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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 6027 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकतार् के िव्षान अिधव्वा ्शी जय ्ऺकाश िसह को सुना तथा प्ऴावली का अवलोकन िकया।
2. भारतीय संिवधान के अनुच्छेद 227 के अंतगर्त ्ऺस्तुत इस यािचका ्षारा यािचकाकतार् ने अितिर्व िसिवल जज (्ऺवर खण्ड), क्ष संख्या 42, लखनऊ को मूल वाद संख्या 1464 सन 2020, िजसका नया पिरवितत नंबर 2064 सन 2021 है, के शी्स िनस्तारण का िनदरॏश िदये जाने का अनुरोध िकया है।
3. उपरो्व वाद िवप्षी ने यािचकाकतार् की माँ ्शीमती गंगा देवी के िवरु्ध ्ऺस्तुत िकया गया था िजसमें स्थायी िनषेधा्ञा की आ्ञिप्त मांगी गयी थी। िदनांक 01.10.2020 को वाद में एकप्षीय अस्थायी िनषेधा्ञा आदेश पािरत हो गया। िदनांक 19.03.2021 को यािचकाकतार् अपनी मृत माँ के स्थान पर ्ऺितस्थािपत हुआ। आदेश-प्ऴ के अवलोकन से ्ऺतीत होता है िक िदनांक 23.05.2025 को वाद अंतिरम िनषेधा्ञा ्ऺाथर्ना-प्ऴ के िनस्तारण हेतु िनयत था िकन्तु वादी ने सुनवाई का स्थगन चाहा। िदनांक 08.07.2025 को प्षों की सहमित से िवचारण न्यायालय ने वाद िबन्दु िवरिचत िकये तथा यािचकाकतार् ्षारा ्ऺस्तुत ्ऺितदावे पर भी वाद िबन्दु िवरिचत िकये गये एवं ्ऺारंिभक वाद िबन्दुओं का िनस्तारण हुआ।
4. आदेश-प्ऴ की ्ऺित से यह ्ऺतीत होता है िक वाद की कायर्वाही अनेक ितिथयों को वादी की अनुपिस्थित के कारण स्थिगत हुई है तथा अनेक ितिथयों को अिधव्वागण के न्याियक कायर् से िवरत रहने के कारण भी वाद की सुनवाई नहीं हो पायी है।
5. जबिक, वाद वषर् 2020 से लंिबत है; वाद िबन्दु िवरिचत िकये जा चुका हैं एवं स्थायी िनषेधा्ञा ्ऺभावी है, ऐसी पिरिस्थित में वाद का शी्स िनस्तारण प्षों के िहत में एवं न्यायिहत में होगा।
6. तद्नुसार, यािचका स्वीकार की जाती है। अितिर्व िसिवल जज (्ऺवर खण्ड), क्ष संख्या 42, लखनऊ को िनदरॏश िदया जाता है िक मूल वाद संख्या 1464 सन 2020, िजसका नया पिरवितत Versus Counsel for Petitioner(s) : Jay Prakash Singh Counsel for Respondent(s) :
Yasang Singh .....Petitioner(s) Beeru Singh .....Respondent(s)
नंबर 2064 सन 2021 है, की कायर्वाही िविधनुसार, छोटे अंतराल पर ितिथयाँ िनयत करते हुए, िबना िकसी प्ष को अनावश्यक स्थगन देते हुए, शी्सतापूवर्क, िविधनुसार करना सुिनि्ात करेंगे। October 17, 2025 Ankit A227 No. 6027 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench