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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 34036 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. सूची पुनरीि्षत वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ, आवेदक की ओर से मु.अ.सं० 255/2025 अन्तगर्त धारा 69/ 351(3) बी.एन.एस., थाना सहसवान, िजला बदायूं में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।
3. सं्षेप में अिभयोजन कथानक के अनुसार वािदनी मुकदमा ्षारा ्षे्ऴािधकारी सहसवान, िजला-बदायूँ को िदनांक 18-06-2025 को इस आशय का ्ऺाथर्ना प्ऴ िदया गया िक वािदनी / पीिडता पु्ऴी रघुवीर िन० ्षाम डकारापुख्ता थाना सहसवान जनपद बदायूँ की रहने वाली है। पीिड़ता की शादी लगभग अब से 18 साल पूवर् परवीन के साथ हुई थी। िजससे आपसी लड़ाई झगडे में तलाक हो गया था। पीिड़ता के तलाक के बाद अपने ्षाम डकारा पुख्ता चली आयी तभी पीिड़ता की मुलाकात िदनेश पु्ऴ फू ल िसह िन० डकारापुख्ता थाना सहसवान जनपद बदायूँ से हुई जो अब से करीब एक साल पूवर् शादी का झांसा देकर पीिड़ता को मो० अकबराबाद, कस्बा व थाना सहसवान जनपद बदायूँ िकराये के मकान में लेकर आ गया तथा पीिड़ता के साथ जबरदस्ती शारीिरक सम्बन्ध बनाये कहा िक शादी कर लेंगे। िफर पीिड़ता को सूरत शहर ले गया वहाँ भी शादी का झांसा देकर शारीिरक सम्बन्ध बनाता रहा व मेरे भाई को जान से मारने की धमकी देते हुए मेरा एक प्लाट जो िक रजपुरा में था िजसे उसने मुझसे अंकन 6 लाख 60 हजार रूपयो में िबकवा िदया िजससे पीिडता अपना खचार् करती थी तथा कु छ कपड़ा कम्पनी में काम करते हुए उससे अपना बाकी खचार् करके अपनी गृहस्थी चला रही थी। परन्तु उसमें से भी िदनेश ने तकरीबन अंकन 4 लाख 32 हजार पाँच सौ रूपये बहला फु सलाकर ले िलये थे और उसने वह रूपया अपने गाँव में िभजवाया था। घटना िदनांक 04.06.2025 की है। Versus Counsel for Applicant(s) : Surendra Nath Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Dinesh .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
4. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। पीिडता ्षारा ्ऺथम सूचना िरपोटर् में कथन िकया गया िक आवेदक उसे करीब एक साल पूवर् शादी का झांसा देकर पीिड़ता को मो.
अकबराबाद, कस्बा व थाना सहसवान जनपद बदायूं िकराये के माकान में रखा और उसके साथ जबरदस्ती शारीिरक संबंध बनाया। जबिक पीिड़ता ने बयान अंतगर्त धारा 183 बी.एन.एस.एस. में कथन िकया िक मेरी शादी 2005 में परवीन यादव के साथ हुई थी। मेरे दो बच्चे है। िदनेश मेरे गाँव का ही है। िदनेश ने मेरे पित को भडकाया और मेरा और मेरे पित का 2024 में तलाक हो गया। मैं अपने मायके आ गयी। मायके आने पर िदनेश कहने लगा िक जहाँ तू रहती है, वहाँ लेकर चलूगा। में िदनेश के साथ सूरत चली गयी। क्योिक िदनेश ने मुझसे कहा था िक शादी करेगा।
5. उ्व ्ऺथम सूचना िरपोटर् एवं पीिड़ता के बयान अंतगर्त धारा 183 बी.एन.एस.एस. के अवलोकन से यह ्ऺतीत होता है िक पीिड़ता एक सहमत प्षकार है। चूिक वािदनी का आवेदक के गाँव में मायका है तथा आवेदक के पािरवािरक िस्थित के बारे में वािदनी को पूरी जानकारी पहले से थी की आवेदक शादीशुदा व 2 बच्चों का िपता है। इसिलए आवेदक पर उपरो्व अंतगर्त धारा 69 बी.एन.एस. का आरोप नहीं बनता है। वािदनी ्षारा यह भी कथन है िक आवेदक शादी का झांसा देकर दुष्कमर् करता रहा जो िक िबल्कु ल झूठा व बनावटी है। आवेदक का कोई आपरािधक इितहास नहीं है। आवेदक के िव्षान अिधव्वा ्षारा अपने तकॏल के समथर्न में न्यायालय का ध्यान उच्चतम न्यायालय ्षारा िनणर्त Mahesh Damu Khare Vs. The State of Maharastra and another reported in 2024 SCC On Line SC 3471, उ्व आदेश में विणत खण्ड ्ऺस्तर 26, 27 एवं 31 की तरफ आकृ ्ि कराया,
26. In the present case, the nature of relationship between the appellant and the complainant can be characterised by the following attributes: (i) The appellant and the complainant were acquainted with each other since 2008. The complainant herself admits that the appellant has been in physical relationship since then till 2017 without protest in spite of alleging that the appellant had done so without her consent. (ii) The physical relationship was going on routinely.
But the complainant in her complaint states that after she got a rented room in Shirvane, Nerul Sector 1, Navi Mumbai, in December, (iii) 2010, the appellant used to come every day and had sexual intercourse everyday, though without her consent and by giving false promise of marriage. The complainant does not appear to be a naive and gullible woman who was susceptible to deceit while maintaining physical relationship with the appellant and the allegation of false promise BAIL No. 34036 of 2025 2
surfaced only when the appellant refused to provide further financial and other assistance. 27.The conduct of the complainant clearly shows that she is a mature person clearly capable of understanding the consequences of her acts and she was fully aware of the kind of illicit relationship she was maintaining with a married person. The complainant was fully aware that the appellant was already married and had two wives, though one of them was not keeping well. Thus, from the above it appears that it is more of an extra- marital affair during the aforesaid period without any insistence by the complainant for getting married to the appellant. The fact that the complainant continued to have a physical relationship for a long time without any insistence on marriage would indicate the unlikelihood of any such promise made by the appellant for marrying her and it rather indicates that the relationship was a consensual one. In our opinion, the longer the duration of the physical relationship between the partners without protest and insistence by the female partner for marriage would be indicative of a consensual relationship rather than a relationship based on false promise of marriage by the male partner and thus, based on misconception of fact. 31.In our view if criminality is to be attached to such prolonged physical relationship at a very belated stage, it can lead to serious consequences.
It will open the scope for imputing criminality to such long term relationships after turning sour, as such an allegation can be made even at a belated stage to drag a person in the juggernaut of stringent criminal process. There is always a danger of attributing criminal intent to an otherwise disturbed civil relationship of which the Court must also be mindful. 6. पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 01.07.2025 से कारागार में िनरु्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
7. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकरॏ का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंम्भीर ्ऺकृ ित का है, BAIL No. 34036 of 2025 3
इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये।
8. आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य ्ऺश्नगत ्ऺकरण में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है।
9. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
1.
आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा।
4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
5. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 14, 2025 S.Mishra BAIL No. 34036 of 2025 4 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad