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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 27109 (ALL)
RAJ NARAYAN v. STATE OF U.P.
BAIL/8117/2025 · 2025-08-10
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 27109 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:135428 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8117 of 2025 Applicant :- Raj Narayan Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Raj Narayan Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Raj Narayan ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 223/2024, अवंतररत धिद्वारद्वा 318(4), 127(7), 309(6), 308(5), 317(2), 115(2), 351(2), 352 बली.एन.एस., थद्वानद्वा मद्वावनकपसुर, धजलद्वा वचितकक ट मम जमद्वानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हहै।
3. आववेदक पर आकवेप हहै वक उसकवे दद्वारद्वा सकचिनद्वाकतद्वार कको मद्वारपलीट कर उसकवे खद्वातवे सवे मको० कवे जररए जबरदस्तली 27,000/- हजद्वार रुपए अपनवे खद्वातवे मम हस्तद्वावंतररत कर धलयद्वा।
4.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झकठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हहै। प्रथम सकचिनद्वा ररपकोटर ववलणमबत हहै तथद्वा उक ववलमब कद्वा ककोई समसुवचित स्पषलीकरर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक कवे पद्वास सवे मद्वात 750 रु० एववं एक मकोबद्वाइल ककी बरद्वामदरली दवशरत ककी रयली हहै, जको वक आववेदक कद्वा खसुद कद्वा हहै। उक कवे अवतररक अन्य ककोई सवंवदग्धि वस्तसु ककी बरद्वामदरली दवशरत नहहीं ककी रयली हहै। बरद्वामदरली कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकली नहहीं हहै। जहद्वाहाँ तक सकचिनद्वाकतद्वार सवे मद्वारपलीट करनवे कद्वा प्रश्न हहै , उक कधथत
मद्वारपलीट कवे सवंबवंधि मम सकचिनद्वाकतद्वार ककी वचिवकत्सलीय आख्यद्वा मम भली स्पष अवंवकत वकयद्वा रयद्वा हहै वक उसकवे शरलीर पर वकसली प्रकद्वार कवे चिकोट कवे वनशद्वान नहहीं पद्वायवे रयवे हह, धजससवे भली अवभयकोजन कथद्वानक वमथ्यद्वा प्रतलीत हकोतद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा सकचिनद्वाकतद्वार कवे मको० सवे वकसली प्रकद्वार ककी धिनरद्वावश स्वयवं अपनवे खद्वातवे मम हस्तद्वावंतररत नहहीं ककी रयली हहै, बणलक पकवर मम आववेदक कवे घर वद्वाललों सवे धलयवे रयवे नरद रुपयलों कवे एवज मम आववेदक कवे खद्वातवे मम सकचिनद्वाकतद्वार दद्वारद्वा कम रुपए ऑनलद्वाइन हस्तद्वावंतररत वकयवे रयवे, वकन्तसु वशकद्वायत करनवे पर सकचिनद्वाकतद्वार दद्वारद्वा आववेदक कको रवंधजशन वतरमद्वान वद्वाद मम वमथ्यद्वारकोवपत कर वदयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पकवर कवे आपरद्वाधधिक इवतहद्वास कको शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 18 मम स्पष वकयद्वा रयद्वा हहै। पसुननः उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हहै वक वह कद्वानकन ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोरली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेरली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 13.12.2024 सवे कद्वारद्वारद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
5.
ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
6. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यलों एववं पररणस्थवतयलों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबकतलों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मसुक करनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वार हहै।
7. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वटप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष पर व्यवकरत बवंधि -पत एववं
अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभक प्रस्तसुत करनवे पर वनमनधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचिनद्वा यद्वा परलीकर कवे ददौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यलों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकयलों व पलीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशलों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परलीकर कवे ददौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहली करवेरद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यलों सवे पररवचित वकसली भली व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररयलों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यलों कको उजद्वारर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
8. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 11.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad