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1 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013}
2025:CGHC:6555 अ्ቚतिवे्ቕ छ्ቈीसगढ़ उ्ሴ न्यायालय
, बि(लासपुर
बि,्ቓ.य सुरति/ बि0,ाँक-31/01/2025 बि,्ቓ.य उ्ሾोबि6 बि0,ाँक-05/02/2025 0ाቄኌ89क अपील ्ቅमाँक
-410
/2013
1. भीखम पाटले बिपा-गंगाराम पाटले, उ्-लगभग 25 व6., बि,वासी-गबि,यारी भाठा, था,ा-करला, राजस्व जिजला-कोर(ा, जिजला-कोर(ा, छ्ቈीसगढ़ -----अपीलाथF बिवरू्ሾ छ्ቈीसगढ़ राज्य, ्ቛारा पुलिलस चौकी-उरगा, था,ा-कोवाली, कोर(ा, जिजला-कोर(ा, छ्ቈीसगढ़ -----उ्ቈरवा0ी 0ाቄኌ89क अपील ्ቅमाँक
-418
/2013
1. परमा चौकसे बिपा-गंगाराम चौकसे, उ्-लगभग 24 व6.,
2. सुरेन््ቖ उ्ቛ. राजू उ्ቛ. गोलू बिपा-गंगाराम चौकसे, उ्-लगभग-22 व6., 0ो,ों बि,वासी-0ा0र भाठा (कला), था,ा-करला, जिजला-कोर(ा, छ्ቈीसगढ़ -----अपीलाथFग्ቓ बिवरू्ሾ छ्ቈीसगढ़ राज्य, ्ቛारा ्ቚभारी पुलिलस चौकी-उरगा, था,ा-जिसटी कोवाली, कोर(ा, जिजला-कोर(ा, छ्ቈीसगढ़ -----उ्ቈरवा0ी POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.02.05 16:49:19 +0530
2 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013} अपीलाथF भीखम की ओर से : ्ቦी अबि,ल िሺसह राजपू, अतिYव्ሹा । अपीलाथF परमा एवं सुरेन््ቖ उ्ቛ. राजू उ्ቛ. गोलू की ओर से : ्ቦी अ,ं (ाजपेयी, अतिYव्ሹा । उ्ቈरवा0ी/शास, ्ቛारा : ्ቦी बिववेक बिम्ቦा, पै,ल अतिYव्ሹा । मा,,ीय न्यायमूቔኌ ्ቦी संजय कु मार जायसवाल !! सी.ए.वी. बि,्ቓ.य !! 1. 0ो,ों अपीलें एक ही बि,्ቓ.य बि0,ाँक-15/04/2013 से उत्प्ቐ हो,े के कार्ቓ, इ,का बि,राकर्ቓ इस संयु्ሹ बि,्ቓ.य के माध्यम से बिकया जा रहा है ।
2. 089 ्ቚबि्ቅया संबिहा, 1973 की Yारा-374(2) के ह ्ቚस्ु उपरो्ሹ 0ाቄኌ89क अपीलों में बिवचार्ቓ न्यायालय-स्ቔ न्यायाYीश, कोर(ा, जिजला-कोर(ा, छ्ቈीसगढ़ ्ቛारा स्ቔ ्ቚकर्ቓ ्ቅमाँक-89/2011 “छ्ቈीसगढ़ राज्य बिवरू्ሾ भीखम पाटले वगैरह” में पारिर बि,्ቓ.य बि0,ाँक-15/04/2013 को चु,ौी 0ी गई है । जिजसके ह अपीलाथFग्ቓ को बि,म्,ा,ुसार 0ो6जिस्ቍ कर 0ቄኌ89 बिकया गया है । जिजसे आगे सं/ेप में “्ቚ्ाYी, बि,्ቓ.य” से सम्(ोतिY बिकया जा रहा हैः- 0ो6जिसति्ቍ 089ा0ेश Yारा-394 सहपबिठ Yारा-397 भारीय 089 संबिहा, 1860 07 व6. के स्ቦम कारावास एवं 1,000/- रूपये का अथ.089 था अथ.089 राशिश अ0ा , कर,े की 0शा में 01 व6. के अतिरिर्ሹ स्ቦम कारावास की सजा से 0ቄኌ89 बिकया गया ।
3. अशिभयोज, मामला सं/ेप में इस ्ቚकार है बिक ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) था सु,ील कु मार या0व (अ०सा०-2) घट,ा बि0,ांक-21/05/20211 को
3 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013} मोटर सायकल में ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) की रिरश्े0ारी में बिववाह में सቄኌम्मलिल हो,े ्ቇाम-जोखा गये थे । रा करी( 11:45 (जे वे मोटर सायकल में वापस अप,े गांव आ रहे थे । मोटर सायकल को सु,ील कु मार या0व (अ०सा०- 2) चला रहा था जिजसके पीछे ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) (ैठा हुआ था । ( ्ቇाम-तिलके जा के कलमीभाठा पारा के पास पुलिलया पर ी, अ्ሺा व्यबि्ሹ जो पैंट-टी शट.
पह,े हुए थे और ग0., में गमछा रखे थे । उन्हों,े रास्े में 0ो मोटर सायकल अड़ाकर उन्हें ज(र, रोका, जो हाथ में लाठी रखे हुए थे और छ्ቈीसगढ़ी भा6ा में (ा कर रहे थे । वे उ,से पेट्रोल भरवा,े और शरा( पी,े के ,ाम पर पैसे की मांग बिकये । उ,के साथ मारपीट बिकये । क्ሾा,ुमा हशिथयार बि0खाये । सु,ील कु मार या0व (अ०सा०-2) से एल०जी० कं प,ी का उसका मो(ाईल ्ቛो, था ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) से ,ग0 रकम 2,000/-रूपये लूट लिलये और Yमकी बि0ये बिक सीYे बि,कल जाओ, पीछे लौटकर म 0ेख,ा और बि्ቛर वे मोटर सायकल में चले गये । ्ቚाथF सु,ील कु मार या0व (अ०सा०-2) की रिरपोट. पर उसी रा चौकी-उरगा में शून्य पर ्ቚथम सूच,ा प्ቔ ्ቚ0श. पी-2 कायम बिकया गया । जिजसके आYार पर था,ा-कोवाली, कोर(ा में ्ቚथम सूच,ा प्ቔ ्ቚ0श. पी-14 0ज. बिकया गया । आहों का 9ॉक्टरी परी/्ቓ करवाया गया । घट,ास्थल का ,क्शा ैयार बिकया गया । अपीलाथF परमा चौकसे से बि(,ा पंजीय, ्ቅमांक वाली मोटर सायकल की जब्ी कर ्ቚ0श. पी-11 ैयार बिकया गया । अपीलाथF सुरेन््ቖ उ्ቛ. राजू उ्ቛ. गोलू से मो(ाईल ्ቛो, की जब्ी कर ्ቚ0श. पी-12 ैयार बिकया गया । अपीलाथF भीखम से (ांस के 9ं9े की जब्ी कर ्ቚ0श. पी-13 ैयार बिकया गया । अपीलाथFग्ቓ की ्ቚाथF प/ से शिश,ाख् करवायी गयी । साति/यों के (या, लिलये गये । बिववेच,ा पू्ቓ. कर अशिभयोगप्ቔ पेश बिकया गया ।
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4. अशिभयोज, की ओर से अप,े प/ समथ., में कु ल-11 साति/यों का परी/्ቓ था 19 0स्ावेज ्ቚ0श.
तिचन्हांबिक करवाये गये । Yारा-313 089 ्ቚबि्ቅया संबिहा के ह (या, में अपीलाथFग्ቓ ,े अप,े बिवपरी साति/यों के कथ,ों को इन्कार करे हुए स्वयं को बि,0ƒ6 हो,ा (ाे हुए कहा है बिक उन्हें झूठा ्ቛं साया गया । जिज,की ओर से (चाव में बिकसी सा/ी का परी/्ቓ ,हीं करवाया गया । उभयप/ को सु,ा जाकर बिवचार्ቓ न्यायालय ्ቛारा अपीलाथFग्ቓ को इस बि,्ቓ.य की कቄኌ89का-2 के अ,ुसार 0ो6जिस्ቍ कर 0ቄኌ89 बिकया गया है । जिजसे इस अपील में चु,ौी 0ी गई है ।
5. अपीलाथFग्ቓ के बिव्ቛा, अतिYव्ሹा का क. है बिक घट,ा में जिजस घाक आयुY क्ሾे का उपयोग बिकया जा,ा (ाया गया है वैसा कोई क्ሾा (राम0 ,हीं हुआ है । आहों को कोई गंभीर उपहति कारिर ,हीं हुई है । Yारा-397 भारीय 089 संबिहा का मामला ,हीं (,ा है । अपीलाथFग्ቓ की पहचा, बिवतिYव ,हीं की गई है । ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) ,े न्यायालयी, (या, में अपीलाथFग्ቓ को पहचा,,े से ही इन्कार कर बि0या है । अपीलाथFग्ቓ से जो जब्ी (ायी गयी है उस जब्ी की स्वं्ቔ साति/यों ्ቛारा पुबि† ,हीं की गई है । अपीलाथF परमा चौकसे से कशिथ रूप से जब् (ाये गये मोटर सायकल की घट,ा में बिकस ्ቚकार से संलिल्ा थी इस (ा(् कोई साቌኚय ,हीं है । अपीलाथF भीखम पाटले से जब् (ाये गये (ांस के 9ं9े की घट,ा में बिकस ्ቚकार से संलिल्ा ,हीं थी इसे पया.् साቌኚय ्ቛारा स्थाबिप ,हीं बिकया जा सका है । अपीलाथF सुरेन््ቖ उ्ቛ. राजू उ्ቛ. गोलू से जब् (ाये गये मो(ाईल ्ቛो, की कोई शिश,ाख् ,हीं करवायी गयी है । इसलिलए वह मो(ाईल ्ቛो, लूट की ही बिव6य वस्ु हो, यह अशिभयोज, ्ቛारा ्ቚमाशि्ቓ ,हीं हो सका है । इस ्ቚकार, ्ቚाथF ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) और सु,ील कु मार
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A. No.-410/2013 & 418/2013} या0व (अ०सा०-2) ,े अप,े साथ जो लूट की घट,ा हो,ा (ाया है, उसे अपीलाथFग्ቓ ,े ही अंजाम बि0या हो, यह अशिभयोज, ्ቛारा ्ቚमाशि्ቓ ,हीं हो सका है । इस ्ቚकार से, अपीलाथFग्ቓ के बिवरू्ሾ अशिभयोज, अप,ा मामला ्ቚमाशि्ቓ कर,े में अस्ቛल रहा है । अपीलाथFग्ቓ की 0ो6जिसति्ቍ, स्प† और बिव्ቫस,ीय साቌኚय पर आYारिर ,हीं है । ऐसी 0शा में, “्ቚ्ाYी, बि,्ቓ.य” ቄኌस्थर रखे जा,े योग्य ,हीं है । अः अपील स्वीकार कर उन्हें 0ो6मु्ሹ बिकया जाये ।
6. उ्ቈरवा0ी/शास, प/ की ओर से उपቄኌस्थ बिव्ቛा, अतिYव्ሹा ,े इस अपील का बिवरोY करे हुए क. बिकया है बिक अशिभयोज, साति/यों ,े पू्ቓ. रूप से अशिभयोज, मामले का समथ., बिकया है जिज,पर अबिव्ቫास बिकये जा,े का कोई कार्ቓ ,हीं है । बिवचार्ቓ न्यायालय का “्ቚ्ाYी, बि,्ቓ.य” साቌኚय की उतिच समी/ा पर आYारिर है । अशिभयोज, ,े अपीलाथFग्ቓ के बिवरू्ሾ अप,ा मामला सं0ेह से परे ्ቚमाशि्ቓ बिकया है । अपीलाथF प/ ्ቛारा अपील में उठाये गये क. स्वीकार योग्य ,हीं है । अः अपील खारिरज बिकया जाये ।
7. उभयप/ का क. सु,ा गया और अशिभलेख का सूቌኚमापूव.क परिरशील, बिकया गया ।
8. अशिभलेख के परिरशील, और ्ቚस्ु साቌኚय से यह ቄኌस्थति स्प† है बिक घट,ा की रा ही रिरपोट. बि(,ा बिकसी बिवलम्( से 0ज. करवायी गयी है । बिकन्ु वह रिरपोट. ,ामज0 ,हीं थी, उसमें जिस्ቛ. अशिभयु्ሹों के हुलिलया का बिववर्ቓ बि0या गया था । बिकन्ु घट,ा में जिजस ्ቚकार का 0ेशी क्ሾा उपयोग में लाया जा,ा कहा गया है ऐसे बिकसी भी 0ेशी क्ሾे या अन्य बिकसी घाक आयुY की जब्ी मामले में ,हीं हुई है ।
9. 9ॉक्टर व्ही०एस० राठौर (अ०सा०-6) ,े बि0,ांक-22/05/2011 को आह सु,ील कु मार या0व (अ०सा०-2) का परी/्ቓ कर ्ቚतिवे0, ्ቚ0श. पी-9 और
6 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013} ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) का परी/्ቓ कर ्ቚतिवे0, ्ቚ0श.
पी-10 0े,ा (ाया है । जिजसके अ,ुसार सु,ील कु मार या0व (अ०सा०-2) को (ांयी आंख के ऊपर माथे पर एक कटा-्ቛटा घाव और जिसर के (ांयी र्ቛ का, के ऊपर एक सूज, थी जिजसकी ्ቚकृ ति साYार्ቓ थी । इसी ्ቚकार, ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-2) के (ांये कोह,ी के जोड़ में 00. की शिशकाय थी और सूज, हो,े से जोड़ की गतिशीला में कमी थी । उन्हें कोई अቄኌस्थभंग ,हीं पाया गया था । 9ॉक्टर ,े ्ቚतिपरी/्ቓ में यह भी अशिभम बि0या है बिक उपरो्ሹ ्ቚाथFग्ቓ को पायी गयी चोटें मोटर सायकल से बिगर,े पर भी कारिर हो सकी है । इस रह स्प† है बिक आहों को बिकसी ्ቚकार की कोई गंभीर चोट ,हीं थी ।
10. अपीलाथFग्ቓ के बिवरू्ሾ अशिभयोज, का मामला मूलः उ,की शिश,ाख् और उ,से जब् वस्ुओं पर आYारिर रहा है । सव.्ቚथम, शिश,ाख् के ्ቚ् पर बिवचार करें, ो यह उ्ቤेख,ीय है बिक न्यायालय के सम/ की गई शिश,ाख् ही मूल साቌኚय होी है । बिकसी अशिभयु्ሹ की करवायी गई शिश,ाख् परे9 बिववेच,ा को अ्ቇसर कर,े में साथ.क हो सकी है बिकन्ु वह मूल साቌኚय ,हीं होी । इस मामले में अपीलाथFग्ቓ की शिश,ाख् 0ो,ों आहों से एक ही तिशिथयों पर करवायी गई है । बि0,ांक-27/05/2011 को सु,ील कु मार या0व (अ०सा०-2) से जो शिश,ाख् करवायी गयी वह ्ቚ0श. पी-4 के रूप में है । आह ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) से अपीलाथFग्ቓ की करवायी गयी शिश,ाख् ्ቚ0श. पी-1 है । यह उ्ቤेख,ीय है बिक उपरो्ሹ शिश,ाख्ी के बिकसी गवाह का अशिभयोज, की ओर से परी/्ቓ ,हीं करवाया गया है । शिश,ाख् करवा,े वाले त्काली, करला के हसील0ार एस०ए,०िሺसह (अ०सा०-7) ,े उ्ሹ शिश,ाख् काय.वाही ्ቚ0श. पी-1 और ्ቚ0श. पी-4 की पुबि† करे हुए (ाया है बिक सु,ील कु मार या0व और ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह ,े अपीलाथFग्ቓ को छू कर पहचा,ा था ।
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11.
It is well settled law that the necessity for holding an identification parade can arise only when the accused are not previously known to the witnesses. The whole idea of a TIP is that witnesses who claim to have seen the culprits at the time of occurrence are to identify them from the midst of other persons without any aid or any other source. The test is done to check upon their veracity. (See: Heera & Anr. v. State of Rajasthan
1 ). 12. The identification test is not substantive evidence, such tests are meant for the purpose of helping the investigating agency with an assurance that their progress with the investigation into the offence is proceeding on right lines. (See : Musheer Khan @ Badshah Khan & Anr. v. State of Madhya Pradesh2)
13. Recently, the Supreme Court in the matter of Rajesh Alias
Sarkari @ Anr. v. State of Haryana
3 considering the object of conducting TIP, laid down the principles to be followed for proper conduct of TIP and in para 43 & 44 held as under : 1 AIR 2007 SC 2425 2 (2010) 2 SCC 748 3 (2021) 1 SCC 118
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“43. The prosecution has submitted that an adverse inference should be drawn against the appellants for refusing to submit themselves to a TIP. Before we deal with the circumstances in which the appellants declined
a
TIP,
it
becomes essential to scrutinize the precedent from this Court bearing on the subject. A line of precedent of this Court has dwelt on the purpose of conducting a TIP, the source of the authority of the investigator to do so, the manner in which these proceedings should be conducted, the weight to be ascribed to identification in the course of a TIP and the circumstances in which an adverse inference can be drawn against the accused who refuses to undergo the process.
The principles which have emerged from the precedents of this Court can be summarized as follows:
43.1. The purpose of conducting a TIP is that persons who claim to have seen the offender at the time of the occurrence identify them from amongst the other individuals without tutoring or aid from any source. An
identification parade, in other words, tests the memory of the witnesses, in order for the prosecution to determine whether any or all of them can be cited as eye- witness to the crime;
43.2. There is no specific provision either in the CrPC or the Indian Evidence Act, 1872, which lends statutory authority to an identification parade. Identification parades belong to the stage of the investigation of crime and there is no provision which compels the investigating agency to hold or
9 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013} confers a right on the accused to claim a TIP. 43.3. Identification parades are governed in that context by the provision of Section 162 of CrPC. 43.4. A TIP should ordinarily be conducted soon after the arrest of the accused, so as to preclude a possibility of the accused being shown to the witnesses before it is held. 43.5. The identification of the accused in court constitutes substantive evidence. 43.6. Facts which establish the identity of the accused person are treated to be relevant under Section 9 of the Evidence Act. 43.7. A TIP may lend corroboration to the identification of the witness in court, if so required. 43.8. As a rule of prudence, the court would, generally speaking, look for corroboration of the witness’ identification of the accused in court, in the form of earlier identification proceedings. The rule of prudence is subject to the exception when the court considers it safe to rely upon the evidence of a particular witness without such, or other corroboration. 43.9.
Since a TIP does not constitute substantive evidence, the failure to hold it does not ipso facto make the evidence of identification inadmissible. 43.10. The weight that is attached to such identification is a matter to be determined by the court in the circumstances of that particular case. 10 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013}
43.11. Identification of the accused in a TIP or in court is not essential in every case where guilt is established on the basis of circumstances which lend assurance to the nature and the quality of the evidence. 43.12. The court of fact may, in the context and circumstances of each case, determine whether an adverse inference should be drawn against the accused for refusing to participate in a TIP. However, the court would
look for corroborating material of a substantial nature before it enters a finding in regard to the guilt of the accused. 44. These principles have evolved over a period of time and emanate from the following decisions:
1. Matru v. State of U.P. [(1971) 2 SCC 75 :
1971 SCC (Cri) 391]
2. Santokh Singh v. Izhar Hussain [(1973) 2 SCC 406 : 1973 SCC (Cri) 828]
3. Malkhansingh v. State of M.P. [(2003) 5 SCC 746 : 2003 SCC (Cri) 1247]
4. Visveswaran v. State [(2003) 6 SCC 73 :
2003 SCC (Cri) 1270]
5. Munshi Singh Gautam v. State of M.P.
[(2005) 9 SCC 631 : 2005 SCC (Cri) 1269]
6. Manu Sharma v. State (NCT of Delhi) [(2010) 6 SCC 1 : (2010) 2 SCC (Cri) 1385]
7. Ashwani Kumar v. State of Punjab [(2015) 6 SCC 308 : (2015) 4 SCC (Cri) 171]
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8. Mukesh and Ors.
v. State (NCT of Delhi) [(2017) 6 SCC 1 : (2017) 2 SCC (Cri) 673] As such, it is quite vivid that the facts which establish the identity of the accused person are treated to be relevant under Section 9 of the Evidence Act. 14. The Allahabad High Court in the matter of Anwar & Another v. State4, it has been held that first rule relates to number of under-trials to be mixed with the suspect to eliminate reasonable possibilities of chance identification and to make results of the identification acceptable. It has been further held one of the rules laid down for testing the observation and memory of identifying witnesses relates to the number of under- trials to be mixed with a suspect in order to eliminate the reasonable possibilities of a chance identification and to make the results of identification acceptable. Further, it has been held that the second rule stresses that the performance of the witnesses in other parades is also relevant in assessing his power of observation. Each suspect should be put up separately for identification mixed with nine or more under-trials. 4 AIR 1961 All 50
12 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013} The ratio of 7 : 1 in the case of one or two suspects ipso facto considerably diminishes the value of identification and unless the investigation is absolutely above board, it would not be prudent to place any reliance on such identification. 15. Recently, in the matter of Gireesan Nair & Others v. State of Kerala
5 , Their Lordships of the Supreme Court held as under :-
“33. It is significant to maintain a healthy ratio between suspects and non-suspects during a TIP. If rules to that effect are provided in Prison Manuals or if an appropriate authority has issued guidelines regarding the ratio to be maintained, then such rules/guidelines shall be followed.
The officer conducting the TIP is under a compelling obligation to mandatorily maintain the prescribed ratio. While conducting a TIP, it is a sine qua non that the non-suspects should be of the same age-group and should also have similar physical features (size, weight, color, beard, scars, marks, bodily injuries etc.) to that of the suspects. The officer concerned overseeing the TIP should also record such physical features before commencing the TIP proceeding. This gives credibility to the TIP and ensures that the TIP is not just an empty formality (Rajesh Govind Jagesha v. State of Maharashtra6 and Ravi v. State7). 5 (2023) 1 SCC 180 6 (1999) 8 SCC 428 7 (2007) 15 SCC 372
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16. उपरो्ሹ न्यायदृ†ांों के ्ቚकाश में अपीलाथFग्ቓ की शिश,ाख् के िሮ(0ु पर आयी साቌኚय पर बिवचार करें ो यह ቄኌस्थति स्प† है बिक न्यायालयी, (या, के समय ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) ,े अपीलाथFग्ቓ को पहचा, पा,े में असमथ.ा व्य्ሹ की है । इस ्ቚकार से, न्यायालयी, (या, जो मूल साቌኚय होा है उसमें ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह ,े अपीलाथFग्ቓ की अपराYी के रूप में पहचा, ,हीं की । त्प्ቐा् न्यायालय की अ,ुमति से उससे सूचक ्ቚ् बिकया गया, जिजसमें उस,े अपीलाथFग्ቓ ्ቛारा ही अपराY कारिर कर,ा (ाया गया है । 0ूसरी ओर, 0ूसरा ्ቚाथF सु,ील कु मार या0व ((०सा०-2) ,े न्यायालीय, (या, में अपीलाथFग्ቓ की पहचा, अपराYी के रूप में की है । 0ो,ों ही ्ቚाथF प/ से हसील0ार ्ቛारा शिश,ाख् काय.वाही करवायी गई है जो ्ቚ0श. पी-1 और ्ቚ0श. पी-4 है । इसलिलए शिश,ाख् के बिव6य में जो साቌኚय आयी है उसे बिवस्ारपूव.क 0ेख,ा होगा ।
17.
ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह (अ०सा०-1) ,े अप,े ्ቚतिपरी/्ቓ में यह स्वीकार बिकया है बिक घट,ा की रा अंYेरी रा थी बिकन्ु उसकी आंख कमजोर है इसलिलए वह घट,ा के समय बिकसी भी अपराYी को बि(ल्कु ल भी पहचा, ,हीं पाया गया था और लम्(े (ाये गये व्यबि्ሹ का भी चेहरा ,हीं 0ेख पाया था । उस,े बिकसी अपराYी के हाथ में घट,ा के समय क्ሾा ,हीं 0ेखा था । उस,े यह भी स्वीकार बिकया है बिक उसकी आंख कमजोर हो,े से उसे कम बि0खा है । उस,े यह भी स्वीकार बिकया है बिक उसके साथ लूटपाट अ्ሺा व्यबि्ሹयों ,े की थी । उस,े यह भी स्वीकार बिकया है बिक पहचा, काय.वाही के समय उरगा पुलिलसवाले 0ूर में खड़े थे और हसील काया.लय में उपቄኌस्थ थे । इस ्ቚकार से, ्ቚाथF ठाकु र वीरेन््ቖ िሺसह जिजस,े न्यायालय में अपीलाथFग्ቓ की पहचा, कर पा,े में असमथ.ा व्य्ሹ की है, उस,े स्प† कहा है बिक घट,ास्थल पर भी अपरातिYयों को पहचा, ,हीं पाया था । इस ्ቚकार से, उसके ्ቛारा अपीलाቕኌथयों की पहचा, पू्ቓ.ः संबि0ग्Y हो जाी है ।
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18. ्ቚाथF सु,ील कु मार या0व (अ०सा०-2) ,े न्यायालय में अशिभयु्ሹग्ቓ की पहचा, की है बिकन्ु ्ቚतिपरी/्ቓ में उस,े भी यह स्वीकार बिकया है बिक घट,ा की रा अंYेरी रा थी । ्ቚतिपरी/्ቓ में उस,े कहा है बिक उस,े पुलिलस के कह,े पर 2-3 कागजों पर हस्ा/र बिकया था । पहचा, काय.वाही के लिलए उसे हसील0ार के काया.लय में ले जाया गया था । हसील0ार को वह ,हीं पहचा,ा था । पहचा, काय.वाही के लिलए जो काया.लय में (ैठे थे वे हसील0ार थे या कोई (ा(ू था, वह ,हीं (ा सका । उस,े भी कहा है बिक हसील काया.लय के (राम0े में पुलिलसवाले खड़े थे । पहचा, के लिलए जो व्यबि्ሹ बिमलाये गये थे उ,का हुलिलया अलग था । इस ्ቚकार, इस सा/ी ,े भी कशिथ पहचा, काय.वाही के समय पुलिलस की उपቄኌस्थति (ायी है और वह यह स्प† कर पा,े में अस्ቛल रहा है बिक पहचा, काय.वाही हसील0ार ,े करवाया था या उ,के बिकसी कमF ,े ।
19.
कशिथ काय.वाही करवा,े वाले त्काली, हसील0ार एस०ए,० िሺसह (अ.सा.-7) ,े ्ቚतिपरी/्ቓ में यह स्वीकार बिकया है बिक अशिभयु्ሹग्ቓ अथा.् 03 अपीलाथFग्ቓ के साथ 4-5 लोगों को ही बिमलाया गया था । उन्हें खड़ा बिकये जा,े का ्ቅम ,हीं (ा सका । उस,े यह स्वीकार बिकया है बिक ्ቚ0श. पी-1 की शिश,ाख्ी पंच,ामा काय.वाही में एक र्ቛ 04 व्यबि्ሹयों के ्ቛोटो्ቇाफ्स और 0ूसरी र्ቛ 02 व्यबि्ሹ के ्ቛोटो्ቇाफ्स चस्पा है । इ, ्ቛोटो्ቇाफ्स के बिव6य में उस,े कहा है बिक बिमलाये गये व्यबि्ሹ वे थे जो हसील काया.लय में काम से आये थे । उस,े जो 04 ्ቛोटो्ቇाफ्स ्ቚ0श. पी-1 में एक ओर चस्पा हो,ा (ाया है वह बिमलाये गये व्यबि्ሹयों का हो,ा (ाया है बिकन्ु इसका कोई उ्ቤेख ्ቚ0श. पी-1 के शिश,ाख्ी पंच,ामा में ,हीं बिमला । इसी ्ቚकार, उस,े 0ूसरी ओर जो 02 अलग ्ቛोटो्ቇाफ्स चस्पा हो,ा कहा है वे शिश,ाख्ी पंच,ामा के गवाहों के ्ቛोटा्ቇाफ्स चस्पा हो,ा (ाया है । ये
15 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013} ्ቛोटो्ቇाफ्स चस्पा कर,े की जरूर क्यों पड़ी, इसे स्प† कर पा,े में हसील0ार अस्ቛल रहा है ।
20. न्यायदृ†ांों के ्ቚकाश में बिवचार करें ो यह स्प† है बिक जहां एक ओर आंख से कमजोर वीरेन््ቖ ,े कहा है बिक वह मौके पर अपरातिYयों को पहचा, ,हीं पाया था । वहीं 0ूसरी ओर सु,ील कु मार या0व ,े न्यायालय में भी अपरातिYयों को पहचा,ा है और शिश,ाख्ी काय.वाही के समय भी पहचा,,े की (ा कही है । बिकन्ु शिश,ाख्ी काय.वाही 0ूबि6 इसलिलए पायी जाी है क्योंबिक शिश,ाख् काय.वाही बिकस,े करवायी गयी थी, इस बिव6य में सु,ील कु मार या0व स्प† ,हीं है । ्ቛोटो्ቇाफ्स चस्पा कर,े की जरूर क्यों पड़ी, इस बिव6य में स्वयं हसील0ार एस०ए,० िሺसह (अ०सा०- 7) स्प† ,हीं है । 03 व्यबि्ሹयों की शिश,ाख् करवाया जा,ा था बिकन्ु उसमें जिस्ቛ. 05 लोगों को सቄኌम्मलिल क्यों बिकया गया और ज्या0ा लोगों को शाबिमल क्यों ,हीं बिकया गया, इस बिव6य में भी हसील0ार स्प† ,हीं है ।
21. उपरो्ሹ सम्पू्ቓ. ቄኌस्थति को दृबि†ग रखे हुए बिवचार करें ो यह बि,ष्कቧኌ6 ,हीं होा है बिक कशिथ शिश,ाख्ी काय.वाही ्ቚ0श.
पी-1 और पी-4 बिवतिYव् की गई हो इसलिलए उस पर सं0ेह से परे बिव्ቫास ,हीं बिकया जा सका । जिजस ्ቚकार से घट,ा में 0ेशी क्ሾे का उपयोग कर,ा (ाया गया है वैसा कोई क्ሾा जब् ,हीं हुआ है । इस अवस्था में, ्ቚाथF प/ ्ቛारा घट,ास्थल पर अपरातिYयों को पहचा, लिलये जा,े का थ्य सं0ेह से परे स्थाबिप ,हीं पाया जाा ।
22. अपीलाथF प/ के 0ो6जिसति्ቍ का 0ूसरा आYार यह रहा है बिक सहायक उपबि,री/क ल्ቤ, िሺसह (अ०सा०-11) ,े बि0,ांक-26/05/2011 को अपीलाथF परमा चौकसे ्ቛारा अप,े घर से बि,कालकर पेश कर,े पर एक हीरो हो89ा मोटर सायकल
16 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013} की जब्ी कर ्ቚ0श. पी-11 ैयार कर,ा (ाया गया है जिजसके सा/ी घ,श्याम कु मार (अ०सा०-9) और ेजपाल िሺसह (अ०सा०-8) है । बिकन्ु उन्हों,े स्प† रूप से इस थ्य की पुबि† ,हीं की है बिक अपीलाथF परमा चौकसे के ्ቛारा ही घर से बि,कालकर पेश कर,े पर हीरो हो89ा मोटर सायकल की जब्ी की गई । वैसे भी कशिथ जब् हीरो हो89ा मोटर सायकल लूट की बिव6य वस्ु ,हीं है । यबि0 उसकी जब्ी अपराY बिकये जाे समय उपयोग में लाये जा,े से की गई है ो इस (ा(् कोई साቌኚय ,हीं है बिक इस मामले की घट,ा को अंजाम 0ेे समय उस जब् मोटर सायकल का उपयोग बिकया गया हो । ऐसी 0शा में, जब्ी ्ቚ0श. पी-11 से अपीलाथF परमा चौकसे के बिवरू्ሾ अशिभयोज, के मामले को समथ., ,हीं बिमला ।
23. सहायक उपबि,री/क ल्ቤ, िሺसह (अ०सा०-11) ,े बि0,ांक-26/05/2011 को ही अपीलाथF भीखम पाटले के पेश कर,े पर एक (ांस का 9ं9ा जब् कर जब्ी ्ቚ0श.
पी-13 ैयार कर,ा कहा है । इस जब्ी काय.वाही की भी स्प† रूप से पुबि† ेजपाल िሺसह (अ०सा०-8) और घ,श्याम कु मार (अ०सा०-9) के (या, से ,हीं होी । यबि0, अपीलाथF भीखम पाटले से (ांस का 9ं9ा जब् हो,ा मा, भी लिलया जाये ो वही 9ं9ा घट,ा को अंजाम 0ेे समय उपयोग बिकया गया था इसे 0शा.,े वास्े अशिभयोज, की ओर से कोई साቌኚय ,हीं है । इसलिलए कशिथ (ांस के 9ं9े की जब्ी से भी अशिभयोज, को अपीलाथF भीखम के बिवरू्ሾ कोई सहयोग ,हीं बिमला और इस जब्ी के आYार पर अपीलाथF भीखम पाटले की 0ो6जिसति्ቍ को उतिच ,हीं कहा जा सका ।
24. इसी ्ቚकार, सहायक उपबि,री/क ल्ቤ, िሺसह (अ०सा०-11) ,े बि0,ांक- 26/05/2011 को ही अपीलाथF सुरेन््ቖ उ्ቛ. राजू उ्ቛ. गोलू से एक काले रंग का
17 /18 {Cr. A. No.-410/2013 & 418/2013} एल०जी० कं प,ी का मो(ाईल जब् कर ्ቚ0श. पी-12 ैयार कर,ा (ाया है । रिरपोट. में अपीलाथF सुरेन््ቖ ्ቛारा अप,े मो(ाईल के लूट,े की भी शिशकाय की गई है । बिकन्ु जो मो(ाईल ्ቛो, लूटा गया था उसका कोई 0स्ावेज ्ቚमाशि्ቓ ,हीं करवाया गया है (ቄኌल्क मो(ाईल ,म्(र 9303418962 लूटे जा,े का उ्ቤेख रिरपोट. में बिकया गया है । ज(बिक अपीलाथF सुरेन््ቖ उ्ቛ. राजू उ्ቛ. गोलू से जो एल०जी० कं प,ी का काले रंग का मो(ाईल ्ቛो, ्ቚ0श. पी-12 के ह जब्ी 0शा.या गया है उसमें उ्ሹ मो(ाईल ,म्(र का उ्ቤेख ,ा होकर (ቄኌल्क आई.एम.ई.आई. ,म्(र का उ्ቤेख है जो 10 अंकों से ज्या0ा संख्या में और शिभ्ቐ है । ्ቚाथF सु,ील कु मार या0व से उसकी कोई शिश,ाख् ,हीं हुई है । इस ्ቚकार से, इस (ा(् कोई साቌኚय ,हीं है बिक जिजस मो(ाईल की लूट हो,ा सु,ील ,े (ाया है वही मो(ाईल अपीलाथF सुरेन््ቖ उ्ቛ. गोलू उ्ቛ. राजू से जब् बिकया गया हो । उ्ሹ जब्ी की भी स्प† रूप से पुबि† स्वं्ቔ सा/ी ेजपाल िሺसह (अ०सा०-8) और घ,श्याम कु मार (अ०सा०- 9) ,े ,हीं की है । इस ्ቚकार, ,ा ो जब्ी बिवतिYव ्ቚमाशि्ቓ है और ,ा ही यह स्थाबिप होा है बिक जब् मो(ाईल ही लूट की बिव6य वस्ु हो । इस रह, अपीलाथF सुरेन््ቖ उ्ቛ. गोलू उ्ቛ. राजू का भी बिवचार्ቓीय घट,ा से सीYा सं(ंY स्थाबिप ,हीं होा ।
25.
इस ्ቚकार, उपरो्ሹ साቌኚय बिववेच,ा के आYार पर यह न्यायालय पाी है बिक अपीलाथFग्ቓ के बिवरू्ሾ अशिभयोज, अप,ा मामला सं0ेह से परे ्ቚमाशि्ቓ कर,े में अस्ቛल रहा है । अः अपीलाथFग्ቓ की 0ो6जिसति्ቍ स्प†, पया.् और बिव्ቫस,ीय साቌኚय पर आYारिर ,हीं है । ऐसी 0शा में, “्ቚ्ाYी, बि,्ቓ.य” ቄኌस्थर रखे जा,े योग्य ,हीं पाया जाा ।
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26. अः अपील स्वीकार की जाी है । “्ቚ्ाYी, बि,्ቓ.य” अपास् बिकया जाा है था अपीलाथFग्ቓ को सं0ेह का लाभ 0ेे हुए आरोबिप अपराY से 0ो6मु्ሹ बिकया जाा है ।
27. अपीलाथFग्ቓ को जमा, पर (ाया गया है । 089 ्ቚबि्ቅया संबिहा, 1973 की Yारा-437 ’क’ के ह उ,का जमा,-मुचलका और 06 माह के लिलए ्ቚभावशील रहेगा त्प्ቐा् अन्य न्यायालय में उपቄኌस्थ हो,े की आवश्यका ,ा रह,े पर मु्ሹ समझा जायेगा ।
28. बि,्ቓ.य की ्ቚति के साथ बिवचार्ቓ न्यायालय को मूल अशिभलेख आवश्यक काय.वाही हेु सूच,ाथ. एवं पाल,ाथ. शी्ቈापूव.क ्ቚेबि6 हो । सही/- (संजय कु मार जायसवाल) न्यायाYीश पोम,