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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW MATTERS UNDER ARTICLE 227 No. - 6056 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
1. यािचकाकतार् के िवद्वान अिधवक्ता श्री सैय्यद फारूख अहमद को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन िकया।
2. यािचका में मांगे गये अनुतोष एवं पािरत िकये जाने वाले प्रस्तािवत आदेश के दृिष्टगत िवपक्षीगण को नोिटस िनगर्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
3. भारतीय संिवधान के अनुच्छेद 227 के अंतगर्त प्रस्तुत इस यािचका द्वारा यािचकाकतार् ने िसिवल जज (अवर खण्ड), हवेली, अयोध्या, को मूल वाद संख्या 624 सन 2024 में लंिबत अंतिरम िनषेधाज्ञा प्राथर्ना-पत्र के शीघ्र िनस्तारण करने का िनदेर्श देने एवं वाद की कायर्वाही शीघ्रतापूवर्क िनष्पािदत करने का अनुरोध िकया है।
4. यािचका के साथ संलग्न वाद के आदेश पत्र की प्रित से यह पिरलिक्षत होता है िक वादी ने िवक्रय-पत्र के िनरस्तीकरण एवं स्थायी िनषेधाज्ञा हेतु उपरोक्त मूल वाद संख्या 624 सन 2024 िदनांक 25.07.2024 को प्रस्तुत िकया था। िदनांक 26.07.2024 को िवचारण न्यायालय ने एकपक्षीय अस्थायी िनषेधाज्ञा जारी करने का औिचत्य न पाते हुए प्रितवादीगण को नोिटस िनगर्त की। िदनांक 20.08.2024 को प्रितवादी िवचारण न्यायालय में उपिस्थत हो गये तथा िदनांक 02.09.2024 की ितिथ िनस्तारण / आदेश हेतु िनयत कर दी गयी। इसके बाद से अनेक ितिथयों पर वाद की सुनवाई िबना िकसी कारण दशार्ए हुए स्थिगत कर दी गयी तथा वादी के अस्थायी िनषेधाज्ञा प्राथर्ना-पत्र का िनस्तारण नहीं िकया जा रहा है।
5. जब िकसी वाद में िवचारण न्यायालय एकपक्षीय अस्थायी िनषेधाज्ञा िनगर्त करने का औिचत्य न पाते हुए प्रितवादी को नोिटस िनगर्त करती है तो ऐसे में यह अिनवायर् है िक अस्थायी िनषेधाज्ञा प्राथर्ना-पत्र का िनस्तारण सम्यक तत्परता से िकया जाय। प्रस्तुत प्रकरण में जब प्रितवादी िदनांक 20.08.2024 को िवचारण न्यायालय के समक्ष उपिस्थत हो गया है तो िवचारण न्यायालय को Versus Counsel for Petitioner(s) : Sayyed Farooq Ahmad, Afzal Ahmad Counsel for Respondent(s) :
Sukhram .....Petitioner(s) Anuradha And 3 Others .....Respondent(s)
वादी के अस्थायी िनषेधाज्ञा प्राथर्ना-पत्र का िनस्तारण तत्परता से करना अिनवायर् था तथा वाद में बार-बार ितिथयां लगना एवं कई बार िबना िकसी कारण के सुनवाई स्थिगत हो जाना उिचत नहीं प्रतीत होता है।
6. ऐसी पिरिस्थित में यह यािचका स्वीकार की जाती है।
7.
िवद्वान िसिवल जज (अवर खण्ड), हवेली, अयोध्या, को िनदेर्िशत िकया जाता है िक मूल वाद संख्या 624 सन 2024 में अस्थायी िनषेधाज्ञा प्राथर्ना-पत्र का िनस्तारण अगली िनयत ितिथ िदनांक 31.10.2025 को करें तथा अपिरहायर् पिरिस्थितयों में यिद उस िदन प्राथर्ना-पत्र का िनस्तारण संभव न हो तो यथासंभव तत्परता के साथ एक िनकट भिवष्य की ितिथ पर अस्थायी िनषेधाज्ञा प्राथर्ना-पत्र िनस्तािरत करें। October 10, 2025 Ankit A227 No. 6056 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench