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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 35757 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 100/2025 , अन्तगर्त धारा 308(5), 79, 352, 351(3), 77, 64(2)एम, 123 भारतीय न्याय संिहता एवं धारा 66 (ई) आई०टी० एक्ट, थाना समथर, िजला झांसी में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। ्ऺथम सूचना िरपोटर् अितिवलंिबत है, इसका कोई समुिचत स्प्िीकरण नहीं िदया गया है। ्ऺथम सूचना िरपोटर् में आवेदक पर अ्शील फोटो/वीिडयों वायरल करने व उसकी देकर किथत अपराध कािरत करने का आ्षेप विणत िकया गया है, िकतु इस मामलें में ्ऺासंिगक तथ्य यह है िक आवेदक के मोबाइल से किथत पीिड़ता कोई अ्शील वीिडयो/फोटो की बरामदगी नहीं की गयी है और न ही किथत स््वीनशॉट का ्ऺमाणन कराया गया है तथा फोन-पे में ्ऺाप्त भुगतान पीिड़ता के साथ उसके डीए िसतंबर के मानदेय से संबंिधत है, जो िक उ्व धािमक कथावाचक के ्ऱाइवर और म्यूिजक प्लेयर के रूप में काम करता है। अतः अिभयोजन प्ष की पूरी कहानी झूठी है और उस पर िव्षास नहीं िकया जा सकता। पीिड़ता के बयान के अवलोकन से यह स्प्ि है िक आवेदक और पीिड़ता एक-दूसरे को बहुत लंबे समय से जानते हैं और वे एक साथ धािमक ्ऺवचन कर रहे हैं, लेिकन आवेदक का कु छ भुगतान पीिड़ता से बकाया था, जो आवेदक को नहीं िदया गया था। जब आवेदक ने पीिड़ता से उपरो्व बकाया रािश की मांग की, तो वतर्मान िववाद में प्षकार बन गए हैं। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता Versus Counsel for Applicant(s) : Shiv Bahadur Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Anil Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 17.06.2025 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4.
िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य एवं प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. 7. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 15, 2025 CP.sahani BAIL No. 35757 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad