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High Court of Rajasthan · body

2025 DAILYLAW 30031 (RAJ)

MST. CHHOTI W/O BASANTI LAL v. RAMKHILADI S/O PRABHATYA

CW/15349/2019 · 2025-08-19

Sameer Jain

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

[2025:RJ-JP:32390] HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN BENCH AT JAIPUR S.B. Civil Writ Petition No. 15349/2019 1. Mst. Chhoti W/o Basanti Lal, Resident Of Village Bamanwas Patti Kalan, Tehsil Bamanwas, District Sawai Madhopur, (Raj.) 2. Chetram S/o Basanti Lal, Resident Of Village Bamanwas Patti Kalan, Tehsil Bamanwas, District Sawai Madhopur, (Raj.) 3. Damu S/o Basanti Lal, Resident Of Village Bamanwas Patti Kalan, Tehsil Bamanwas, District Sawai Madhopur, (Raj.) ----Petitioners Versus Ramkhiladi S/o Prabhatya, Resident Of Bamanwas Patti Kalan, Tehsil Bamanwas, District Sawai Madhopur, (Raj.) ----Respondent For Petitioner(s) : Mr. Rahul Sharma For Respondent(s) : HON'BLE MR. JUSTICE SAMEER JAIN Judgment 19/08/2025 By way of present petition, challenge is made to impugned order dated 25.07.2019, passed in revision petition No. 19/2019 filed against the order dated 17.01.2019 whereby the debt recovery application was allowed and order directing to pay Rs. 61,500/- along with 9% interest per annum was set aside. Upon perusal of the impugned order dated 25.07.2019, this Court is of the opinion that learned trial Court recorded the evidences, considered the issue qua limitation and considered the provisions of Section 18 of the Indian Evidence Act after detailed analysis and thereafter gave a finding that claim was not tenable [2025:RJ-JP:32390] (2 of 4) [CW-15349/2019] and therefore has taken a contra view. Relevant extract of the impugned order is reproduced herein below:- “14. आया प्रार्थी के पि ता द्वारा अप्रार्थी से 50.000/- रू ये उधार पिये। पिसे उसके पि ता द्वारा चुकाये ाने के श्चात् भी अप्रार्थी द्वारा 63.860/- रू ये और पिनका कर उस र ब्या दर ब्या ोड कर 1.50,000/- रू ये की मांग कर रहे हैं। ो नहीं पिनकते हैं। इस कारण प्रार्थी उ रोक्त रापि* बाबत ऋण पिनधा-रण करवाने का हकदार है? 15. त्रावी र उ ब्ध साक्ष्य एवं उभय क्ष की ओर से पिकये गये तक6 के रिरप्रेक्ष्य में पिववाद्यक संख्या 1 र पिवचार पिकया ावे तो ए.ड. 1 रामखि<ाडी ने प्रद*- 1 ए बही (Account book) में अ ने हस्ताक्षर होना स्वीकार पिकया है और यह भी स्वीकार पिकया है पिक पिदनांक 28.06.2012 को 63,860/- रू ये का <ाता उसके नाम पि<ा गया र्थीा। यह भी स्वीकार पिकया गया है पिक उसके द्वारा पिये गये ऋण 63,500/- रू ये के बाबत कोई डीआरए े* नहीं की है। यह भी स्वीकार पिकया है पिक उसके ास साढे नौ बीघा कृ पिD भूपिम है। एन.ए.ड.-1 चेतराम ने इस खिFपित को अ नी साक्ष्य से स्पष्ट पिकया है पिक पिदनांक 29.06.2012 को स्वयं पिनगरानीकता- के द्वारा 63,500/- प्राप्त पिकये गये र्थीे और उक्त ऋण रापि* प्राप्त करने के अ ने हस्ताक्षर ए से बी गह र पिकये र्थीे। इनको स्वयं पिनगरानीकता- ने स्वीकार भी पिकया है। उक्त <ाता के दार ा के द्वारा पि<ा गया र्थीा। यह भी एक स्वीकृ त तथ्य है पिक पिनगरानीकता- के पि ता के द्वारा तर्थीाकपिर्थीत रू से पिये गये 50,000/- रू ये ऋण रापि* के बाबत कोई भी दस्तावे पिनगरानीकता- की ओर से े* नहीं हुए हैं बखिL गैर- पिनगरानीकता- का कर्थीन रहा है पिक 50,000/- रू ये की कोई ऋण रापि* पिनगरानीकता- के पि ता ने प्राप्त नहीं की है। वहीं दू सरी ओर ए.ड. 1 पिनगरानीकता- रामखि<ाडी ने प्रद*- 1 ए र 63,500/- रू ये की ऋण रापि* का <ाता अ ने नाम से स्वीकार पिकया है और स्वयं के हस्ताक्षर भी स्वीकार पिकये हैं। अतः यह स्पष्ट हो ाता है पिक पिनगरानीकता- के पि ता द्व ाारा कोई ऋण रापि* 50,000/- रू ये प्राप्त नहीं की गई बखिL स्वयं पिनगरानीकता- के द्वारा 63,500/- रू ये की रापि* गैरपिनगरानीकता-गण से प्राप्त की र्थीी। अतः इस सम्बन्ध में पिवद्वान कृ पिD ऋण पिनवारण न्यायाधी* के द्वारा ारिरत आक्षेपि त पिनण-य में इस हद तक पिकसी प्रकार की कोई पिवपिधक या तथ्यात्मक त्रुपिT नहीं है। 16. त्रावी के अवोकन से प्रकT होता है पिक पिनगरानीकता- के पिवद्वान अपिधवक्ता ने ऋण रापि* समय बापिधत होने का पिबन्ददु कृ पिD ऋण पिनवारण न्यायाधी* के समक्ष भी उठाया र्थीा ेपिकन पिनण-य के अवोकन से प्रकT होता है पिक इस र कोई पिववेचन नहीं पिकया गया है। इस स्टे र भी ऋण रापि* पिमयाद बाहर होने का पिबन्ददु उठाया गया है और उनका कहना है पिक ऋण रापि* पिमयाद बाहर होने का पिबन्ददु पिकसी भी स्टे र ताया ा सकता है। प्रद*- 1 ए र पिदनांक 08.04.2015 व 17.05.2015 को एक एक हार रू ये की रापि*, उक्त मू रापि* 63,500/- रू ये के ाT- ैमेंT के सम्बन्ध में पिनगरानीकता- के द्वारा मा करवाये ाने का कर्थीन गैरपिनगरानीकता- के पिवद्वान अपिधवक्ता ने पिकया है ेपिकन यह एक स्वीकृ त तथ्य है पिक ाT- ैमेंT र उक्त तारी<ों में पिनगराबरीकता- के हस्ताक्षर नहीं है। एन.ए.डी. 2 सत्यप्रका* व एन.ए.ड. [2025:RJ-JP:32390] (3 of 4) [CW-15349/2019] 3 दामू पिन्होंनने अ ने हस्ते< में उक्त ाT- ैमेंT के सम्बन्ध में इबारत पि<ी है, उन्होंनने अ ने <ुद के ही हस्ताक्षर इस इबारत र करना बताया है। हाांपिक उनका कहना है पिक रामखि<ाडी के समक्ष यह हस्ताक्षर पिकये र्थीे और रामखि<ाडी ने ाT- ैमेंT पिकया र्थीा, ेपिकन यह स्वीकृ त तथ्य है पिक इन र रामखि<ाडी के हस्ताक्षर नहीं है। 17. न्यापियक दृष्टान्त Jamnadas V. Panchayat Samiti, Sriganganagar, 1977 WLN (UC) 476 में प्रपित ापिदत पिसद्धान्त के अनुसार यपिद कोई ऋण पिमयाद बाहर हो चुका है तो वह ऋण नहीं माना ा सकता। पिमयाद अपिधपिनयम, 963 की धारा 18 (1), (2) व स्पष्टीकरण बी पिनम्नपिखि<त प्रावधान करती है- 18. Effect of acknowledgment in writing (1) Where, before the expiration of the prescribed period for a suit or application in respect of any property or right, an acknowledgment of liability in respect of such property or right has been made in writing signed by the party against whom such property or right is claimed, or by any person through whom he derives his title or liability, a fresh period of limitation shall be computed from the time when the acknowledgment was so signed. (2) Where the writing containing the acknowledgment is undated, oral evidence may be given of the time when it was signed; but subject to the provisions of the India Evidence Act, 1872, oral evidence of its contents shall not be received. Explanation- For the purposes of this section - a............ (b) the work "signed" means signed either personally or by an agent duly authorized in this behalf and c............. 18. उक्त पिवपिधक प्रावधानों के अवोकन से यह प्रकT होता है पिक ाT- ैमेंT र पिनगरानीकता- के हस्ताक्षर नहीं है। अतः यह नहीं माना ा सकता पिक उक्त ऋण रापि* का कोई ाT- ैमेंT पिनगरानीकता- के द्वारा पिकया गया हो। एन.ए.ड. 1 सत्यप्रका* व एन.ए.ड. 2 दामू को अ ने ाT- ैमेंT र हस्ताक्षर करने हेतु अपिभकता- पिनयुक्त पिकये ाने का ना तो गैरपिनगरानीकता- का कर्थीन रहा है और ना ही पिनगरानीकता- का कर्थीन रहा है। अतः यह अपिभस्वीकृ पित वैध नहीं मानी ा सकती है। इन रिरखिFपितयों में पिवद्वान कृ पिD ऋण पिनवारण न्यायाय को चापिहए र्थीा पिक वह इस तथ्य एवं पिवपिधक पिबन्ददु र पिवचार करता ेपिकन पिवद्वान कृ पिD ऋण पिनवारण न्यायाधी* ने इस पिबन्ददु र कोई पिवचार अ ने आक्षेपि त पिनण-य में नहीं पिकया है। ऋण रापि* को वसूने के पिए तीन वD- के अन्दर यापिचका े* करनी चापिहए र्थीी ेपिकन यह यापिचका काउन्टर क्लेम के रू में स्वीकृ त रू से तीन वD- से बाहर है। गैरपिनगरानीकता- के पिवद्वान अपिधवक्ता का यह कर्थीन पिक पिनगरानीकता- ने स्वयं यापिचका ऋण पिनधा-रण के पिए े* की है और उसने यह भी स्वीकार पिकया है पिक कोई बकाया पिनकता है तो वादी पिकश्तों में अदा करने के पिए तैयार है। अतः ऋण रापि* समय से [2025:RJ-JP:32390] (4 of 4) [CW-15349/2019] बापिधत नहीं मानी ा सकती। इस सम्बन्ध में उक्त न्यापियक दृष्टान्त ो पिवद्वान अपिधवक्ता पिनगरानीकता- की ओर से े* पिकया गया है, उससे स्पष्ट है पिक ऋण रापि* का तात्पय- ऐसी ऋण रापि* से है पिसकी वसूी की ा सकती हो और समय से बापिधत नहीं हो, ेपिकन हस्तगत प्रकरण में वसूी समय से बापिधत हो चुकी है। अतः कोई भी ऋण रापि* बकाया होना नहीं माना ा सकता। इन रिरखिFपितयों में यह स्पष्ट है पिक ऋण रापि* ' समय बापिधत हो चुकी है। पिववाद्यक संख्या- 2 अनुतोD. 19. यह पिववाद्यक अनुतोD से सम्बखिन्धत है। पिववाद्यक संख्या 1 में हाांपिक गैरपिनगरानीकता-गण की ऋण रापि* 63,860/- रू ये पिनगरानीकता- की ओर बकाया है, ेपिकन यह भी स्पष्ट है पिक उक्त ऋण रापि* समय बापिधत हो चुकी है, पिसकी वसूी कृ पिD ऋण पिनवारण अपिधपिनयम के तहत पिकये ाने का कोई भी अपिधकार गैरपिनगरानीकता-गण को नहीं है। चूंपिक पिनगरानीकता- के काउन्टर क्लेम अवपिध बापिधत होने क अपिभवचन र इस न्यायाय द्वारा पिवचार कर पिया गया है। ऐसी खिFपिव में पिगनरानीकता- की यह प्रार्थी-ना पिक मामे में पिमयाद बाहर होने क पिववाद्यक पिवरपिचत कर ुनः सुनवाई हेतु अधीनF न्यायाय को प्रपितप्रेपिDन पिकया ावे, स्वीकार पिकये ाने योग्य नहीं है। अतः इन रिरखिFपितयों पिनगरानी उ रोक्त पिववेचनानुसार आंपि*क रू से स्वीकार पिकये ाने योग्य है और आक्षेपि त पिनण-य व पिडकी अ ास्त पिकये ाने योग्य है। 20. अतः उक्त सम्पूण- पिववेचन के रिरप्रेक्ष्य में प्रार्थी- साय की ओर से ” प्रस्तुत पिनगरानी आंपि*क रू से स्वीकार पिकये ाने योग्य ाई ाती है। In light of the aforementioned, this Court finds no reason to interfere in the instant matter. Accordingly, the present petition is dismissed. All pending application also stand disposed of. (SAMEER JAIN),J Pooja /28