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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 25091 (ALL)

JARMAN SINGH v. STATE OF U.P.

BAIL/8025/2025 · 2025-08-13

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:139516 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8025 of 2025 Applicant :- Jarman Singh Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Pradyumn Kumar,Prashant Yadav,Raghvendra Singh,Rajeev Kumar Counsel for Opposite Party :- Narayan Singh(Kushwaha),G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रिद्वाज्य कक तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक Jarman Singh कक ओरि सवे मसु०अ०सवं० 204/2023, अवंतररत धिद्वारिद्वा 452, 323, 324, 504, 506, 308 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा जजैथरिद्वा, धजलद्वा एटद्वा मम जमद्वानत परि मसुक करिनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हजै। 3. आववेदकरर कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदकरर कको इस प्रकरिर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हजै , उन्हहोंनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हजै। आववेदकरर दद्वारिद्वा ऐसद्वा ककोई भदी कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा रयद्वा हजै , जजैसद्वावक प्रद्वाथवमकक मम दवशरत वकयद्वा रयद्वा हजै। प्रद्वाथवमकक ववलणमम्बित हजै तथद्वा उक ववलमम्बि कद्वा ककोई समसुवचित स्पषदीकरिर नहहीं वदयद्वा रयद्वा हजै। आववेदकरर कको वतरमद्वान वद्वाद मम रद्वागाँव कक पद्वाटर्जीम्बिन्ददी कक वजह सवे वमथ्यद्वारिकोवपत वकयद्वा रयद्वा हजै। वतरमद्वान वद्वाद कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकदी नहहीं हजै। वतरमद्वान वद्वाद कको कद्वाररित वकयवे जद्वानवे मम वकसदी भदी अवभयसुक कक वववशष भझूवमकद्वा दवशरत नहहीं कक रयदी हजै, वरिनन् सभदी अवभयसुकहों कक समद्वान भझूवमकद्वा दवशरत कक रयदी हजै। आववेदक दद्वारिद्वा अपनवे पझूवर कवे आपरिद्वाधधिक इवतहद्वासहों कको शपथपत कवे प्रस्तरि सवं० 17 एववं 18 मम स्पष वकयद्वा रयद्वा हजै। पसुननः उनकद्वा यह भदी कथन हजै वक आववेदकरर कक तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हजै वक वह कद्वानझून कक प्रवक्रियद्वा मम सहयकोर करिनवे कवे धलए तजैयद्वारि हह औरि जम्बि भदी आवश्यकतद्वा हकोरदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करिद्वाएवंरवे औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तजैयद्वारि हह जको न्यद्वायद्वालय उन परि अधधिरिकोवपत करिमरदी। आववेदकरर वनदरष हह तथद्वा वह इस प्रकरिर मम वद० 18.02.2025 सवे कद्वारिद्वारद्वारि मम वनरुद्ध हह। इसधलए आववेदकरर कको जमद्वानत परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। 4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रम्बिल ववरिकोधि करितवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारिद्वा कद्वाररित अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभदीरि प्रकक वत कद्वा हजै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि न छकोड़द्वा जद्वाय। 5. उभयपक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वारर कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्यहों एववं पररिणस्थवतयहों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे म्बिद्वाद, सम्बिझूतहों कक प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रदी कक अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रदी सवे छवेड़छद्वाड़ कक सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत परि मसुक करिनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वारि हजै। 6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष परि वम्बिनद्वा ककोई वटप्परदी वकए हहए आववेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिद्वाधि मम सवंम्बिवंधधित न्यद्वायद्वालय कक सवंतसुवष परि व्यवकरत म्बिवंधि -पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भदी दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करिनवे परि वनमनधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचिनद्वा यद्वा परिदीकर कवे ददौरिद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यहों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करिवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकयहों व पदीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरिद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशहों कद्वा पद्वालन करिवेरद्वा , वह परिदीकर कवे ददौरिद्वान वम्बिनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परिदीकर मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोर करिवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हकोनवे कवे म्बिद्वाद जमद्वानत कक स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहदी करिवेरद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक रवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यहों सवे पररिवचित वकसदी भदी व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररियहों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमकक नहहीं दवेरद्वा न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिवेरद्वा, धजसकवे कद्वारिर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यहों कको उजद्वाररि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़। 7. उपरिकोक शतरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक कक जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतवंत हजै। Order Date :- 14.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad