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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 7857 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 523/2023 से उद्भूत वाद सं० 8488/2023, अंतगर्त धारा 419, 420, 467, 468, 471, 506 भा.दं.सं., थाना कोतवाली हाटा, िजला कु शीनगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता श्री गौरव कु मार िसह एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में विणत िकया गया है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। प्रश्नगत घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। वतर्मान घटना से संबंिधत िकसी प्रकार की संिदग्ध वस्तु आवेदक के पास से बरामद नहीं हुई है। दौरान िववेचना िववेचक ने आवेदक के िवरुद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य एकित्रत िकए िबना ही आवेदक के िवरुद्ध िमथ्या रूप से आरोप पत्र प्रस्तुत कर िदया है। आवेदक द्वारा सूचनाकतार् का कोई जाली/फजीर् दस्तावेज़ नहीं बनाया है , न ही िकसी दस्तावेज की कू टरचना कािरत की है और न ही कोई संपित्त बेची है। आवेदक को संदेह के आधार पर वतर्मान मामले में झूठा फं साया गया है। प्रासंिगक तथ्य यह भी है िक सूचनाकतार् काफी समय से सऊदी अरब में रहता है तथा उसने अपनी सम्पित्त िकसी अन्य व्यिक्त को पट्टे पर दे रखी है और िजस व्यिक्त ने सूचनाकतार् की सम्पित्त का पट्टा िलया है, वह इसकी सम्पूणर् िजम्मेदारी है। सूचनाकतार् द्वारा आवेदक पर अपने िलए श्रमकायर् करने हेतु दबाव डाला जाता है, मना करने पर आवेदक को वतर्मान वाद में िमथ्यारोिपत कर िदया गया है। प्रश्नगत वाद में आवेदक द्वारा िकसी प्रकार की जमीन की खरीद-फरोख्त कािरत नहीं की गयी है तथा प्रश्नगत वाद में िवक्रय-िवलेख के संबंध में कोई प्रितफल की धनरािश आवेदक के खाते में प्राप्त Versus Counsel for Applicant(s) : A.C.Srivastava, Amrita Kashyap, Chandan Yadav, Dipanshu Kushwaha, Renu Sharma, Shams Uz Zaman Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Gaurav Kumar Singh Arshad .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) नहीं हुई है। आवेदक के िवरुद्ध प्रश्नगत िववािदत जमीन के िवक्रे ता द्वारा एक अन्य प्राथिमकी पंजीकृ त करायी गयी, िजसमें आवेदक को जमानत प्राप्त हो चुकी है। उक्त के अितिरक्त आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण
में िद० 29.08.2023 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7.
उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 17, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 7857 of 2024 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad