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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 197611 (ALL)

KAMAL FAROOK @ KAMAL KHAN AND ANR. v. STATE OF U.P. AND ANR.

/150/2021 · 2025-12-08

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW APPLICATION U/S 482 No. - 150 of 2021 Court No. - 29 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. यह आवेदन प्ऴ आवेदक सं० 1/अिभयु्व कमल फारूक एवं आवेिदका सं० 2/पीिड़ता की ओर से संयु्व रूप से ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदकगण की ओर से धारा 482 दं०्ऺ०सं० के अंतगर्त ्ऺस्तुत यह आवेदन प्ऴ, मु०अ०सं० 0772 वषर् 2018 अन्तगर्त धारा 363, 366, 376 भारतीय दण्ड संिहता व धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट, थाना ठाकु रगंज, िजला लखनऊ से उ्यूत स्ऴ परी्षण सं० 403 वषर् 2020 में अपर िजला स्ऴ न्यायधीश/िवशेष न्यायधीश पाक्सो एक्ट, लखनऊ ्षारा पािरत ्ऺसं्ञान/तलबी आदेश िदनांक 26.02.2020 व 26.11.2020 एवं इस वाद की संपूणर् आपरािधक कायर्वाही के िवरू्ध योिजत िकया गया है। 3. सं्षेप में अिभयोजन कथानक यह है िक अिभयोगी ्षारा संबंिधत थाने पर इस आशय का सूचना दी गयी िक मेरी पु्ऴी िदनांक 30/06/18 को सुबह तनवीर लड़के को मोबाइल फोन देने गयी थी, िजसकी उ्ा 17 वषर् है जो िक वहां से वापस नहीं आयी है, मेरे अपनी िरश्तेदारों पडोिसयों के यहां सब जगह तलाश करने के बावजूद िमल नहीं सकी है। मुझे तनवीर अहमद मोबाइल न०-****** पर शक है िक इनके ्षारा लड़की को गुमराह करके कहीं ले जाया गया है। अतः अनुरोध है िक एफ.आई.आर. दजर् कर आवश्यक कायर्वाही करने की कृ पा करे। 4. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा मो० एम.एम. सलाम, पिरवादी के िव्षान अिधव्वा मो० खािलद अमीन खान एवं अपर शासकीय अिधव्वा ्शी अशोक कु मार ्शीवास्तव को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 5. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक सं० 1 का आवेिदका सं० 2 के साथ ्ऺेम संबंध था तथा किथत घटना के समय पीिड़ता/आवेिदका सं० 2 अपनी स्वेच्छा से आवेदक के साथ गयी थी तथा िदनांक 16.07.2018 को िनकाहनामा भी कर िलया था, िकतु तत्समय इसी दौरन आवेदक सं० 1 के िवरू्ध उपरो्व अिभयोग पंजीकृ त हो गया, िजसके िववेचना के दौरान पीिड़ता/आवेिदका सं० 2 ्षारा अपने धारा 161 दण्ड ्ऺि्वया संिहता व 164 दण्ड ्ऺिकया संिहता के बयान में भी सहमत प्षकार होने का अिभकथन िकया गया था। तदोपरांत, ्ऺश्नगत अिभयोग के िवरू्ध आवेदकगण ्षारा माननीय न्यायालय के सम्ष िरट Versus Counsel for Applicant(s) : Mohd. Muballi Gussalam Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Mohd. Khalid Amin Khan Kamal Farook @ Kamal Khan And Anr. .....Applicant(s) State Of U.P. And Anr. .....Opposite Party(s) यािचका संख्या 29126, वषर् 2018 योिजत की थी। उ्व िरट यािचका की सुनवाई के समय माननीय न्यायालय ने िदनांक 08.10.2018 के आदेश ्षारा यािचका का िनस्तारण करते हुए यह िनदरॏश िदया िक “उ्व अपराध में तब तक याची को िगरफ्तार न िकया जाए जब तक िक उसके िवरु्ध िव्षसनीय साष्य एक्ऴ न कर िलए जाएँ।” माननीय न्यायालय से आदेश ्ऺाप्त करने के उपरांत से आवेदकगण पित-पत्नी के रूप में एक साथ रह रहे हैं और उनके दांपत्य जीवन से िदनांक 10.09.2019 को एक संतान का जन्म हुआ है। याचीगण अपनी नवजात संतान के साथ सुखपूवर्क जीवन-यापन कर रहे हैं। नवजात संतान का िनगर्त जन्म ्ऺमाण प्ऴ की ्ऺित संलग्नक संख्या–17 के रूप में संलग्न है। उल्लेखनीय तथ्य यह भी है िक मुिस्लम िविध के अनुसार आवेिदका संख्या–2 िववाह के समय बािलग थी और उसे जीवनसाथी चुनने का अिधकार था। आवेदकगण के िववाह ्ऺमाणप्ऴ/िनकाहनामा िदनांक 16.07.2018 अनुलग्नक- 5 एवं हाई स्कू ल ्ऺमाण प्ऴ, अनुलग्नक- 13 पर संलग्न है। आवेिदका संख्या–2, आवेदक सं० –1 की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात पु्ऴी के साथ पित- पत्नी के रूप में रह रहे हैं। आगे यह भी कहा गया िक इस वाद की पीिड़ता/आवेिदका संख्या–2 ्षारा अपने धारा 161 व धारा 164 दण्ड ्ऺि्वया संिहता के बयानों में अिभयोजन कथानक का समथर्न भी नहीं िकया गया है। ्ऺासंिगक तथ्य यह भी है िक सूचनाकतार्/आवेिदका सं० 2 के िपता मोहम्मद अहमद का देहांत हो चुका है और िवप्षी प्ष संख्या–2 उनकी पत्नी हैं। अतः उन्हें वतर्मान यािचका में िवप्षी संख्या–2 बनाया गया है। इसिलए, अिभलेखीय साम्षी से ्ऺथम दृ्िया याची संख्या–1 के िवरु्ध कोई अपराध िस्ध नहीं होता रहा है। अतः आपरािधक कायर्वाही जारी रखना आवेदकगण के भावी भिवष्य व न्याियक संकल्पना में न्योयोिचत नहीं है। इसिलए, ्ऺश्नगत आदेश खिण्डत िकए जाने योग्य है। उनके ्षारा अपने तकर् के समथर्न में धारा 482 दं०्ऺ०सं० के अंतगर्त ्ऺस्तुत आवेदन प्ऴ सं० 41580, वषर् 2022 (Fakre Alam @ Shozil Vs. Stae of U.P. and 3 others) में मा० उच्च न्यायालय ्षारा पािरत िविध-्िवस्था की ओर से न्यायालय का ध्यान आकृ ्ि िकया। 6. पिरवादी के िव्षान अिधव्वा ्षारा आवेदक के िव्षान अिधव्वा के उपयुर््व कथनों पर सहमित ्ऺकट की गयी तथा उनके ्षारा स्वीकार िकया िक वतर्मान में आवेिदका सं०–2, आवेदक संख्या–1 की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात 320 Cr.P.C. पु्ऴी के साथ पित-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रहे हैं एवं उनके ्षारा उपरो्व उल्लेिखत उच्च न्यायालय के ्ऺश्नगत आदेश पर भरोसा भी िकया तथा यह वाद खिण्डत िकये जाने पर उन्हें कोई आपि्त नहीं है। 7. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा उपयुर््व तथ्यों का िवरोध िकया गया, िकतु यह स्वीकार िकया गया िक तर्मान में आवेिदका सं०–2, आवेदक संख्या–1 की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात पु्ऴी के साथ पित-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रहे हैं। 8. न्यायालय ्षारा उभय प्ष के िव्षान अिधव्वागण के तकॏल को सुना गया तथा तकॏल के पिर्ऺेष्य में प्ऴावली पर उपलब्ध साष्य एवं ्ऺश्नगत आदेश का पिरशीलन िकया गया। 9. यहां ्ऺासंिगक है िक, माननीय उच्चतम न्यायालय ने State of Madhya Pradesh vs. Laxmi Narayan (AIR 2019 SC 1296); State of Madhya Pradesh vs. Dhruv Gurjar (AIR 2019 SC 1106); तथा Parbatbhai Aahir vs. State of Gujarat (AIR 2017 SC 4842) के मामलों में यह कहा है िक समाज के िवरु्ध िकए गए A482 No. 150 of 2021 2 अपराध के वल समझौते या कमजोर साष्य के आधार पर समाप्त नहीं िकए जाने चािहए। 10. हालाँिक, Ramawatar vs. State of Madhya Pradesh (2021 SCC Online SC 966) के मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा िक िवशेष अिधिनयमों, जैसे SC/ST Act के अंतगर्त आने वाले अपराध—य्यिप ये समाज के िवरु्ध अपराध हैं—कु छ पिरिस्थितयों में समझौते के आधार पर धारा 482 Cr.P.C. के तहत समाप्त िकए जा सकते हैं, परंतु यह शि्व के वल मुकदमें या अपील के लंिबत रहने के दौरान ही ्ऺयोग की जानी चािहए, उसके बाद नहीं। उपरो्व िनणर्य का पैरा 10 इस ्ऺकार उ्धृत िकया जाता है : "10. ्ऺथम ्ऺश्न के संदभर् में, यह उिचत होगा िक हाल ही में इस न्यायालय ्षारा िदए गए Romgopal & Anr. vs. State of Madhya Pradesh के िनणर्य का उल्लेख िकया जाए, िजसमें इसी ्ऺकार का ्ऺश्न उठा था। इसका उ्तर सकारात्मक देते हुए स्प्ि िकया गया िक धारा 320 Cr.P.C. की सीमाएँ इस न्यायालय के अनुच्छेद 142 के अंतगर्त िनिहत शि्व पर, या उच्च न्यायालयों के धारा 482 Cr.P.C. के शि्व पर रोक के रूप में नहीं देखी जानी चािहए। आगे यह भी कहा गया िक अनुच्छेद 142 या धारा 482 Cr.P.C. के तहत असाधारण शि्व का ्ऺयोग ‘पूणर् न्याय’ करने के उ्देश्य से िकया जाना चािहए। अतः न्यायालय, अपराध की ्ऺकृ ित तथा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए िक पीिड़त/िशकायतकतार् ने स्वेच्छा से समझौता िकया है, अपने संवैधािनक/िनिहत शि्व का ्ऺयोग कर कायर्वाही को समाप्त कर सकता है।” 11. यह भी ्ऺासंिगक है िक य्यिप, दण्ड ्ऺिकया की धारा 320 में उिल्लिखत अपराधों के अितिर्व िकसी अन्य अपराध के समझौते का ्ऺावधान नहीं है, िफर भी कु छ मामलों में पीिड़ता, भले ही अपराध असंयोजनीय (non-compoundable) हो, आरोिपत के आचरण को ्षमा करने के िलए तैयार हो सकता है। ऐसे मामलों में न्यायालय धारा 482 Cr.P.C. के अंतगर्त अपनी िनिहत शि्व का ्ऺयोग कर सकता है, भले ही अपराध धारा 320 Cr.P.C. के अंतगर्त संयोजनीय न हो। 12. हालाँिक, उच्च न्यायालय को सामान्यतः मिहलाओं और बच्चों के िवरु्ध यौन अपराधों में के वल समझौते के आधार पर हस्त्षेप नहीं करना चािहए, परन्तु धारा 482 Cr.P.C. की असाधारण शि्व का ्ऺयोग पूरी तरह से विजत नहीं है। ऐसे मामलों में न्यायालय को सम्ष दृि्िकोण (holistic approach) अपनानी चािहए और िनम्निलिखत बातों पर िवचार करना चािहए— (i) समाज की चेतना पर अपराध का ्ऺभाव; (ii) चोट की गंभीरता, यिद कोई हो; (iii) आरोपी तथा पीिड़ता के बीच समझौते की स्वैिच्छक ्ऺकृ ित; (iv) आरोपी का घटना से पूवर् और घटना के प्ाात ्िवहार तथा अन्य ्ऺासंिगक बातें। 13. यहां उल्लेखनीय है िक Ankit Jatav vs. State of Rajasthan, S.B. Criminal Misc. Petition No. 3075/2023 में राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने POCSO Act के अंतगर्त कायर्वाही इसिलए समाप्त कर दी थी, क्योंिक पीिड़ता ने अपने धारा 164 दण्ड ्ऺि्वया संिहता बयान में कहा था िक आरोपी ने उस पर कोई अपराध नहीं िकया और वह स्वयं अपनी इच्छा से िववाह करने हेतु घर से गई थी। A482 No. 150 of 2021 3 14. वतर्मान मामले में, अिभलेख के अवलोकन करने पर यह स्प्ि होता है िक आवेिदका संख्या–2/पीिड़ता ्षारा आवेदक संख्या–1 के साथ मुिस्लम िविध के अनुसार िनकाह कर िलया तथा तब से वह आवेदक सं० 1/अिभयु्व की पत्नी के रूप में उसके साथ दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रही है। उनके दांपत्य जीवन से िदनांक 10.09.2019 को एक संतान का जन्म हो चुका है तथा नवजात संतान का िनगर्त जन्म ्ऺमाण प्ऴ की ्ऺित अनुलग्नक संख्या–17 के रूप में संलग्न भी है तथा आवेदकगण के िववाह ्ऺमाणप्ऴ/िनकाहनामा िदनांक 16.07.2018 अनुलग्नक-5 पर संलग्न है। साथ ही, आवेिदका संख्या–2 ने अपने बयानों में भी आवेदक के साथ स्वेच्छा से जाने व िववाह कर लेने का अिभकथन िकया गया है। तद्नुसार, यह पिरलि्षत है िक आवेिदका संख्या–2/पीिड़ता, आवेदक संख्या–1 की िविधवत पत्नी है और दोनों अपनी नवजात संतान के साथ पित-पत्नी के रूप में दांपत्य जीवन का िनवर्हन कर रहे हैं। 15. तद्नुसार, यह आवेदन स्वीकार िकया जाता है। 16. अतः इस मामलें में प्ऴावली पर उपलब्ध साष्यों तथा आवेिदका संख्या–2/पीिड़ता ्षारा आवेदक संख्या–1/अिभयु्व के साथ िववाह कर लेने के तथ्य को सम्ष रूप से ध्यान में रखते हुए तथा उच्च न्यायालय के Fakre Alam @ Shozil Vs. Stae of U.P. and 3 others में ्ऺितपािदत िविधक िस्थित को देखते हुए उपरो्व मामलें की समस्त कायर्वाही अिभखिण्डत (quashed) की जाती है। 17. ्ऺश्नगत ्ऺकरण में यिद कोई अंतिरम आदेश हो तो उसे समाप्त समझा जाय। December 8, 2025 CP.sahani A482 No. 150 of 2021 4 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench