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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 24071 (ALL)

IQRAR AHMAD v. STATE OF U.P.

BAIL/7440/2025 · 2025-09-10

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 7440 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 114/2023, अंतगर्त धारा 420, 467, 468, 471, 506 भा.दं.सं., थाना इज्जतनगर, िजला बरेली में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता, पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. यह आवेदक का िद्वतीय जमानत प्राथर्नापत्र है। आवेदक का प्रथम दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्नापत्र सं० 35420/2023, आदेश िदनांिकत 31.07.2024 को िनरस्त िकया जा चुका है। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आज पूरक शपथपत्र दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा िकसी प्रकार की कू टरचना एवं धोखाधड़ी कािरत नहीं की गयी है। आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा न्यायालय के समक्ष यह नवीन तथ्य प्रस्तुत िकया गया िक यह प्रासंिगक तथ्य है िक सूचनाकतार् ने अन्य सह-अिभयुक्तगण अली अहमद एवं एजाज अहमद के साथ समझौता कर िलया है। यहाँ यह भी उल्लेख करना प्रासंिगक है िक समझौता करने के बाद, सह-अिभयुक्त अली अहमद ने धारा 482 सीआरपीसी के अंतगर्त एक प्राथर्नापत्र सं० 2670/2025 दािखल िकया, िजसमें आदेश िदनांिकत 20.08.2025 के द्वारा उभयपक्ष के मध्य समझौता हो जाने के आधार पर सह-अिभयुक्त अली अहमद के पक्ष में स्वीकृ त करते हुए िनस्तािरत िकया जा चुका है। उपयुर्क्त कथनों के समथर्न में, समझौता िवलेख की प्रितयाँ, सूचनाकतार् के शपथपत्र सिहत आज दािखल पूरक शपथपत्र के अनुलग्नक संख्या SA-3 के रूप में संलग्न िकया गया है। सूचनाकतार् एवं मुख्य अिभयुक्त के मध्य प्रश्नगत िववाद में समझौता हो चुका है, िकन्तु आवेदक को रंिजशन िमथ्या रूप से अिभयुक्त बनाया गया है तथा आवेदक पूरी तरह से िनदोर्ष है िकन्तु अभी तक उसे कारागार में िनरुद्ध रखा गया है, जो पूरी तरह से अवैध है और कानून की नज़र में स्वीकायर् नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी Versus Counsel for Applicant(s) : Amit Kumar Srivastava Counsel for Opposite Party(s) : Krishna Kumar Shukla, G.A. Iqrar Ahmad .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 17.06.2023 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 6. पिरवादी के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय। 7. उभयपक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने तथा सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 8. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 9. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 11, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 7440 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad