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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 199001 (ALL)

SURESH PRATAP CHAND v. STATE OF U.P. THROUGH PRIN. SECY. COOPERATIVE LKO. and ORS.

WRIA/7745/2014 · 2025-10-27

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW WRIT - A No. - 7745 of 2014 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ्शी आफताब अहमद की तरफ से उपिस्थत िव्षान अिधव्वा ्शी युसुफ सखवी तथा राज्य सरकार के िव्षान अपर मुख्य स्थायी अिधव्वा ्शी राहुल शुक्ला तथा िवप्षी संख्या 3 से 5 की तरफ से उपिस्थत िव्षान अिधव्वा ्शी राके श कु मार चौधरी को सुना तथा प्ऴावली का अवलोकन िकया। 2. भारतीय संिवधान के अनुच्छेद 226 के अंतगर्त ्ऺस्तुत इस िरट यािचका ्षारा यािचकाकतार् ने ्ऺबंध िनदेशक, उ्तर ्ऺदेश ्ऺसंस्करण एवं िनमार्ण सहकारी संघ िलिमटेड लखनऊ ( PACCFED) ्षारा पािरत आदेश िदनांक 7/4/2014 की वैधता को चुनौती दी है, िजसके ्षारा यािचकाकतार् को ₹6285/- की वसूली, का आदेश पािरत िकया गया तथा उसकी चिर्ऴ पंिजका में िवशेष ्ऺितकू ल ्ऺिवि्ि अंिकत की गई तथा िजस अविध में यािचकाकतार् सेवा में नहीं रहा, उस अविध के मध्य वेतन एवं भ्ता न देने का आदेश भी यािचकाकतार् के िवरु्ध पािरत िकया गया। 3. यािचकाकतार् के कथन सं्षेप में इस ्ऺकार हैं िक उ्तर ्ऺदेश ्ऺसंस्करण एवं िनमार्ण सहकारी संघ िलिमटेड लखनऊ (PACCFED) ने यािचकाकतार् की िनयुि्व सहायक के पद पर तदथर् रूप में िदनांक 28/9/1982 को हुई थी, िजस पद पर यािचकाकतार् ने िदनांक 7/10/1982 तक योगदान ्ऺस्तुत िकया। यािचकाकतार् के िवरु्ध कु छ आरोपों के आधार पर िदनांक 1/6/1993 को अनुशासिनक कारर्वाई ्ऺारंभ की गई। जांच अिधकारी ने यािचकाकतार् को आरोप प्ऴ िदया, िजसका उ्तर यािचकाकतार् ने िदनांक 30/5/1994 को िदया। जांच आख्या िदनांक 31/1/1995 को जांच अिधकारी ने यािचकाकतार् को आरोप संख्या 1 एवं आरोप संख्या 4 में धन के अपहरण/गबन/दुरुपयोग का दोषी पाया। िदनांक 12/9/2002 को यािचकाकतार् को एक कारण बताओ नोिटस दी गई िक क्यों न उसको सेवाच्युत कर िदया जाए Versus Counsel for Petitioner(s) : Aftab Ahmad Counsel for Respondent(s) : C.S.C., Rakesh Kumar Chaudhary Suresh Pratap Chand .....Petitioner(s) State Of U.P. Through Prin. Secy. Cooperative Lko. And Ors. Secy. Cooperative Lko. And Ors. .....Respondent(s) तथा अपहरण/गबन की गई धनरािश ₹ 33558.43/- की वसूली उससे की जाए। यािचकाकतार् ने उ्व नोिटस का कोई उ्तर नहीं िदया, िजसके उपरांत िदनांक 15/1/2003 को यािचकाकतार् को तत्काल ्ऺभाव से सेवाच्युत करने तथा उससे ₹ 33558.43/- वसूल करने का आदेश पािरत िकया गया। उ्व आदेश के िवरु्ध यािचकाकतार् ने इस न्यायालय के सम्ष िरट यािचका संख्या 1501 (S.S) सन् 2003 ्ऺस्तुत की जो िदनांक 21/5/2012 के आदेश से स्वीकार करते हुए दंडादेश िदनांक 15/1/2003 िनरस्त कर िदया गया तथा उ्तर ्ऺदेश ्ऺसंस्करण एवं िनमार्ण सहकारी संघ िलिमटेड (PACCFED) के ्ऺबंध िनदेशक को पुनः जांच कर के अंितम आदेश पािरत करने का िनदरॏश िदया गया। उ्व आदेश में यह भी अंिकत है िक इस अविध में यािचकाकतार् सेवा में स्थािपत रहेगा, िकतु वेतन के पूवर् देयों की देयता जांच आख्या के अधीन होगी। इसके उपरांत, यािचकाकतार् को पुनः सुनवाई का अवसर िदया गया तथा उसका प्ष लेने के प्ाात आलोच्य आदेश िदनांक 7/4/2014 पािरत िकया गया। 4. आलोच्य आदेश में यह अंिकत है िक यािचकाकतार् को कायार्लय कायॏल हेतु िलए गए अि्षम धनरािश ₹10,637/- में से ₹6,285/- समायोिजत न करने के कारण उ्व धनरािश का अपहरण/गबन कर संघ को ्षित पहुचाने के िलए आरोिपत िकया गया था, जो आरोप जांच में पु्ि हुआ है। इस कारण से यािचकाकतार् से उपरो्व धनरािश ₹6,285/- की वसूली करने तथा उ्व कायर् के िलए उसकी पिरिनदा करने का आदेश पािरत िकया गया। यह भी आदेश पािरत िकया गया, चूँिक यािचकाकतार् अनुशासिनक कायर्वाही के अधीन दोषी पाए गए इसिलए सेवाच्युत िकए जाने से सेवा में पुनः स्थािपत िकए जाने की अविध के िलए यािचकाकतार् को कोई वेतन एवं भ्ता देय नहीं होगा। 5. उ्व आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए, यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने तकर् िदया िक किथत जांच आख्या, िजसके आधार पर आदेश पािरत िकया गया िक ्ऺित यािचकाकतार् को उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी कथन अंिकत िकया िक जांच में यािचकाकतार् को दोषी नहीं पाया गया। 6. िवप्षी संख्या 3 से 5 के िव्षान अिधव्वा ्शी राके श कु मार चौधरी ने यािचका का िवरोध करते हुए न्यायालय का ध्यान शपथ प्ऴ िदनांक 9/4/2019 के साथ संलग्न जांच आख्या की ओर आकृ ्ि िकया, िजसके अनुसार यािचकाकतार् को आरोप संख्या 1 से 3 के िलए दोषी नहीं पाया गया। आरोप संख्या 4 के संदभर् में यह अंिकत है िक यािचकाकतार् ने िदनांक 23/4/1992, 14/5/1992 एवं 30/6/1992 को ्वमशः ₹3,637-/, ₹5,000/- एवं ₹2,000/-, कु ल ₹10,637/- अि्षम िविवध कायार्लय कायॏल हेतु ्ऺाप्त िकया, िकतु ₹3,952/- मा्ऴ के ही वाउचर ्ऺस्तुत िकए तथा ₹400/- नगद जमा िकए। अि्षम की धनरािश ₹6,285/- असमायोिजत है और यािचकाकतार् उ्व धनरािश का अपहरण/गबन कर संघ को ्षित पहुंचाने के िलए उ्तरदायी है। ्िि्वगत सुनवाई के समय यािचकाकतार् ने कहा WRIA No. 7745 of 2014 2 िक उसने ली गई अि्षम धनरािश ₹10,637/- के सापे्ष ₹10,273/- के ्िय वाउचर ्ऺस्तुत कर िदए थे तथा ₹400/- नगद जमा कर िदए थे। यािचकाकतार् ने यह भी कहा िक ्ऺकरण लगभग 20 वषर् पुराना है इसिलए अब ्िय ्ऺस्तुत िकए जाने का साष्य ्ऺस्तुत करना किठन है। यािचकाकतार् ने कहा िक ₹6,285/- अि्षम की कटौती उनके वेतन से की जा सकती है। 7. जांच अिधकारी ने यह अंिकत िकया है िक अिभलेखों की उपलब्धता के उपरांत ही उ्व आरोप की िस्थित स्प्ि हो सकती है। इस संबंध में अिभलेखों की उपलब्धता हेतु जांच अिधकारी ने िजला सहायक िनबंधक, सहकारी सिमितयां, उ्तर ्ऺदेश, लखनऊ को प्ऴ ्ऺेिषत िकया तथा सिचव/महा्ऺबंधक, िजला सहकारी बैंक िलिमटेड एवं कई अन्य अिधकािरयों को भी प्ऴ ्ऺस्तुत िकए। िजला सहायक िनबंधक रायबरेली ने प्ऴ िदनांक 24/8/2012 ्षारा अवगत कराया िक सहकारी शीतगृह महराजगंज से संबंिधत अिभलेख ्ऺभारी सिचव, ्वय-िव्वय, सहकारी सिमित िलिमटेड नसीराबाद रोड जायस अमेठी की अिभर्षा में है। उ्व अिधकारी ने एक प्ऴ के उ्तर में अवगत कराया िक उनके पास सहकारी शीतगृह महराजगंज से संबंिधत वषर् 1984-1986 तक का ही अिभलेख उपलब्ध है। यािचकाकतार् के िवरु्ध लगाए गए आरोप संख्या 4 के संबंध में अिभलेख मुख्यालय पर भी उपलब्ध नहीं हो पाए। जांच अिधकारी ने यहा पाया िक यािचकाकतार् ने अपने िलिखत बयान िदनांक 3/12/2012 में यह कहा है िक उनके ्षारा ₹10,237/- के ्िय वाउचर ्ऺस्तुत िकए गए हैं तथा ₹400 /- नगद जमा िकया गया था िफर भी यिद उनके ऊपर अि्षम दशार्या जा रहा है तो वह उनके वेतन से काट िलया जाए। जांच अिधकारी ने यहा पाया िक यािचकाकतार् के उपरो्व बयान के आधार पर धनरािश उनके वेतन से समायोिजत करके यािचकाकतार् को आरोप मु्व िकया जा सकता है। इस जांच आख्या के आधार पर यािचकाकतार् से उपरो्व धनरािश की वसूली करने के साथ-साथ उसकी पिरनंदा की गई एवं सेवाच्युत होने से पुनः स्थािपत होने की अविध के मध्य वेतन एवं भ्ता न देने का आदेश भी पािरत िकया गया। 8. जबिक जांच आख्या में यह स्प्ितया अंिकत है िक यािचकाकतार् के िवरु्ध आरोपों की पुि्ि के संबंध में कोई अिभलेख उपलब्ध नहीं है तथा मा्ऴ इस आधार पर िक यािचकाकतार् ने स्वयं ही धनरािश की कटौती करने का ्ऺस्ताव िदया है, धनरािश की कटौती का आदेश पािरत िकया गया एवं यािचकाकतार् को धनरािश अदा करने पर आरोपों से मु्व करने का कथन िकया गया है, यािचकाकतार् के िवरु्ध पिरिनदा ्ऺिवि्ि िकए जाने का कोई औिचत्य ्ऺतीत नहीं होता है। 9. जांच आख्या में यािचकाकतार् को दोषी नहीं पाया गया है, इसके उपरांत भी आदेश िदनांक 7/4/2014 में यह गलत ्ऺकार से अंिकत िकया गया िक यािचकाकतार् अनुशासिनक कारर्वाई के अधीन दोषी पाया गया है इसिलए उसे सेवाच्युत िकए जाने से पुनस्थार्िपत िकए जाने के मध्य कोई वेतन एवं भ्ता देय नहीं होगा। चूँिक यािचकाकतार् जांच में दोषी नहीं पाया गया है तो इस आधार पर उ्व अविध का वेतन ना िदए जाने का भी कोई औिचत्य नहीं है। WRIA No. 7745 of 2014 3 10. तदनुसार, यह िरट यािचका स्वीकार की जाती है। ्ऺबंध िनदेशक, उ्तर ्ऺदेश ्ऺसंस्करण एवं िनमार्ण सहकारी संघ िलिमटेड लखनऊ (PACCFED) ्षारा पािरत आदेश िदनांक 7/4/2014 िनरस्त िकया जाता है। यािचकाकतार् ्षारा ्ऺकरण पुराना होने, अिभलेख उपलब्ध न होने एवं ्ऺकरण को समाप्त करने के उ्देश्य से िदया गया ्ऺस्ताव, िजसमें उसने ₹6,285/- जमा िकए जाने का कथन िकया था, को स्वीकार िकए जाने का औिचत्य है, िकतु उस ्ऺस्ताव के आधार पर यािचकाकतार् को दोषी ठहराए जाने का कोई औिचत्य नहीं है, जबिक यािचकाकतार् को दोषी ठहराने के संबंध में कोई भी साष्य ्ऺस्तुत नहीं िकया जा सका तथा उ्व ्ऺस्ताव देते हुए भी यािचकाकतार् ने स्वयं के दोष की स्वीकारोि्व नहीं की। यािचकाकतार् की पिरिनदा ्ऺिवि्ि एवं सेवाच्युत से पुनस्थार्पना की अविध के मध्य वेतन न िदए जाने का आदेश अपास्त िकया जाता है। िवप्षी संख्या 4 ्ऺबंध िनदेशक, उ्तर ्ऺदेश ्ऺसंस्करण एवं िनमार्ण सहकारी संघ िलिमटेड लखनऊ (PACCFED)जो अब वतर्मान में राज्य िनमार्ण सहकारी संघ के नाम से जाना जाता है, को िनदरॏिशत िकया जाता है िक यािचकाकतार् के वेतन से यिद ₹6,285/- की वसूली आलोच्य आदेश िदनांक 07/04/2014 के ्वम में की जा चुकी है तो उसको सेवाच्युत से सेवा पुनस्थार्पना की अविध के मध्य िदए वेतन तथा भ्तों की अदायगी इस आदेश की ्ऺमािणत ्ऺित ्ऺाप्त होने से 30 िदन के भीतर करना सुिनि्ात करें। यािचका का ्िय प्षकार स्वयं ्िय करेंगे। October 27, 2025 Himanshu WRIA No. 7745 of 2014 4 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench