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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 192623 (ALL)

AMAN v. STATE OF U.P.

BAIL/33742/2025 · 2025-10-12

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 33742 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीि्षत वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ, आवेदक अमन की ओर से मु.अ.सं. 57/2025 अन्तगर्त धारा 69/ 61(2) बी.एन.एस., थाना बढ़पुरा, िजला इटावा में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। उसके ्षारा आरोिपत अपराध कािरत नहीं िकया गया है और न उ्व अपराध कािरत िकये जाने में उसकी िकसी अन्य ्िि्व के साथ संिलप्तता रही है। अिभयोजन कथानक िनतान्त असत्य व ्ऽामक तथ्यों पर आधािरत है। वादी की पत्नी दो बच्चों की माँ है। वह पूणर् रूप से बािलग है तथा अपना भला-बुरा समझती है। आवेदक वादी की पत्नी को कहीं भगाकर नहीं ले गया है। वादी की पत्नी अपने मायके में रह रही है। वादी की पत्नी की आयु लगभग 30 वषर् है, जब िक आवेदक की आयु मा्ऴ 23 वषर् है। ्ऺथम सूचना िरपोटर् िवलम्ब से अंिकत करायी गयी है और िवलम्ब का कोई स्प्िीकरण नहीं िदया गया है। आवेदक का कोई पूवर् अपरािधक इितहास नहीं है। चूिक पीिड़ता की उ्ा लगभग 30 वषर् है और वह पहले से ही शादी है इसिलए उपरो्व धाराओं का अपराध आवेदक पर नहीं बनता। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 25.08.2025 से कारागार में िनरु्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकरॏ का ्ऺबल िवरोध Versus Counsel for Applicant(s) : Aditya Kumar Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Aman .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंम्भीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये। 5. आवेदक के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य ्ऺश्नगत ्ऺकरण में प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 6. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परी्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 13, 2025 S.Mishra BAIL No. 33742 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad