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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 24823 (ALL)

ANWAR KHA v. STATE OF U.P.

BAIL/7717/2025 · 2025-09-10

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 7717 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 404/2022, अंतगर्त धारा 34, 420, 406, 467, 468, 471, 504, 506 भा.दं.सं., थाना कोतवाली उरई, िजला जालौन में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आज पूरक शपथपत्र दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय। 4.(क) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा सूचनाकतार् से िकसी प्रकार की धोखाधड़ी/कू टरचना कािरत नहीं की गयी है। आवेदक द्वारा िकसी प्रकार के प्लाट की फजीर् रिजस्ट्री नहीं की गयी है, न ही िकसी प्रकार का रुपया िलया गया है। वतर्मान वाद की प्राथिमकी में यह दशार्या गया है िक एफ.आई.आर. के पंजीकरण हेतु 11 व्यिक्तयों ने आवेदन िकया था, अथार्त् रजनी, ओम प्रकाश, राजीव कु मार िमश्रा, रविसया, चंद्रपाल, िवनोद कु मार, गोिवद, नजरा, श्रीमती नीलम, अरूण कु मार एवं आरजू, परन्तु इनमें से िकसी ने भी क्रय की गई भूिम के सम्बन्ध में आवेदक को एक पैसा भी नहीं िदया है। आवेदक उनमें से िकसी से कभी िमला भी नहीं है। आवेदक का उपरोक्त लोगों में से िकसी से कोई पिरचय भी नहीं है। इस प्रकार आवेदक िकसी भी िवक्रय, लेन-देन आिद का लाभाथीर् नहीं है। इस तथ्य का कोई सुसंगत साक्ष्य नहीं है िजससे यह स्पष्ट हो सके िक आवेदक ने िकसी को धोखा िदया हो या उसे कोई संपित्त/धन देने के िलए प्रेिरत िकया हो या आवेदक ने वतर्मान मामले से संबंिधत िकसी व्यिक्त से कोई धन िलया हो या आवेदक ने कोई जाली/फजीर् दस्तावेज़ तैयार िकया हो या िकसी जाली दस्तावेज़ को असली के रूप में इस्तेमाल िकया हो, तद्नुसार Versus Counsel for Applicant(s) : Sushil Kumar Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Anwar Kha .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) आवेदक के िवरुद्ध उपरोक्त आरोिपत धाराओं का अपराध बनता पिरलिक्षत नहीं हो रहा। (ख) अिग्रम आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक प्राथिमकी में सूचनाकतार् के रूप में दजर् िकसी भी व्यिक्त या िकसी अन्य व्यिक्त द्वारा कोई िविशष्ट आरोप आवेदक के िवरुद्ध नहीं लगाया गया है और ऐसा कोई आरोप नहीं है िक आवेदक ने उनमें से िकसी से कोई धन प्राप्त िकया है या भुगतान िकया है। प्रश्नगत मामले में आवेदक के िवरुद्ध कोई प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष, पिरिस्थितजन्य या िविधक साक्ष्य नहीं है। आवेदक सिहत प्राथिमकी में नािमत अिभयुक्तों के िवरुद्ध अिभयोजन द्वारा लगाए गए झूठे आरोपों का समथर्न करने के िलए कोई स्वतंत्र गवाह सामने नहीं आया है। आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक वतर्मान मामले में आवेदक के िवरुद्ध िदनांक 24.08.2023 को आरोप तय िकया जा चुका है तथा वह िनरंतर जेल से उपिस्थत होता रहा है, िकन्तु िदनांक 04.07.2025 तक कोई भी साक्षीगण न्यायालय के समक्ष उपिस्थत नहीं हो रहे हैं तथा उनके िवरुद्ध जमानतीय अिधपत्र रु० 10,000/- का जारी िकया गया, िजसके बावजूद साक्षीगण िवचारण न्यायालय के समक्ष बयान हेतु उपिस्थत नहीं हो रहे हैं। अिग्रम उनके द्वारा कथन िकया गया िक सी.आर.पी.सी. की धारा 437(6) के तहत, यिद िकसी मिजस्ट्रेट द्वारा िवचारणीय अपराध का मुकदमा अिभयोजन साक्ष्य शुरू होने की पहली तारीख से 60 िदनों के भीतर समाप्त नहीं होता है, तो अिभयुक्त को जमानत िमल सकती है, बशतेर् अिभयुक्त पूरी अविध के दौरान िहरासत में रहा हो और मिजस्ट्रेट ने इसके िखलाफ िवशेष कारण दजर् न िकए हों। इस आधार पर आवेदक धारा 437(6) दं.प्र.सं. का लाभ पाने का अिधकारी है। आवेदक द्वारा अपने पूवर् के आपरािधक इितहास को शपथपत्र के प्रस्तर सं० 11 में स्पष्ट िकया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 26.02.2023 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध BAIL No. 7717 of 2025 2 में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 11, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 7717 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad