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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 193074 (ALL)

ROHIT v. STATE OF U.P.

BAIL/46297/2024 · 2025-10-15

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 46297 of 2024 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 320/2024 , अन्तगर्त धारा 64(2) k भारतीय न्याय संिहता, थाना शाहगंज, िजला आगरा में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। यह इंिगत करना ्ऺासंिगक है िक जाँच अिधकारी ने आवेदक के िवरु्ध कोई िव्षसनीय साष्य एकि्ऴत िकए िबना, के वल अिभयोिगनी और गवाहों के संशय के आधार पर िदये बयान के आधार पर, वतर्मान मामले में आवेदक को झूठा फं साया है, जबिक अिभयोजन प्ष के मामले का समथर्न करने के िलए एक भी स्वतं्ऴ गवाह नहीं है। जाँच अिधकारी ने सूचनाकतार् और गवाहों के बयान धारा 161 दंड ्ऺि्वया संिहता के अंतगर्त दजर् िकए, िजन्होंने अिभयोजन प्ष की कहानी में उिल्लिखत नहीं होने के बावजूद झूठी कहानी दी। मेिडकल िरपोटर् में सूचनाकतार् के अनुसार पीिड़ता की आयु लगभग 22 वषर् है और जाँच अिधकारी ्षारा इस अपराध के िलए उसकी मेिडकल जाँच भी की गई है और डॉक्टर ने पीिड़ता की आयु व अन्य पहलुओं की जाँच की है। मेिडकल िरपोटर् के अनुसार पीिड़ता के बाहरी या आंतिरक अंगों पर कोई चोट आना अंिकत नहीं है तथा पूरक िचिकत्सीय िरपोटर् में डाक्टर ्षारा किथत अपराध के संबंध में कोई िनि्ात राय नहीं दी गयी है। इसिलए, आवेदक के ऊपर दुराचार का कोई अपराध नहीं बनता है। ्ऺासंिगक तथ्य यह है िक आवेदक न तो अिभयोिगनी के घर गया था और न ही उसने पीिड़ता के साथ बलात्कार िकया था, बिल्क उसने पैसों के िववाद की पुरानी रंिजश के कारण आवेदक को झूठा फं साया है। आगे ्ऺासंिगक तथ्य यह है िक आज तक जांच अिधकारी या आईडी मिजस््िेट ्षारा Versus Counsel for Applicant(s) : Kiran Tiwari, Mahesh Chandra Tiwari, Prabhat Kumar Tiwari Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Rohit .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) धारा 161 और 164 सीआरपीसी के तहत पीिड़ता के कोई बयान दजर् नहीं िकए गए हैं, बिल्क जांच अिधकारी ने के वल सूचनाकतार् और गवाहों के बयानों के आधार पर आवेदक को झूठा फं साया है, तथ्य यह है िक आवेदक ने पीिड़ता के साथ शारीिरक संबंध नहीं बनाए थे। इसकी पिरपुि्ि किथत पीिड़ता के पूरकिचिकत्सीय परी्षण आख्या के अनुसार भी हो रही है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 16.07.2024 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य एवं प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा 5. BAIL No. 46297 of 2024 2 , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 16, 2025 CP.sahani BAIL No. 46297 of 2024 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad