NEEBU LAL v. STATE OF U.P. THROUGH SECY. SECONDARY EDU. LKO. and ORS.
WRIA/1415/2014 · 2025-10-27
Subhash Vidyarthi
body2025
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[ 2025 DAILYLAW 199555 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW WRIT - A No. - 1415 of 2014 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ्शी अिभषेक पटेल, राज्य सरकार के िव्षान अपर मुख्य स्थायी अिधव्वा ्शी राहुल शुक्ला तथा िवप्षी संख्या 3 एवं 4 के िव्षान अिधव्वा ्शी ्िास नारायण शुक्ला की तरफ से उपिस्थत अिधव्वा ्शी अंकु र ्शीवास्तव को सुना तथा प्ऴावली का अवलोकन िकया।
2. भारतीय संिवधान के अनुच्छेद 226 के अंतगर्त ्ऺस्तुत इस िरट यािचका ्षारा यािचकाकतार् ने िवप्षी संख्या 3- ्ऺधानाचायर् जनता इंटर कॉलेज बेलहरी, सुल्तानपुर ्षारा पािरत आदेश िदनांक 31/12/2004 की वैधता को चुनौती दी है, िजसके ्षारा यािचकाकतार् की उ्व िव्यालय में चतुथर् ्शेणी कमर्चारी के रूप में सेवा समाप्त कर दी गई। यािचकाकतार् ने शासन ्षारा पािरत आदेश िदनांक 31/1/2013 की वैधता को भी चुनौती दी है, िजसके ्षारा उ्व आदेश को उिचत ठहराया गया।
3. सं्षेप में ्ऺकरण के तथ्य इस ्ऺकार हैं िक िदनांक 6/5/1997 को ्ऺाथर् की िनयुि्व जनता इंटर कॉलेज बेलहरी, जनपद सुल्तानपुर में चतुथर् ्शेणी के पद पर हुई। वतर्मान में िव्यालय का नाम बदलकर राज िसह इंटर कॉलेज बेलाहारी, जनपद सुल्तानपुर हो गया है। उ्व पद पर कायर् करते हुए िदनांक 31/12/2004 को यािचकाकतार् के िवरु्ध िव्यालय के ्ऺधानाचायर् ने एक आदेश पािरत िकया, िजसके कथन िनम्नवत हैंः-
"आप अपने िनलंबन संबंिधत गंभीर आरोप प्ऴों का उ्तर एवं स्प्िीकरण िजलािधकारी, िजला िव्यालय िनरी्षक, सुल्तानपुर, जांच अिधकारी (िजला िव्यालय िनरी्षक कायार्लय, सुल्तानपुर) एवं जनता इंटर कॉलेज, बेलाहारी की जाँच सिमित के सम्ष आपने अपना प्ष बार-बार समय देने के बावजूद से ्ऺस्तुत नहीं िकया। Versus Counsel for Petitioner(s) : Ajay Kumar Singh Raj, Abhishek Patel, Ravi Kr Singh Vats, Vijay Kumar Counsel for Respondent(s) : C.S.C., Rajesh Kumar Singh, Vyas Narayan Shukla Neebu Lal .....Petitioner(s) State Of U.P. Through Secy. Secondary Edu. Lko. And Ors. .....Respondent(s)
अतः सभी आरोपों के कारण आपकी सेवा समाप्त की जाती है।"
4.
पूवर् में यािचकाकतार् ने इस न्यायालय के सम्ष िरट यािचका संख्या 10357 (S.S.) सन् 2006 ्ऺस्तुत की थी, जो िदनांक 14/9/2011 के आदेश से िनस्तािरत हुई। उ्व आदेश में यह अंिकत है िक यािचकाकतार् की सेवा समािप्त के संबंध में उपिजलािधकारी खादीपुर जनपद सुल्तानपुर ने िदनांक 22/6/2010 को एक जांच आख्या ्ऺस्तुत करते हुए यािचकाकतार् की सेवा में पुनः स्थापना का ्ऺकरण सहानुभूितपूवर्क िवचार िकए जाने हेतु कहा है। िजला मिजस््िेट ने ्ऺकरण राज्य सरकार को संदिभत िकया है, िकतु ्ऺकरण में कोई अंितम िनणर्य नहीं िलया गया है। इस न्यायालय ने राज्य सरकार को यािचकाकतार् के ्ऺकरण में िनणर्य लेने का िनदरॏश देते हुए यािचका िनस्तािरत कर दी।
5. उ्व आदेश िदनांक 14.09.2011 के अनुपालन में राज्य सरकार ने आदेश िदनांक 31/1/2013 पािरत िकया, िजसमें शासन ने यह पाया िक यािचकाकतार् को पदच्युत िकया जाना संस्था के शैि्षक वातावरण की सुिचता एवं िव्यालय िहत में उिचत है।
6. यािचकाकतार् की सेवा समािप्त के आदेश िदनांक 31/12/2004 से स्प्ि है िक यािचकाकतार् की सेवा मा्ऴ इस आधार पर समाप्त कर दी गई िक उसने आरोप प्ऴ का उ्तर एवं स्प्िीकरण नहीं िदया। सेवा समािप्त आदेश में यह अंिकत नहीं है िक यािचकाकतार् के िवरु्ध लगाए गए आरोपों के संबंध में कोई जांच की कायर्वाही की गई एवं आरोपों की पुि्ि के िलए यािचकाकतार् के िवरु्ध कोई साष्य ्ऺस्तुत िकया गया।
7. यह िविध का सुस्थािपत िस्धांत है िक मा्ऴ आरोपों का बचाव न करने के कारण िकसी भी कमर्चारी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकती है तथा कमर्चारी ्षारा बचाव न िकए जाने की िस्थित में भी सेवा योजक को कमर्चारी के िवरु्ध लगाए गए आरोपों को साष्य से िस्ध करना होगा।
8. ्ऺस्तुत ्ऺकरण में आलोच्य आदेश के पिरशीलन से यह सुस्प्ि होता है िक यािचकाकतार् के िवरु्ध लगाए गए आरोपों की सत्यता ्ऺमािणत करने के िलए कोई भी साष्य नहीं िदया गया। ऐसी पिरिस्थित में मा्ऴ यािचकाकतार् ्षारा आरोपों का उ्तर अथवा स्प्िीकरण न िदए जाने के आधार पर पािरत िकया गया सेवा समािप्त आदेश िविध में संधायर् नहीं है।
9.
यािचकाकतार् की सेवा समाप्त होने के उपरांत उप-िजलािधकारी खादीपुर, सुल्तानपुर ने एक जांच करके िदनांक 22/06/2010 को जांच आख्या ्ऺस्तुत की। जांच आख्या के पिरशीलन से स्प्ि है िक यह जांच सेवा समािप्त के उपरांत यािचकाकतार् ्षारा अनुसूिचत जाित आयोग को िदए गए ्ऺाथर्ना प्ऴ के आधार पर संिस्थत हुई थी। जांच आख्या में अंिकत है िक जांच के दौरान उप- िजलािधकारी ने िव्यालय के चतुथर् ्शेणी कमर्चािरयों ्शी रामजी, ्शी रंजीत कु मार िसह तथा ्शी सीताराम के कथन अंिकत िकए तथा यािचकाकतार् का भी बयान अंिकत िकया गया। िव्यालय में ्ऺव्वा जीव िव्ञान के पद पर कायर्रत ्शी राजें्श ्ऺताप िसह, जो िदनांक 30/06/2006 को सेवा WRIA No. 1415 of 2014 2
िनवृ्त हो गए, ने यािचकाकतार् के प्ष में कथन िकया तथा उन्होंने यह भी कहा िक ्शी िशव भूषण िम्शा ्ऺधानाचायर् जनता इंटर कॉलेज, िजन्होंने यािचकाकतार् के िवरु्ध सेवाच्युत करने का आदेश पािरत िकया, यािचकाकतार् के साथ अच्छा ्िवहार नहीं करते थे तथा वह यािचकाकतार् को सेवा से िनकाल कर अपने िकसी ्िि्व को िनयु्व करना चाहते थे तथा ्शी िशव भूषण िम्शा ्ऺधानाचायर् ने यािचकाकतार् को जबरदस्ती सेवामु्व कर िदया। ्शी उदय पाल िसह सहायक अध्यापक एल०टी तथा ्शी राम सेवक पांडेय, सहायक अध्यापक, ने भी यािचकाकतार् के प्ष में ऐसा ही बयान िदया।
10. जांच आख्या में अंिकत है िक ्शी िशव भूषण िम्शा ने जांच अिधकारी के सम्ष एक िलिखत आख्या ्ऺस्तुत की, िकतु अपना बयान नहीं अंिकत कराया।
11. ्शी िशव भूषण िम्शा, ्ऺधानाचायर्, ्षारा ्ऺस्तुत आख्या िदनांक 17/06/2010 के समथर्न में यािचकाकतार् के िनष्कासन संबंिधत प्ऴाचार जांच अिधकारी के सम्ष ्ऺस्तुत िकया गया था, िजसके संबंध में यािचकाकतार् ने कहा िक उसे कोई भी नोिटस अथवा आदेश ्ऺाप्त नहीं कराया गया था तथा उसे डरा-धमका कर िव्यालय से भगा िदया गया था।
12.
जांच आख्या में अंिकत है िक यािचकाकतार् के िव्यालय में कायर् करने के संबंध में उसके सहकमर् चतुथर् ्शेणी कमर्चािरयों के बयानों तथा तत्कालीन अध्यापकों के बयानों से स्प्ि है िक यािचकाकतार् िव्यालय में सेवा पर सुचारू रूप से िनरंतर उपिस्थत रहता था और यथा आदेश कायर् करता था एवं कायर् में कोई िवशेष लापरवाही नहीं बरतता था। यािचकाकतार् के अनुसूिचत जाित के ्िि्व एवं कमजोर ्िि्वत्व के ्िि्व होने के कारण उसे डरा-धमका कर सेवा िनष्कासन की िस्थित बनाई गई। जांच अिधकारी ने अंिकत िकया िक समस्त जांच पड़ताल के प्ाात यह ्ऺतीत होता है िक यािचकाकतार् के ्ऺकरण पर सहानुभूितपूवर्क िवचार करने का औिचत्य है और सेवा में बहाल करने का कारण बनता है।
13. उ्व जांच आख्या को शासन ने आलोच्य आदेश िदनांक 31/01/2013 से इस आधार पर अस्वीकार कर िदया िक जांच अिधकारी ने ्ऺधानाचायर् के कथन अंिकत नहीं िकए थे।
14. शासन ने यह तथ्य सं्ञान में नहीं िलया िक ्ऺधानाचायर् को अपना प्ष रखने का अवसर िदया गया था तथा इसके बावजूद ्ऺधानाचायर् ने मा्ऴ िलिखत आख्या एवं अिभलेख ्ऺस्तुत िकए तथा अपना बयान अंिकत नहीं कराया। ऐसी पिरिस्थित में मा्ऴ ्ऺधानाचायर् का बयान अंिकत ना िकए जाने के आधार पर जांच आख्या िदनांक 22/06/2010 को अस्वीकार कर देना उिचत ्ऺतीत नहीं होता है। जांच आख्या कई चतुथर् ्शेणी कमर्चािरयों एवं अध्यापकों के बयानों को दृि्िगत रखते हुए ्ऺस्तुत करी गई है तथा उ्व जांच आख्या में भी यािचकाकतार् के सेवा में रहते हुए आचरण के िवरु्ध कोई तथ्य ्ऺकाश में नहीं आया है।
15.
राज्य सरकार ने ्ऺित शपथ प्ऴ ्ऺस्तुत करके यािचका का िवरोध िकया है तथा यह कहा है िक याची िबना िकसी सूचना के सेवा से अनुपिस्थत चल रहा था। उसका आचरण सेवा िनयमों के WRIA No. 1415 of 2014 3
िवरु्ध था, िजसको सं्ञान में लेते हुए िव्यालय के ्ऺधानाचायर् ्षारा यािचकाकतार् की सेवाएं िनयमानुसार समाप्त कर दी, िजसके िवरु्ध यािचकाकतार् ने िजला िव्यालय िनरी्षक, सुल्तानपुर के सम्ष ्ऺाथर्ना प्ऴ ्ऺस्तुत िकया। याची के ्ऺाथर्ना प्ऴ को सं्ञान में लेते हुए िजला िव्यालय िनरी्षक ने ्ऺकरण की जांच सह िजला िव्यालय िनरी्षक ्षारा कराई तथा जांच आख्या िदनांक 4/11/2004 के अनुसार यािचकाकतार् की िशकायतें आधारहीन पाई गई एवं उसके िवरु्ध आरोप पु्ि हुए।
16. ऐसी पिरिस्थित में, जबिक यािचकाकतार् की सेवा समाप्त करने का आदेश िदनांक 31/12/2004 िबना उसके िवरु्ध आरोपों को पु्ि िकए हुए पािरत िकया गया था, उप- िजलािधकारी ने अपनी जांच आख्या में यािचकाकतार् को सेवा में बहाल करने का कारण बनना पाया है तथा उ्व जांच आख्या िबना िकसी समुिचत आधार के शासन ने अस्वीकार कर दी, सेवा समािप्त आदेश िदनांक 31/12/2004 एवं शासन ्षारा पािरत आदेश िदनांक 31/01/2013 िविध में संधायर् नहीं है एवं िनरस्त िकए जाने योग्य है।
17. जहां तक ्ऺित शपथ प्ऴ में कहे गए कथन का संबंध है, ्ऺित शपथ प्ऴ के अनुसार यािचकाकतार् ने सेवा समािप्त के प्ाात एक ्ऺाथर्ना प्ऴ िदया िजस पर सह िजला िव्यालय िनरी्षक ने जांच करके जांच आख्या िदनांक 4/11/2004 ्ऺस्तुत की, िजसमें यािचकाकतार् के आरोप पु्ि नहीं हुए एवं उसके िवरु्ध लगाए गए आरोप पु्ि हुए। यह ्ऺाथर्ना प्ऴ किथत रूप से यािचकाकतार् की सेवा समािप्त के प्ाात िदया गया तथा सेवा समािप्त का आदेश िदनांक 31/12/2004 को पािरत हुआ है। ऐसी पिरिस्थित में, ्ऺित शपथ प्ऴ में कहे गए कथन सही नहीं ्ऺतीत होते हैं क्योंिक िदनांक 31/12/2004 को सेवा मु्व होने के प्ाात िदए गए ्ऺाथर्ना प्ऴ के आधार पर जांच आख्या िदनांक 4/11/2004 को ्ऺस्तुत नहीं की जा सकती है। इन कथनों के अनुसार भी सेवा मुि्व िकए जाने का आदेश पािरत करने के पूवर् जांच में साष्यों से यािचकाकतार् के िवरु्ध लगाए गए आरोपों की पुि्ि नहीं हुई थी।
18.
तदनुसार, िरट यािचका स्वीकार की जाती है। िवप्षी संख्या 3 ्षारा पािरत आलोच्य आदेश िदनांक 31/12/2004 तथा िवप्षी संख्या 1 ्षारा पािरत आदेश िदनांक 31/1/2013 िनरस्त िकए जाते हैं। यािचकाकतार् सेवा मु्व िकए जाने के आदेश िदनांक 31/12/2004 के िनरस्तीकरण का ्ऺभाव यह होगा िक यािचकाकतार् उ्व ितिथ से िनरंतर सेवारत माना जाएगा तथा उसको सेवा में रहने के समस्त अनुषांिगक लाभ ्ऺदान िकए जाएंगे। वेतन के बकाया के संबंध में यह आदेश पािरत िकया जाता है िक यािचकाकतार्, उसको देय वेतन का 50 ्ऺितशत पाने का अिधकारी होगा। October 27, 2025 Himanshu WRIA No. 1415 of 2014 4 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench