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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 33993 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीि्षत वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ, आवेदक की ओर से मु.अ.सं० 94/2015 अन्तगर्त धारा 137(2)/ 64(1)/ 115(2)/ 127(2) बी.एन.एस., थाना उसहैत, िजला बदायू में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। िचिकत्सीय िरपोटर् के मुतािबक पीिड़ता की उ्ा 18 वषर् आना दिशत है। ्ऺथम सूचना िरपोटर् पांच महीने देरी से दजर् करायी गयी। वािदनी मुक़दमा/पीिड़ता का यह आरोप िक अिभयु्व अमरपाल ने 3-4 बार जबरदस्ती गलत काम िकया वह िनराधार व झूठा है। आवेदक ने पीिड़ता को शारीिरक व मानिसक रूप से ्ऺतािड़त नहीं िकया है और न ही उसको मारापीटा है। पीिड़ता का कोई भी आपरािधक इितहास नहीं है। पीिड़ता ्षारा ्ऺथम सूचना िरपोटर् में लगाये गये सभी आरोप गलत एवं िनराधार हैं पीिड़ता के अनुसार आवेदक ्षारा पीिड़ता को बांस से मारा गया जबिक पीिड़ता के िचिकत्सीय िरपोटर् में No External injury seen at the time of Examination दिशत है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 27.05.2025 से कारागार में िनरु्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकरॏ का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंम्भीर ्ऺकृ ित का है, Versus Counsel for Applicant(s) : Mahendra Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Amarpal .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये।
5.
आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य ्ऺश्नगत ्ऺकरण में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है।
6. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 14, 2025 S.Mishra BAIL No. 33993 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad