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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 6777 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकतर् के िव्षान अिधव्वा ्शी मनोज कु मार गुप्ता को सुना।
2. भारतीय संिवधान के अनुच्छेद 227 के अंतगर्त ्ऺस्तुत इस यािचका ्षारा यािचकाकतर् ने िव्षान िसिवल जज (अवर खण्ड), रायबरेली को मूल वाद संख्या 499 वषर् 2019 में पािरत आदेश िदनांक 11.04.2023 की वैधता को चुनौती दी है, िजसके ्षारा यािचकाकतर् ने आदेश 7 िनयम 11 ्िवहार ्ऺि्वया संिहता के अंतगर्त ्ऺस्तुत ्ऺाथर्ना-प्ऴ (कागज संख्या 60 ग) िनरस्त कर िदया। यािचकाकतार् ने उपरो्व आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए ्िवहार पुनरी्षण संख्या 15 वषर् 2023 ्ऺस्तुत िकया था जो ्ऺथम अपर जनपद न्यायाधीश रायबरेली के िनणर्य तथा आदेश िदनांक 21.08.2024 ्षारा िनरस्त कर िदया गया तथा उपरो्व आदेश की वैधता को भी इस यािचका के माध्यम से चुनौती दी गई है।
3. उपरो्व वाद िवप्षी संख्या-1 ने यािचकाकतर् सिहत 15 ्ऺितवादीगण के िवरु्ध इस आशय की स्थायी िनषेधा्ञा हेतु ्ऺस्तुत िकया िक ्ऺितवािदनी संख्या 1 (यािचकाकतर् ) वादी के आवासीय भूखण्ड के दि्षण िस्थत 20 फीट चौड़े आम रास्ते, जो वाद-प्ऴ के साथ संलग्नक नक्शे में दिशत है, पर िकसी ्ऺकार का अवैध कब्जा व िनमार्ण न करें एवं आम रास्ते को सकरा न करें।
4. यािचकाकतर् ने आदेश 7 िनयम 11 ्िवहार ्ऺि्वया संिहता के अंतगर्त ्ऺाथर्ना-प्ऴ ्ऺस्तुत करके यह कहा िक िवचारण न्यायालय ने िदनांक 30.04.2019 को अस्थायी िनषेधा्ञा पािरत करके उभयप्षों को यथािस्थित बनाए रखने का िनदरॏश िदया।
5. यािचकाकतर् ने िदनांक 10.10.2019 को अपना पिरवाद प्ऴ ्ऺस्तुत कर िदया। यािचकाकतर् ने िदनांक 09.05.2022 को आदेश 7 िनयम 11 ्िवहार ्ऺि्वया संिहता के अंतगर्त ्ऺाथर्ना-प्ऴ ्ऺस्तुत करके कहा िक वादी ्षारा अनुतोष आम रास्ते के संबंध में मांगा गया है तथा वादी के ्िि्वगत अिधकार ्ऺकरण में सिन्निहत नहीं है। िविनिद्ि अनुतोष अिधिनयम 1963 की धारा 4 के अनुसार िविनिद्ि अनुतोष के वल ्िि्वगत िसिवल अिधकार के ्ऺवतर्न के उ्देश्य से मांगा जा सकता है तथा आम रास्ते के संबंध में मांगा गया अनुतोष ्िि्वगत िसिवल अनुतोष नहीं है। इस Versus Counsel for Petitioner(s) : Manoj Kumar Gupta, Chandra Kishore, Rajesh Kumar Shukla Counsel for Respondent(s) :
Smt. Krishna .....Petitioner(s) Jitendra Bahadur Singh And Others .....Respondent(s)
कारण से वाद प्ऴ आदेश 7 िनयम 11 के अंतर्गत िनरस्त िकया जाना चािहए।
6.
धारा 4 िविनिद्ि अनुतोष अिधिनयम िनम्न ्ऺकार हैः-
"िविनिद्ि अनुतोष का ्िि्वगत िसिवल अिधकारों के ्ऺवतर्न के िलए ही अनुद्त िकया जाना, दण्ड िविधयों के ्ऺवतर्न के िलए नहीं- िविनिद्ि अनुतोष, ्िि्वगत िसिवल अिधकारों के ्ऺवतर्न के ्ऺयोजन के िलए ही अनुद्त िकया जा सकता है, न िक िकसी दण्ड िविध के ्ऺवतर्न के ्ऺयोजन मा्ऴ के िलए।"
7. िविनिद्ि अनुतोष अिधिनयम की धारा 4 का आशय यह है िक िविनिद्ि अनुतोष अिधिनयम दािण्डक अनुतोष अिधिनयम के ्ऺावधान दािण्डक िविधक ्ऺावधानों के ्ऺवतर्न के िलए ्ऺयोग नहीं िकए जा सकते हैं।
8. िविनिद्ि अनुतोष अिधिनयम की धारा 38 के अनुसार स्थायी ्िादेश वादी को उसके प्ष में िस्थत िकसी दाियत्व के उल्लंघन को रोकने के िलए िनगर्त िकया जा सकता है, चाहे वह दाियत्व िकसी ्ऺकार से अिभ्ि्व या िववि्षत हो। वादी अपने घर के सामने सावर्जिनक रास्ते को ्ऺयोग करने का अिधकार रखता है तथा घर के सामने िस्थत सावर्जिनक रास्ते पर अित्वमण वादी के अिधकारों का उल्लंघन होगा। ऐसी पिरिस्थित में यह नहीं कहा जा सकता है िक वादी के घर के सामने िस्थत रास्ते पर अित्वमण रोकने के िलए ्ऺस्तुत वाद पोषणीय नहीं है। यािचकाकतर् के िव्षान अिधव्वा इस न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ्षारा ्ऺमोद कु मार त्यागी एवं अन्य बनाम िजयाउल हसन खान एवं दो अन्य, 2018:AHC:207544 का आ्शय िलया। उ्व यािचका अस्थायी िनषेधा्ञा ्ऺाथर्ना-प्ऴ के िनरस्तीकरण के आदेश से उत्पन्न हुई थी। अिधव्वाओं के तकॏल में यह कहा गया वाद आदेश 7 िनयम 11 ्िवहार ्ऺि्वया संिहता से बािधत है, िकतु न्यायालय ने इस िबदु पर यह कहा िक यह अिववािदत है िक सावर्जिनक मागर् पर अित्वमण नहीं होने देना चािहए, िकतु जब तक वादी अपने अिधकारों के हनन के बारे में अिभकथन न करे, िनषेधा्ञा का वाद पोषणीय नहीं होगा।
9. ्ऺस्तुत ्ऺकरण में न्यायालय का सुिनि्ात मत है िक िकसी भी ्िि्व के घर के सामने िस्थत सावर्जिनक मागर् पर अित्वमण से उस ्िि्व ्षारा रास्ते के ्ऺयोग के अिधकार का हनन होता है। ऐसी पिरिस्थित में इस अिधकार का उल्लंघन रोकने के िलए ्ऺस्तुत िनषेधा्ञा का वाद पोषणीय होगा तथा िवचारण न्यायालय ने आदेश 7 िनयम 11 ्िवहार ्ऺि्वया संिहता के अंतगर्त ्ऺस्तुत ्ऺाथर्ना-प्ऴ िनरस्त करने में कोई ्ऴुिट या अवैधािनकता कािरत नहीं की है। यािचका बलहीन है, तदनुसार, िनरस्त की जाती है। (Subhash Vidyarthi,J.) November 21, 2025 Sumit A227 No. 6777 of 2025 2
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