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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 21075 (CHH)
SMT. SARITA SAHU v. SHYAM BIHARI
CRMP/1634/2025 · 2025-08-11
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 21075 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 4 (Cr.M.P. No.-1634 of 2025)
2025:CGHC:40454 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक
क्रमां%क
-1634
/2025
1. श्री मां सरिरया सहू2 तिपु-इवेन सहू2, उम्र-लगभग 33, तिनवेस -ग्रामां मां8नपुर, हूल मांकमां-क9र्ट" क;ल9न , कवेर्धा", हूस ल वे जि>ल-क रर्धामां, छत्ती सगढ़ -----यातिचकक" तिवेरूद्घ
1. श्यामां तिहूर , तिपु-द्री सहू2, उम्र-लगभग-36 वेर्ष", तिनवेस -ग्रामां मां8नपुर, पुजिलस थान-पुरिरया, जि>ल-क रर्धामां, छत्ती सगढ़,
2. जि>ल दाजिर्धाकर , कवेर्धा", जि>ल-क रर्धामां, छत्ती सगढ़ । -----उत्तीरवेदा गर्ण यातिचकक"/अतिभयाक्त द्वार : श्री र्धामांIश श्री वेस्वे, अजिर्धावेक्त । उत्तीरवेदा क्रमां%क-1 द्वार : क9ई उपुण्डिस्था नहूM । उत्तीरवेदा क्रमां%क-2 द्वार : श्री अजिNलश क मांर, शसक या अजिर्धावेक्त । मांनन या न्यायामांOति" श्री स%>या क मांर >यासवेल
, न्यायार्धा श
!! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 12/08/2025
1. भर या नगरिरक सरक्षा स%तिहू, 2023 क र्धार-528 क हू प्रस् इस यातिचक मांU पुनर क्षार्ण न्यायालया-अपुर सत्र न्यायार्धा श, क रर्धामां, छत्ती सगढ़ द्वार दाण्डिक पुनर क्षार्ण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.08.13 15:17:05 +0530
2 / 4 (Cr.M.P. No.-1634 of 2025) क्रमां%क-04/2025 “श्री मां सरिर सहू2 तिवेरूद्घ श्यामां तिहूर वे अन्या एक" मांU पुरिर आदाश तिदान%क-21/03/2025 क9 चनZ दा गई हू8, जि>सक हू यातिचकक" क दाण्डिक पुनर क्षार्ण आवेदान तिनरस् कर तिदाया गया ।
2. उक्त दाण्डिक पुनर क्षार्ण क्रमां%क-04/2025 मांU यातिचकक" श्री मां सरिर सहू2 द्वार तिवेचरर्ण न्यायालया-न्यातियाक मांजि>स्र्ट[र्ट प्रथामां श्रीर्ण , पुरिरया, जि>ल-क रर्धामां (छत्ती सगढ़) क दाण्डिक प्रकरर्ण क्रमां%क-1052/2023 “श्यामां तिहूर तिवेरूद्घ श्री मां
सरिर सहू2" मांU पुरिर आदाश तिदान%क-05/09/2023 क9 चनZ दा गई था । उक्त आदाश क हू पुति श्यामां तिहूर द्वार प्रस् पुरिरवेदा स्वे कर कर हू_ए यातिचकक" सरिर सहू2 क तिवेरूद्घ र्धार-294, 323, 324 भर या दा स%तिहू क हू स%ज्ञान जिलया >कर उसक नमां न9तिर्टस >र करन क आदाश तिकया गया ।
3.
यातिचकक" क तिवेद्वान अजिर्धावेक्त क क" हू8 तिक यातिचकक" श्री मां सरिर सहू2 और उत्तीरवेदा श्यामां तिहूर आपुस मांU पुति-पुत्न रहू हूc था वेर्ष"-2024 क आदाशनसर उनक तिवेवेहू तिवेच्छदा हू9 चक हू8 । घर्टन तिदान%क-07/06/2016 क ई गई हू8 । उक्त तिजिथा पुर, पुत्न यातिचकक" सरिर सहू2 क रिरपु9र्ट" पुर पुति उत्तीरवेदा श्यामां तिहूर
क तिवेरूद्घ र्धार-498(क) भर या दा स%तिहू क अपुरर्धा दा>" हू_आ था, जि>समांU तिनर्ण"या हू9 चक हू8 और श्यामां तिहूर क9 दा9र्षजिसद्ध कर दाण्डि भ तिकया गया । उस मांमांल क करर्ण हू पुति उत्तीरवेदा श्यामां तिहूर न दाभ"वेनवेश यातिचकक" क तिवेरूद्घ तिवेचरर्ण न्यायालया मांU वेर्ष"-2018 मांU जिलजिN पुरिरवेदा पुश तिकया था, जि>सपुर पुजिलस प्रतिवेदान क वे>Oदा तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार यातिचकक" सरिर सहू2 क तिवेरूद्घ र्धार-294, 323, 324 भर या दा स%तिहू क हू स%ज्ञान जिलया गया हू8, >9 उतिच नहूM हू8 । पुरिरवेदा मांU
3 / 4 (Cr.M.P. No.-1634 of 2025) स%ज्ञान क जिलए पुया"प्त सक्ष्या क अभवे हू8 था उस झूOठ फं% सया गया हू8 । ऐस दाश मांU तिवेचरर्ण न्यायालया क "प्रश्नर्धा न आदाश" ण्डिस्थार रN >न या9ग्या नहूM हू8 । अm याहू यातिचक स्वे कर कर तिवेचरर्ण न्यायालया था पुनर क्षार्ण न्यायालया क आदाशn क9 अपुस् कर हू_ए उसक तिवेरूद्घ दाण्डिक कया"वेहू समांप्त क >ए ।
4. रज्या/उत्तीरवेदा क्रमां%क-2 पुक्षा क तिवेद्वान अजिर्धावेक्त न इस यातिचक क तिवेर9र्धा कर हू_ए कहू हू8 तिक यातिचकक" पुक्षा द्वार उठए गए क" स्वे कर या9ग्या नहूM हू8 । "प्रश्नर्धा न आदाश" उतिच और वे8र्धा हू8 । अm याहू यातिचक Nरिर> क >ए ।
5. उभयापुक्षा क क" श्रीवेर्ण तिकया गया था अतिभलN क पुरिरश लन तिकया गया ।
6. यातिचकक" सरिर सहू2 क तिपु एवे% भई क9 पुजिलस तिवेभग मांU पुदास्था हू9न हू_ए, उत्तीरवेदा श्यामां तिहूर न याहू जिलजिN पुरिरवेदा प्रस् तिकया था तिक यातिचकक" (>9 उस समांया उसक पुत्न था ) न तिदान%क-07/06/2016 क9 उस मांp-हून क अश्ल ल गजिलया% दाM, अभद्री व्यावेहूर तिकया, उसक छ9र्ट भई क पुत्न क सथा अवे8र्धा स%%र्धा और च9र क आर9पु लग कर चप्पुल स मांरपु र्ट क और नNOन स नक9ड़ा जि>सस NOन तिनकल आया । उक्त जिलजिN रिरपु9र्ट" पुर श्यामां तिहूर क तिचतिकत्सक या पुर क्षार्ण भ हू_आ । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार पुजिलस प्रतिवेदान मां%गया गया । पुजिलस प्रतिवेदान तिदान%क- 08/10/2018 मांU याहू उल्लेN तिकया गया तिक पुरिरवेदा सत्या नहूM हू8 था पुरिरवेदा क जिNलफं अपुरर्धा कयामां तिकया गया था जि>स करर्ण उसन पुरिरवेदा पुश तिकया हू8 ।
7.
उक्त पुजिलस प्रतिवेदान क उपुर%, तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार पुरिरवेदा श्यामां तिहूर क पुक्षा क प्रर%तिभक सक्ष्या दा>" तिकया गया और त्पुश्च पुरिरवेदा पु%> यान क "प्रश्नर्धा न आदाश" पुरिर तिकया गया ।
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8. प्रर%तिभक सक्ष्या मांU, स्वेया% पुरिरवेदा श्यामां तिहूर क अलवे मांदान मां9हून सहू2 एवे% पुस्कर सहू2 क भ पुर क्षार्ण करया गया । प्रर%तिभक सक्ष्या और जिलजिN तिशकया मांU आया थ्याn क आर्धार पुर पुरिरवेदा पु%> यान क आदाश तिकया गया । >%च स याहू स्पुष्ट हू8 तिक आहू पुरिरवेदा श्यामां तिहूर क तिचतिकत्स या पुर क्षार्ण भ करया गया जि>समांU उस च9र्ट पुई गया । उक्त >%च क आर्धार पुर पु%> यान क आदाश तिकया गया हू8 । उसमांU क9ई अवे8र्धा या अतिनयातिमां पुरिरलतिक्षा नहूM हू9 । इसजिलए तिवेचरर्ण न्यायालया क प्रश्नर्धा न आदाश था पुनर क्षार्ण न्यायालया क आदाश मांU हूस्क्षापु क आवेश्याक नहूM पुया > ।
9. अm याहू यातिचक प्रर%तिभक स्र पुर हू Nरिर> क > हू8 ।
10. उपुर9क्तनसर, इस दाण्डिक प्रक र्ण" यातिचक क तिनरकरर्ण तिकया > हू8 ।
11. रजि>स्र्ट[ क9 तिनदाIतिश तिकया > हू8 तिक इस आदाश क प्रतिजिलतिपु याथाश घ्र तिवेचरर्ण न्यायालया क9 सOचनथा" प्रतिर्ष क >ए । सहू /- (स%>या क मांर >यासवेल) न्यायार्धा श पो
मन