KISHORE CHANDRA v. EXECUTIVE OFFICER NAGAR PANCHAYAT MALIHABAD DISTT. LKO. AND ANOTHER
A227/6008/2025 · 2025-10-28
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 202798 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 6008 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ्शी कािजम इ़्ािहम तथा नगर पंचायत, मिलहाबाद के िव्षान अिधव्वा ्शी सुधीर कु मार िसह को सुना तथा प्ऴावली का अवलोकन िकया।
2. भारतीय संिवधान के अनुच्छेद 227 के अंतगर्त ्ऺस्तुत इस यािचका ्षारा यािचकाकतार् ने औ्योिगक न्यायािधकरण, उ्तर ्ऺदेश, लखनऊ ्षारा अिभिनणर्य िववाद संख्या 25 सन 2010 में पािरत अिभिनणर्य िदनांक 05.06.2025 की वैधता को चुनौती दी है, िजसके ्षारा यािचकाकतार् ्षारा ्ऺस्तुत औ्योिगक िववाद िनरस्त कर िदया गया। यािचकाकतार् से सेवा मुि्व के संबंध में िकया गया संदभार्देश िनरस्त कर िदया गया।
3. संदभार्देश में औ्योिगक िववाद का िववरण िनम्न ्ऺकार िकया गया है- "क्या सेवायोजक ्षारा संबंिधत ्शिमक ्शी िकशोर चन््श पु्ऴ ्शी मुन्नी लाल, ्िैक्टर चालक की सेवायें िदनांक 12.07.2003 से समाप्त िकया जाना उिचत एवं वैधािनक है? यिद नहीं तो सम्बिन्धत ्शिमक क्या िहतलाभ पाने का हकदार है और उसके वैधािनक देयों के िववरण क्या हैं?"
4. यािचकाकतार् का कथन है िक वह नगर पंचायत, मिलहाबाद में िदनांक 10.04.1198 से ्िैक्टर चालक के पद पर कायर्रत हुआ तथा उसने िदनांक 11.07.2004 तक िनरंतर सेवा की। उसको िनधार्िरत न्यूनतम वेतन से कम भुगतान िकया जा रहा था तथा न्यूनतम वेतन एवं सेवा के स्थायीकरण की मांग करने पर सेवायोजकों ने नाराज होकर उसे िदनांक 12.07.2003 को िबना कोई कारण बताये उसकी सेवा समाप्त कर दी तथा सेवा समािप्त के पूवर् उसे कोई नोिटस, वेतन अथवा भ्ता इत्यािद का भुगतान नहीं िकया गया। इस ्ऺकार यािचकाकतार् की सेवाएँ उ्तर ्ऺदेश औ्योिगक िववाद अिधिनयम, 1947 की धारा 6(एन) के उल्लंघन में समाप्त की गयीं। यािचकाकतार् ने यह भी कहा िक उससे किन्ष कमर्चािरयों की सेवाएँ समाप्त नहीं की गयीं।
5. यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने कहा िक नगर पंचायत के तत्कालीन अध्य्ष ने यािचकाकतार् के दावे के समथर्न में न्यायािधकरण के सम्ष साष्य िदया था। उ्व साष्य की ्ऺित यािचका के साथ संलग्न है िजससे यह ्ऺतीत होता है िक यह साष्य िदनांक 23.01.2020 को Versus Counsel for Petitioner(s) : Sushil Kumar, Kazim Ibrahim Counsel for Respondent(s) : Sudhir Kumar Singh Kishore Chandra .....Petitioner(s) Executive Officer Nagar Panchayat Malihabad Distt. Lko.
And Another .....Respondent(s)
अंिकत िकया गया। सा्षी ने कहा िक वह नगर पंचायत, मिलहाबाद का अध्य्ष वषर् 1995 में चुने गये थे। ्िैक्टर चालक के पद पर िनयु्व करने की सूचना अिधशाषी अिधकारी ने नोिटस बोडर् पर लगायी थी। चार लोगों ने आवेदन िकया था िजसमें यािचकाकतार् की िनयुि्व हुई। अिधशाषी अिधकारी की संस्तुित पर अध्य्ष ने स्वीकृ ित दी थी तथा परगना अिधकारी को भी िविधवत सूिचत िकया था। यािचकाकतार् की िनयुि्व वषर् 1998 में हुई तथा उस समय िवभाग में कोई ठेके दार कायर्रत नहीं था। इस सा्षी का कायर्काल वषर् 2000 तक रहा तथा तब तक यािचकाकतार् ने काम िकया। सा्षी ने कहा िक वषर् 2009 में बहन की मृत्यु के कारण वह दुःखी था और इसिलए वह गवाही देने नहीं आ पाया था। िजरह में इस सा्षी ने कहा िक वषर् 2000 के बाद नगर पंचायत से उसका संबंध पूणर्तया समाप्त हो गया था। िजरह में सा्षी ने यह भी कहा िक यािचकाकतार् को िनयुि्व प्ऴ अिधशाषी अिधकारी ने िदया होगा जो उसके सं्ञान में है। अध्य्ष से िनयुि्व प्ऴ देने से पहले अनुमित ली जाती है। िफर कहा िक चतुथर् ्शेणी कमर्चारी की िनयुि्व अिधशाषी अिधकारी करते हैं िजसकी सूचना वह अध्य्ष को देते हैं।
6. उपरो्व कथनों के अनुसार यािचकाकतार् को अिधशाषी अिधकारी ने िनयुि्व प्ऴ िदया होगा िकन्तु यािचकाकतार् ने कोई िनयुि्व प्ऴ न तो औ्योिगक न्यायािधकरण के सम्ष ्ऺस्तुत िकया और न ही उसे न्यायालय के सम्ष ्ऺस्तुत िकया। अतः तत्कालीन अध्य्ष ्षारा िदये गये उपरो्व बयान के आधार पर भी वांिछत अिभलेखीय साष्य यािचकाकतार् ्ऺस्तुत नहीं कर पाया।
7.
सेवायोजक नगर पंचायत, मिलहाबाद ने यािचकाकतार् को अपनी सेवा में होने से अस्वीकार िकया तथा कहा िक नगर पंचायत, मिलहाबाद में ्िैक्टर चालक का कोई पद सृिजत नहीं है। नगर पंचायत सरकारी सहायता पर जन कायर् करती है तथा इसमें के वल सरकारी स्थायी नौकरी होती है। वाद में राज्य सरकार प्षकार नहीं है। नगर पंचायत ने यह भी कहा िक कॉमिशयल िसक्योिरटी गॉडर् सिवसेस डूडा सेवा के न््श लखनऊ से अल्पकालीन सेवा के िलए कमर्चािरयों को नगर पंचायत में बुलाकर उनसे काम िलया जाता था। यािचकाकतार् कॉमिशयल िसक्योिरटी गॉडर् सिवसेस का कमर्चारी था तथा वह कभी भी नगर पंचायत का कमर्चारी नहीं रहा।
8. यािचकाकतार् ्षारा नगर पंचायत, मिलहाबाद ्षारा िनगर्त अनुभव ्ऺमाण-प्ऴ ्ऺस्तुत िकये गये था, िजनकी सत्यता से नगर पंचायत ने अस्वीकार िकया।
9. अपने कथन में यािचकाकतार् ने कहा िक उसे रुपये 1,450/- ्ऺितमाह की दर से वेतन नगर पंचायत कायार्लय में िलिपक ्षारा िकया जाता था तथा उसे ठेके दार ्षारा भुगतान नहीं िकया जाता था। यािचकाकतार् ने िदनांक 04.06.2003 व िदनांक 25.06.2004 को िनगर्त अनुभव ्ऺमाण- प्ऴ भी ्ऺस्तुत िकया। यािचकाकतार् ने नगर पंचायत ्षारा िनगर्त कोई िनयुि्व ्ऺमाण-प्ऴ ्ऺस्तुत नहीं िकया न ही उसने नगर पंचायत ्षारा वेतन अदा िकये जाने के संबंध में कोई अिभलेखीय साष्य ्ऺस्तुत िकये। अनुभव ्ऺमाण प्ऴ के संबंध में यािचकाकतार् ने कथन िकया िक वह उसने काम ढूंढ़ने के िलए िलया था तािक उसको िदखाकर काम मांगा जा सके ।
10. नगर पंचायत की तरफ से शपथ-प्ऴ पर अंिकत कथन में सा्षी ने कहा िक नगर पंचायत को िकसी भी सेवा में रखने का अिधकार नहीं है तथा नौकरी पर रखने के िलए चयन ्ऺि्वया शासन A227 No. 6008 of 2025 2
्षारा ही की जाती है। नगर पंचायत ्षारा ्ऺस्तुत अिभलेखों से यह दशार्या गया िक यािचकाकतार् कॉमिशयल िसक्योिरटी गॉडर् सिवसेस का कमर्चारी था।
11.
नगर पंचायत के अिधशाषी अिधकारी ने िदनांक 19.12.2024 को अंिकत अपने बयान में कहा िक यािचकाकतार् ने िजलािधकारी को संिवदा बहाल करने हेतु एक ्ञापन िदया है िजसमें उसने स्वयं स्वीकार िकया है िक वह दैिनक वेतन भोगी संिवदा कमर्कार है। नगर पंचायत ्षारा कॉमिशयल िसक्योिरटी गॉडर् सिवसेस के साथ हुए अनुबंध की ्ऺित भी न्यायािधकरण के सम्ष ्ऺस्तुत की गयी।
12. कॉमिशयल िसक्योिरटी गॉडर् सिवसेस को भी प्षकार बनाया गया है िकन्तु नोिटस के उपरान्त भी कॉमिशयल िसक्योिरटी गॉडर् सिवसेस न्यायािधकरण में उपिस्थत नहीं हुआ तथा उसके िवरु्ध एकप्षीय कायर्वाही अ्षसािरत की गयी।
13. प्ऴावली पर उपलब्ध िलिखत कथनों, अिभकथनों, अिभलेखों एवं साष्यों का पिरशीलन करते हुए न्यायािधकरण ने यह पाया िक यािचकाकतार् ने स्वयं को नगर पंचायत, मिलहाबाद ्षारा िनयु्व िकये जाने के संबंध में के वल मौिखक कथन िकया है तथा िनयुि्व के संबंध में कोई अिभलेखीय साष्य ्ऺस्तुत नहीं िकया है।
14. सेवायोजक की ओर से िलिखत कथन के अिभलेख में यह कहा गया है िक यािचकाकतार् कॉमिशयल िसक्योिरटी गॉडर् सिवसेस का कमर्चारी था। न्यायािधकरण ने समस्त तथ्यों एवं तकॏल की िववेचना करके यह िनष्कषर् िनकाला िक यािचकाकतार् ठेके दार ्षारा िनयु्व दैिनक वेतन भोगी कमर्चारी था तथा संदभार्देश िनस्तािरत कर िदया।
15. उपरो्व आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने कहा िक अिधशाषी अिधकारी नगर पंचायत, मिलहाबाद ने िदनांक 04.06.2003 एवं 25.06.2004 को यािचकाकतार् को अनुभव ्ऺमाण-प्ऴ िनगर्त िकये थे िजसमें अंिकत है िक यािचकाकतार् नगर पंचायत कायार्लय में िदनांक 11.08.1998 से दैिनक वेतन / संिवदाकमर् के रूप में कायर्रत है। यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा का कथन है िक उपरो्व ्ऺमाण-प्ऴों से यह िस्ध हो जाता है िक यािचकाकतार् नगर पंचायत का कमर्चारी था। उ्व अनुभव ्ऺमाण-प्ऴों की सत्यता को नगर पंचायत की तरफ से िववािदत िकया गया था। अनुभव ्ऺमाण-प्ऴ में भी यािचकाकतार् को दैिनक वेतन भोगी / संिवदा पर कायर्रत बताया गया, जबिक यािचकाकतार् एक ही समय पर दैिनक वेतन भोगी तथा संिवदा पर कायर्रत नहीं हो सकता है। अनुभव ्ऺमाण-प्ऴ में अंिकत उपरो्व कथन भी अनुभव ्ऺमाण-प्ऴ को संदेहास्पद बनाते हैं।
16.
यािचका के साथ नगर पंचायत, मिलहाबाद के दैिनक वेतन भोगी कमर्चािरयों की माह अगस्त 1998 एवं जनवरी 2001 के िबल की टंिकत ्ऺितयां संलग्न की गयी हैं। उ्व सूची की छाया्ऺितयां यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने न्यायालय के सम्ष रखी, िजनपर नगर पंचायत के िकसी भी अिधकारी के पदनाम की कोई मुहर नहीं लगी है। यािचकाकतार् का कथन है िक उसको 1425 रुपये वेतन िमलता था िकन्तु माह अगस्त 1998 के िबल में यािचकाकतार् का वेतन A227 No. 6008 of 2025 3
1472 रुपये 50 पैसे िलखा तथा माह अगस्त 1999 के िबल में उसका वेतन 1425 रुपये िलखा है। उ्व अिभलेख को िस्ध करने के िलए यािचकाकतार् की तरफ से कोई साष्य ्ऺस्तुत नहीं िकया गया तथा यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने कहा िक यह वेतन िबल ्ऺदशर् के रूप में अंिकत नहीं िकये गये। ऐसी पिरिस्थित में औ्योिगक न्यायािधकरण ने ्ऺदशर् न हुए वेतन िबल के आधार पर यािचकाकतार् का दावा िस्ध न मानने में कोई ्ऴुिट कािरत नहीं की।
17. उपरो्व िववेचना के आधार पर न्यायालय इस सुिनि्ात मत की है औ्योिगक न्यायािधकरण ने आलोच्य आदेश िदनांक 05.06.2025 ्ऺकरण के समस्त संगत तथ्यों, कथनों एवं साष्यों की समुिचत समी्षा करके पािरत िकया है। आदेश में कोई ऐसी ्ऴुिट अथवा अवैधािनकता ्ऺतीत नहीं होती है िजसमें इस न्यायालय के अनुच्छेद 227 के अंतगर्त ्ऺद्त शि्वयों के अंतगर्त हस्त्षेप िकया जाय।
18. यािचका बलहीन है, तद्नुसार िनरस्त की जाती है।
October 28, 2025 Ankit A227 No. 6008 of 2025 4 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench