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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 296 (CHH)

RAJVEER SINGH NAGPAL v. STATE OF CHHATTISGARH

CRA/2587/2025 · 2026-03-10

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 9 {Cr. A. No.-2536 of 2025 & 2587 of 2025} 2026:CGHC:11621 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दाण्डिक अपु ल क्रमां"क -2536 /2025 1. रज रठ तिपु-रमांरूपु रठ, उम्र-लगभग 22 वेर्ष0, ति1वेस -वे0 स"ख्या-06, च"दामांर , रयागढ़, पुलिलस था1-लिसटी क6वेल , रयागढ़, लिजल-रयागढ़, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा7/अतिभयाक्त तिवेरूद्घ  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार था1 प्रभर , पुलिलस था1-लिसटी क6वेल , रयागढ, लिजल-रयागढ़, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा /रज्या अपु लथा7गण/अतिभयाक्तगण द्वार : श्री रजन्द्र तिAपुठ , अलिBवेक्त । तिDकयाक0 द्वार : श्री एस.आर.ज. जयासवेल, अलिBवेक्त । उत्तीरवेदा /रज्या द्वार : श्री कन्हैIया रमां यादावे, पुI1ल अलिBवेक्त । एवे" दाण्डिक अपु ल क्रमां"क -2587 /2025 1. रजवे र लिस"है 1गपुल तिपु-प्यार लिस"है 1गपुल, उम्र-लगभग 20 वेर्ष0, ति1वेस - च"दामांर , है6मांग0 कया0लया क पुस, रयागढ़, पुलिलस था1-लिसटी क6वेल , रयागढ़, लिजल-रयागढ़, छत्ती सगढ़, POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.03.13 15:23:17 +0530 2 / 9 {Cr. A. No.-2536 of 2025 & 2587 of 2025} 2. जयादावे लिस"है उर्फ0 जस्स क" ग तिपु-स्वेग7या लदावे लिस"है, उम्र-लगभग 24 वेर्ष0, ति1वेस -वे0 स"ख्या-13, गQDलपुर, पुलिलस लई1, रयागढ़, पुलिलस था1-लिसटी क6वेल , रयागढ़, लिजल-रयागढ़, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा7गण/अतिभयाक्तगण तिवेरूद्घ  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार था1 प्रभर , पुलिलस था1-लिसटी क6वेल , रयागढ, लिजल-रयागढ़, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा /रज्या अपु लथा7/अतिभयाक्त द्वार : श्री अतिमां Dमां0, अलिBवेक्त । आपुलित्तीक0 द्वार : श्री सक  पुया, अलिBवेक्त । उत्तीरवेदा /रज्या द्वार : श्री कन्हैIया रमां यादावे, पुI1ल अलिBवेक्त । मां11 या न्यायामांSति0 श्री स"जया क मांर जयासवेल , न्यायाB D !! ति1ण0या पु ठ पुर पुरिर !! 11/03/2026 1. भर या 1गरिरक सरक्षा स"तिहै, 2023 कW Bर-415 (2) क है प्रस् इस दाण्डिक अपु ल मां[ तिवेचरण न्यायालया-सA न्यायाB D, रयागढ़, लिजल-रयागढ़, छत्ती सगढ़ द्वार सA प्रकरण क्रमां"क-33/2025 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ रजवे र लिस"है 1गपुल वेगIरहै” मां[ पुरिर ति1ण0या तिदा1"क-30/10/2025 क6 च1Q दा गई हैI । लिजसक है अपु लथा7गण क6 ति1म्11सर दा6र्षलिसद्ध कर दाण्डि तिकया गया हैI । लिजस आग स"क्षापु मां[ “प्रश्1B 1 ति1ण0या” स स"6लिB तिकया ज रहै हैIa- 3 / 9 {Cr. A. No.-2536 of 2025 & 2587 of 2025} दा6र्षलिसतिद्ध दादाD Bर-191(3) भर या न्याया स"तिहै, 2023 04 वेर्ष0 क सश्रीमां करवेस एवे" 10,000/-रूपुया क अथा0दा था अथा0दा रतिD अदा 1 कर1 कW दाD मां[ 01 मांहै क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कW सज । Bर-109 भर या न्याया स"तिहै, 2023 10 वेर्ष0 क सश्रीमां करवेस एवे" 50,000/-रूपुया क अथा0दा था अथा0दा रतिD अदा 1 कर1 कW दाD मां[ 05 मांहै क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कW सज । Bर-109 सहैपुतिठ Bर-190 भर या न्याया स"तिहै, 2023 10 वेर्ष0 क सश्रीमां करवेस एवे" 50,000/-रूपुया क अथा0दा था अथा0दा रतिD अदा 1 कर1 कW दाD मां[ 05 मांहै क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कW सज । Bर-115(2) भर या न्याया स"तिहै, 2023 06 मांहै क सश्रीमां करवेस एवे" 5,000/- रूपुया क अथा0दा था अथा0दा रतिD अदा 1 कर1 कW दाD मां[ 15 तिदा1 क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कW सज । Bर-115(2) सहैपुतिठ Bर-190 भर या न्याया स"तिहै, 2023 06 मांहै क सश्रीमां करवेस एवे" 5,000/- रूपुया क अथा0दा था अथा0दा रतिD अदा 1 कर1 कW दाD मां[ 15 तिदा1 क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस कW सज । सभ मांSल सजए" सथा-सथा चल[ग । 4 / 9 {Cr. A. No.-2536 of 2025 & 2587 of 2025} 2. अतिभया6ज1 मांमांल स"क्षापु मां[ इस प्रकर हैI तिक तिदा1"क 07/12/2024 कW रतिA लगभग 11:30 ज आहै/प्रथा7 सतिहैल लिस"है रजपुS (अ.स.-1) था अमां1 लिस"है ठक र (अ.स.-2) अपु1 तिमांAc क सथा रयागढ़ पु6स्टी ऑतिeस क पुस ण्डिस्था लिजमां क पु छ लकड़ी जलकर आग पु रहै था । उस समांया ण्डिस्वेफ्टी तिज़ायार कर मां[ सवेर है6कर अपु लथा7गण अन्या सहै-अतिभयाक्तc क सथा वेहै" आए, ज6 अपु1 हैथाc मां[ रi एवे"  लिलए हैjए था । वे कर स उरकर प्रथा7 पुक्षा क6 अश्ल ल गलिलया" दा हैjए ज1 स मांर1 कW BमांकW दा1 लग था उ1कW हैत्या कर1 क आDया स रi एवे"  स मांरपु टी तिकए, लिजसस सतिहैल लिस"है रजपुS था अमां1 लिस"है ठक र क6 च6टी[ आई" । उन्है[ उपुचर है अस्पुल मां[ भ7 करया गया । घटी1 मां[ सतिहैल लिस"है रजपुS क एक दा" था जड़ी भ टीSटी गया । सSच1 पुर था1 लिसटी क6वेल , रयागढ़ मां[ अपुरB क्रमां"क 741/2024 पु"ज द्ध तिकया गया था स"पुSण0 तिवेवेच1 उपुर" अतिभया6ग-पुA प्रस् तिकया गया । 3. तिवेचरण क दाQर1 आर6पु क प्रमांण1 है अतिभया6ज1 कW ओर स अपु1 पुक्षा क समांथा01 मां[ क ल 14 सतिक्षायाc क पुर क्षाण करया गया था 48 दास्वेज प्रदातिD0 तिचन्है"तिक करए गए । Bर 313 दा प्रतिक्रया स"तिहै क है कथा1 मां[ अपु लथा7गण/अतिभयाक्तगण 1 अपु1 तिवेपुर  आए सतिक्षायाc क कथा1c स इ"कर कर हैjए स्वेया" क6 ति1दाnर्ष है61 वे झूSठ र्फ" सया ज1 या, लिजन्हैc1 चवे मां[ क6ई सक्ष्या प्रस् 1हैq तिकया । उभयापुक्षा क6 स1 जकर तिवेचरण न्यायालया द्वार अपु लथा7गण/अतिभयाक्तगण क6 Bर-296 (चर र) एवे" 351(3)(चर र) क अपुरB स दा6र्षमांक्त तिकया गया था इस ति1ण0या कW कण्डिक-1 क अ1सर दा6र्षलिसद्ध कर दाण्डि तिकया गया हैI । लिजस इस अपु ल मां[ च1Q दा गई हैI । 5 / 9 {Cr. A. No.-2536 of 2025 & 2587 of 2025} 4. मांमांल मां[ अपु लथा7गण/अतिभयाक्तगण कW ओर स अ"रिरमां आवेदा1 क्रमां"क 3/2026 था 4/2026 प्रस् तिकए गए हैr, लिज1 पुर आहै/प्रथा7 सतिहैल लिस"है रजपुS एवे" अमां1 लिस"है ठक र क हैस्क्षार हैr । उक्त आवेदा1c क मांध्यामां स ति1वेदा1 तिकया गया हैI तिक पुक्षाकरc क मांध्या हैjए रज 1मां क6 स्वे कर कर1 कW अ1मांति प्रदा1 कW जए । सभ अपु लथा7गण वे0मां1 मां[ जल मां[ ति1रुद्ध हैr था उ1कW ओर स उ1क अतिभभवेकc क DपुथापुA प्रस् तिकए गए हैr । आज तिदा1"क क6 आहै/प्रथा7 सतिहैल लिस"है रजपुS एवे" अमां1 लिस"है ठक र अपु1 अलिBवेक्त सतिहै न्यायालया क समांक्षा उपुण्डिस्था हैjए और उन्हैc1 याहै व्याक्त तिकया तिक वे तिकस भ प्रकर क भया, दावे या प्रल6भ1 क ति1 स्वेच्छपुSवे0क अपु लथा7गण/ अतिभयाक्तगण क सथा रज 1मां कर1 क लिलए सहैमां हैr । 5. स"पुSण0 अतिभलख क पुरिरD ल1 स याहै पुरिरलतिक्षा है6 हैI तिक अपु लथा7गण 1 अन्या र्फरर सहै-अतिभयाक्तc क सथा तिमांलकर प्रथा7/आहै पुक्षा क सथा मांरपु टी कW, लिजसस उन्है[ ग"भ र प्रकx ति कW च6टी[ करिर हैjई" । हैत्या क प्रयास क अपुरB Dमां1 या 1हैq हैI । स"कलिल सक्ष्या वे अपुरB कW ग"भ र ण्डिस्थाति क6 दाख हैjए अ"ति10तिहै Dतिक्तयाc क है रज 1मां कW अ1मांति तिदाया ज1 उपुयाक्त 1हैq पु । अa रज 1मां स""B आवेदा1 ति1रस् तिकया ज हैI । 6. अपु लथा7गण/अतिभयाक्तगण क तिवेद्वा1 अलिBवेक्तगण क क0 हैI तिक वे अपु लथा7गण कW दा6र्षलिसतिद्ध क6 च1Q 1हैq दा1 चहै । सभ अपु लथा7गण वे0मां1 मां[ जल मां[ ति1रुद्ध हैr था उ1 पुर पुरिरवेरिरक दातियात्वे हैr । आहै/प्रथा7 पुक्षा द्वार भ रज 1मां कर1 कW इच्छ व्याक्त कW ज चकW हैI । अपु लथा7 रजवे र लिस"है 1गपुल अ क लगभग 09 मांहै 10 तिदा1, अपु लथा7 जसदावे लिस"है उर्फ0 जस्स क" ग लगभग 06 मांहै 17 तिदा1 था अपु लथा7 6 / 9 {Cr. A. No.-2536 of 2025 & 2587 of 2025} रज रठ लगभग 06 मांहै 28 तिदा1 स अतिभरक्षा मां[ रहै चक हैr । अa उक्त अतिभरक्षा अवेलिB क6 पुया0प्त मां1 हैjए उ1क करवेस क दा क6 उस अवेलिB क स तिमां तिकया जवे[ । तिवेद्वा1 अलिBवेक्तगण द्वार अपु1 क0 क समांथा01 मां[ न्यायादृष्टां" "टी कस1 उर्फ0 क Dवे तिवेरूद्घ मांध्याप्रदाD रज्या, दाण्डिक अपु ल क्रमां"क 5640/2024, ति1ण0या तिदा1"क 03/07/2025 क हैवेल तिदाया गया हैI । 7. उत्तीरवेदा /रज्या पुक्षा कW ओर स तिवेद्वा1 अलिBवेक्त 1 इस अपु ल क तिवेर6B कर हैjए क0 तिकया हैI तिक अपु लथा7 रज रठ क तिवेरुद्ध Bर 294, 506 एवे" 323 भर या दा स"तिहै क अ"ग0 वेर्ष0 2020 एवे" 2021 क दा6 पुSवे0 आपुरलिBक मांमांल भ दाज0 हैr । 8. उभयापुक्षा क क0 स1 गया और अतिभलख क सSक्ष्मांपुSवे0क पुरिरD ल1 तिकया गया । 9. मां11 या मांध्याप्रदाD उच्च न्यायालया, ग्वेलिलयार क न्यायादृष्टां" "टी कस1 उर्फ0 क Dवे (पुSवेnक्त) कW कण्डिक-12 स 15 ति1म्11सर हैIa- (12) On this aspect, the law laid down by the Hon'ble Apex Court in the case of Ishwar Singh vs. State of Madhya Pradesh [AIR 2009 SC 675] is worth to be quoted here, as under: "15. In our considered opinion, it would not be appropriate to order compounding of an offence not compoundable under the code ignoring and keeping aside statutory provisions. In our judgment, however, limited submission of the learned counsel for the appellant deserves consideration that while imposing substantive sentence, the factum of compromise between the 7 / 9 {Cr. A. No.-2536 of 2025 & 2587 of 2025} parties is indeed a relevant circumstances which, the Court may keep in mind." (13) On this point, the view of the Hon'ble Apex Court in the case of Unnikrishnan alias Unnikuttan versus State of Kerala, AIR 2017 Supreme Court 1745 is also worth referring in the context of this case, as under:- "10. In series of decisions i.e. Bharath Singh vs. State of M.P. and Ors., 1990 (Supp) SCC 62, Ramlal vs. State of J & K, (1999) 2 SCC 213, Puttaswamy vs. State of Karnataka and Anr, (2009) 1 SCC 71 1, this Court allowed the parties to compound the offence even though the offence is a noncompoundable depending on the facts and circumstances of each case. In some cases this Court while imposing the fine amount reduced the sentence to the period already undergone." 11. What emerges from the above is that even if an offence is not compoundable within the scope of Section 320 of Code of Criminal Procedure the Court may, in view of the compromise arrive at between the parties, reduce the sentence imposed while maintaining the conviction." (14) Cr. A. No.268/2016 (Kanha @ Mahesh v/s The State of Madhya Pradesh) decided on 26.08.2017 as well as in Cr. A. No.561/2010 (Radhakrishnan & 3 Others v/s The State of Madhya Pradesh) decided on 18.04.2017 and in CRA No.604/2000 (Aaram singh vs. The State of Madhya Pradesh) 8 / 9 {Cr. A. No.-2536 of 2025 & 2587 of 2025} decided on 08.08.2019, Sohan Jangu & others vs. State of Madhya Pradesh passed in CRA No.550/2023 on 11.07.2023. (15) Hon'ble Apex Court in the case of Bhagwan Narayan Gaikwad vs. State of Maharashtra; [2021 (4) Crimes 42 (SC)] held as under:- "28. Giving punishment to the wrongdoer is the heart of the criminal delivery system, but we do not find any legislative or judicially laid down guidelines to assess the trial Court in meeting out the just punishment to the accused facing trial before it after he is held guilty of the charges. Nonetheless, if one goes through the decisions of this Court, it would appear that this Court takes into account a combination of different factors while exercising discretion in sentencing, that is proportionality, deterrence, rehabilitation, etc." 29. The compromise if entered at the later stage of the incident or even after conviction can indeed be one of the factor in interfering the sentence awarded to commensurate with the nature of offence being committed to avoid bitterness in the families of the accused and the victim and it will always be better to restore their relation, if possible, but the compromise cannot be taken to be a 6 solitary basis until the other aggravating and mitigating factors also support and are favourable to the accused for molding the sentence which always has to be examined in the facts andcircumstances of the case on hand." 9 / 9 {Cr. A. No.-2536 of 2025 & 2587 of 2025} 10. उपुर6क्त न्यायादृष्टां" क प्रकD मां[ याहै पु हैjए तिक अपु लथा7गण/अतिभयाक्तगण कW आया लगभग 20 स 25 वेर्ष0 क मांध्या हैI था मांमांल मां[ आहै/प्रथा7 पुक्षा द्वार अपु लथा7गण क सथा रज 1मां हैjआ हैI । ऐस दाD मां[ समांस् थ्या एवे" पुरिरण्डिस्थातियाc क6 दृतिष्टांग रख हैjए याहै न्यायालया पु हैI तिक अपु लथा7गण क6 जल मां[ और ति1रूद्घ रख ज1 क औतिचत्या 1हैq हैI । अa उ1कW दा6र्षलिसतिद्ध कW पुतिष्टां कर हैjए उ1क करवेस क दा क6 उ1कW अतिभरक्षा अवेलिB क स तिमां तिकया ज हैI । अथा0दा रतिD कW पुतिष्टां कW ज हैI । अथा0दा कW रतिD अदा 1 कर1 कW दाD मां[ तिवेचरण न्यायालया द्वार ति1B0रिर वेIकण्डि•पुक करवेस क दा कW भ पुतिष्टां कW ज हैI । अथा0दा कW रतिD जमां है61 पुर उक्त रतिD आहै/प्रथा7 सतिहैल लिस"है रजपुS एवे" अमां1 लिस"है ठक र क मांध्या समां1 रूपु स तिवेभलिज कर प्रतिकर स्वेरूपु प्रदा1 कW जए । अa अपु ल आ"तिDक रूपु स स्वे कर तिकया ज हैr । 11. अपु लथा7गण/अतिभयाक्तगण क6 जल मां[ ति1रूद्घ या गया हैI । यातिदा उ1कW अन्या मांमांल मां[ आवेश्याक 1 है6 6 उन्है[ त्कल रिरहै तिकया जए । 12. ति1ण0या कW प्रति क सथा तिवेचरण न्यायालया क6 मांSल अतिभलख था ति1ण0या कW सत्याप्रतिलिलतिपु स""लिB जल अB क्षाक क6 आवेश्याक कया0वेहै है सSच1था0 एवे" पुल1था0 D घ्रपुSवे0क प्रतिर्ष है6 । सहै /- (स"जया क मांर जयासवेल) न्यायाB D पु6मां1