SHIV SINGH MEENA AND 3 OTHERS v. PRABANDHAK NIRDESHAK RAJYA BHANDARAN NIGAM LUCKNOW AND ANOTHER
WRIA/15111/2025 · 2025-10-06
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[ 2025 DAILYLAW 193884 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - A No. - 15111 of 2025
Court No. - 52 HON'BLE MRS. MANJU RANI CHAUHAN, J.
1. ्शीमती संगीता ्शीवास्तव, आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा एवं ्शी बाल मुकुं द िसह, िवप्षीगण के िव्षान अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
2. वतर्मान िरट यािचका अंततः िनम्निलिखत राहतों की ्ऺाथर्ना करते हुए दायर की गई है:-
"(क) यह िक माननीय न्यायालय से िनवेदन है िक हम यािचकाकतार् की सेवाओं का आदेश जारी करें। एस.डब्लू.सी. (राज्य भण्डारण िनगम) आगरा िडपो के आगरा िजले में हम यािचकाकतार् को िनयिमत िकया जाना न्यायिहत में उिचत है। (ख) आगे न्यायालय उपरो्व तथ्यों को म्देनजर रख के अपनी आदेश को िनदरॏिशत करें।"
3. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक यािचकाकतार् िपछले 10 वषॏल से एस.डब्लू.सी. (राज्य भण्डारण िनगम) आगरा िडपो में संिवदा कमर्चारी के रूप में कायर्रत हैं और अपनी पूरी ्षमता व ईमानदारी से अपने कतर््िों का िनवर्हन कर रहे है परन्तु िनयिमत नहीं िकया गया है। यािचयों ने कई ्ऺत्यावेदन िदए लेिकन उस पर कोई िवचार नहीं िकया गया। यािचयों की ्ऺाथर्ना है की उसका िनयिमतीकरण िकया जाय।
4. िवप्षीगण के िव्षान अिधव्वा ्षारा कथन िकया गया है िक याची आउटसोसर् कमर्चारी है और इनके िनयिमतीकरण का कोई ्ऺावधान नहीं है। इस पर सारे कानून याची के िवपछ में है, इसिलए इनकी ्ऺाथर्ना िनरस्त करने योग्य है।
5. यह एक सवर्स्वीकृ त िविधक िस्धांत है िक आउटसोिसग अनुबंधों के माध्यम से अस्थायी रूप से िनयु्व कािमकों को सेवा के िनयिमतीकरण का कोई स्वत्वािधकार (legal entitlement) ्ऺाप्त नहीं होता। ऐसे कमर्चारी न तो ्ऺत्य्ष रूप से िनयोजक संस्था ्षारा िनयु्व होते हैं और न ही उनकी िनयुि्व िविधसम्मत ्ऺि्वया अथवा सेवा िनयमों के अंतगर्त की Versus Counsel for Petitioner(s) : Sangita Srivastava Counsel for Respondent(s) : Bal Mukund Singh Shiv Singh Meena And 3 Others .....Petitioner(s) Prabandhak Nirdeshak Rajya Bhandaran Nigam Lucknow And Another .....Respondent(s)
जाती है। अतः आउटसोिसग के तहत कायर्रत कमर्चािरयों को िनयिमतीकरण का दावा करने का कोई वैध अिधकार ्ऺाप्त नहीं है।
6. उपरो्व तथ्यों के म्देनज़र, यािचका में कोई िविधक आधार नहीं पाया गया है, अतः इसे िनरस्त िकया जाता है।
7.
हालांिक, यािचकाकतार्ओं को यह स्वतं्ऴता ्ऺदान की जाती है िक वे अपनी समस्त िशकायतों को यथोिचत रूप से अिभ्ि्व करते हुए, इस आदेश की ्ऺमािणत ्ऺित संलग्न कर, िवप्षी संख्या-1, ्ऺबंध िनदेशक, राज्य भंडारण िनगम, लखनऊ के सम्ष एक नवीन आवेदन ्ऺस्तुत कर सकते हैं। यिद ऐसा आवेदन ्ऺस्तुत िकया जाता है, तो िवप्षी संख्या-1 उ्व आवेदन पर, संबंिधत प्षकारों को समुिचत अवसर ्ऺदान करते हुए, िविध के अनुरूप, कारणयु्व एवं स्प्ि आदेश पािरत करने हेतु भरसक ्ऺयास करेगा, और यथासंभव शी्स िनणर्य िलया जाए। October 7, 2025 Jitendra/- WRIA No. 15111 of 2025 2 (Mrs. Manju Rani Chauhan,J.) Digitally signed by :- JITENDRA KUMAR YADAV High Court of Judicature at Allahabad