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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 35491 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीि्षत वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ, आवेदक की ओर से मु.अ.सं० 303/2025 अन्तगर्त धारा 64(1)/ 352/ 351(2) बी.एन.एस., थाना लोिहया नगर, िजला मेरठ में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3.
आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। किथत घटना दो वषर् पुरानी है। िजसकी िरपोटर् िवलम्ब से दजर् करायी गयी है और िवलम्ब का कोई कारण दिशत नहीं िकया गया है। आवेदक ने वािदनी के साथ कोई मारपीट नहीं की न ही बलात्कार िकया। बलात्कार का कोई साष्य प्ऴावली पर दािखल नहीं है। अिभयु्व व वािदनी एक दूसरे को काफी वषॏल से जानते थे और एक दूसरे के साथ घूमते िफरते थे। िजसकी फोटो संलग्न हैं। वािदनी राजमहल होटल में अपनी मजर् से गयी थी िजसका समथर्न के स डायरी में गवाह महेन््श िसह रावत ने िकया है और होटल में ठहरने के दौरान कोई झगड़ा न होने तथा िकसी के िमलने आने से इंकार िकया है। वािदनी बािलग है िजसने सोच समझकर झूठी कहानी बनाकर अिभयु्व के िवरू्ध िरपोटर् दजर् करायी गयी है। पीिड़ता से हुए बलात्कार व मारपीट की कोई पुि्ि नहीं हुई है। पीिडता कभी गभर्वती नहीं हुई न ही इस सम्बन्ध में कोई िरपोटर् प्ऴावली पर उपलब्ध है। वािदनी के बयान 161 व 164 में िभन्नता है। उसका कोई आपरािधक इितहास नहीं है अिभयु्व के िवरू्ध कोई स्वतन््ऴ सा्षी नहीं है। आवेदक ने वािदनी के साथ कोई मारपीट नहीं की न ही बलात्कार िकया। बलात्कार का कोई साष्य प्ऴावली पर उपलब्ध नहीं है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी Versus Counsel for Applicant(s) : Rakesh Dubey, Satish Mohan Tiwari Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Maulana Ahmad Hasan .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 17.05.2025 से कारागार में िनरु्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
4.
िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकरॏ का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंम्भीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये।
5. आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य ्ऺश्नगत ्ऺकरण में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है।
6. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 28, 2025 S.Mishra BAIL No. 35491 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad