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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 300 (CHH)

ASHUTOSH DWIVEDI v. ADITI DWIVEDI

CRMP/3019/2025 · 2026-01-13

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 (Cr. M. P. No.-3019 of 2025) 2026:CGHC:2181 प्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक प्रकर्ण! यातिचक क्रमां$क -3019 /2025  आशु/ष ति1वेदा तिपु-रजेश्वेर प्रसदा ति1वेदा , उम्र-लगभग 35, ति6वेस -22/16, 6हरू 6गर (पुण्डिश्चमां), तिभलई, जिजेल–दाग!,छत्ती सगढ़ -----आवेदाक तिवेरूद्घ  अतिदाति ति1वेदा पुति-आशु/ष ति1वेदा , पुत्री -चन्द्र मां/ह6 उपुध्याया, उम्र-लगभग 33 वेष!, ति6वेस - ( )i पु . एमां. श्री पु$. आर. . तिवेर शुसकया अ$ग्रेजे मांध्यामां तिवेद्यलया, आमांपुर, जिजेल–रयापुर, छत्ती सगढ़ ( ) ii 117-स /2, जेवेहर ग$जे, धरहरिरया, प्रयाग, प्रयाग रलवे स्टेशु6 क समां पु, जिजेल–प्रयागरजे, उत्तीर प्रदाशु । -----प्रत्यार्थीP आवेदाक 1र : श्री मांया$क चन्द्रकर, अजिधवेक्ता । प्रत्यार्थीP 1र : सSच6 जेर 6हT । मां66 या न्यायामांSति! श्री स$जेया क मांर जेयासवेल , न्यायाध शु !! आदाशु पु ठ पुर पुरिर !! 14/01/2026 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.01.16 16:21:36 +0530 2 / 6 (Cr. M. P. No.-3019 of 2025) 1. भर या 6गरिरक सरक्षा स$तिह, 2023 क धर 528 क ह प्रस् इस यातिचक मां[, न्यायालया–मांख्या न्यातियाक मांजिजेस्टे]टे, दाग!, जिजेल-दाग!, छत्ती सगढ़ 1र दाण्डिक प्रकरर्ण क्रमां$क- RCC/26173/2025 “आशु/ष ति1वेदा तिवेरुद्ध अतिदाति ति1वेदा " मां[ पुरिर आदाशु तिदा6$क 04/08/2025 क/ च6b दा गई हc र्थी उक्ता आदाशु क/ अपुस् तिकए जे6 क ति6वेदा6 तिकया गया हc । सर्थी ह याह भ ति6वेदा6 तिकया गया हc तिक आवेदाक 1र भर या न्याया स$तिह, 2023 क धर 229 क अ$ग! कजिर्थी अपुरध क स$$ध मां[ तिदा6$क 28/04/2025 क/ प्रस् आवेदा6 क/ तिवेजिध अ6सर तिवेचर एवे$ ति6रकरर्ण ह स$$जिध क टेम् न्यायालया, दाग!, जिजेल-दाग! (छत्ती सगढ़) क/ वेपुस प्रतिष तिकए जे6 क ति6दाeशु प्रदा6 तिकए जेएf । 2. प्रकरर्ण क थ्या स$क्षापु मां[ इस प्रकर हc तिक प्रत्यार्थीP अतिदाति ति1वेदा , आवेदाक क तिवेजिधक पुत्6 हc । आवेदाक 1र प्रध6 न्यायाध शु, क टेम् न्यायालया, दाग!, जिजेल-दाग!, छत्ती सगढ़ क समांक्षा तिवेवेह-तिवेच्छदा ह एक मांSल व्यावेहरवेदा प्रस् तिकया गया हc, जे/ व्यावेहरवेदा क्रमां$क 727/2024 “आशु/ष ति1वेदा तिवेरुद्ध श्री मां अतिदाति ति1वेदा ” क रूपु मां[ वे!मां6 मां[ ल$ति हc । उक्ता व्यावेहरवेदा मां[ प्रत्यार्थीP अतिदाति ति1वेदा क अ6पुण्डिस्र्थीति क करर्ण उस एकपुक्षा या घो/तिष तिकया गया र्थी । पुश्चk प्रत्यार्थीP 1र आदाशु 9 ति6यामां 7 व्यावेहर प्रतिक्रया स$तिह क अ$ग! एकपुक्षा या कया!वेह ति6रस् तिकए जे6 ह आवेदा6 प्रस् तिकया गया, जिजेसमां[ उस6 अपु6 पु प्रयागरजे, उत्तीर प्रदाशु क  हlए एक शुपुर्थीपुत्री प्रस् तिकया । 3. आवेदाक क याह कर्थी6 हc तिक प्रत्यार्थीP 1र प्रस् उक्ता शुपुर्थीपुत्री असत्या, भ्रामांक एवे$ थ्याह 6 हc र्थी इस न्यायालया क/ गमांरह कर6 क उद्देश्या स प्रस् तिकया गया हc । 3 / 6 (Cr. M. P. No.-3019 of 2025) आवेदाक क अ6सर, प्रत्यार्थीP 1र जे6Sझकर असत्या थ्या क शुपुर्थीपुSवे!क कर्थी6 तिकया गया, जे/ भर या न्याया स$तिह, 2023 क अ$ग! दा6 या अपुरध क श्रीर्ण मां[ आ हc । उक्ता आवेदा6 तिदा6$क 28/04/2025 पुर प्रध6 न्यायाध शु, क टेम् न्यायालया, दाग!, जिजेल–दाग!, छत्ती सगढ़ 1र तिदा6$क 18/07/2025 क/ ति6म्6जिलजिp आदाशु पुरिर तिकया गया— "अ याह दाp6 हc तिक क्या पुरिरवेर न्यायालया क/ दाण्डिक मांमांल मां[ स$ज्ञा6 ल6 क अजिधकर हc । पुरिरवेर न्यायालया दाण्डिक न्यायालया 6हT हc इसजिलए पुरिरवेर न्यायालया क/ दाण्डिक न्यायालया 6हT ह/6 क करर्ण आपुरजिधक मांमांल मां[ स$ज्ञा6 ल6 क अजिधकर 6हT हc इसजिलए स$ज्ञा6 ल6 क अजिधकरिर रp6 वेल न्यायालया मां[ आवेदाक क आवेदा6 और दास्वेजे क/ भजे6 उतिच ह/ग । अu आवेदाक क आवेदा6 और दास्वेजे क सर्थी लग दास्वेजे क/ अतिग्रेमां कया!वेह क जिलए मांख्या न्यातियाक मांजिजेस्टे]टे, दाग! क/ ज्ञापु6 क सर्थी भजे जेवे[ । प्रकरर्ण क कया!वेह समांप्त । आदाशु पुत्रीक क/ रिरक! रूमां भजे जेवे[ ।" 4. इसक पुश्च न्यायालया-मांख्या न्यातियाक मांजिजेस्टे]टे, दाग!, जिजेल-दाग!, छत्ती सगढ़ क समांक्षा उक्ता आवेदा6 क/ दाण्डिक प्रकरर्ण क्रमां$क- RCC/26173/2025 “आशु/ष ति1वेदा तिवेरुद्ध अतिदाति ति1वेदा " क रूपु मां[ पु$जे द्ध तिकया गया । मांख्या न्यातियाक मांजिजेस्टे]टे 1र तिदा6$क-04/08/2025 क/ आदाशु पुरिर कर हlए याह उल्लेp तिकया गया तिक उसक समांक्षा क/ई कS टेरतिच दास्वेजे प्रस् 6हT तिकया गया हc र्थी धर 195(1)( )( ) b ii दा प्रतिक्रया स$तिह क अ$ग! न्यायालया 6 कया!वेह मां[ प्रस् दास्वेजेx क स$$ध मां[ स$ज्ञा6 क वेल उस न्यायालया 1र जिलया जे सक हc, जिजेसक कया!वेह मां[ वेह दास्वेजे प्रस् तिकया गया ह/ । इस आधर पुर, प्रकरर्ण क गर्ण-दा/ष पुर तिवेचर तिकए ति6 ह आवेदाक क आवेदा6 ति6रस् कर तिदाया गया । 4 / 6 (Cr. M. P. No.-3019 of 2025) 5. न्यायालया 1र स$पुSर्ण! अतिभलp एवे$ प्रस् कy$ पुर तिवेचर कर6 क पुश्चk याह थ्या ति6तिवे!वेदा रूपु स स्पुष्ट ह/ हc तिक तिवेवेह-तिवेच्छदा स स$$जिध मांSल व्यावेहरवेदा वे!मां6 मां[ प्रध6 न्यायाध शु, क टेम् न्यायालया, दाग! क समांक्षा ल$ति हc । प्रत्यार्थीP 1र कजिर्थी शुपुर्थीपुत्री उस न्यायालया क कया!वेह क दाbर6 प्रस् कर6 या गया हc । वेस्u, उक्ता आवेदा6 पुर स$$जिध न्यायालया 1र धर 379 भर या 6गरिरक सरक्षा स$तिह, 2023 क अ$ग! कया!वेह तिकया जे6 अपुतिक्षा र्थी, जिजेसक प्रवेध6 ति6म्6वेk हc— “379. धर 215 मां[ वेतिर्ण! मांमांलx मां[ प्रतिक्रया-(1) जे तिकस न्यायालया क, उसस इस ति6तिमांत्ती तिकए गए आवेदा6 पुर या अन्यार्थी, याह रया हc तिक न्याया क तिह मां[ याह समां च 6 हc तिक धर 215 क उपुधर (1) क p$ (p) मां[ ति6तिदा!ष्ट तिकस अपुरध क, जे/ उस, यार्थीण्डिस्र्थीति, उस न्यायालया क कया!वेह मां[ या उसक सम्न्ध मां[ या उस न्यायालया क कया!वेह मां[ सक्ष्या मां[ प्रस् या तिदाए गए दास्वेजे क र मां[ तिकया हlआ प्र  ह/ हc, जे$च क जे6 चतिहए,  ऐस न्यायालया ऐस प्ररण्डिम्भक जे$च क पुश्चk, यातिदा क/ई ह/, जेcस वेह आवेश्याक समांझ, - (क) उस भवे क ति6ष्कष! अतिभजिलजिp कर सक ग; (p) उसक जिलजिp पुरिरवेदा कर सक ग; (ग) उसक अजिधकरिर रp6 वेल प्रर्थीमां वेग! मांजिजेस्टे]टे क/ भजे सक ग; (घो) ऐस मांजिजेस्टे]टे क समांक्षा अतिभयाक्ता क उपुण्डिस्र्थी ह/6 क जिलए पुया!प्त प्रतिभSति ल सक ग या यातिदा अतिभकजिर्थी अपुरध अजेमां6 या हc और न्यायालया ऐस कर6 आवेश्याक समांझ हc /, अतिभयाक्ता क/ ऐस मांजिजेस्टे]टे क पुस अतिभरक्षा मां[ भजे सक ग; और (ङ) ऐस मांजिजेस्टे]टे क समांक्षा उपुण्डिस्र्थी ह/6 और सक्ष्या दा6 क जिलए तिकस व्यातिक्ता क/ आद्ध कर सक ग । (2) तिकस अपुरध क र मां[ न्यायालया क/ उपुधर (1) 1र प्रदात्ती शुतिक्ता क प्रया/ग, ऐस मांमांल मां[ जिजेसमां[ उस न्यायालया 6 उपुधर (1) क अध 6 उस अपुरध क र मां[ 6 / पुरिरवेदा तिकया हc और 6 ऐस पुरिरवेदा क तिकए जे6 क जिलए आवेदा6 क/ 6मां$जेSर तिकया हc, उस न्यायालया 1र तिकया जे सक ग जिजेसक अध 6स्र्थी ऐस पुSवे!कजिर्थी न्यायालया धर 215 क उपुधर (4) क अर्थी! मां[ हc । 5 / 6 (Cr. मां[ हc । 5 / 6 (Cr. M. P. No.-3019 of 2025) (3) इस धर क अध 6 तिकए गए पुरिरवेदा पुर हस्क्षार, - (क) जेह$ पुरिरवेदा कर6 वेल न्यायालया उच्च न्यायालया हc वेह$ उस न्यायालया क ऐस अजिधकर 1र तिकए जेए$ग, जिजेस वेह न्यायालया ति6याक्ता कर; (p) तिकस अन्या मांमांल मां[, न्यायालया क पु ठस 6 अजिधकर 1र या न्यायालया क ऐस अजिधकर 1र, जिजेस न्यायालया इस ति6तिमांत्ती जिलजिp मां[ प्रजिधक€  कर, तिकए जेए$ग । (4) इस धर मां[ "न्यायालया" क वेह अर्थी! हc जे/ धर 215 मां[ उसक हc । याह धर दा प्रतिक्रया स$तिह, 1973 क धर 340 क समांरूपु हc ।" 6. प्रध6 न्यायाध शु, क टेम् न्यायालया, दाग! 1र 6 / तिकस प्रकर क प्रर$तिभक जे$च क गई और 6 ह धर 379 भर या 6गरिरक सरक्षा स$तिह, 2023 क अ$ग! अपुतिक्षा स$तिष्ट अतिभजिलजिp क गई । ति6 उक्ता वेcधति6क प्रतिक्रया क पुल6 तिकए, आवेदाक क आवेदा6 क/ स ध मांख्या न्यातियाक मांजिजेस्टे]टे क समांक्षा प्रतिष कर तिदाया गया, जे/ तिवेजिधक प्रतिक्रया 6हT हc । अu याह न्यायालया पु हc तिक प्रध6 न्यायाध शु, क टेम् न्यायालया, दाग! 1र पुरिर आदाशु तिदा6$क 18/07/2025 तिवेजिधसम्मां 6हT हc । 7. चSfतिक, मांख्या न्यातियाक मांजिजेस्टे]टे, दाग! 1र पुरिर आदाशु तिदा6$क 04/08/2025 उस त्रीतिटेपुSर्ण! आदाशु क पुरिरर्णमांस्वेरूपु पुरिर तिकया गया हc, अu वेह आदाशु भ ण्डिस्र्थीर रp जे6 या/ग्या 6हT हc । इस प्रकर, प्रध6 न्यायाध शु, क टेम् न्यायालया, दाग! 1र पुरिर आदाशु तिदा6$क 18/07/2025 र्थी न्यायालया—मांख्या न्यातियाक मांजिजेस्टे]टे, दाग! 1र पुरिर आदाशु तिदा6$क 04/08/2025, क/ अपुस् तिकया जे हc । 8. याह दाण्डिक प्रकर्ण! यातिचक उपुर/क्ता आदाशु क सर्थी ति6रक€  क जे हc र्थी प्रध6 न्यायाध शु, क टेम् न्यायालया, दाग!, जिजेल-दाग!, छत्ती सगढ़ क/ ति6दाeतिशु तिकया जे हc तिक यातिदा आवेदाक 1र इस प्रक€ ति क आवेदा6 पु6u प्रस् तिकया जे6 पुर भर या 6गरिरक 6 / 6 (Cr. M. P. No.-3019 of 2025) सरक्षा स$तिह, 2023 क धर-379 क तिवेजिधक प्रवेध6 क अ6सर ति6रकरर्ण तिकया जेवे[ । 9. आवेदाक क/ तिवेजिध क अ6सर 6वे 6 आवेदा6 प्रस् कर6 अर्थीवे 6 कर6 क पुSर्ण! स्वे$त्री रहग । 10. रजिजेस्टे] क/ ति6दाeतिशु तिकया जे हc तिक इस आदाशु क प्रति यार्थीशु घ्र स$$जिध न्यायालयाx क/ सSच6र्थी! एवे$ पुल6र्थी! प्रतिष क जेए । 11. उपुर/क्ता6सर, इस दाण्डिक प्रकर्ण! यातिचक क ति6रकरर्ण तिकया जे हc । सह /- (स$जेया क मांर जेयासवेल) न्यायाध शु पु/मां6