DR. RAMSUNDAR YADAV ALIAS SHYAMSUNDAR ALIAS VIRENDAR ALIAS SURENDAR ALIAS RS YADAV v. STATE OF U.P. AND ANOTHER
NA528/36211/2025 · 2025-09-18
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[ 2025 DAILYLAW 194087 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 36211 of 2025
न्यायालय सं. - 77 माननीय सौरभ श्रीवास्तव, न्यायमूित. 1- प्राथीर् की ओर से िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की ओर से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को िवस्तारपूवर्क सुना एवं पत्रावली का अवलोकन िकया। 2- प्राथीर् की ओर से यह प्राथर्ना पत्र अन्तगर्त धारा 528 बी.एन.एस.एस., वाद संख्या 14902 वषर् 2024 (राज्य प्रित डॉ. राम सुन्दर यादव), मु०अ०सं० 114 वषर् 2022, अन्तगर्त धारा 304, 419, 420, 467, 468, 471 भा०दं०सं० एवं धारा 15(3) इंिडयन मेिडकल काउंिसल एक्ट, 1956, थाना िबरनो, िजला गाजीपुर में प्रेिषत आरोप पत्र िदनांिकत 26-12-2022 एवं प्रश्नगत प्रसंज्ञान आदेश िदनांिकत 15.04.2024 जो िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, गाजीपुर के समक्ष लिम्बत है, को िनरस्त करने हेतु योिजत िकया गया है। 3- प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा तकर् प्रस्तुत िकया गया िक सम्बिन्धत िववेचक द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर प्राथीर् के िवरूद्ध आरोप पत्र िदनांक 26.12.2022 को प्रेिषत िकया गया था, िजसके पश्चात क्षेत्रािधकारी कािसमाबाद, िजला गाजीपुर द्वारा जांच के दौरान पायी गई अिनयिमतताओं के कारण सम्बिन्धत िववेचक को मामले की पुनः जांच करने का िनदेर्श िदया गया था। मामले की पुनः जाँच चल रही थी एवं प्राथीर् धारा 41-ए दं०प्र०सं० के संरक्षण में था, लेिकन इसी दौरान िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट, गाजीपुर द्वारा प्रश्नगत आदेश िदनाँक 15.04.2024 को प्रसंज्ञान लेते हुए प्राथीर् के िवरूद्ध समन जारी करने का आदेश पािरत कर िदया। िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट द्वारा प्रसंज्ञान लेते समय समुिचत कारणों का उल्लेख नहीं िकया गया है तथा िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट द्वारा पािरत प्रसंज्ञान आदेश िविधसंगत नहीं है। ऐसी दशा में प्रश्नगत मामले की सम्पूणर् कायर्वाही िनरस्त िकये जाने योग्य है। 4- िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा प्राथीर् के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रस्तुत तकोर्ं का खण्डन िकया गया एवं तकर् प्रस्तुत िकया गया िक िववेचक द्वारा समुिचत साक्ष्य संकिलत कर प्राथीर् के िवरूद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेिषत िकया गया है। िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट द्वारा आरोप Versus Counsel for Applicant(s) : Narendra Kumar, Sitendra Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Dr.
Ramsundar Yadav Alias Shyamsundar Alias Virendar Alias Surendar Alias Rs Yadav .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
पत्र प्राप्त होने पर संज्ञान लेते हुए प्राथीर् को जिरये समन होने का आदेश पािरत िकया है। िवद्वान मुख्य न्याियक मिजस्ट्रेट द्वारा पािरत प्रश्नगत आदेश िविधसंगत है, िजसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। ऐसी दशा में यह प्राथर्ना पत्र बलहीन है एवं िनरस्त िकये जाने योग्य है। 5- पक्षों के िवद्वान अिधवक्तागण द्वारा प्रस्तुत तकोर्ं एवं पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने के पश्चात इस न्यायालय का यह मत है िक संज्ञान लेने के क्रम में मिजस्ट्रेट को पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया राय दजर् करनी होती है और और उससे यह अपेक्षा नहीं की जाती िक वह एक लघु परीक्षण आयोिजत करे अथवा अिभयुक्त की रक्षा पर िवचार करे। माननीय सवोर्च्च न्यायालय द्वारा एस.डब्लू. पलनीटकर एवं अन्य बनाम िबहार राज्य एवं अन्य; (2002) 1 एस.सी.सी.
241 में यह प्रितस्थािपत िकया गया है िक इस चरण पर लागू िकया जाने वाला परीक्षण यह है िक क्या "कायर्वाही हेतु पयार्प्त आधार" है, न िक यह िक "दोषिसिद्ध हेतु पयार्प्त आधार" है। इसी प्रकार नुपुर तलवार बनाम कें द्रीय अन्वेषण ब्यूरो एवं अन्य; (2012) 11 SCC 465 के मामले में पुनः स्पष्ट िकया गया िक सम्मन जारी करने के चरण पर िवचार हेतु प्रस्तुत सामग्री का उद्देश्य के वल प्रारंिभक एवं अस्थायी होता है, िजसे परीक्षण के दौरान प्रस्तुत वास्तिवक साक्ष्य से िभन्न माना जाता है। अतः इस स्तर पर लागू िकया जाने वाला परीक्षण यह है िक क्या मिजस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत सामग्री "अिभयुक्त के िवरुद्ध कायर्वाही हेतु पयार्प्त" है, न िक " दोष िसद्ध करने एवं अपराध स्थािपत करने हेतु पयार्प्त"। संज्ञान लेने के चरण पर न्यायालय का प्रमुख ध्यान इस बात पर कें िद्रत होता है िक क्या प्रथमदृष्टया मामला बनता है, अथार्त् क्या ऐसा पयार्प्त साक्ष्य है िजससे यह संके त िमले िक कोई अपराध िकया गया है, न िक इस स्तर पर मामले की गुण-दोष पर गहराई से िवचार करना। 6- उपयुर्क्त कानूनी िस्थित पर इस न्यायालय द्वारा पािरत िनणर्य िदनांक 6.05.2024 में आिटकल 227 संख्या 3254/2024 (कै लाश एवं अन्य बनाम प्रित उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) के तहत मामलों में पािरत िनणर्य में भी िवचार िकया गया है। 7- प्रकरण के समस्त तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को दृिष्टगत रखते हुए मेरे िवचार से प्रश्नगत प्रकरण की कायर्वाही तथा प्रश्नगत आदेश को िनरस्त करने का कोई आधार नहीं पाया जाता है। इसिलए धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अन्तगर्त यह प्राथर्ना पत्र बलहीन है और िनरस्त िकये जाने योग्य है। 8- तद्नुसार यह प्राथर्ना पत्र अन्तगर्त धारा 528 बी.एन.एस.एस. िनरस्त िकया जाता है।
िसतम्बर 19, 2025 राहुल NA528 No. 36211 of 2025 2 (सौरभ श्रीवास्तव, न्यायमूित ) Digitally signed by :- RAHUL KUMAR High Court of Judicature at Allahabad