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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 195503 (ALL)

HARINAM v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. FOOD AND CIVIL SUPPLIES GOVT. LKO. AND ANOTHER

WRIC/9529/2025 · 2025-10-07

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW WRIT - C No. - 9529 of 2025 . Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ्शी सतीश कु मार शमार् तथा िव्षान अपर मुख्य स्थायी अिधव्वा ्शी आलोक ्शीवास्तव, को सुना तथा प्ऴावली का अवलोकन िकया। 2.भारतीय संिवधान के अनुच्छेद 226 के अंतगर्त ्ऺस्तुत इस िरट यािचका ्षारा, यािचकाकतार् ने उप िजलािधकारी सदर, जनपद खीरी ्षारा पािरत आदेश िदनांक 9/9/2025 की वैधता को चुनौती दी है, िजसके ्षारा ्ऺाथर् की उिचत दर दुकान का अनुबंध िनरस्त कर िदया गया। िव्षान अपर मुख्य स्थाई अिधव्वा ने ्ऺारंिभक आपि्त रखी िक आलोच्य आदेश के िवरु्ध यािचकाकतार् को उ्तर ्ऺदेश आवश्यक वस्तु (िव्वय एवं िवतरण िनयं्ऴण का िविनयमन) आदेश 2016 के ्ऺस्तर 13 के अंतगर्त अपील ्ऺस्तुत करने का वैधािनक अिधकार ्ऺाप्त है तथा इस कारण से यह िरट यािचका पोषणीय नहीं है। 3. उ्व ्ऺारंिभक आपि्त के उ्तर में यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने तकर् रखे िक वैधािनक अपील का अिधकार िरट यािचका की पोषणीयता को पूरी तरह से बािधत नहीं करता तथा यह न्यायालय के िववेकाधीन है िक वैधािनक अनुतोष ्ऺाप्त होने के बाद भी िरट यािचका स्वीकार की जाए। इस तकर् के समथर्न में, यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने इस न्यायालय की एक अन्य पीठ ्षारा ्शीमती नीतू बनाम उ्तर ्ऺदेश राज्य तथा चार अन्य, िरट सी संख्या 42567 सन् 2015 में पािरत आदेश िदनांक 22/2/2019 का आ्शय िलया। ्शीमती नीतू Versus Counsel for Petitioner(s) : Satish Kumar Sharma Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Harinam .....Petitioner(s) State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Food And Civil Supplies Govt. Lko. And Another .....Respondent(s) के ्ऺकरण में यािचकाकतार् ने उिचत दर दुकान के आवंटन के िनरस्तीकरण आदेश के िवरु्ध अपील ्ऺस्तुत की थी तथा अपील िनरस्तीकरण के आदेश के िवरु्ध िरट यािचका ्ऺस्तुत की गई थी। अतः ्शीमती नीतू के ्ऺकरण में पािरत िनणर्य अपील का वैधािनक अिधकार ्ऺाप्त होने के उपरांत भी िरट यािचका की पोषणीयता का ्ऺश्न िनणर्त नहीं करता है तथा उ्व िनणर्य ्ऺश्नगत ्ऺकरण के िलए संगत नहीं है। 4. यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने एक अन्य पीठ ्षारा सीताराम बनाम उ्तर ्ऺदेश राज्य तथा अन्य (न्यू्िल साइटेशन संख्या 2024 AHC 138390) का आ्शय िलया। उ्व ्ऺकरण में इस न्यायालय ने व्हलर्पूल कॉपरॏरेशन बनाम रिजस््िार ऑफ ्िेड माक्सर्, मुंबई (1998) 8 SCC पृ्ष 1, के िस्धांतों का अनुपालन िकया था, िजसमें माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह िस्धांत ्ऺितपािदत िकया िक िनम्निलिखत पिरिस्थितयों में अन्य अनुतोष की उपलब्धता िरट यािचका की पोषणीयता को ्ऺभािवत नहीं करती है:- ्ऺथम- जब िरट यािचका मूलभूत संवैधािनक अिधकारों के संबंध में ्ऺस्तुत की गई हो। ि्षतीय- जहां ्ऺाकृ ितक न्याय के िस्धांतों का उल्लंघन हुआ हो। तृतीय- जहां पर कायर्वाही अथवा आदेश ्षे्ऴािधकार से परे जाकर पािरत िकए गए हों। चतुथर्- जहां िकसी िविध के िकसी वैधािनक ्ऺािवधान की संवैधािनकता का ्ऺश्न िनिहत हो। यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने तकर् िदया िक ्ऺस्तुत ्ऺकरण में ्ऺाकृ ितक न्याय के िस्धांतों का उल्लंघन हुआ है, इस कारण से िरट यािचका पोषणीय है। 5. आलोच्य आदेश िदनांक 9/9/2025 में अंिकत है िक उप िजलािधकारी के प्ऴ िदनांक 1/4/2025 के अनुपालन में यािचकाकतार् िदनांक 8/4/2025 को ्िि्वगत सुनवाई के अवसर में अपना अिभकथन अंिकत कराने हेतु उपिस्थत हुआ तथा उसने िलिखत अिभकथन ्ऺस्तुत करने हेतु पांच िदन का समय मांगा। इसके प्ाात िदनांक 21/4/2025 को यािचकाकतार् ने अपना िलिखत स्प्िीकरण ्ऺस्तुत िकया, िजसमें िबदुवार उल्लेख िकया िकः- "धारा 1-यह िक जो वीिडयो वायरल बताया जा रहा है उस वीिडयो िक्लप को ्ऺाथर् को उपलब्ध कराया जाये तािक ्ऺाथर् उ्व वीिडयो िक्लप के बारे में अपना समुिचत जवाब ्ऺस्तुत कर सके । धारा 2- यह िक राशन िवतरण ्षाम पंचायत अिधकारी की उपिस्थित में ई-पॉस मशीन के ्षारा िकया जाता है। धारा 3- यह िक ्ऺाथर् ्षारा खा्यान्न की कालाबाजारी नहीं की गयी है शासन ्षारा जो खा्यान्न काडर् धारकों के िलए उपलब्ध कराया जाता है उसे ्षाम पंचायत अिधकारी की उपिस्थित में काडर् WRIC No. 9529 of 2025 2 धारकों को िवतिरत िकया जाता है और न ही िकसी को ज्यादा राशन िदया जाता है। लगाये गये सारे इल्जाम िनराधार व असत्य हैं। कायर्वाही करने के पूवर् शासनादेश िदनांक 05.08.2019 का पालन नहीं िकया गया। ्ऺाथर् िनदरॏष है।" 6. आलोच्य आदेश के उपरो्व कथन से यह स्प्ि है िक यािचकाकतार् को ्िि्वगत सुनवाई का भी अवसर िदया गया तथा िलिखत रूप में अपना प्ष ्ऺस्तुत करने का भी अवसर िदया गया तथा ऐसा नहीं है िक यािचकाकतार् को सुनवाई का समुिचत अवसर नहीं िदया गया। ऐसी िस्थित में ्ऺाकृ ितक न्याय के िस्धांतों के उल्लंघन का आ्षेप अिभलेख पर एक दृि्ि डालने से ही असत्य िस्ध हो जाता है। 7. यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने अगला तकर् यह िकया िक यािचकाकतार् ्षारा अपने कथन में उठाए गए िबदुओं को आलोच्य आदेश में उिचत ्ऺकार से ध्यान में नहीं रखा गया है। 8. यािचकाकतार् के कथनों को उिचत ्ऺकार से िनणर्त न करना ्ऺाकृ ितक न्याय के िस्धांतों का उल्लंघन नहीं है तथा यह मा्ऴ आदेश को ्ऴुिटपूणर् बनाता है। आदेश का ्ऴुिटपूणर् होना अपील में देखा जा सकता है तथा मा्ऴ इसिलए िक यािचकाकतार् के अनुसार आदेश ्ऴुिटपूणर् है, आदेश को ्ऺाकृ ितक न्याय के उल्लंघन में पािरत हुआ नहीं माना जा सकता है। 9. सुनवाई ्ऺारंभ होते समय ही यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा को यह िवकल्प िदया गया था िक इस यािचका पर बल न देते हुए, यािचकाकतार् वैधािनक ्ऺािवधान के अंतगर्त अपील ्ऺस्तुत कर लें, िकतु उन्होंने लगभग आधे घंटे तक ्ऺकरण में तकर् िकए तथा ऐसे िनणर्यज िविधयों का आ्शय िलया जो ्ऺकरण में संबंिधत नहीं हैं। न्यायालय का मूल्यवान समय न्ि करने के उपरांत इस स्तर पर यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ने कहा िक यह यािचका बल न िदए जाने के आधार पर िनरस्त कर दी जाए। 10. यह तथ्य सवर्िविदत है िक सभी न्यायालय कायर् की अिधकता के बोझ से िनपटने का ्ऺयास कर रहे हैं। इलाहाबाद हाई कोटर् न्यायाधीशों की कमी तथा मुकदमों की अिधकता के बोझ से वादकािरयों को शी्स न्याय देने में किठनाइ से जूझता चला आ रहा है। न्यायालय का हमेशा यह ्ऺयास रहता है िक िकसी भी ्ऺकरण में अनावश्यक समय न ्िय िकया जाए तथा उस समय को अन्य वादकािरयों के िहत में ्ऺयोग िकया जाए। ्ऺस्तुत ्ऺकरण में यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ्षारा ्िथर् िकया गया समय वस्तुतः न्यायालय का समय नहीं है, अिपतु यह अन्य वादकािरयों के िहत में ्ऺयोग िकया जाने वाला समय था िजससे िक अन्य कई वादकािरयों के ्ऺकरण की सुनवाई आज सम्भव नहीं हो पाएगी। 11. इस ्ऺकार, यह यािचका यािचककतार् को वैधािनक उपचार उपलब्ध होने के कारण िनरस्त की जाती है। WRIC No. 9529 of 2025 3 12. यिद यािचकाकतार् वैधािनक ्ऺावधान के अंतगर्त अपील ्ऺस्तुत करता है, तो उसे इस आदेश से ्ऺभािवत हुए िबना गुण-दोष के आधार पर शी्सतापूवर्क िनस्तािरत िकया जाएगा। October 7, 2025 Himanshu WRIC No. 9529 of 2025 4 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench