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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 193840 (ALL)

VIPIN KUMAR v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

BAIL/34082/2025 · 2025-10-13

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 34082 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 172/2025 , अन्तगर्त धारा 65(1), 351(3) भारतीय न्याय संिहता व धारा 3/4(2) पाक्सो एक्ट, थाना िबल्हौर, िजला कानपुर में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा, पिरवादी के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. सं्षेप में अिभयोजन कथानक यह है िक िदनांक 04.05.2025 को समय लगभग 12:00 बजे दोपहर में सूचनाकतार् की नाबािलग पु्ऴी अथार्त पीिड़ता उ्ा 15 वषर्, जो गांव में बने सरकारी शौचालय में शौच करके बाहर आई थी, पहले से ही घात लगाकर बैठे िविपन पु्ऴ िशव कु मार िनवासी ्षाम अिलयापुर, पोलकी थाना-िबल्हौर, िजला- कानपुर नगर ने उसकी नाबािलग पु्ऴी पीिड़ता को बुरी िनयत से मक्के के खेत से मुंह बंद करके जबरन उठा ले गया तथा उसकी नाबािलग पु्ऴी पीिड़ता के साथ दुष्कमर् िकया। जब सूचनाकतार् की नाबािलग पु्ऴी पीिड़ता िचल्लाई तो िविपन ने धमकी देते हुए कहा िक यिद िचल्लाओगी तो जान से मार देंगे तथा उपरो्व शोरगुल देखकर मौके से भाग गया। तब सूचनाकतार् की पु्ऴी थाना-िबल्हौर, िजला- कानपुर नगर आई तथा घटना की सम्पूणर् जानकारी दी। 4. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। उपरो्व ्ऺाथिमकी दजर् करने के उपरांत, जांच अिधकारी ने िदनांक 04.05.2025 को धारा 180 बी.एन. एस.एस. के तहत ्ऺथम सूचनाकतार् का बयान दजर् िकया, िजसमें उसने ्ऺथम सूचना िरपोटर् के तथ्य को पूरी तरह दोहराया, इसके बाद अगले िदन यानी िदनांक 05.05.2025 को पीिड़ता का सामुदाियक स्वास्थ्य कें ्श, िबल्हौर, कानपुर नगर में िचिकत्सीय परी्षण िकया गया और Versus Counsel for Applicant(s) : Amit Kumar Shukla, Kuldeep Narayan Tiwari Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Ravi Sahu Vipin Kumar .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) संबंिधत िचिकत्सक ्षारा उसकी मेिडकल िरपोटर् तैयार की गई, िजसमें स्प्ि रूप से उल्लेख िकया गया है िक "हाइमन- पुराना, फटा हुआ, ठीक हो गया है। यौन उत्पीड़न के संबंध में कोई िनि्ात राय नहीं दी जा सकती, क्योंिक एफ०एस०एल० िरपोटर् लंिबत है। तदोपरांत किथत पीिड़ता का धारा 183 बी.एन.एस.एस. के तहत बयान संबंिधत न्यायालय के सम्ष िदनांक 14.05.2025 को दजर् िकया गया, िजसमें उसने नया घटना्वम बताया है और अपने पहले के बयान के िवपरीत बयान िदया है। इससे पिरलि्षत हो रहा है िक किथत पीिड़ता के बयानों में परस्पर िवरोधाभाष है। आगे यह भी कहा गया िक के स डायरी के अवलोकन मा्ऴ से ही यह स्प्ि हो जाता है िक िचिकत्सीय परी्षण के बाद, उसकी रेिडयोलॉिजकल जाँच नहीं की गई थी और पीिड़ता को उसकी आयु िनधार्िरत करने के िलए मुख्य िचिकत्सा अिधकारी, कानपुर नगर के सम्ष नहीं भेजा गया था। यहाँ यह इंिगत करना ्ऺासंिगक है िक यिद किथत पीिड़ता नाबािलग है और उसकी इच्छा के िवरु्ध उसके साथ जबरन बलात्कार िकया गया है, तो उसके शरीर के िकसी न िकसी स्थान पर कोई चोट अवश्य ही आनी चािहए तथा किथत घटना के दूसरे िदवस ही किथत पीिड़ता का िचिकत्सीय परी्षण िकया गया है, िकत इस मामलें में पीिड़ता के िचिकत्सीय परी्षण आख्या के अनुसार उसके गुप्तांग या शरीर के िकसी अन्य भाग पर चोट का कोई िनशान नहीं पाया गया तथा िचिकत्सीय जाँच में, योिनच्छद (हाइमन) पुराना, फटा हुआ और ठीक हुआ पाया गया है। िजससे स्प्ि रूप से पता चलता है िक िचिकत्सीय जाँच अिभयोजन प्ष की कहानी का समथर्न नहीं करती है। अतः आवेदक के िवरु्ध धारा 65(1) भा .ना.स. और 3/4(2) लैंिगक अपराधों से बालकों का संर्षण अिधिनयम के अंतगर्त कोई अपराध नहीं बनता है। इस मामलें में वास्तिवक तथ्य यह हैं िक आवेदक और ्ऺथम सूचनाकतार् एक ही मोहल्ले में रहते हैं और आवेदक के घर का गंदा पानी आवेदक के घर में घुस जाता है, िजस पर जब आवेदक ने अपनी पाइप लाइन की मरम्मत के िलए आवेदक से कहा, तो आवेदक उनसे नाराज हो गया और आपरािधक मामले में फं साने की धमकी दी, िजसके पिरणामस्वरूप आवेदक ने झूठी और मनगढ़ंत कहानी गढ़ी और आवेदक और उसके िपता के िखलाफ उन्हें परेशान करने के आरोप में तत्काल ्ऺाथिमकी दजर् कराई। अिभसा्षी की सवरॏ्तम जानकारी के अनुसार, आवेदक समाज का शांिति्ऺय और कानून का पालन करने वाला ्िि्व है और वतर्मान मामले को छोड़कर उसका कोई आपरािधक इितहास नहीं है। । पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 06.05.2025 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. पिरवादी के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक पीिड़ता अवयस्क है तथा उसके ्षारा अपने धारा 180 व 183 भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता के बयान में अिभयोजन कथानक का BAIL No. 34082 of 2025 2 समथर्न िकया गया है। इससे पिरलि्षत हो रहाा है िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य एवं प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 8. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 14, 2025 CP.sahani BAIL No. 34082 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad