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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 25059 (ALL)
MOTI AND ANOTHER v. STATE OF U.P.
BAIL/8111/2025 · 2025-08-13
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 25059 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:139503 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8111 of 2025 Applicant :- Moti And Another Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Prashant Yadav,Raghvendra Singh,Rajeev Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A.,Narayan Singh(Kushwaha) Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदकगण कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रिद्वाज्य ककी तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदकगण Moti एववं Ativeer @ Ganttu ककी ओरि सवे मसु०अ०सवं० 204/2023, अवंतगरत धिद्वारिद्वा 452, 323, 324, 504, 506, 308 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा जजैथरिद्वा, धजलद्वा एटद्वा मम जमद्वानत परि मसुक करिनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा गयद्वा हजै।
3. आववेदकगण कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदकगण कको इस प्रकरिण मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हजै , उन्हहोंनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हजै। आववेदकगण दद्वारिद्वा ऐसद्वा ककोई भदी कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा गयद्वा हजै , जजैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हजै। प्रद्वाथवमककी ववलणमम्बित हजै तथद्वा उक ववलमम्बि कद्वा ककोई समसुवचित स्पषदीकरिण नहहीं वदयद्वा गयद्वा हजै। आववेदकगण कको वतरमद्वान वद्वाद मम गद्वागाँव ककी पद्वाटर्जीम्बिन्ददी ककी वजह सवे वमथ्यद्वारिकोवपत वकयद्वा गयद्वा हजै। घटनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकदी नहहीं हजै। वतरमद्वान वद्वाद कको कद्वाररित वकयवे जद्वानवे मम वकसदी भदी अवभयसुक ककी वववशष भझूवमकद्वा दवशरत नहहीं ककी गयदी हजै , वरिनन् सभदी अवभयसुकहों ककी समद्वान भझूवमकद्वा दवशरत ककी गयदी हजै। आववेदक सवं० 1 कवे
ववरुद्ध पवंजदीकक त एक मद्वात आपरिद्वाधधिक इवतहद्वास कको शपथपत कवे प्रस्तरि सवं० 17 मम स्पष वकयद्वा गयद्वा हजै तथद्वा आववेदक सवं० 2 कद्वा ककोई पझूवर आपरिद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हजै। पसुननः उनकद्वा यह भदी कथन हजै वक आववेदकगण ककी तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हजै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करिनवे कवे धलए तजैयद्वारि हह औरि जम्बि भदी आवश्यकतद्वा हकोगदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करिद्वाएवंगवे औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तजैयद्वारि हह जको न्यद्वायद्वालय उन परि अधधिरिकोवपत करिमगदी। आववेदकगण वनदरष हह तथद्वा वह इस प्रकरिण मम वद० 18.02.2025 सवे कद्वारिद्वागद्वारि मम वनरुद्ध हह। इसधलए आववेदकगण कको जमद्वानत परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
4. पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदकगण कवे जमद्वानत कद्वा प्रम्बिल ववरिकोधि करितवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदकगण दद्वारिद्वा कद्वाररित अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभदीरि प्रकक वत कद्वा हजै , इसधलए आववेदकगण कको जमद्वानत परि न छकोड़द्वा जद्वाय।
5.
उभयपक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वागण कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्यहों एववं पररिणस्थवतयहों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे म्बिद्वाद, सम्बिझूतहों ककी प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रदी ककी अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रदी सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मम आववेदकगण कको जमद्वानत परि मसुक करिनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वारि हजै।
6. अतनः वद्वाद कवे गसुण -दकोष परि वम्बिनद्वा ककोई वटप्पणदी वकए हहए आववेदकगण कको उपरिकोक ववणरत अपरिद्वाधि मम सवंम्बिवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतसुवष परि व्यवकगत म्बिवंधि-पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भदी दको -दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करिनवे परि वनमनधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छकोड़ वदयद्वा जद्वाय।
i. आववेदकगण ववववेचिनद्वा यद्वा परिदीकण कवे ददौरिद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यहों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करिमगवे। ii. आववेदकगण अवभयकोजन सद्वावकयहों व पदीवड़तद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरिद्वायमगवे/धिमकद्वायमगवे नहहीं। iii. आववेदकगण न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशहों कद्वा पद्वालन करिमगवे , ववे परिदीकण कवे ददौरिद्वान वम्बिनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हहोंगवे तथद्वा परिदीकण मम ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोग करिमगवे। iv. आववेदकगण जमद्वानत परि ररिहद्वा हकोनवे कवे म्बिद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोग नहदी करिमगवे औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हहोंगवे न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिमगवे। v. आववेदकगण प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यहों सवे पररिवचित वकसदी भदी व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररियहों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दमगवे न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिमगवे, धजसकवे कद्वारिण उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यहों कको उजद्वागरि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरिकोक शतरवं मम सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिदीकण न्यद्वायद्वालय आववेदकगण ककी जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतवंत हजै। Order Date :- 14.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad