह * आवेश्याक त्वे अतिवेया हc, अथाh अपुरD तिकस एक व्यातिक्त द्वार हs ण्डि{क एक स अलिDक व्यातिक्तयाp द्वार तिकया गया ह* था ऐस प्रत्याक व्यातिक्तग कy त्या क समांतिक पुरिरर्णमां, >* अपुरD क घतिटू ह* मांU पुरिरर्ण हiआ ह*, सभ व्यातिक्तयाp क समांन्या आशया कP पुIति मांU तिकया गया ह*; उक्त तिर्णया कP कण्डि./क–23 तिम्सर हM^-
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“23. Thus to attract Section 34 IPC two postulates are indispensable: (1) The criminal act (consisting of a series of acts) should have been done, not by one person, but more than one person. (2) Doing of every such individual act cumulatively resulting in the commission of criminal offence should have been in furtherance of the common intention of all such persons.”
17.
मां या उच्चमां न्यायालया द्वार लिस ह मां तिहर रज्या, 2005 ( ) SCC Cri 127 मांU याह प्रतिपुति तिकया गया हM तिक समांन्या आशया क तिष्क+ प्रत्या सक्ष्या स अथावे पुरिरवेश पुरिरण्डिस्थातियाp एवे पुकरp क आचरर्ण स तिकल > सक हM; अ^ याह तिक क*ई कy त्या समांन्या आशया कP पुIति मांU तिकया गया हM, याह थ्या क प्रश् हM, तिक तिवेलिD क प्रश् ।
18. मां या उच्चमां न्यायालया द्वार स कपुIर मां स घ शलिस त्र च / गढ़, (2006) 10 SCC 182 मांU याह प्रतिपुति तिकया गया हM तिक भर या ./ स तिह कP Dर 34 क आक+र्ण ह * त्वेp क स्थातिपु ह* आवेश्याक हM—प्रथामां, अपुरD कर क समांन्या आशया था तिद्वा या, अपुरD क तिक्रयान्वेया मांU सहभतिग; याति या *p त्वे लिसद्ध ह* > हc, * समांन्या आशया सझ कर वेल प्रत्याक अतिभयाक्त क तिवेरुद्ध पुyथाक रूपु स प्रत्या कy त्या (
) overt act क ह* आवेश्याक हs हM ।
19. मां या उच्चमां न्यायालया द्वार सMया याIसर्फ हiसM मां आ ध्र प्रश रज्या, (2013) 4 SCC 517 मांU याह प्रतिपुति तिकया गया हM तिक अपुरD क कy त्या एक स अलिDक व्यातिक्तयाp द्वार तिकया > आवेश्याक हM था अपुरD क तिक्रयान्वेया मांU वे सभ व्यातिक्त, कy त्या या उपु (
commission या omission) क मांध्यामां स, समां आशया सझ कर हp;
13 / 17 {Cr. A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} प्रत्याक अतिभयाक्त द्वार पुyथाक-पुyथाक कy त्या तिकया > आवेश्याक हs हM तिक उस अ तिमां आपुरलिDक कy त्या क लिलए उत्तीरया ठाहरया > सक ।
20.
मां या उच्चमां न्यायालया द्वार तिवे>न्द्र लिस ह मां उत्तीर प्रश रज्या, (2017) 11 SCC 129 मांU याह प्रतिपुति तिकया गया हM तिक याह लिसद्ध अपुरD कर क समांन्या आशया क सथा तिकस कy त्या मांU सहभतिग क* समांतिह कर हM, और >Mस ह ऐस सहभतिग स्थातिपु ह* > हM, Dर 34 क प्रवेD त्कल लगI ह* > हM ।
21. उपुर*क्त न्यायादृष्ट p क प्रकश मांU, प्रकरर्ण मांU उपुलब्D थ्या एवे सक्ष्या पुर तिवेचर कर पुर आह सत्यारयार्ण क सढ़I भई लवे क मांर (अ.स.-10) क कथा स याह स्थातिपु ह* हM तिक मांड़ई मांल मांU अपु लथा?गर्ण द्वार उसकP पुत् Dक मांर (अ.स.-5) क सथा छड़छड़ कP गई था , लि>सक करर्ण तिवेवे उत्पुन्न हiआ था । उक्त तिवेवे क* आह सत्यारयार्ण द्वार समांझइश कर श करया गया था । तिकन् इसक क छ समांया पुश्च ह *p अपु लथा?गर्ण पु^ प्रथा? सत्यारयार्ण कP क पुर आए, >हe उसकP पुत्
स ई (अ.स.-4), सढ़I भई लवे क मांर (अ.स.-10) था Dक मांर (अ.स.- 5) उपुण्डिस्था था । वेहe अपु लथा? मां + पुहल प्रथा? सत्यारयार्ण क* थाप्पुड़ मांर, त्पुश्च अपु लथा? लिखलश उसक पुटू मांU चकI स वेर तिकया । सतियाp क कथाp स याह थ्या तितिवेवे रूपु स प्रमांतिर्ण ह* हM तिक पुIवे मांU हiए तिवेवे क* लकर *p अपु लथा?गर्ण अन्या व्यातिक्तयाp क सथा सत्यारयार्ण कP क पुर आए था । घटूक्रमां स याह भ स्पुष्ट ह* हM तिक पुहल अपु लथा? मां + द्वार मांरपु टू कP शरुआ कP गई और उसक पुश्च अपु लथा? लिखलश द्वार चकI स वेर तिकया गया । या समांस् पुरिरण्डिस्थातियाe इस कP ओर स क कर हc तिक अपु लथा?गर्ण समांन्या आशया क सथा घटूस्थाल
14 / 17 {Cr. A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} पुर आए था । याह भ पुरिरलति ह* हM तिक अपु लथा? मां + द्वार थाप्पुड़ मांरकर उक्त समांन्या आशया क तिक्रयान्वेया कP शरुआ कP गई था उसक पुश्च अपु लथा? लिखलश द्वार चकI स वेर कर उस आग ढ़या गया । इस प्रकर याह प्रमांतिर्ण ह* हM तिक घटू स पुIवे ह *p अपु लथा?गर्ण क मांध्या प्रथा?
सत्यारयार्ण क* उक्त च*टू पुहieच क समांन्या आशया तिवेद्यमां था । अ^ तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार याह तिष्क+ तिकल तिक अपु लथा? लिखलश द्वार प्रथा? सत्यारयार्ण क* चकI स मांरकर हत्या क प्रयास तिकया गया था उस कy त्या मांU अपु लथा? मां + क भ समांन्या आशया था, तिवेलिDसम्मां एवे उतिच प्र ह* हM । र्फलस्वेरूपु, अपु लथा? लिखलश कP Dर 307 भर या ./ स तिह क अ ग था अपु लथा? मां + कP Dर 307/34 भर या ./ स तिह क अ ग कP गई *+लिसतिद्ध मांU क*ई अवेMD या अशद्घो पुरिरलति हs ह* हM । अ^ उक्त *+लिसतिद्ध कP पुतिष्ट कP > हM । ./श
22. >हe क ./श क प्रश् हM, इस स D मांU उल्लेख या हM तिक स्वेया प्रथा? सत्यारयार्ण अपु प्रतिपुर र्ण कP कण्डि./क–7 मांU याह स्वे कर तिकया हM तिक उपुचर क [र अपु लथा?गर्ण द्वार उस लगभग ₹65,000 स ₹85,000 क कP आलिथाक सहया प्र कP गई था । अपु लथा? पु क याह भ क हM तिक *p अपु लथा? ति क 18/12/2021 स 14/01/2022 क, अथाh लगभग 28 तिp क करवेस मांU रह था तिवेचरर्ण न्यायालया क तिर्णया ति क 23/05/2025 स अ क तिर र अतिभर मांU हc । इस प्रकर उकP क ल अतिभर अवेलिD लगभग 11 मांह 12 ति कP ह* चकP हM । याह भ अतिभलख पुर हM तिक अपु ललिथायाp क क*ई पुIवे आपुरलिDक इतिहस हs हM था
15 / 17 {Cr. A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} उन्हp उपुचर क [र प्रथा? कP सहया भ कP हM । अ^ इ समांस् पुरिरण्डिस्थातियाp क* दृतिष्टग रख हiए याह तिवे तिकया गया हM तिक करवेस या ./ क* उकP अ क कP अतिभर अवेलिD क स तिमां तिकया >ए ।
23.
रज्या पु क तिवेद्वा अलिDवेक्त द्वार अपुरD कP ग भ र क* रख तिक कर हiए याह क प्रस् तिकया गया हM तिक तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार पुरिर ./श तिवेलिDसम्मां एवे न्याया*तिच हM ।
24. >हe क ./ क प्रश् क स D हM, मां*हम्मां तिगयासद्दी मां आ ध्र प्रश रज्या, (1977) 3 SCC 287 क प्रकरर्ण मांU मां या सवे…च्च न्यायालया ./ तिDरर्ण क स भ मांU सDरत्मांक लिसद्ध क* तिवेश+ मांहत्वे हiए
George Bernard Shaw क तिवेचरp क उद्धरर्ण तिकया हM, >* इस प्रकर हM—“याति आपु तिकस व्यातिक्त क* प्रतिश*Dत्मांक रूपु स ण्डि./ कर चह हc, * आपुक* उस आह कर ह*ग; तिकन् याति आपु उस सDर चह हc, * आपुक* उस हर ह*ग, और मांष्या च*टू पुहieच स हर हs ।”
25. अपु लथा?गर्ण क तिवेरुद्ध क*ई पुIवे आपुरलिDक इतिहस अतिभलख पुर हs हM । तिगरफ्र
पुत्रक प्रश पु –10 एवे पु –11 क असर अपु लथा? लिखलश क 10वेs क था अपु लथा? मां + क 12वेs क तिशति हc एवे *p / .>. स चलिल कर क व्यावेसया कर हc । अपु लथा? लिखलश कP आया लगभग 19 वे+ था अपु लथा? मां + कP आया लगभग 21 वे+ हM । घटू वे+ 2021 कP हM था अपु लथा?गर्ण पुर पुरिरवेरिरक तियात्वे भ
हc । तिकन्, याह भ स्पुष्ट रूपु स प्रमांतिर्ण हiआ हM तिक अपु लथा?गर्ण समांन्या आशया क अग्रासरर्ण मांU प्रथा? सत्यारयार्ण क* पुटू मांU चकI स वेर कर ग भ र उपुहति करिर कP,
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A. No.-1049 of 2025 & 1199 of 2025} लि>सस उसकP आ र्फटू गई और उसक श{यातिक्रया (ऑपुरश) द्वार उपुचर कर पुड़ । अ^ अपुरD कP प्रकy ति एवे उसकP ग भ र क* दृतिष्टग रख हiए, सथा ह
उपुयाक्त समांस् पुरिरण्डिस्थातियाp पुर तिवेचर कर हiए, याह न्यायालया पु हM तिक अपु लथा?गर्ण क* प्रत्ती करवेस ./ मांU क छ स मां क कमां तिकया > न्याया*तिच ह*ग । >हe क अथा./ क स D हM, याह भ दृतिष्टग हM तिक अपु लथा?गर्ण द्वार उपुचर क [र प्रथा? सत्यारयार्ण क* आलिथाक सहया*ग प्र तिकया गया था, अ^ अथा./ मांU तिकस प्रकर क पुरिरवे तिकया > आवेश्याक प्र हs ह* ।
26. अ^ अपु ल आ तिशक रूपु स स्वे कर कP > हM । अपु लथा?गर्ण कP *+लिसतिद्ध कP पुतिष्ट कP > हM । अपु लथा?गर्ण क* Dर 307 भर या ./ स तिह / Dर 307 सहपुतिठा Dर 34 भर या ./ स तिह क अ ग प्रत्ती 07 वे+ क सश्रीमां करवेस क ./ क* घटूकर 02 वे+ 06 मांह क सश्रीमां करवेस मांU पुरिरवेति तिकया > हM । अथा./ याथावे रख > हM ।
27. अपु लथा?गर्ण द्वार तिवेचरर्ण एवे अपु ल क [र व्या कP गई अतिभर अवेलिD क* उक उपुयाक्त करवेस ./ (>* इस तिर्णया द्वार 02 वे+ 06 मांह तिकया गया हM) मांU समांया*लि> तिकया >ए ।
28. अपु लथा?गर्ण क* वेमां मांU >ल मांU तिरुद्ध या गया हM । अ^ उन्हU श+ करवेस ./ कP अवेलिD भगया >या ।
29. अथा./ रतिश >मां ह* > पुर [र प्रतिकर क आह सत्यारयार्ण स*झर क* प्र कP >वे ।
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तिर्णया कP प्रति क सथा तिवेचरर्ण न्यायालया क* मांIल अतिभलख था तिर्णया कP सत्याप्रतिलिलतिपु स लिD >ल अD क क* आवेश्याक कयावेह ह सIचथा एवे पुलथा श घ्रपुIवेक प्रति+ ह* । सह /- (स >या क मांर >यासवेल) न्यायाD श पु*मां