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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 24586 (ALL)

ADARSH YADAV @ CHHOTELAL YADAV v. State of UP

BAIL/8686/2024 · 2025-09-09

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 8686 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक आदशर् यादव उफर् छोटेलाल की ओर से मु०अ०स० 322/2024, अन्तगर्त धारा 147/ 148/ 149/ 302/ 323/ 342/ 504/ 506/ 120बी भा.दं.सं., थाना फू लपुर, िजला आजमगढ़़़़ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. यह आवेदक का िद्वतीय जमानत आवेदन पत्र है, प्रथम जमानत आवेदन पत्र िदनांक 13.07.2023 को िनरस्त कर िदया गया था। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। अिभयोजन साक्षी सं. 01 ने अवर न्यायालय में कथन िकया िक उसके द्वारा जो थाने में तहरीर दी गयी थी उसे अिमत (मृतक) के द्वारा स्वयं बोलकर िलखवाया गया था। वह तहरीर िदनांक 05.10.2022 को अिमत ने होश आने के बाद बोलकर िलखाया था। 05.10.2022 को िदन में लगभग 10.00 बजे तहरीर अिमत ने बोलकर िलखवाना प्रारम्भ िकया और लगभग 25 िमनट तक तहरीर बोल कर िलखवायी गयी। इसका अथर् यह हुआ िक वह तहरीर जो थाना फू लपुर में दी गयी थी। वह िदनांक 05.10.2022 को 10.30 बजे िदन तक िलखकर तैयार हो गयी थी। अिभयोजन साक्षी सं. 01 से परीक्षण के दौरान प्रश्नोत्तरी की गयी जो िक िनम्नवत है:- 5. प्रश्न- तहरीर िकस तारीख को िलखी गयी थी। उत्तर-िदनांक 06.10.2022 को सुबह Versus Counsel for Applicant(s) : Anand Kumar Upadhyay, Anil Kumar Tripathi, Husnaara Khatoon, Kamlakar Pal, Rajrshi Gupta, Shiv Kumar Pal Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Ravi Prakash Bhatt Adarsh Yadav @ Chhotelal Yadav .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) 10.30 बजे िलखी तहरीर िलखी गयी थी और िदनांक 06.10.2022 को शाम को थाने पर दी गयी थी। िजस समय तहरीर थाने पर शाम को दी गयी थी उस समय मैं थाने पर स्वयं नही गया था मेरी पुत्री नीलू िसह ने िदया था। मैं बताने के आधार पर तहरीर को शाम को थाने में देने की बात बता रहा हूँ। िदनांक 05.10.2022 को सायं 05.00 बजे मेदान्ता लखनऊ अस्पताल में अिमत (मृतक) को होश आया था। और वह चेतना अवस्था में आये थे। 6. उक्त अिभयोजन साक्षी सं. उक्त अिभयोजन साक्षी सं. 01 के बयान अवलोकन से यह दिशत हो रहा है िक वादी मुकदमा के बयान में परस्पर िवरोधाभाष है यिद मृतक (अिमत) िदनांक 05.10.2022 को शाम 05.00 बजे होश आने का कथन िकया गया तो िदनांक 05.10.2022 को सुबह मृतक (अिमत) द्वारा अपनी बहन नीलू िसह को बोलकर तहरीर कै से िलखवा सकते हैं। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 02.11.2022 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 7. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर् का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये। 8. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 9. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. BAIL No. 8686 of 2024 2 आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 10, 2025 S.Mishra BAIL No. 8686 of 2024 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad